तेरे प्यार की कसम - 5 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 5

तेरे प्यार की कसम - 5

रघु  और आयशा चले ही जा रहे थे
आयशा रघु से : तुम्हे डर तो नही  लगा रात को
रघु आयशा को देखो : नहीं तुम थी न मेरे साथ
आयशा : ह्म्म्म ... वैसे तुम्हें  बूरा तो नही लगा
रघु : किस बात का
आयशा : अम्मा ने हम दोनो को गलत समझ लिया और रात को ...
रघु: नहीं वो उनकी गलत फहमी थी
आयशा : हम्म
रघु आयशा को देख कर मन मे : मैं यही चाहता हूँ तुम्हें अपना बनाना तुम्हें  अपनी बीवी बनाना
आयशा : कहा खो गए
रघु का ध्यान टूटा : कही नहीं
आयशा उसके सामने आकर उसे घूरते हुए : आज और अभी मैं ये जानकर रहूंगी
आयशा के बाल बंधे थे उसकी लटे उसके फेस मे टच हो रही थी
रघु उसके चहरे मे खो सा गया
आयशा इतना प्यारा सा मू बना रही थी और कमर मे हाथ रख कर बात कर रही थी  रघु खो सा गया और ऊपर से वो अपनी आँखे छोटी तो कभी चौड़ी करे जा रही थी तरहा तरहा  के मू भी बनाए जा रही थी
आयशा : एक बात पूछु
रघु उसमे  खोते हुए : पुछो
आयशा: हम्म्म्म .. मै आम तौर पर पुछ रही हूँ  तुम सिरियश मत लेना ठीक है
रघु : ठीक है
आयशा : वो तुम अमेरिका से आए हो हा ...
रघु : हा
आयशा : तो ये सब तो वहा कॉमन है
रघु : है
आयशा : हा तो मैं इसलिए  पूछ रही हूँ क्योंकि  तुम खोए से रहते हो इसलिय मै पूछ रही थी की...
रघु : की
आयशा आँखे बंद  करके : की तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है ..
रघु : है
रघु  को उसकी हरकतों मे खोया था उसे कुछ समझ नही आ रहा था वो सिर्फ आयशा को आखरी शब्द रिपीट कर रहा था
आयशा उसे  हैरानी से देख रही थी उसे मारने के लिए हाथ उठाया फिर उसे याद आया
आयशा मन मे : एक मिनट .. मै क्यों  मार रही हूँ मुझे क्या इसकी गर्लफ्रेंड हो या नही मुझे क्या लेना देना
है ये अमेरीका रिटर्न है इसकी गर्लफ्रेंड  ... हहह वो अजीब सा मू बनाकर आगे चली गयी  वो आगे चली गई रघु वही खड़ा था
आयशा ने पीछे देखा : फिर उसके ख्यालो मे खो गया अमेरिका रिटर्न वैसे इसकी गर्लफ्रेंड यहा इंडिया  आयी होगी ..
वो रघु के पास आयी
आयशा बड़े प्यार से देखते हुए : रघु
रघु उसकी आंखें मे अपने लिए प्यार देखकर मदहोश हो गया
आयशा : वैसे वो इंडिया  आयी है
रघु मदोहशी मे : आयी है
आयशा : अच्छा वैसे वो अंग्रेजन ही होगी हा   (एक आइब्रो ऊपर करके)
रघु : हा
आयशा मन मे : छी यार वैसे मुझे क्यों  बुरा  लग रहा है नो आयशा तुझे बुरा नहीं लग रहा (रघु से): चलो अब
वो आगे चलने लगी रघु उसे ही देखे जा रहा था आयशा ने अपनी तिरछी नजरो से देखा
आयशा मन मे  : ये मुझे ऐसे क्यों देख रहा है प्लीज नजर हटा लो अपनी माफ़ करदो तुम्हारी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा प्लीज माफ़ कर दो
रघु आगे ना देखकर उसे देखे जा रहा था रघु  ने देखा ही नही कि उसके पैर मे एक पत्थर से जा तकराया वो गिरने वाला था पर आयशा ने उसकी बाजुए पकडी़ और अपनी तरफ खींच लिया रघु  उसकी तरफ इतना बडा़ कि वो दोनो संभल नही पाए और गिर गए रघु  आयशा के ऊपर गिर गया आयशा के दोनो हाथ रघु  के सीने मे थे रघु  का एक हाथ आयशा के सर के नीचे था उसने गिरते हुए लगा दिया ताकि उसे सर मे चोट ना लगे और एक हाथ आयशा के सीने मे था रघु  को उसकी धड़कने साफ सुनायी दे रही थी रघु  का भी कुछ ऐसी ही हाल था
वो उस पोजीशन मे कुछ देर के लिए  एक दुसरे की आँखो मे खोये रहे थोड़ी देर बाद आयशा अपनी आइब्रो से कुछ इशारे  करने लगी रघु उसे कन्फ्यूज्ड  होकर देखने लगा
आयशा : ऐसे क्यों देख रहे हो उठो
रघु ने आयशा के सीने से अपना हाथ हटाया और उसे बैठा दिया वो दोनो खड़े हुए
रघु चिंता  से : तुम्हे कही चोट तो नही आयी
आयशा : नही, नही तुम्हें आगे  देखकर चलना चाहिए  न
रघु : सॉरी वो मेरा ध्यान कहीं और था
आयशा : कहा था तुम्हारा ध्यान
आयशा अपने मन मे सोचते हुए : अपनी गर्लफ्रेंड को ही सोच रहा होगा
रघु : वो मै....
