तेरे प्यार की कसम - 8 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 8

तेरे प्यार की कसम - 8

वो मोहित था रघु और आयशा ने पीछे देखा
गए काम से रघु  के मुँह से अपनेआप निकल गया 
आयशा रघु से : काम से हम नहीं ये गया अब बताती हूँ इसे
शांत रहो रघु  ने कहा आयशा ने मू बनाकर  ठीक है कहा 
कहा जा रही हो हमसे बात नहीं करोगी मोहित ने आयशा को देखकर कहा 
आयशा ने शांति से जवाब दिया  : तुमसे तो मैं मिलना चाहती हूँ और मिलुंगी भी
अच्छा तुम से तो कई सारे बदले लेने वैसे ये कौन है तुम्हारे साथ
ये कोई भी हो इससे तुम्हें  कोई मतलब नहीं होना चाहिए
मोहित ने रघु  को देखकर कहा : ओह् अच्छा  कही ये तुम्हारा बॉयफ्रेंड तो नहीं
आयशा गुस्से मे बोली : अपनी बकवास बंद करो समझे और हम जा रहे हैं
इतनी जल्दी नहीं जा सकते तुम लोग मोहित ने चाकू उठाते हुए कहा  : अपना भी बदला लेना है तुमसे
मेरा यहा काम हो गया अब मैं चलती हूँ
सबूत मिटाने आयी थी ना मोहित ने चाकू कि धार चलाते हुए कहा 
ना तुम्हें बरबाद करने आयी थी
मोहित हसँने लगा : हाहा तुम नहीं बदलोगी
आयशा ने हा जो बदल जाए वो इंसान ही क्या  कहा 
वैसे मेरी दुल्हन कैसी है आज उसे मेरी मेहंदी लगी होगी ना
मेहंदी तो लगी है पर तुम्हारे नाम की नहीं हर्षित के नाम की आयशा ने बडी़ शांति से जवाब दिया 
वो हर्षित की नहीं मेरी है मैं हूँ उसका पती प्यार करता हूँ उससे मोहित ने गुस्से मे दांत पीसकर कहा 
तुम और प्यार दूर तक का रिश्ता नहीं है तुम जिस्म का खेल जानते हो अपनी हवस को प्यार का नाम मत दो प्यार को तुम जैसो ने ही बदनाम किया है
मोहित गुस्से  से : तो क्या गलत किया शादी करने वाला था मैं प्यार करता था इतना  हक तो था
आयशा गुस्से से  : तुम चुप रहो तुम जैसे बेकार  इंसान नहीं देखा मैंने शुक्र करो मैंने पुलिस मे शिकायत नहीं की
करो डरता थोड़ी  ना हूँ बरबाद करके रख दूंगा तुम्हें और उस अंजली  को भी मोहित ने धमकाकर कहा 
चुप कर तू इन दोनो को कुछ नहीं कर सकता रघु  जो अबतक शांति से उनकी बाते सुन रहा था वो बोल पडा़ 
ओह् ये बोलते भी है मुझे लगा गुंगा है  मोहित ने रघु  को देखकर कहा 
चुप रहो और हमने अपना काम कर दिया है अब तुम कुछ नहीं कर सकते सो गुड नाइट बाय बाय आयशा ने मकारी मे हसँकर कहा  और फिर रघु से बोली : चलो दोनो पीछे मुड़कर जाने लगे
जाओ जाओ कल सुबह  तुम सोशल मीडिया मे एक वीडियो दिख जाएगी
आयशा पीछे  मुडी़ और उसे देखकर बोली  : क्या
सुनाई नही दिया क्या?
आयशा ने  हाथ फोल्द  करके कहा :  हमने सारे सबूत मिटा दिए है
पता है वो लैपटॉप भी तोड़  दिया इतना गुस्सा 
आयशा हैरान थी उसने पूछा : तुम्हे कैसे पता
मुझे लगा ही  था की मेरे घर में कोई आया है और तब कन्फर्म हुआ जब पानी की अवाज सुन ली थी फिर मै जानबूझकर म्यूजिक ऑफ करके चला गया और चुप गया मोहित ने कहा 
ओह बड़ा दिमाग है तुम पर अफसोस बहुत देर हो गयी  आयशा ये बोलकर  हसँ  पडी़ 
मोहित फोन ऊपर करके : इसमे भी कॉपी है
आयशा ने अपनी हँसी रोकी और बोली :  तुम इसे मुझे देदो चुपचाप
मोहित मक्कारी से हसँकर बोला :  एक बार मैं ही हार मानली आओ लेलो मुझसे
आयशा आगे बढ़ने लगी रघु ने आयशा का हाथ पकड़ लिया : वहा मत जाओ आयशा उसके हाथ में हथियार है
आयशा रघु से बोली : वो फोन मे सबूत है यार
उसके लिए तुम अपनी जान खतरे में  क्यों डाल रही हो
पर वो.. आयशा कह ही रही तबतक 
मोहित बीच मे बोला : ओह..हो हीरो को हीरोइन की चिंता हो रही है
चुप रहो अपनी बकवास बंद करो आयशा ने मोहित को घूरकर कहा 
आयशा ने रघु का हाथ छुडाया और आगे बड़ गयी : दो तुम फोन मुझे
रघु पीछे से : वहा मत जाओ आयशा
आयशा मोहित के करीब आयी मोहित ने अपना फोन पीछे फेका और उसका हाथ पकड़ के अपनी तरफ़  खीच लिया और उसकी गरदन मे चाकू रख दिया:  अब बताओ क्या करोगी
रघु घबराहत मे : मोहित उसे छोड दो वरना अच्छा नहीं होगा  उसने आयशा को देखा और बोला कहा था न  आयशा मत जाओ सुनती तो हो नहीं तुम किसीकी अपनी चलानी आती है
तुम चुप रहोगे अब आयशा ने रघु  से कहा 
हा  मैं तो हमेशा चुप ही रहता हूँ सुनती तो हो नहीं अपनी ही चलानी है अब क्या करोगी रघु  ने अपनी परेशानी जताते हुए कहा 
मोहित आयशा से अब तुम बचोगी नहीं 
आयशा हसँते  हुए बोली : हा बचोगे तो तुम नहीं पर इससे पहले वो फोन से सबूत मिटाना है
मोहित हसँते  हुए : हाहा फोन मैं कोई सबूत नहीं था मैने झूठ कहा था  तुम्हें  मारने के लिए 
देखा कहा था ना की मत जाओ सुनना ही नहीं है मतलब किसीकि  सुनना ही नहीं है कसम खायी है तुमने रघु ने उसे घूरकर कहा 
हद है तुम्हारे लिए मेरे गले मे चाकू लगा है और तुम्हें  मुझसे  लडा़ई करनी है  ये नहीं की बचाओ आयशा ने झल्लाकर कहा 
सोचने दो यार कैसे बचाऊ
तुम सोचते रहो तब तक मेरी जान निकल जाएगी...