आयशा बीच मे तोककर : रहने दो चलो देर हो गयी है
रघु : हम्म (रघु ने पैकेट उठाया और चलने लगा)
रघु मन मे : जब तुम सामने होती हो तो कोइ दिखता ही नही है  क्या करू मे दिल का तुम्हारा  दीवाना बन गया है  (वो दोनो खामोशी से चलते जा रहे थे )
आयशा का ध्यान  गया तो  रघु के एक हाथ मे रगड़ (खरोच) लगी है वो रूकी उसने रघु का हाथ पकडा़
आयशा उसका हाथ देखते हुए: ये कैसी लगी कहा मार के लाए हो
रघु ने देखा : ये पता नहीं कहा लगी छोडो़  इसे
आयशा : कैसे छोड़ दो कितनी लगी है (फिर उसे याद आया की वो गिर रही थी तब लगी होगी)
आयशा : ये तब लगी थी जब मे गिरी
रघु : पता नही छोड़ो न  इतनी नही लगी
रघु ने उसके हाथ से अपना हाथ हटा दिया और चलने लगा
आयशा उसे देखते हुए : अजीब इंसान है  वो भी चलने लगी
वो लोग कार के पास  पहुँचने वाले थे
आयशा : आआउच्छ!
रघु : क्या हुआ
आयशा पैर को उठाके : कुछ चुभा
आयशा रोड के साइड मे ही बैठ गयी
रघु उसके पास आया और उसे गोदी मैं उठाकर ले जाने लगा
आयशा : रघु  प्लीज मुझे नीचे उतार दो
रघु उसे देखते हुए : चलोंगी कैसे
आयशा : मै चल लुंगी वैसे भी कार आ गयी है
रघु : ज्यादा उच्छलो मत चोट  लगी है चुप रहो
आयशा उसे चुप होकर देखने लगी वो लोग कार के पास पाहुचे
संजय : ये हर बार इसे उठा क्यों  लेता है क्यों  चिपकता है इतना ....
रघु कार के पास आया
रघु आयशा से : दरवाजा खोलो
आयशा ने कार का दरवाजा खोला
रघु ने आयशा को सीट मे बैठाया और उसका पैर देखने लगा वहा पर काटा चुभा  था हल्का सा खून निकल रहा था
रघु घबराहट से : कहा ध्यान रहता है कितना खून निकल रहा है
आयशा ने देखा तो हल्का सा खून निकल रहा था
आयशा : ज्यादा खून थोड़ी  ना निकल रहा है
रघु गुस्से मे : ध्यान से चलना तो आता नहीं है बड़ी आयी
वो काटे को संभल के निकालने लगा
वहा संजय आया : क्या हुआ
आयशा : कुछ नहीं बस हल्का सा काटा चुभ गया
संजय : संभलके चलना चाहिए न चलना भी नही आता
आयशा : तू रहने दे हा चुप होजा
रघु  गुस्से मे : तुम चुप रहो चलना तो आता नही है बडी़ आयी
आयशा बूरा सा मू बनाते हुए : अब इतनी भी नहीं लगी
रघु उसे गुस्से मे घूरने लगा : चुप रहो तुम्हें  चलना तो आता नहीं है यही बैठे रहना हिलना मत वरना
आयशा छोटा सा मू बनते हुए : ओकए
रघु वहा से उठा और चला गया
संजय : कर तो  ऐसा रहा है जैसे कितनी फ़िकर होगी
वो आयशा के साइड वाली सीट मैं बैठा गया
रघु एक पत्ता तोड़  के लाया
रघु आयशा से : इसमे अपना पैर रखो
आयशा ने पत्ते के ऊपर अपना पैर रखा
रघु ने उसके पैर  से काटा निकाला
आयशा : आआ....ऊउउउउ
रघु उसका पैर सहलाते हुए : ज्यादा दर्द हो रहा है
आयशा उसे खामोशी से देखने लगी
रघु के आँखो में हल्के से  आँसू झलक रहे थे
रघु ने उसका खून साफ ​​किया पत्ती से और पैर को सहलाने लगा
रघु उसका पैर सहलाते हुए : अब बोलोंगी भी
आयशा ने कुछ नहीं कहा
रघु आयशा को देखते हुए : अब बताओगी भी तुम्हें  दर्द हो रहा या नहीं...
वो आयशा को देख कर चुप हो गया
आयशा उसे देखकर : ठीक है
रघु उसे देखते हुए: दर्द हो रहा है
आयशा : न .न. नहीं हो रहा पर ..
रघु : पर..
आयशा : तुम्हें हो रहा है... तुम रो क्यों रहे हो ज्यादा नहीं लगी
रघु ने आपकी आंखे साफ कर दी और उसका पैर सहलाने लगा
रघु : वो... तु.. तुम्हे दर्द नहीं हो रहा ना
आयशा : नहीं नहीं लगी टेंशन मत लो बैठ जाओ गाडी़ मे
रघु ने उसके पैर को धीरे से रखा और कहा : अब ध्यान से चलना
आयशा : हम्म
वो उठा उसने देखा कि संजय उसके बगल में ही  बैठा था उसने एक पल संजय को देखा फिर आयशा को
आयशा भी उसे देख रही थी
रघु आगे वाली सीट मे बैठ गया और गाड़ी चल निकली
रघु साइड मिरर से आयशा को देखे जा रहा था और आयशा भी
आयशा मन मे : तुम्हें अपनी खरोच मे दर्द नहीं हुआ और मेरे एक काटे से ही तुम्हारी आँखे नम हो गई क्यों
रघु   मन मे : तुमसे प्यार करता हूँ इसलिय तुम्हारी फ़िक्र है
गाड़ी चल रही थी
सुबह के दस बज गए थे लगबाग आधे रास्ते में थे वो लोग
संजय : भूख लग रही है कुछ खाने को भी नहीं है
आयशा : है न
संजय : कहा है
आयशा ने पैकेट निकला : ये है खाना अम्मा ने दिया और पानी
संजय : अम्मा जिसे तू भूत समज रही थी हाहा (हँसने लगा)
आयशा बुरा सा मू बनाते हुए : तू चुप कर
आयशा ने खाना निकला उसमे कुछ रोटी थी और सब्जी
संजय खाने मे टूट पड़ा उसने रोटी उठायी और थोड़ी  सब्जी भी और खाने लगा
आयशा रघु की तरफ रोटी और सब्जी बड़ायी : ये लो रघु खा लो तुम भी
संजय : आयशा को बड़ी चिंता हो रही है इसकी
रघु  ने पकड़  लिया
रघु : तुम नहीं खाओगी
आयशा : खाऊगी न
रघु : वो टॉनिक पी लेना
आयशा : हा पर वो टॉनिक है कहा
रघु ने डैशबोर्ड से वो टॉनिक निकाली और पकडा़ दिया
रघु : खाने के बाद पी लेना
आयशा : हम्म
वो दोनो भी खाने लगे सबने खत्म किया
आयशा ने टॉनिक पीली
गाड़ी चलती जा रही थी वो लोग शिमला पहुचने वाले थे
रघु आयशा को देखे जा रहा था साइड मिरर से और
आयशा को नींद आ रही थी उसकी गर्दन  कभी इधर तो कभी उधर हो रही थी
आयशा का सर संजय के कंधे मे लग गया
संजय सर झटका कर : क्या कर रही है यार
आयशा ने सर हटा दिया उसने मिरर से सर लगाके बहार देखने लगी उसे नींद की झपकिया आ रही थी
रघु : कार रोको
ड्राइवर ने कार रोकी
संजय : अब क्या हुआ
आयशा : क्या हुआ रघु
रघु : वो मुझे वाशरूम जाना है आता हूँ
रघु बहार निकल गया संजय और आयशा भी बहार निकल गयी
आयशा पहाड़ो के नजारे देखने लगी संजय दुसरी साइड मे था रघु आयशा के पास आया
रघु: तुम्हें नींद आ रही है
आयशा : हा वो टॉनिक दी था न तुमने उससे
रघु : हम्म मै कल जब पीछे बैठा था तब तुम्हें  कोई तकलीफ तो नहीं हुई न
आयशा : मुझे कैसी तकलीफ उल्टा तुम्हें  हुई थी न वो मैं तुम्हारे कंधे मे सर रख दिया था
रघु : नहीं मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई वो तुम्हारी नींद को तोड़ना  नहीं  चाहता था
आयशा ने रघु की तरफ देखा और देखती रह गयी
आयशा कार मे जाकर बैठ गयी रघु उसके बगल वाली सीट मे जा बैठा
रघु : वो मेरी कमर अकड़ गयी वहा बैठे बैठे तो क्या मैं यह बैठ सकता हूँ अगर तुम्हें  कोई ..
आयशा : मैंने किसी को भी नहीं मना नही किया
रघु : हम्म
वहा संजय आया संजय ने देखा की वो बैठा है तो वो मरेमन से आगे गया ड्राइवर ने कार स्टार्ट की और निकल गए
आयशा मन मे : अभ नहीं सोऊगी वरना इसके ऊपर गिर जाउंगी
रघु मन मे : तुम सो जाओ आयशा मैं तुम्हें संभाल लूँगा
मौसम भी ठंडा था और सफर अभी बाकी था
रघु आयशा से : तुम सो जाओ वरना उल्टी हो जाएगी
आयशा : नहीं मौसम बडी़या  है नही होगी
आयशा खिड़की  के बाहर देखने लगी
थोड़ी देर बाद आयशा की आँखे बंद होने लगी वो लगबाग सो चुकी थी
आयशा अपना सर बचाने की काफी कोशिश कर रही थी की कहीं उसका सर रघु के कंधे  मे ना जाए पर उसे नींद आ गयी और उसका सर रघु के कंधे  मे जा तकराया रघु उसे ही देख रहा था ।
संजय : ओह... इसलिये ये पीछे बैठा ताकी ये आयशा के साथ रोमांस कर सके
आयशा ने अपना सर रघु के कंधे  से लगाया था कुछ देर बाद वो नींद मैं बड़बडा़ने लगी : क्या यार ये आइसक्रीम टेस्टी  नहीं है तू अपनी वाली दे आहना
उसने एक हाथ से रघु की बाजुए  पकड़  ली और दुसरे हाथ से रघु का हाथ
रघु को बहुत अच्छा लग रहा था वो कभी आयशा के हाथ को कभी आयशा को देख रहा था उसने आयशा का हाथ कस के पकड़ लिया और आयशा को देखने लगा
आयशा नींद मे बड़बडा़ये जा रही थी
आयशा रघु के गले को चाट रही थी
रघु को एक करेंट  सा दौडा़ रघु सिर्फ  उसे महसूस कर रहा था
वह संजय ये सब देखकर जल भुन गया था वो कुछ करना चाहता था वो शिमला मे पहुँच गए थे
उसने अंजली  को फोन किया
अंजली : हाय संजय, तुम लोग पाहुँच गए
संजय : हा पर कौनसा होटल है
अंजली  : शाइनिंग स्टार होटल
संजय ने मिरर से देखा की आयशा अभी भी रघु के गले को चाट रही है उसने फोन को कस के पकड़  लिया और कहा : कौनसा (मिरर मे घूरते हुए)
अंजली : शाइनिंग स्टार
संजय जोर  से : कौनसा...