आयशा पूरा बोलती रघु बीच मे बोल पडा़ : चुप ! पागलो जैसी बात मत करो एक कान के नीचे लगाऊगा पागल कहीं की
क्या यार आयशा ने मू बनाकर कहा 
तुम दोनो चुप रहो कब से बात किए जा रहे हो मोहित ने उन दोनों के बीच मे कहा 
अब मेरा बदला लेने का समय आ गया जैसे तुम्हारे लैपटॉप को तोड़ा वैसे ही तुम्हें तोडूंगी उस समय की बात याद है ना
मोहित ने चाकू कि नोक आयशा कि गर्दन पर कसके  रखने लगा और बोला   : चुप इस बार मैं तुम्हें मार दूंगा
तुम्हें मै नहीं छोडूंगा छोड़ दे उसे रघु  ने गुस्से मे चिल्लाकर कहा 
आयशा ने रघु से कहा :  तुम कुछ कर तो नहीं रहे हो कह रहे हो छोडूंगा नहीं तुम बस भागने की तैयारी करो बाकी मुझपर छोड़ दो
तुम क्या करोगी रघु  कि आँखें नम हो गई थी 
देखते जाओ तैयर हो जाओ आयशा ने मोहित के पैर मैं सैंडल से झोर से मारा वो चिल्ला उठा आयशा ने चाकू एक तरफ मे फेका फिर वो उसे मारने लगी पैरो मे)
रघु ने मोका देखा तो बोला : चलो यहा से
आयशा ने मोहित को उठाया और उसके मू मे दो तीन थप्पड़ चिपका दिए : अब किसी लड़की के साथ ऐसा किया ना तो मैं तुम्हें मार दूंगी  जान से
आयशा ने उसके पेट मे दो जोर से लाटे और पैर भी मार दिए
वहा रघु बोले जा रहा था : आयशा चलो अब हो गया बेचारा मर जाएगा
आयशा ने एक नहीं सुनी उसने चाकू उठाया और मोहित के मारने लगी उसने मोहित के हाथ मे चाकू मार दिया मोहित जमीन मे गिर गया आयशा रूकने का नाम नहीं ले रही थी उसने फोन उठाया और पटक दिया फोन मे से बैटरी बहार निकल गयी  आयशा ने बैटरी उठाई और मोहित के मू मे फेक दी : और बोलेगा इस बार मैं तुझे छोडूंगी नहीं
रघु झलाते हुए : फोन क्यों तोड़ा सबूत थोड़ी  था इसमे
आयशा वहा सुन ही नहीं रही थी आयशा ने सैंडल से मोहित के पेट  मे मारा
मोहित दर्द से बिलक उठा : आ... तुझे तो मैं छोडूंगा नहीं
अच्छा पहले उठ तो जा तब मारना
रघु ने आयशा को देखकर कहा : क्या लड़की है यार ये सुन ही नहीं रही पर मजे आ रहे हैं
आयशा रघु से : अब चलो या पूरी रात यहा रहना है
इतनी देर से बोल रहा हूं चलो रघु  ने झल्लाकर कहा 
वहा  मोहित भी उठा
आयशा ने मोहित से कहा : अब किसी लड़की के साथ ऐसा मत करना वरना जान से मार दूंगी  याद रखना
मोहित आगे बड़ा रघु ने आयशा का हाथ पकडा़  और दोनो  भागने लग गए दोनो भाग रहे थे मोहित पीछे से: तुम नहीं बचोगी
वो दोनो भाग रहे थे साइड मे आयशा को फ्लावर पॉट दिखा उसने वो  उठाया और मोहित के सर मे मार दिया मोहित गिर गया
आयशा और रघु बहार  निकल गए आयशा ने घर का दरवाजा बंद कर दिया वहा मोहित के सर से खून निकलने लगा उसने खुद को संभाला और दरवाजे के पास जाकर बोला : खोलो दरवाजा खोलो
वहा रघु और आयशा हँसे जा रहे थे
कमाल हो यार तुम  रघु  ने हसँते हुए कहा 
हा वो तो मुझे पता है आयशा ने एटिटूड से कहा 
फोन क्यों तोड़ा उसमे  कुछ थोड़ी था ना 
मुझे गुस्सा आया इसलिये मैंने तोड़  दिया
उसका बहुत नुकसान हो गया होगा बेचारा ऊपर से तुमने उसे कितना मारा
तुम्हें वो बेचारा क्यों लग रहा है उसने जो किया वो गलत था और मैंने उसे गलत की सजा दी जो कोई भी मेरे करीबो को या मेरे परिवार को नुकशान पहुचायंगा मैं उसे मारूंगी आयशा ने कहा 
इतना इम्पोर्टेन्ट है परिवार रघु  ने उसकी आँखों मे झांककर कहा 
हा खुद से भी ज्यादा 
वैसे मुझे आज बहुत  मजे आए
आज मैंने लेडी कुंगफू देखी क्या मारा है तुमने ऊपर से फोन लैपटॉप शावर सब खराब कर दिया रघु  ये बोलकर पेट पकड़के हसँने लगा 
अब मुझे गुस्सा आ गया तो आ गया क्या कर सकते है और अच्छा  हुआ इसका नुकशान हुआ आयशा ने मुस्कराकर कहा 
कह तो सही रही हो तुम अब चलो इससे  पहले वो आ जाए रघु  ने हँसी रोककर कहा 
नहीं आएगा
रघु ने   क्यों कहा 
क्योंकि  मैंने उसे  बंद कर दिया है आयशा ने हसँते हुए कहा 
उसीके घर मे  रघु  ने सवाल किया 
आयशा ने हसँते हुए  हा कहा 
रघु तालिया बजाने लगा : वहा कमाल हो यार तुम मजा आ गया आज तो लेडी ब्रुसेली कुंगफू मास्टर देख कर  कहीं तुम उसकी पत्नी तो नहीं
आयशा ने  सवालिया अंदाज मे पूछा  किसकी ?
ब्रूस ली की 
नहीं हूं मैं किसी की वाइफ और ना इंट्रेस्टेड हूं आयशा ने मू बनाकर कहा  
क्यों  कभी ना कभी तो शादी करनी होगी ना रघु  ने बडे़ प्यार से उसे देखकर  कहा 
आयशा सवाल को तालते हुए बोली अब चलो कार मे या सारी बात यही करोगे
रघु ने  हम्म कहा आयशा चलने लगी रघु उसे ही देखे जा रहा था : ऐसे मत देखो गिर जाओगे फिर से मैं तुम्हें नहीं संभालुंगी इस बार
रघु सामने रास्ते को देखने लगा
दोनो कार के पास पाहुचे तब तक आयशा को कॉल आई वो आहना की थी
आहना के साथ अंजली  भी थी : दी क्या हुआ काम हुआ
हा हो गया काम
वा दी आप जल्दी से आओ
आयशा ने  खालीपन से हा कहा 
दी आप कहीं रास्ते में रूकना मत और जल्दी आ जाओ आहना ने कहा 
आयशा ने हम्म कहा और फोन कट गया  
दोनो कार मे बैठे
चलो भैया जहां से पकडा़  था वही ड्रॉप कर दो रघु  ने कहा 
कार स्टार्ट हुई और चलने लगी
आयशा खिड़की के बहार खालीपन से देख रही थी जैसे वो कुछ सोच रही हो
रघु उसे देखकर समझने की कोशिश कर रहा था की क्या बात है होटल बस आने ही वाला था 
आयशा ने अचानक कहा : गाड़ी रोको
रघु कन्फ्यूज्ड हो गया उसने पूछा  क्यों 
कहा ना गाड़ी रोको
गाड़ी रूकी आयशा बहार निकली और रघु से बोली : तुम जाओ मैं आ जाऊगी
इतनी सुनसान रात में तुम कहा जाओगी, आगे पीछे कोई नहीं है रघु  ने चिंता से कहा 
देखो तुम जाओ मैं आ जाऊंगी वैसे भी होटल पास है आयशा ने उसे समझाते हुए कहा 
नहीं मैं तुम्हें अकेला छोड़के नहीं जाउंगा
आयशा गुस्से मे बोली : तुम्हें रे समज नहीं आता क्या जाओ
मैं नहीं जाऊंगा तुम कुछ भी करो रघु  ने जिद करते हुए कहा 
आयशा गुस्से  से चिल्लाकर बोली : जाओ मुझे अकेला छोड़ दो क्यों मेरे पीछे पडे़  रहते हो तुम समज नहीं आता क्या कहा ना तुमसे अकेला छोड़ दो तो छोड़ दो बस
रघु मन मे : अगर इससे बहस करूंगा तो ये नहीं मानेगी
:  ठीक है पर आ जाना 
आयशा ने हा कहा और रघु ने  ड्राइवर से कहा : चलो
ड्राइवर ने कार स्टार्ट की और आगे निकल गया पीछे आयशा कार को जाते हुए देख रही थी
रघु ने आगे मोड़ पर गाड़ी रोकी और कार से उतर गया उसने पे किया और कार चली गई वो चुपके से पीछे आया उसने  देखा की आयशा शांती  से सड़क के किनारे पत्थर मे बैठी है
आयशा खामोशी से ज़मीन को देख रही थी
थोडी देर बाद रघु का फोन बजा उसने बिना देखे उठाया  हा कौन पूछा 
मै आहना आहना ने जवाब दिया 
आहना तुम : रघु ने कहा 
हा तुम कहा हो दी भी नहीं आई और फोन भी नहीं उठा रही कह रह गए  
आ रहे बस रघु  ने आयशा को देखकर कहा 
हो कहा तुम लोग कुछ हुआ है आहना ने चिंता से कहा 
नहीं बस आ रहे हैं रघु  ने कहा 
झूठ मत बोलो  सच बताओ कहा हो तुम और दी कहा है आहना ने पूछा 
हम होटल के पास है आयशा ने गाड़ी रोकी और उतर गई मुझे जाने के लिए कह दिया और खुद जमीन को घूरे जा रही है
दी बहुत तकलीफ मैं है तुम उन्हे अकेला छोड़ दो वो आ जाएगी अपने आप
रघु ने कन्फ्यूज्ड  होकर कहा  तकलीफ ? किस बात की और मैं उसे अकेला क्यों छोडू सुनसान रास्ता है..