अंजली : अरे सुनायी नहीं दे रहा शाइनिंग स्टार यार शाइनिंग स्टार
संजय चिलाते हुए  : कौनसा।
अंजली : अबे बहरा हो गया है क्या शाइनिंग स्टार..
संजय और जोर  से चिल्लाते हुए : कौन सा ...
वहा आयशा की नींद खुली उसने देखा की वो रघु को चाट रही है वो अलग हुई  और रघु को देखने लगी रघु ने उसे देखा
वहा से अंजली  भी चिलाने लगी : बावले इंसान शाइनिंग स्टा...आर आर
संजय ने देखा की वो जाग गयी
संजय : अभे चिला क्यों रही है पता चल गया शाइनिंग स्टार
अंजली : अभी कौन चिला रहा था तू या मै
संजय : हा हा चल फोन रख (दोनो ने फोन कट कर दिया)
तिया: तू चिल्ला क्यों  रही है
अंजली : अरे वो लोग पाहुँच गए तो उन्हे होटल का नाम बता रही थी
तिया: तो चिल्ला क्यों  रही थी
अंजली : क्योंकि  उसे सुनायी नहीं दे रहा था
तिया : अच्छा
अंजली  : हम्म
कार मे: आयशा संजय से: हम पाहुँच गए
संजय (मिरर मे से रघु को घूरते हुए) लगता तो है
आयशा : अभी कोई पागल चिल्ला रहा था क्या
संजय : हा वो पागल मैं ही था
आयशा : क्यों
संजय मन मे : क्योंकि  मुझे तुझे उठाना था
संजय आयशा से : वो सुनायी नहीं दे रहा था
आयशा : अच्छा
आयशा ने साइड मे देखा रघु उसे ही देखे जा रहा था।
आयशा ने नज़र खिड़की  की तरफ़ कर ली
आयशा मन मे : ये मुझे ऐसे क्यों देख रहा है और मैं नींद में उसे चाट रही थी .. छी यार क्या करती हूं मैं भी सॉरी बोलू
आयशा ने तिरछी  नज़रो से देखा तो रघु उसे ही देख रहा था
आयशा रघु से : क् ..क्या  हुआ
रघु: कुछ नहीं (वो खिड़की  के बाहर देखने लगा)
आयशा : कही ये मुझसे नाराज तो नहीं क्या करू..
थोड़ी देर बाद कार शाइनिंग स्टार होटल मे रूकी सब कार से उतरे और होटल के अंदर चल दिए
वहा अंजली  तिया अनीता खड़े थे
संजय : हैलो सब को
अंजली  : हाय संजय
अनीता : हाय
अंजली  संजय से : आयशा कहा है
पीछे से : आयशा यहा है
अंजली  तिया अनीता आयशा के गले लग गए
तिया: बहुत जल्दी आ गई
आयशा : आ तो गई यार (आयशा के पास रघु खड़ा था)
अनीता (रघु की तरफ देखें): ये कौन है
आयशा : ये .. ये रघु है
तिया : रघु...