आहना ने कहा : कुछ नहीं होगा उनको वो खुद को बचा सकती है
रघु आयशा को देखकर : हा वो तो पता है देखा मैंने
आहना ने  चलो बाय कहा और  रघु ने फोन कट कर दिया
रघु कुछ देर तक ऐसी ही आयशा को देखता रहा फिर आयशा के पास चला गया
रघु आयशा के सामने घुटने के बल बैठ गया 
आयशा उसे देखर हैरानी से बोली : तुम ! तुम यह क्या कर रहे हो गए नहीं कहा था ना की जाओ अकेला छोड़ दो
तुम अकेले कैसे रहती इसलिये मैं आ गया
मैं कोई छोटी बच्ची नहीं हूं अकेली रह सकती हूं अभी जाओ यहासे दिमांग मत पकाओ आयशा ने चिड़कर कहा 
रघु ने उससे  कुछ नहीं कहा सिर्फ  देखता रहा 
क्या है ऐसे क्यों देख रहे हो आयशा ने उसी चिडे़ लहजे मे कहा 
रघु ने कुछ नहीं कहा देखो इससे पहले मैं तुम्हें  मारू चले जाओ अकेला छोड़ दो आयशा ने उंगली दिखाते हुए कहा तो रघु ने उसके दोनो हाथ प्यार से पकड़ लिए और प्यार से बोला : मारो जीतना मारना है उतना मारो और डाँटना भी है तो  डांट लो कुछ नहीं कहूंगा
आयशा उसे देखने लगी
रघु प्यार से आगे बोला : उदास मत हो सब ठीक हो गया है हमने सारे सबूत मिटा दिया है अंजली  की शादी धूम धाम से होगी कोई मोहित नहीं होगा ना उसकी दमकी
आयशा नज़र साइड करते हुए : नहीं मैं उस वजह से उदास नहीं हूं
रघु उसका चेहरा अपनी तरफ करते हुए बोला  : तो फिर क्यों  उदास हो
कुछ नहीं छोडो़ चलो अब देर हो गई है
आयशा ये बोलकर  खडी़  हुई और जाने लगी रघु ने पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया
रघु खड़ा हुआ और उसके पास गया : बताओ मुझे क्या हुआ
आयशा ने कहा कुछ नहीं चलो 
रघु ने उसका हाथ कस के पकड़ लिया : मैं नहीं छोडूंगा बताओ
तुम मेरा पीछा नहीं छोडोंगे ना आयशा ने घूरकर कहा तो रघु  ने कहा : ना जबतक बताओगी नहीं तबतक
बस मोहित की बातो को याद कर रही थी आयशा ने कहा 
अंजली  उसपर बहुत भरोसा करती थी वो उससे शादी के लिए कहने वाली थी पर उसने अपनी  फितरत दिखा दी अच्छा  हुआ शादी नहीं हुई
किसी और की वजहा से  अपना मूड खराब करना क्या सही है?
आयशा  उसने जो करना था कर दिया पर हमने बचा लिया ना अगर शादी के बाद ये सब पता चलता तब होता 
पछतावा पर अब तो हमे खुशीया मनानी चाहिए की सब ठीक है और एक बात अगर तुम  खुश नहीं रहोगी तो तुम्हारी दोस्त   कैसे खुश रहेगी कल  शादी है तुम खुश नहीं रहोगी तो  वो और तुम एक साथ कैसे एन्जॉय करोगे और बात रही उस मोहित की तो वो जैसा है वैसा हर इंसान हो वो जरूरी नहीं समझी उसकी  वजह से तुम अपना   मूड खराब क्यों कर रही हो वो इस काबिल नही 
आयशा ने हम्म कहा और 
रघु ने उसके जवाब मे कहा : हम्म नहीं खुश रहो आहना का कॉल आया था बुला रही थी चलो और हा एक बड़ी सी मुस्कान देके
आयशा ने एक मुस्कान दी और  हा कहकर चलने लगी 
दोनो चलते जा रहे थे
रघु ने आयशा कि तरफ देखकर कहा :  तुम्हें अंजली  ने जो कुछ भी दिया तुम्हें पसंद नहीं आया
आयशा अपनी मुस्कान छुपाते हुए बोली :  उसने मुझे जो दिया है वो तुम्हें पता है
नहीं वो मैं ऐसी ही पूछ रहा हूं वैसे  दिया क्या है रघु  ने टपक  से कहा 
तुम्हें क्यों जानना है आयशा ने एटिटूड से कहा 
ऐसी ही अगर तुम्हें नहीं बताना मत बताओ
आयशा मुस्कराते हुए बोली : ऐसे कैसे मैं बताती हूं न 
रघु ने उसे देखकर कहा बताओ फिर 
उसने एक लांछा दिया है पिंक कलर का
रघु ने हिचकते हुए पूछा : तुम्हें पसंद आया
हम्म हा  ठीक है इतना बुरा नहीं है
तुम्हें पसंद हीं आया रघु  ने पूछा 
ऐसा नहीं है आया ना
फिर रघु  थोडा उदास होकर कहा 
वो मैं उसे वापीस कर दूंगी आयशा ने ड्रामे करते हुए कहा 
रघु जोर से बोला  : क्यों ..
आयशा पीछे  हट गई : तुम्हें  क्या हुआ
तुम ये छोड़ो तुम वापीस क्यों  करोंगी ये बताओ
उसके साथ ज्वैलरी भी है वो बहुत मेहंगी होगी
रघु ने कहा तो 
तो क्या यार मैं क्यों  लु
रघु: किसी ने इतने प्यार से दिया है तुम रख नहीं सकती
हा पर...