आयशा: हा रघु मल्होत्रा ​​अभी अभी अमेरिका से आया है मेरा दोस्त
अनीता (आयशा के कान मे): दोस्त या फिर कुछ और
आयशा उसे मारते हुए : चुप रह यार
अनीता हसँ दी
आयशा रघु से : रघु ये मेरी दोस्ते है
ये अनीता ये तिया और ये अंजली  जिसकी शादी है
रघु : हाय
अंजली क: हाय
अनीता और तिया ने भी हाय बोला
रघु अंजली  से : कॉंग्रट्स
अंजली : थैंक्स आओ अंदर
आयशा : प्रिया और आहना कहा है
तिया: वो दोनो खाना खा रहे हैं अंदर
आयशा : अच्छा
संजय : दोनो के दोनों भुकड़ है खदूए
अंजली : चलो अंदर (सब अंदर जाने लगें)
रघु अंदर जाने को हुआ तब ही संजय ने उसका रास्ता रोक दिया सब अंदर चले गए थे
रघु असमंजस मे : क्या हुआ
संजय : वो तो मैं पूछ रहा हूं क्या हुआ
रघु : मतलब तुम क्या कहना चाहते हो जाने दो मुझे अंदर
संजय उसे तोकते हुए : पहले मेरे सवाल का जवाब दो
रघु : कौनसा सवाल क्या पूछ रहे हो
संजय : मैं सब देख रहा था
रघु : क्या देखा तुमने
संजय : कार मे जो हो रहा था
रघु : क्या हो रहा था
संजय : अच्छा तुमने कैसे आयशा को बाहो मैं पकडा़ हुआ था  वो सब
रघु : वो मेरी बाहो मे थी मैंने नहीं कहा था
संजय : अच्छा रोका क्यों नहीं तुमने और जिस नजर से तुम उसे देख रहे थे देखा मैंने जब वो सोयी थी तुम उसके गालो को क्यों  छू रहे थे उठा नहीं पाए
रघु : पहली बात मैं उसे परेशान नहीं करना चाहता था उसे नींद आ रही थी और उसकी गर्दन  मे दर्द हो जाता इसलिय मैंने नहीं रोका तुमने रोका वो तुम्हारी प्राब्लम है समझे अब हटो जाने दो
संजय गुस्से मे : मेरी बात खत्म नहीं हुई है अभी  दूर रहो उससे याद रखना इस बात को
रघु: क्यों  दूर रहु और तुम कौन होते हो ये बोलने वाले
संजय : दोस्त हू उसका
रघु : दोस्त की तरह रहो फिर पति बनने की कोशिश मत करो
संजय : ओह ... तो तुम क्या लगते हो उसके
रघु: जो भी लगता हूँ तुम्‍हें मतलब नहीं होना चाहिए जब उसे परेशानी नहीं है तुम्हें क्यों  हो रही है परेशानी
संजय : अच्छा वार्निंग दे रहा हूं तुम्हें
रघु : तुम्हारी वार्निंग  से मैं डरता नहीं हूं
रघु उसे साइड करके अंदर जाने लगा वहा संजय उसे घूरके जाते हुए देख रहा था
अंदर प्रिया और आहना  दोनों भूक्कङ   की तरह खा रहे थे
आयशा ने पीछे से दोनो को मारा
आयशा : भूक्कडो खाते रहोगे (आहना और प्रिया ने पीछे देखा )
आहना : दी...
वो दोनो उसके गले लग गए
आयशा : अरे बस बस छोड दो मुझे बच्चे की जान लोंगे क्या (संजय भी आ गया था) वो सब एक दुसरे से बात करने लगे
अनीता : कल शॉपिंग मे चलेंगे
आहना : हा और दी आप भी आओगी
आयशा : हा हा आउंगी
आयशा इधर उधर देखते हुए मन मे : रघु कहा है
प्रिया : आयशा किसको खोज रही हो
आयशा: नहीं किसी भी नहीं
तिया प्रिया के कान मे : रघु को
प्रिया : कौन रघु
तिया: एक है हैंडसम है बहुत
प्रिया ( पीते हुए) : हा कौन है दिखा मुझे भी
तिया: हम्म देखने दे
वहा आयशा ने देखा की रघु काउंटर मे है ड्रिंक पी रहा है वो वहा गई
आयशा : रघु तुम यह क्या कर रहे
रघु : वो मे ड्रिंक के लिए आया था
आयशा : अच्छा  आओ मैं तुम्हें अपनी दोस्तो से मिलाती हूं (उसने रघु का हाथ पकडा़  और ले गयी)
आयशा: हैलो गाईज मैं तुम किसी से मिलवाना चाहती हूं
तिया ने पीछे देखा तिया प्रिया को: पीछे देख यही है वो
प्रिया ने ड्रिंक पीते हुए पीछे देखा रघु को देखकर उसके गले मे खराश हो गयी
प्रिया खराश लेते हुए मन मे : ये तो वो है जिसे आयशा ने सुनाया था और ये पीछे आ रहा था
आयशा प्रिया से: ये रघु है मेरा दोस्त
प्रिया : दोस्त
आयशा : हा (रघु तो आयशा को देख रहा था )
आहना : रघु तुम यहा
रघु ने कुछ नहीं कहा आहना ने रघु को हिलाया
आहना : कहा खो गए
रघु : हा हा बोलो
आयशा मनमे : अपनी जीएफ को याद कर रहा होगा)
प्रिया तिया के कान मे : ये देख ये तो आयशा को ही घूरे जा रहा है
अनीता शामील होते हुए : हा नज़र ही नहीं हट रही
प्रिया : कितना हॉट है यार ये मैं इसे अपना बॉयफ्रेंड बनाऊ
अनीता : तू तो तब बनागी ना जब पटेगा वो देख आयशा को ही देखे जा रहा है
आयशा : तुम लोग क्या खुशर पुशर कर रहे हो
अनीताष: कुछ नहीं
तिया : हम कह रहे थे की तुम लोग थक गए होंगे आओ खाना खा लो
प्रिया : हा हा आयशा आ बैठ
आयशा संजय बैठ गए
प्रिया : तुम भी बैठो रघु
रघु आयशा के बगल में बैठ गया
संजय : मुझे भूख नहीं है मैं अंकल आंटी के पास जा रहा हूं (संजय वहा से चला गया प्रिया रघु के पास बैठ गयी
सब बात करते करते खाना खाने लगे
अनीता तिया के कान मे : देख आयशा को ही घूर जा रहा है
अंजली  : तुम दोनो चुपचाप खाना खाओ
तिया : हम तो खा रहे हैं पर वो देख रघु को
अंजली  ने रघु को देखा जो आयशा को देखे जा रहा था
अंजली  : इसे क्या हुआ है
तिया : प्रेम रोग
अंजली : मतलब
तिया : पागल देख वो आयशा को कैसे देख रहा है अब और देख
तिया आयशा से : आयशा तुम प्लीज मेरे लिए ड्रिंक ले आओ
आयशा : ठीक है (वो उठी और चली गई )
रघु उसे जाते हुए देख रहा था और उसकी नज़र वही जब तक वो गयी नही
तिया अंजली  से : देख कैसे वही पर देख रहा है
अंजली : हा यार
प्रिया उन सब से : अभी देखो तुम्हें दिखाती हूं कुछ
( उसने आँख मारी और उठकर रघु के पीछे आयी
वो झुकी और रघु की गर्दन न मे उंगलिया  फेरने लगी
प्रिया : मिस्टर हैंडसम क्या हो रहा है
रघु को जैसे कोई असर नहीं हुआ वो वही देख रहा था जहा आयशा थी
तिया : इसे देख ये तो हिल भी नहीं रहा
अनीता : सिड्यूस भी नहीं हो रहा
अंजली : लगता है आयशा से प्यार करता है
तिया: प्या..आर वो भी उस हिटलर से उस शेरनी से सच में भगवान ही बचाए इसे
सब हसँने लगे तब तक आयशा ड्रिंक लेके आ गयी
आयशा: ये ले तिया ड्रिंक (आयशा ने देखा की सब  हँस रहे हैं और प्रिया रघु के कान के पास है)
आयशा : तुम हसँ क्यों  रहे हो और प्रिया
प्रिया ने देखा की आयशा आ गायी वो रघु से दूर हुई
प्रिया हकलाते हुए : त..त.....तु...म यहा
आयशा : हा पर तू क्या कर रही है
प्रिया : वो वो... मै कुछ नहीं बस वो रघु के नीचे मेरा चम्मच गिर गया था वो उठा रही थी
आयशा : अच्छा
प्रिया : हा .. हा ..हा
आयशा : क्या हा हा चल बैठ जा
प्रिया बैठ गई मन मे : बच गयी हिटलर से
सब खाना खाने लगे
आयशा रघु से : तुम्हें खाना कैसा लग रहा है
रघु : अच्छा है
आयशा : हम्म
तिया अनीता प्रिया आयशा और आहना ने खत्म किया और तिया आयशा और उन सब को लेकर चली गई
रघु की एक रोटी बची थी वो और अंजली  खा रहे थे खाना
आयशा : प्रिया तू क्या कर रही थी वहा
प्रिया : कु..कुछ .. नहीं
आयशा : कुछ तो था
प्रिया :  नहीं सच्ची तिया बता न
तिया : हा हा आयशा कुछ नहीं है
आयशा : ओके मै रूम देखके आती हूं
अनीता के दिमाग मे एक खुरापाती आइडिया आया
अनीता : आयशा रूक
आयशा रूक गई  : हा क्या
अनीता: यहा का स्विमिंग एरिया देख  बहुत अच्छा है
आयशा : अच्छा किस तरफ है
अनीता : राइट हाथ को वहा
आयशा वहा चली गई
प्रिया और तिया उसके पीछे जाने लगे
अनीता: तुम दोनो कहा जा रहे हो इधर आओ
प्रिया : क्या हुआ
अनीता : मेरे दिमाग मे एक आइडिया है
तिया: क्या
अनीता : देख उस हिटलर और रघु को पास लाने का
प्रिया : तू पागल है रघु को मौत के मू मे क्यों  दखेल रही है वो हिटलर मार डालेंगे तुझे भी और रघु को भी
तिया : हा अनीता मुझे उस हिटलर के हाथो नहीं मरना
अनीता: डर क्यों रहे हो यार अंजली  भी साथ देंगी
आहना : आप लोग मुझे भूल गई
अनीता: अरे तुझे कैसे भूलेंगे पर तू देगी साथ
आहना: क्यों नहीं दूंगी हिटलर से मुझे भी बचना है
सब हँसने लगे
अनीता : अब सुनो मेरी बात
अनीता बताने लगी और बाकी सब उसे सुन रहे थे
वहा अंजली  ने रघु की तरफ देखते हुए कहा: बहुत प्यार करते हो उससे
रघु ने उसकी  तरफ देखा: किससे
अंजली : जिसको इतना घूर घूरके देख रहे थे उसी को रघु : हम्म
अंजली : तुम आयशा से प्यार करते हो पता है
रघु उसे हैरानी से देखने लगा :...
अंजली  : ऐसे क्यों  देख रहे हो
रघु : तुम्हें  कैसे पता
अंजली  हसँते हुए : अब एक लड़की को इतना घूरोगे की छेढ ही हो जाए तो पता अपनेआप ही चल जाएगा अब बोलो
रघु: हा वो...