रघु बीच में बोला : पर वर नहीं रखो
आयशा रघु को घूरके : तुम्हें इतना क्यों हो रहा है जैसे तुमने भिजवाया हो अंजली  के हाथ से
रघु रूक गया थोड़ा हिचकते हुए बोला : नहीं तो मैंने नहीं दिया मैं इसलिये कह रहा था क्योंकि वो तुम्हारी दोस्त ने दिया है
तुम्हें किसने कहा आयशा ने शक भरी निगाहों से कहा 
रघु ने पूछा : मतलब  
मैंने उसे पूछा था वो कह रही थी की मेरे ही किसी दोस्त ने दिया है पता नहीं वो कौन है खुद देना चहिए  था अगर देना ही था तो शायद संजय ने दिया हो
रघु मू लताके बोला : अब क्या करोंगी
क्या करूंगी संजय को वापीस आयशा ने हँसी कंट्रोल करते हुए कहा 
रघु चिलाते हुए बोला : नहीं तुम ऐसा नहीं करोंगी
अब क्या हो गया तुम्हें  आयशा ने उसे देखकर कहा 
नहीं तुम संजय को नहीं दोगी रघु  ने सपाट लेहजे मे कहा 
क्यों रघु  आयशा ने पूछा 
तुम्हें  कैसे कन्फर्म है कि उसीने दिया है कोई और भी तो हो सकता है और फिर कोई भी हो उसने प्यार से दिया है रखना चाहिए और अगर (रघु   उदासी से बोला ) तुम्हें वापीस करना भी  है तो अंजली को करो  उसने दिया है 
आयशा : पर मैंने कब कहा की मुझे नहीं रखना
अभी थोड़ी  देर पहले रघु ने   उदास होकर कहा 
आयशा : हा पर वो जो कोई भी है उसने प्यार से दिया है इसलिय मैंने रख लिया है अपने पास और उसे वापीस नहीं दूंगी पर वो होगा कौन किसने दिया होगा? तुम्हें कुछ पता है
नहीं मुझे नहीं पता रघु  ने बड़े प्यार से आयशा को देखकर) पर जिसने भी दिया है  बड़े प्यार से और बहुत सारे अरमानों से दिया है
हा पर उसे ही देना चाहिए  था पता तो चलता किसने दिया शायद उसे डर हो रघु  ने कहा 
आयशा हैरानी से उसे देखकर कहा : किस बात का ?
रघु उसे देखकर : तुम्हें हर्ट करने का या तुम गलत समझो
जिस किसी ने दिया है वो मेरा दोस्त ही है तो बुरा किस बात का मानुगी मै थैंक्स भी नहीं बोल पाई अब आएगा भी मेरे सामने तो पता कैसे चलेगा।
सामने ही तो हूँ रघु  ने टपक से कहा 
आयशा हैरानी से उसे देखकर बोली : क्या?
नहीं मेरा मतलब है उसे थैंक्स नहीं चाहिए  हो शायद
अच्छा तो फिर क्या चाहिए  उसे
रघु : बस तुम पेहनलो यही शायद से
आयशा मन मे  बोली : शायद बोल रहा है ये नहीं की बता दू की मैंने दिया है  आयशा ने रघु  से कहा : हा पर थैंक्स भी तो बोलना है ना इतना सुंदर लांछा देने के लिए
रघु : थैंक्स बोलने की जरूरत नहीं है तुम्हें पसंद आया वो बात है
आयशा : मुझे बहुत प्यारा लगा बहुत ज्यादा अच्छा लगा
रघु ने कंनफोर्म करते हुए पूछा :  सच्ची
हा सच्ची तबही तो थैंक्स बोलना चाहती हूं इतना अच्छा देने के लिए आयशा ने रघु को देखकर   थैंक यू कहा 
रघु उसे  हेरानी से देखने लगा तो  आयशा ने बात संभालते हुए कहा : मतलब मैंने तुम्हें वो इंसान समज के बोल दिया तुम भी तो दोस्त हो
रघु ने ठीक है हम्म कहा 
क्या ठीक है यार अगर वो तुम होते तो क्या कहते ठीक है हम्म बस आयशा ने चिड़कर कहा 
मै तुम्हें उसमे  देखना चाहता हूँ आयशा ने उसे देखा तो रघु ने बात संभालते हुए कहा : तुमने कहा था ना की अगर वो होता तो क्या बोलता तो वो ये बोलता 
हा पेहनुंगी उसे कल शादी मे
इंतेजार रहेगा (आयशा ने रघु  को देखा  तो उसने बात संभालते हुए कहा) उसे
हम्म वैसे अगर वो खुद देता तो ज्यादा अच्छा लगता आयशा ने थोडा नाराजगी से कहा 
शायद वो तुमसे डर गया हो
आयशा उसे  हेरानी से देखकर बोली : डर क्यों 
रघु हसँते हुए : कहीं तुम उसे ब्रूस ली बनकर मार ना दो
आयशा हसँ  गई ​​: तुम भी ना मैं क्यों  मारूंगी
रघु ने अपनी हँसी रोककर कहा : उसे ये डर हो सकता है की कहीं तुम उसे गलत समझो या फिर कहीं गुस्से मैं आकार दोस्ती तोड़  दो
आयशा : नहीं मैं नहीं समझुगी गलत ना ही दोस्ती तोडो़गी
तुमने गुस्से  मैं आकार उसकी हड्डी तोड़  दी शायद इसलिए  रघु  ने मुस्कराते हुए कहा 
आयशा हसने लगी रघु भी उसे देखकर हसँने लगा
दोनो होटल पाहुच गए थे वहा आहना और अंजली  खड़े थे
आहना : दी आप ठीक हो ना
अंजली  : तू ठीक है न 
आयशा ने उन्हें दिलासा देते हुए कहा : हा मैं ठीक हूं सब बड़िया काम तमाम करके आ गई मे
आयशा ने सब कुछ बता दिया जो वहा हुआ
अंजली  : अच्छा हुआ उसके साथ
आहना : कमाल कर दिया दी आपने धोती फाड़  के रूमाल कर दिया
तीनो ने एक दुसरे को गले लगाया और हसँ दिये
अंजली  आयशा से अलग हुई और रघु के पास गई: थैंक यू रघु मेरी मदद करने के लिए
रघु : थैंक यू मत बोलो दोस्त हूं दोस्ती मैं इतना तो बनता है ना
अंजली ने हम्म कहा 
आयशा उन दोनो के पास आई और रघु को छेड़ते हुए अंजली  से बोली : अब तक उसका नाम नहीं बताया जिसने मेरे लिए गिफ्ट  भेजा
अंजली  ने रघु को देखा रघु ने चुप रहने का इशारा दिया अंजली  हसँ  गई
आहना वहा आते हुए : कौनसा गिफ्ट दी
बता नाम उसका आयशा ने तिरछी नजरों से उसे देखकर कहा 
अंजली  रघु को देखकर बोली  : उसने मना किया है यार नहीं बता सकती
यार देख प्लीज बता दे आयशा ने जोर देते हुए कहा 
क्या बताते दी मुझे भी बताओ क्या चल रहा है आहना ने पूछा 
अंजली ने   रघु को देखकर कहा  : नहीं बता सकती यार