अंजली : वो वो नहीं हा बोलो
रघु : हा करता हूं प्यार आयशा से
अंजली : हम्म तो अब क्या है कब बताओगे
रघु रोटी खत्म करते हुए : कुछ नहीं सोचा  
अंजली : तुम कब बोलोगे फिर जब कोई ओर उसे ले जाएगा (रघु का मूड खराब हो गया )
अंजली : मूड खराब मत करो वो ऐसे नहीं है की किसी से भी प्यार कर ले और शादी में कोई दिलचस्पी नहीं है उसे
रघु : क्यों
अंजली : क्योंकि  उसे प्यार जैसे शब्द से उसे .... (मन मे) नहीं इसे नहीं बताती वरना बेचारे का दिल लगने से पहले ही टूट जाएगा
रघु : कहा खो गई
अंजली : कहीं नहीं वो मैं कह रही थी की वो ऐसी किसी लड़की से बात या शादी नहीं करेगी मतलब उसे लड़के ज्यादा नहीं पसंद वो आजकल की लड़की के तरह नहीं है
रघु : हम्म वो अलग है ये मैं जनता हूं
अंजली : तुम उसका दिल तो नहीं दुखाओगे
रघु : कभी नहीं
अंजली : वो बहुत अच्छी लड़की है प्लीज उसका  दिल मत दुखाना उसे अपनी जिंदगी मे बहुत कुछ देखा है उसके झकमो मे नमक मत छीड़कना
रघु: मैं उसके झकमो का मरहम बनना चाहता हूं
अंजली : हम्म्म और अगर वो तुम्हारे प्यार को नहीं समझी और किसी और के साथ शादी मेरा मतलब है अगर उसे तुमसे प्यार नहीं हुआ तो क्या करोगे?
रघु : फिर भी उससे हीं प्यार करुंगा उसे खुश देखना चाहता हूं बस भले ही वो दुसरे के साथ रहकर खुश रहे बस यही चाहता हूं वो जिसके साथ रहे खुश रहे
अंजली : तुम्हें दुख नहीं होगा की तुम्हारा प्यार एक तरफा रह गया
रघु: मैं उसे खुश देखकर खुश रहूंगा मेरा प्यार चाहे एक तरफा रह जाए पर अब जीना भी उसके लिए है और मरना भी मेरा प्यार सच्चा है बस ये ही सच है
अंजली :अगर वो तुम्हारी कभी नहीं हुई उसे कभी तुम्हारे प्यार का एहसास नहीं हुआ तो
रघु : ये क्यों  पूछ रही हो
अंजली  : बताओ
रघु : अपने  प्यार को जताऊंगा उसे एहसास दिलाऊंगा की मैं उसे प्यार करता हूँ
अंजली  : मेरी दोस्त का दिल मत तोड़ना कभी
रघु : कभी नहीं
अंजली : वैसे तुम्हारा किसी के साथ रिश्ता था कभी
रघु : कभी नहीं कभी मिला ही नहीं जिसे देख कर ये दिल धड़का और किसी के इमोशन के साथ मुझे खेलना नहीं आता
अंजली  : अच्छा ठीक है मेरी दोस्त बहुत अच्छी है तुम उसका दिल मत दुखाना
रघु : हम्म
अंजली : वैसे मुझे लगता है कि तुम उससे प्यार करते हो
रघु : फिर मेरा इंटरव्यू क्यों लिया
अंजली : हाहाहा इंटरव्यू नहीं था यार
मैं इसलिय कह सकती हू क्योंकि  तुम इतने दूर उसके पीछे आ गए वरना तुम तो यहा किसीको नहीं जानते तुम मुझे भी नहीं जानते जिसकी शादी में तुम आए हो
रघु : जानता हूं सबको
अंजली  : क्या कब कैसे
रघु : मेरा मतलब है तुम लोग आयशा के दोस्त हो तो मेरे भी दोस्त हुए न
अंजली  : हा
रघु : क्या अब इंटरव्यू खत्म हुआ
अंजली हसँते हुए : हा हा हो गया
रघु भी हसँ दिया
रघु : वैसे तुमसे कुछ पूछू
अंजली : हा पूछो अब मेरा इंटरव्यू शूरू
रघु हसँते हुए : नहीं मैं सिर्फ आयशा के बारे में ही जानना चाहता हूं उसकी पसंद  और नापसंद
अंजली  : उसे सब पसंद है
रघु : अच्छा  कोई स्पेशल नहीं मतलब जैसे फिल्मस्टार और फेवरेट कलर फूड आदि।
अंजली : हम्म उसे सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​की फिल्मे पसंद है फेवरेट  कलर उसका सारे ही है और फेवरेट फूड भी
रघु : और उसकी नापसंद
अंजली : वो कभी किसी चीज से नफरत नहीं करती और हा वो ना फूल से बहुत प्यार है आर्ट से प्यार है
रघु: हम्म देखा है मैंने गया हूं आर्ट इन मोशन इंस्टिट्यूट
अंजली : अच्छा  (मन मे) शायद ये आयशा को अतीत से निकाल दे और फिर से प्यार करना सिखा दे
वहा पर आयशा स्विमिंग एरिया देखर लौटी तिया अनीता आहना और प्रिया एक गोला बनाकर खुशूर पुसूर कर रहे थे
आयशा वहा आयी और उनके साथ जुड़  गई
आयशा : बहुत सीरियस  बात चल रही है
वो सब आयशा को देख कर पीछे हट गए
प्रिया जोर से चिल्ला पड़ी : हिटलर आ गई भागो
आयशा  घूरते हुए : कौन आ गई
प्रिया : मेरा मतलब है मेरी सबसे अच्छी प्यारी कभी ,  कभी गुस्सा ना करने वाली दोस्त
आयशा : बस बस इतना मखन मत लगा
और ये बताओ मुझे ये चल क्या रहा था कोई सीरियस बाते चल रही थी
तिया डरते हुए : हा हा वो.. हम ..कह रहे थे की तुझे और उसे कैसे .....
अनीता ने तिया के पैर मे अपना पैर  मारा
तिया दर्द से : आऊउउ इतनी  जोर से  कौन मारता है
आयशा : एक मिनट तिया मै और वो कौन?