रघु परेशान हो चुका था अपने मन मे बोला :  प्लीज़ अंजली  मत बताना
आयशा शरारत से बोली : तुझे बताना ही पडेगा हमे जानना है की वो कौन है क्यों रघु उसने रघु  को देखा तो रघु ने आयशा को देखकर हा कहा) देखा अब तो रघु को भी जानना है बता
अंजली  अपनी मुस्कान छुपाते हुए बोली :  रघु तुम्हें  भी जानना है
रघु झेपते हुए बोला : हा .. मतलब 
मतलब क्या रघु अंजली ने पूछा 
रघु ने कुछ नहीं कहा 
आयशा को हँसी आ रही थी वो बड़ी मुश्किल से कंट्रोल कर रही थी
आहना : दी क्या बात चल रही है कुछ समज नहीं आ रहा है कोई बताएगा हो क्या रहा है
अंजली  रघु को देखकर बोली : तुझे रघु बताएगा सारी बात
अंजली रघु को देखकर बोली  : बताओ रघु इसे हमारे बीच क्या बात चल रही है
रघु बुरे तरीके से थक गया था उसने  मन मे कहा : कहा फस गया मैं इन तीखी मिर्चियों के बीच से जाता हूं
क्या हुआ बताओ रघु आहना को अंजली ने मुस्कराकर कहा 
हा बताओ रघु आहना ने रघु  से पूछा 
मुझे बहुत नींद आ रही मैं सोने जा रहा हूं रघु   वहा से भाग गया)
आहना पीछे से चिल्लाते हुए बोली :  रघु क्या हुआ अरे बात तो दो
अंजली  और आयशा पेट  पकड़के  हसँने लगे
आहना : अब आप दोनों  को क्या हुआ
क्या हो रहा कोई बताएगा वो चला गया और आप हसँ  रहे हो
अंजली  : बताती हूं तुझे हम क्यों हसँ  रहे हैं
अंजली  ने आहना को सारी बात बता दि
आहना हसँते हुए  बोली :  अच्छा  तभी वो भाग गया
अंजली : हा चलो अब बहुत रात हो गई है
तीनो अपने अपने कमरे मे चले गए
आयशा कमरे मे आई वहा रघु सोफे मे आंख बंद करके लेटा था आयशा अपनी हँसी कंट्रोल करके बिस्तर मे लेट गई
रघु ने अपनी आंखें खोली और आयशा को देखकर कहा : आयशा
आयशा उसे देखकर  हा कहा 
तुम्हारी बात हुई अंजली  से बताया उसने वो कौन था 
ना नही  बताया 
ओके गुड नाईट सो जाओ बहुत रात हो गई है रघु  ने कहा 
आयशा ने भी हा गुड नाईट कहा  थैंक गॉड बच गया मै रघु  ने मन मे कहा और दोनो सो गए
सुबह के 7 बज गए थे
आयशा की नींद खुली और वो बालकनी मे चली गई। आयशा को संजय की कॉल आई : हा संजय बोलो
कल आचानक कहा चली गई थी दिखी नहीं
आयशा : कहीं नहीं गई थी यही थी
संजय : दिखी तो नहीं तुम उस रघु के साथ थी क्योंकि  वो भी नहीं दिखा
आयशा मन मे  : अगर इसे बताऊंगी ये पचास सवाल पूछेगा झूठ ही बोल  देती हूं क्या जाता है
क्या हुआ कहा खो गयी संजय ने कहा 
आयशा ने कहीं नहीं मे जवाब दिया 
संजय : तुम उस रघु के साथ थी
आयशा : हा मतलब उसे कुछ काम था वोई काम करने गए थे थोड़ी देर बस फिर आ गए थे
संजय ने पूछा कहा गए थे
आयशा मन मे बोली : अब इसे पूरी राम कहानी जाननी है
कहा खो जाती है संजय ने पूछा 
नहीं वो मुझे अंजली  बुला रही है बाय बाद में बात करती हूं
संजय ने  ठीक है कहा और फोन कट गया
वहा रघु की भी नींद खुल गई थी और वो बालकनी मे आया
रघु ने आयशा गुड मॉर्निंग कहा बदले मे आयशा ने भी 
  गुड मॉर्निंग कहा 
कल हम यहा से चले जाएंगे रघु  ने सामने देखकर कहा 
हा  तुम्हें यहा मजे  आए आयशा ने पूछा 
हा बहुत ज्यादा रघु  ने उसे देखकर कहा 
आयशा ने कहा : जल्दी तैयार हो जाते हैं बहुत सारे काम है
हा तुम तैयार हो जाओ रघु ने कहा आयशा बहार आई उसने पैकेट पकडा़  और बाथरूम मे तैयार होने चली गई
थोड़ी देर बाद वो तैयार होके आई
मैचिंग दुपट्टा और ज्वेलरी के साथ आज उसने येलो कलर का लहंगा पहना था। आयशा की मेहंदी भी बहुत अच्छी रची थी
रघु बालकनी से आया और आयशा को एक पल देखता ही रह गया फिर बोला  : अच्छी  लग रही हो
थैंक्स तुम भी तैयर हो जाओ आयशा ने कहा 
रघु  ने  हम्म कहा और फिर मन मे सोचने लगा  पता नही तुम कब वो लांचा पहनोगी
क्या हुआ कुछ कहना है आयशा ने उसे देखकर कहा 
रघु ने ना  कहा और जाने लगा 
रुको :  आयशा ने उसे पीछे से रोककर कहा
रघु ने पीछे  पलटकर हा कहा 
आयशा: अगर संजय मिले और कुछ पूछे तो उसे कहना की तुम मेरे साथ किसी बिजनेस के सिलसिले मे गए थे बहार कल रात को
क्यों झूठ बोलना है
हा क्योंकि  मैं नहीं चाहता की किसी और को भी ये बात पता चले हम तीनो के अलावा
उसे मोहित के बारे में कुछ भी नहीं पता क्या रघु  ने पूछा 
आयशा : ना मैंने कभी ये बात किसीको नहीं बतायी सिर्फ  आहना मै  और अंजली को ही पता है और अब तुम्हें  और मैं चाहती हूं 
रघु बीच मे बोलते हुए : की मै ये बात किसीको ना बताऊ
आयशा ने हा ऐसी बात किसीको ना पता चल सके कहा 
हम्म चिंता मत करो मैं किसीको नहीं बताऊंगा ये बात
आयशा ने हा थैंकस  कहा अब मै  जाऊ रघु  ने कहा 
हा जाओ जल्दी आ जाना आयशा अंजली  के कमरे मे आई वहा सब थे आहना तिया अनीता प्रिया अंजली  अभी तैयर नहीं हुई थी
प्रिया आयशा से बोली : आयशा देख ना ये दुपट्टा हो ही नहीं रहा कर दे
आयशा ने प्रिया का दुपट्टा ठीक किया
प्रिया ने मुस्कराते हुए कहा :  वैसे वो मिस्टर हैंडसम तैयार हुआ
आयशा चिड़ते  हुए बोली :  क्या यार तुझे हमेशा उसीकी बात सूजती है
क्यों  जलन होती है प्रिया ने शरारती मुस्कान लिए पूछा 
मुझे क्यों होंगी आयशा ने चिड़कर कहा 
प्रिया : होती है...
आयशा ने उसके सर मे मारा : अब ये बात छोड़ और अंजली  को तैयार करते हैं।
आ...उ .उ तू मरती क्यों  रहती है प्रिया ने सर मसलते हुए कहा 
क्योंकि तू बात ही ऐसी करती है आयशा ने कहा 
तिया: वैसे  कल रात तुम दोनो कहा गयाब हो गए थे
अनीता ने भी पूछा : हा तुम दोनो  दिखे नहीं अचानक गायब हो गए
आयशा ने बात को संभालके कहा  : वो मै थक गई थी और फंक्शन भी खत्म हो गया था तो मैं सोने चली गई और रघु भी थक गया था इसलिय जल्दी सो गए
प्रिया ने अच्छा  कहा  हा क्यों  कुछ काम था  आयशा ने पूछा 
अनीता : नहीं वो संजय पुछ रहा था तुम्हें 
हा मेरी बात हो गई थी
अब आपस मैं ही बात करते रहोगे या मुझसे भी बात करोगे अंजली ने कहा 
आयशा : तुझसे क्या बात करनी
अंजली  मू बनाते हुए कहा  : अच्छा जी अभी से भूल गए मुझे
आयशा : तुझे कैसे भूल सकते हैं तेरी शादी मैं ही तो आए है
अनीता : हा पागल तेरे लिए ही तो आए हैं
तिया ने  हा कहा 
अंजली  : आओ फिर झप्पी  पाते हैं वैसे ही आज आखिरी  दिन है
अनीता ने पूछा  किसका
हम तेरे दोस्त थे और रहेंगे आयशा ने कहा 
हा यार तुम तो रहोगे ही मैं तो आजादी की बात कर रही थी सबने हसँते हुए अंजली  को गले लगाया
प्रिया ने हसँकर कहा : आजादी तो हर्षित  की छीनेगी तेरी नहीं
अंजली ने सही कहा और सब हसँन लगे
आयशा : अब चल तैयर हो जा अंजली 
अंजली  ने  हा कहा 
प्रिया ने आयशा को छेड़कर कहा : वैसे जब इस हिटलर की शादी होगी तो बेचारा दुल्हा भी डरेगा
अनीता : हा यार रघु की क्या हालत  होगी मैं तो अभी से इमेजिन  कर रही हूं बेचारा आयशा बोलेंगी उठ तो वो उठेगा ये बोलेंगी सो जा सोएगा
तिया : हा वो आयशा की डांत खाए जाएंगा बेचार 
सही कहा आहना ने कहा 
आयशा : तुम सब चुप रहोगे और तू आहना तू भी इनका साथ दे रही है
अहाना झेप गई
अब  तुम सब चुप रहो आयशा ने बुरी तरीके से चिड़कर कहा 
अनीता : हा हम तो चुप ही रहते हैं रघु भी चुप ही रहेंगा
आयशा : चुप हो जाओ अगर उसे पता लगेगा तो क्या सोचेगा
अनीता तिया के कान मे : सोचेगा क्या वो खुद इसके पीछे पडा़  है अगर इसे पता चलेगा ना खून कर देंगी उसका भी हमारा भी
दोनो हसँ दिए
आयशा : क्या खुशर पुशुर कर रहे हैं तुम दोनो
अनीता ने  कुछ नहीं कहा 
आयशा : मैं देख रही हूं आजकल तुम लोग कुछ ज्यादा ही खुशर पुशर कर रहे हो बात क्या है बताओगे
अनीता ने कहा कुछ नहीं सच मे 
आयशा उसे  घूरके देखने लगी : क्या है जल्दी बताओ
अनीता डर गई मन मे : अब मे मर गई बचा लो भगवान इस हिटलर से
आयशा घूरते हुए अनीता के पास गई : बता
वो... मै ...
प्रिया तिया के कान मे : अब गई ये काम से
तू ये छोड तू मेरा दुपट्टा ठीक कर दे अंजली ने कहा 
आयशा उसके पास आई और अनीता को घूरके बोली : तुझे तो मैं बाद में देखती हूं
अनीता ने अंजली को देखकर मन मे कहा : थैंक्स अंजली  बच गई मै
अंजली  ने अपनी पलके झपका दी वहा रघु तैयर होके नीचे  गया था रघु सजावट का काम देखने लगा 
संजय ने रघु को देखा वो रघु से मिलने आ गया
संजय ने उसे देखकर हाय कहा 
रघु ने एक नज़र देखा  और फिर मन मे कहा : ये खुद मेरे पास कैसे चल के आया है
संजय ने दोबारा  हाय कहा 
रघु ने हेलो कहा और काम देखने लगा)
तुम कल कहा थे संजय ने पूछा 
जहां तुम थे रघु  ने सपाट से कहा 
संजय : अच्छा मैं तो यहीं होटल मै था
तो मै  चाइना मै था रघु  ने कहा 
तुम सीधे मू बात नहीं कर सकते
रघु : जो जैसा होता है मैं उससे वैसा ही बात करता हूं संजय ने कहा : आयशा से कैसे बात करते हो 
तुम हर बार उसे क्यों बीच में ले आते हो रघु  ने चिड़कर कहा 
क्योंकि तुम आ रहे हो मेरी और उसकी दोस्ती के बीच
मैं किसी दोस्ती के बीच नहीं आ रहा
संजय : अच्छा जैसा तुम आयशा को देखते हो मुझे नहीं 
पता
पता है फिर बोल क्यों रहे हो  रघु  ने जवाब दिया 
: ज्यादा स्मार्ट मत बनो  संजय ने गुस्से मे कहा 
कोई मतलब नहीं है रघु  ने कहा 
संजय : कल कहा थे तुम और आयशा
रघु : कही भी हो तुम उसके पापा हो जो बताऊ
संजय : अपनी  बकवास बंद करो जो पूछा है बताओ
रघु जाते हुए : आयशा से ही पूछ लेना
संजय पीछे से बोला : कहा जा रहे हो बात कर रहा हूं तुमसे
काम है मुझे फालतू नहीं हूँ मैं जो किसीकी चुगली करता रहूँ
संजय चिल्लाते हुए बोला : मैं फालतू नहीं हूं और ना चुगली करता हूं
रघु जा चुका था।
संजय ने मन मे कहा : इसे आयशा से दूर रखना पडे़गा वरना  काम बिगाड़  देगा इतने सालो की मेहनत बर्बाद चली जाएगी
वहा पर आयशा ने अंजली  को तैयार कर दिया था
अनीता अंजली  की बलाया लेते हुए : वह कितनी सोनी लग रही है आज
प्रिया उसके कंधे मैं हाथ रख कर : अभी तो शादी मैं देखना पूरा चांद का टुकड़ा लगेगी
तिया ने हा कहा और आहना ने  अब चले आयशा ने पलटकर  हा चलो कहा सब कमरे से बाहर निकल गए
अंजली  आयशा के बगल में चल रही थी
अंजली  आयशा के कान मै बोली : तू रघु का दिया हुआ गिफ्ट  कब पेहंगी 
पेंनुगी रात को
अंजली : बेचारे को बैचेनी हो रही है
आयशा : हा देखा मैंने कल रात को पूछ रहा था अंजली  ने कुछ बताया तो नहीं
तूने क्या बोला
आयशा : नहीं कहा कुछ  कुछ नही  बोला
अंजली ने  बेचारा कहा और दोनो हसँ  दिए 
वो लोग हॉल मे पाहुचे और अंजली  को मंच मैं बैठा दिया
वहा अंजली  के पापा :  खाने की व्यवस्था भी नहीं हुई अब तक महमान आ गए आज रात को ही शादी भी है जल्दी करो
कैटरिंग वाले : जी सर सब हो गया है आप चिंता मत किजिये
अंजली  की मां : अरे लड़के वाले के वहा से हल्दी आई
आयशा ने पूछा : क्यों आंटी जी
अंजली  की मां : बेटा दुल्हन को दुल्हे की हल्दी लगायी जाती  है रीवाज है
आयशा ने अच्छा कहा 
अंजली  की मां ने फूलो की टोकरी  पकड़ी थी
आयशा :  आंटी जी मैं रख देती हूँ इसे 
अंजली  की मां ने फूलो की टोकरी को आयशा को दे दी
आयशा टोकरी पकड़के  चल रही थी उसे आगे अच्छे  से दिख नहीं  रहा था क्योंकि  टोकरी काफ़ी बड़ी थी दुसरी तरफ से रघु भी आ रहा था रघु भी अपने धुन मे  था वो 
दोनो तकरा गए आयशा के हाथ से टोकरी छुट गयी रघु  ने आयशा के दोनों पकड़ लिए और आयशा का एक हाथ रघु के सीने मे था और एक रघु ने पकडा़  था ऊपर से उनके ऊपर वो फूल बरस रहे थे और वो दोनों  एक दुसरे की आँखो मे खोए थे।