अनीता बात को संभलते हुए : वो वो कोई नहीं आयशा तू और संजय थक गए होंगे ना तो हम कह रहे थे की तू जाके आराम कर ले हना तिया
अनीता ने तिया को आँख दिखाई : हा हा आयशा यही बोल रही थी मे
आयशा तिया से : तेरे पैर को क्या हुआ
तिया : कुछ नहीं हुआ तू आराम कर जाकर
आयशा : हा थक तो गई हूँ बहुत चलो तुम मेरा कमरा दिखा दो मुझे
अनीता : हा हा चल
सब जहा अंजली और रघु थे वहा पाँहुचे
आयशा रघु से : तुम ठक गए होंगे आराम कर लो
रघु : हम्म
आयशा अंजली से : रूम बुक है न
अंजली  : हा हा....
अनीता खासी लेते हुए
आयशा : तुझे क्या हुआ
अनीता आयशा प्लीज पानी लेआ काउंटर से
रघु : मैं ले आता हूं
अनीता जोर से चिल्लाकर : नहीं तुम नहीं
रघु  आचानक से हैरान हो गया
अनीता : मतलब तुम हमारे महमान हो तुम्हें  तकलीफ नहीं दे सकते आयशा ले आना प्लीज
रघु : इसमे कोई तकलीफ की बात नहीं है
अनीता : मैं सिर्फ आयशा के हाथ से पियुंगी
आयशा : रघु तुम रहने दो मैं ला रही हूं
वो निकल गई जैसी वो निकली अनीता ने अंजली  को साइड किया और सारा प्लान समझाने  लगी
रघु : इसे  क्या हुआ अभी तो  खासी हो रही थी
वहा पर अंजली  की मां आई वो रघु से तकरा गई जिस वजह से सारे फूल गिर गए
रघु फूल उठाते हुए : सॉरी आंटी जी मेरी वजह से आपके फूल गिर गए
अंजली  की मां : नहीं बेटा कोई नहीं
रघु ने सारे फूल तोकरी मे  रख दिए
रघु : आंटी जी मै छोड़ देता हूं
अंजली  की मां : नहीं बेटा मैं कर लुंगी
रघु ने उनसे तोकरी ली और खुद उन्हे छोड़ दिया
अंजली  की मां : थैंक यू बेटा
रघु :  ओकए आंटी जी
अंजली  की मां: वैसे  बेटा तुम्हारा नाम क्या है और तुम्हें कभी देखा नहीं
रघु : मेरा नाम रघु है  संजय और आयशा के साथ आया हूं
अंजली  की मां : अच्छा  अंजली  की दोस्त हना
रघु : जी आंटी
अंजली  की मां : अच्छा बेटा कोई तकलीफ हो बताना
रघु : जी  मैं आपकी कुछ मदद करू
अंजली  की मां : नहीं बेटा तुम आराम करो
रघु : नहीं आप बता दिजिये अगर कोई है तो
अंजली  की मां : तुम तकलीफ मत लो
रघु : इसमे तकलीफ की कोई बात नहीं है
अंजली  की मां : अरे बेटा
रघु : अरे वरे छोडी़ये बताइए
अंजली  की मां : अच्छा  बाहर लाइटनिंग का काम देख लो हुआ या नहीं
रघु : ठीक है
वो बाहर चला गया बाहर संजय भी खड़ा था रघु लाइटनिंग का काम देखने लगा
संजय उसके पास आया : क्या कर रहे हो
रघु : लाइटिंग का काम देख रहा हूं
संजय : ओके देखो देखो मैं चला
रघु : कहा जा रहे हैं
संजय : अपने दोस्त के घर रहने
रघु : तुम यहा नहीं रूकोगे
संजय : नहीं दोस्त के घर ही रहुंगे उसने जोर दिया फिर कुछ काम भी है फंक्शन  मैं आ जाऊंगा
रघु : हम्म ठीक है
संजय : अब जाउ या और जासूसी करनी है
वो निकल गया गेट के बहार
रघु उसे देखकर : अजीब इंसान है
होटल के अंदर अनीता ने अंजली  को प्लान बता दिया था
अंजली : पागल हो गए हो क्या ऐसा नहीं करुंगी
अनीता : करना  पडे़गा
अंजली  : नहीं यार
तिया :हा
प्रिया : तू नहीं चाहती क्या की आयशा अपनी जिंदगी मैं आगे बड़े
अंजली  : चहाती  हूँ
तिया : तो फिर करना पडे़गा
अंजली  कुछ सोचते हुए : हम्म सही कह रहे हैं अब आएंगे मजे पर कुछ गड़बड़  हुई तो
प्रिया: नहीं होगी यार चिंता मत कर पक्का
अंजली  : पक्का
तिया : हा
अंजली : डन
सबने एक दुसरे को हाय फाय  दी
आयशा पानी लेके आई और अनीता को दे दिया
आयशा : रघु  कहा है
अंजली  : होगा कही पे ये छोड़
आयशा : अंजली रूम की चाबी
अंजली : वो आयशा एक गड़बड़ हो गयी है
आयशा  : क्या गड़बड़ हुई है 
अंजली ने बात बतायी
आयशा  : इतनी बडी़ गड़बड़ अब क्या होगा
हर हर महादेव    

Rate & Review

एडवोकेट मदन मोहन गौनियाल
Akash jaiswar A-26

Mam next part jaldi lao please 🙏🙏🙏

Usha Dattani Dattani