वहा से तिया और प्रिया गुजर रहे थे। तिया की नज़र पड़ी रघु और आयशा मे
तिया : प्रिया देख वहा पर रोमांस चल रहा है
प्रिया ने उदर देखा : वह यार पर एक कमी है
तिया : क्या कमी रह गई
प्रिया: रूक बताती हूं (वो एक थाली लेके आई जिसमे  गुलाब की पंखुड़िया थी)
तिया उसे  देखकर : ये क्यों लायी
रोमांस करवाने को
प्रिया वहा से गुजरने लगी उन दोनो के सामने पैर  मुड़ने  का नाटक किया और आयशा को रघु के ऊपर धक्का दे दिया और उनके ऊपर पंखुड़िया की थाल फेक दी
प्रिया एक्टिंग करते हुए : ओह सॉरी वो मेरा पैर मुड़  गया (वो वहा से भाग गई तिया के पास) वहा आयशा रघु के ऊपर गिर गई और उनके ऊपर गुलाब की पंखुड़िया गिर 
रही थी  दुसरी  तरफ से संजय  आ गया था। आयशा और रघु   को ऐसे देखा तो उसे बहुत तेज गुस्सा  आया संजय उन दोनो को अलग करने के लिए आगे बड़ा पर तिया ने उसे पकड़के साइड कर दिया 
क्या है छोड़ मुझे
तिया : तू यहा  रूककर रोमांस देख 
प्रिया आयशा और रघु की फोटो निकाले  जा रही थी संजय उन दोनो को घूरके देखे जा रहा था
आयशा रघु दोनो ज़मीन मे गिरे हुए थे रघु के देखे रघु  के सीने मे  आयशा के हाथ थे  और गिरने की वजह से आयशा के बाल आगे आ गए थे उन दोनो के ही दिल तेजी से धड़क रहे थे। कुछ देर बाद वहा से अंजली  की मां गुजर रही थी
तिया : यहा तो आंटी आ रही है जल्दी कुछ करना पडे़गा
प्रिया भागते हुए वहा गई
प्रिया : आयशा सॉरी वो मेरा पैर  मुड़  गया था
आयशा का ध्यान टूटा : कोई नहीं
वहा तिया अंजली  की मां के पास गई और उन्हें  बातो में लगा दिया
आयशा उठने को हुई तो बाल फस गए थे आयशा मन मे : इन बालो को आग लगा दो सच मैं जब देखो फस जाते हैं
वहा रघु तो अभी भी आयशा को ही देखे जा रहा था।
आयशा रघु के ऊपर से उठी और बैठ गई
आयशा रघु को देखकर  : अब तुम्हें क्या हुआ है
रघु ने कुछ नहीं कहा 
आयशा बाल निकलने  लगी रघु ने उसका हाथ पकड़  लिया आयशा उसे देखने लगी
मैं निकलता हूँ
मैं निकालती हूं तुम चुप रहो
आयशा को खुद पे ही बहुत तेज गुस्सा  आ रहा था उसने अपने बालो को तेजी से झटका बालो के साथ बटन भी निकल गया आयशा के मू से आ....ऊ... च निकला 
आयशा और रघु दोनो खड़े हुए
प्रिया बटन उठाते हुए बोली : ओहो आयशा ये क्या कर दिया शर्ट का बटन तोड़ दिया
आयशा ने रघु से सॉरी कहा 
रघु तो ब्लैंक होके आयशा को देखे जा रहा था
प्रिया: कोई नहीं तू लगा दे इसे जा कमरे मे
आयशा ने  हेरानी से प्रिया को देखकर कहा : मै
हा और कौन प्रिया ने कहा 
आयशा फूलो को उठाते हुए बोली : नहीं मुझे काम है
प्रिया ने उसके हाथो से फूल लिए और बोली: मैं कर लुंगी तू जा बटन लगा कमरे मैं जाकर
क्यों 
प्रिया फूलो को इखटा करते हुए : क्योंकि  तूने तोड़ा है यार अब जल्दी जा फंक्शन शुरू होने वाला है
आयशा : ओके यार वैसे मेरा फोन कहा गिरा
प्रिया ने उसे  फोन दिया : अब जा
आयशा ने रघु को देखा जो एक तक खड़ा था : चलो कमरे  मे 
आयशा आगे चलने लगी पीछे रघु उसे जाते हुए देख रहा था
प्रिया ने रघु को हिलाया : जाओ अब
थैंक यू रघु  ने कहा तो 
प्रिया ने सवाल किया : किस लिए
रघु : मुझे और उसे धक्का देने के लिए
प्रिया हसँते हुए बोली  : ओके ओके अब  जाओ
रघु आयशा के पीछे पीछे चला गया
तिया प्रिया के पास आई : अच्छा  ​​हुआ बच गए वैसे ये दोनो  कहा गए
प्रिया : बटन लगाने
तिया: किसका बटन लगाने
प्रिया : रघु की शर्ट का टूट गया है
तिया : ओह् बड़िया है
दोनो ने फूलो को उठाया और हसँते हुए   चले गए
संजय : इन सब को क्या हुआ है कोई रोक ही नहीं रहा ऊपर से हसँ  रहे है कुछ तो गड़बड़ है
आयशा ने कमरे का दरवाजा खोला तबी उसे कॉल आई वो रश्मि की थी
आयशा चलते हुए बोली :  हा माँ
ठीक से चल रहा है सब रश्मि ने पूछा 
हा माँ सब बड़िया चल रहा है
आयशा ने रघु का हाथ आगे किया और उसमे  वो बटन रख दिया
आयशा रघु से बोली :  अभी आई सुई धागा लेके
आयशा ने ड्रावर खोलके सुई धागा निकाला
रश्मि : शादी की तैयारी कैसी चल रही है
आयशा रघु के पास आई और उसे सोफ़े मे बिठाया
ठीक चल रही है मां
आयशा ने फोन स्पीकर मे किया और टेबल मे रख दिया वो रघु के पास गई और बटन लगाने लगी
रश्मि ने बेटा कहा तो आयशा ने जवाब दिया : हा माँ बोलिये मैं सुन रही हूँ
रघु उसे ही देखे जा रहा था कब से जबसे वो उस कमरे मे आया था
रश्मि : बेटा अंजली  को हमारी तरफ से बधाई कहना और सॉरी भी ना आने के लिए
हा माँ बोल दूंगी 
आयशा ने  रघु से कहा :  हिलना मत वरना चुभ जाएगा
कोई है तेरे साथ बेटा रश्मि ने पूछा 
आयशा : नहीं माँ आप बोलो
रश्मि : बेटा अब तो तेरी दोस्त की शादी हो गई है अब तू कब करेगी
आयशा बटन को शर्ट मे लगाती हूँए बोली  : क्या मां हर समय शादी शादी अभी नहीं करनी मुझे शादी वादी
कब करेंगी बेटा जब उमर निकल जाएगी अब मुझे भी नाती नातिनी चाहिए
आयशा ने रघु को देखते हुए कहा: क्या मां हर समय बस यही सब लगा रहता है कभी तो इससे हट के बोलो (वो बटन मे सुई लगाने लगी)
रश्मि : बेटा अब शादी तो करनी ही है ना कभी ना कभी वैसे वो है ना मेरी दोस्त रंजना  उसका बड़ा बेटा क्या नाम था... हा रघु वो कैसा है बेटा उससे  बात करू शादी करेगी
आयशा के हाथ से सुई छूट गई उसने ऊपर देखा तो रघु उसे ही देख रहा था
वो बहुत अच्छा लड़का है रघु कितना प्यारा नाम है श्री राम तू बनजा सीता
आयशा रघु को ही देख रही थी उसे उन्हें  बीच में तोकते हुए कहा : कैसी बात करती हो माँ वो क्या सोचेगा वो मेरा दोस्त है आप चुप रहो मैं फोन रख रही हूं
अच्छा अच्छा  नहीं बात करूंगी पर तू बस शादी के लिए तैयार हो जा
आयशा तो रघु को देखे जा रही थी और रघु भी
रश्मि : अच्छा बेटा मुझे घर के काम है फोन रखती हूं
फोन कट गया था आयशा को होश ही नहीं था
रघु मन मे  : ऐसे मत देखो मैं मर जाऊंगा
रघु ने बड़े प्यार से आयशा से कहा  आयशा फोन कट गया है
आयशा होश मैं आई हा हा और  बटन फिर लगाने  लगी)
आयशा ने हिचकते हुए  सॉरी कहा 
क्यों रघु  ने हैरानी से पूछा 
वो मेरी मां ने तुम्हारे बारे में...
रघु बीच मे बोला : तो इसमे सॉरी क्यों उन्होनें  तो सिर्फ  वो कहा जो उनके दिल मे था बात तो तुम्हारी सोच की है   तुम क्या सोचती हो
आयशा : वो माँ ने तुम्हें मेरे साथ जोड़ा तुम्हें बुरा नहीं लगा
रघु : नहीं आंटी  ने सिर्फ  कहा की मैं अच्छा हूं और कुछ गलत नहीं कहा
आयशा बटन मैं से सुई धागा निकालते हुए बोली : हम्म मां भी ना शादी के पीछे पड़ी रहती है कह दिया एक बार नहीं करनी अभी क्यों नही करनी शादि तुम्हें 
आयशा धागा मू से काटते हुए बोली : क्योंकि  बहुत सारे कारण है कभी फुर्सत से बताऊंगी
आयशा धागा काटने के बाद : ये लो बटन लग गया है अब नीचे चलते हैं
रघु ने सिर्फ़ हम्म कहा और दोनो उठे और नीचे आ गए
अंजली  और अनीता को सारी बात पता चल गई थी प्रिया ने फोटो और सारी बात बता दी थी
अंजली  ने आयशा से पूछा : कहा थी कबसे इंतजार कर रहे हैं रघु का बटन टूट गया था वो लगा रही थी
अनीता : अच्छा  कैसे टूटा
आयशा को थोड़ी देर वाली बात याद आई : वो... टूट गया लगा हुआ
अनीता : अच्छा झूठ मत बोल मुझे सब पता है
क्या पता है आयशा ने हिचककर पूछा 
अंजली : यही की तू उसकी बाहो में गिर गई थी
आयशा : ऐसा कुछ नहीं है वो प्रिया का धक्का लगा इसलिए 
हा हा ये भी पता है अंजली ने कहा और 
आयशा ने बात पलटते हुए कहा : ये सब छोडो़ हल्दी आ गई
हा आ ही गई
आयशा : चलो फिर फंक्शन शुरू करते हैं
अंजली को उन्होने स्टेज मे बिठाया और सब बारी बारी से हल्दी लगाने लगे और गीत गाने लगे
रघु भी वही खड़ा होके सब को खुश होते हुए देख रहा था।
आयशा ने भी अंजली  को हल्दी लगाई : तू खुश रहे हर्षित  के साथ
अंजली ने कहा  : हा अब जल्दी से तू भी अपने हाथ पीले कर ले
आयशा ने  फ़ीकी तराह मुस्करते हुए  हा कहा 
रघु रश्मि की बात सोच रहा था :(तू बनजा उसकी सीता) दिल की बात कह दी उन्होनें  पर कहू कैसे और कब ?
संजय ने भी अंजली को हल्दी लगायी 
संजय : कॉंग्रट्स अंजली 
: थैंकस  संजय अंजली ने मुस्कराकर कहा 
बाकी तिया आहना अनीता प्रिया ने भी उसे हल्दी लगायी
रघु स्टेज  के पास आया अंजली  रघु से : तुम नहीं लगाओगे
क्यों  नहीं लगाऊगा
रघु ने हल्दी ली अपने हाथ में और गालो मैं लगा दी : कॉंग्रट्स 
अंजली : थैंक यू वैसे अगली बार मैं तुम्हारी हल्दी मैं आऊंगी जो.. आयशा को लगेगी
रघु हसँते हुए बोला  : हा आना 
: आयशा को ही लगेगी ना अंजली ने पूछा 
रघु ने आयशा को देखकर कहा  : हा पक्का आयशा को मेरे नाम की और मुझे उसकी नाम की ही हल्दी लगेगी
अंजली : हा हा देखना ऐसा ही होगा
रघु मुस्काराने लगा
सब एन्जॉय कर रहे थे लगाबग सबने हल्दी लगा दी थी प्रिया ने हल्दी उठाई और अनीता को लगा दी अनीता ने भी लगा दी ऐसे ही उन सब ने एक दुसरे हो हल्दी लगा दी। अनीता ने आयशा के भी लगा दी संजय ने भी अनीता तिया को लगा दी सब हल्दी से होली खेलने लगे। उन सब को रघु देख रहा था
संजय ने आयशा को भी गालो मे हल्दी लगायी ये देखकर 
रघु को बहुत गंदा लगा। आयशा ने देखा की रघु साइड मे है  तो वो वहा गई : तुम यहा क्या कर रहे हो आओ होली खेलो
रघु हसँते हुए नहीं रहने दो बोला 
अरे ऐसे कैसे चलो आयशा ने उसे खींचकर कहा 
नहीं आयशा मैं नहीं जा रहा तुम जाओ
आयशा ने ठीक है और वो  जाने लगी 
रघु ने उसे रोककर कहा  सुनो
आयशा ने  पीछे  पलटकर  हा मे जवाब दिया 
तुम्हारे गालो मैं हल्दी लगी है प्लीज इसे साफ कर लो
आयशा ने हा कहा और वो वॉशरूम चली गई)
आयशा वॉशरूम से चेहरा साफ करके आ गई।
थोड़ी देर बाद हल्दी खत्म हुई और शादी के लिए तैयारीया शुरू कर दी
सब अपने अपने कमरे मे चले गए अराम करने के लिए
शाम के पाँच बज गए थे रघु शीशे  के आगे खड़े होकर तैयार हो रहा था और सोच रहा था : भगवान करे आज आयशा मेरी दी हुई ड्रेस पहने 
आयशा मन मे बोली :  आज तुम्हारी ही दी हुई ड्रेस पहन लेती हूं
रघु ने आयशा को देखकर कहा  : आयशा तुम तैयर होके आना मैं जा रहा हूं
आयशा ने हा ठीक है कहा रघु का मन था उसे पूछने का की वो लांछा पेहंगी भी या नहीं पर हिम्मत नहीं हुई
वो नीचे चला गया और आयशा ने रघु का दिया हुआ पैकेट खोला उसे वो लांछा कुछ पल के लिए देखा फिर  तैयर होने चली गई
हर हर महादेवी
 

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