तेरे प्यार की कसम - 11 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 11

तेरे प्यार की कसम - 11

आयशा उन वादियो मे ही खोयी थी जो पीछे छुट रही थी। आयशा का दिल कर रहा था कुछ  वक़्त रूकने का और फिर उसे नींद  भी आ रही थी , उसने बगल मे देखा तो संजय गाड़ी से बहार देख रहा  था
आयशा मन मे : अगर मे सो गयी   और इसके ऊपर गिरि तो इसने मेरा खून कर  देना हैआयशा कुछ सोच
थोडी देर बाद उसे एक चाय का स्टाल दिखा 
आयशा ने चुरंत कहा गाडी़ रोको
पर क्यों क्या हुआ संजय ने पूछा
रोक ना यार आयशा ने झल्लाकर कहा
गाड़ी साइड मे  रूकी आयशा और बाकि सब  गाडी से उतरे :  कुछ  देर यही रुक जाते है  वहाँ चाय पीते है आयशा ने उस तरफ इशारा करके कहा
आयशा हमे देर नही करनी देर हो जायेंगी संजय ने कहा
प्लीज़ ना कुछ देर बाद चलते है आयशा ने मासूमियत से कहा  पर  संजय बोल ही रहा था तबतक
रघु बीच मे बोला : रूक जाते है  इतनी भी देर नही होगी
संजय ने रघु  को देखकर कहा :  मुझे काम है मे तेरी तरह फ्री नही हूँ 
मुझे भी काम है पर जब आयशा का मन है फिर मना  क्यों करना रघु  ने उसे घूरकर कहा
तुम दोनो प्लीज़  झगडा़ मत  करोआयशा बैमन से बोली :  चलो बैठ जाओ
संजय ने आयशा को देखकर कहा : उदास मत हो  रहन दे तेरा मन है तो  चल कुछ देर यहाँ  रूक जाते  है
आयशा ख़ुशी से बोली :  ये हुई  ना बात
तीनो स्टाल मे  चले गये और चाय मंगवाई
संजय: कुछ खाने का भी ले लेते है भूख  लगी है
हा ठीक  कहाँ  आयशा ने कहा वहा पास मे ही  ढाबा दिखा तीनो  वहा खाने चले गए खाना खत्म करके तीनों आए 
आयशा  उन पहाडो को देखे जा रही  थी
रघु भी उसके  बगल मे आ गया
आयशा रघु को देखकर बोली :  कितने हसीन नज़ारे हैं ना
ह्म्म्म बहुत खुबसूरत है
अगर कोई मुजझे कहे ना यहीं  रुक जा जा मे  यही  रूख जाऊँगी
संजय वहा आते हुए : है ही क्या पहाड़ों मे  कुछ भी नही है  ना  एजुकेशन सिस्टम  है नेटवर्क भी नही आते पता नही तूझे क्या पंसद है
आयशा का  मूड ऑफ हो गया : तुम बताओ रघु  तुम्हें कैसा लगा उसने रघु  से पूछा तो रघु  बोला :  मुझे  यहाँ रहना  है यहाँ  शांती है दिल को सकून मिलता है  मे कभी रहा नहीं हूँ  पर जितने दिन भी रहा  एक  सकून सा मिला । शहर की जिदंगी से अलग है वहाँ पर लोग मशीनों की तरह रहते है  सुबह उठो काम पे जाओ  यहाँ देखो सब शांति से रहते है और अगर एक को तकलीफ होती है तो सो लोग आ जाते है  हेल्प करने  शहर मे एक साथ रहते हुए भी नही आते यहाँ के लोगों को जो कुछ मिलता है वो उसमे सन्तुष्ट रहते है
आयशा को उसकी बाते बहुत अच्छी लगी
आयशा ने रघु का हाथ लिया और मिलाने लगी
संजय ने मू बनाकर मन मे कहा  : हहहह,  एक बात बोलने के लिए  कहाँ था पुरा लेक्चर केहने को किसने कहा था
आयशा रघु से हाथ मिलाते हुए बोली  : देखा संजय रघु की बाते कितनी अच्छी  है (रघु आयशा को तो कभी हाथ को देख रहा था  जो आयशा ने पकडा़ था)
संजय बेमन से बोला :  हम्म मै  कार मे  जा  रहा हूँ आ जाना
हा ठीक है आयशा ने कहा और संजय वहाँ  से चला गया
आयशा रघु से खुशी से बोली  : एक काम  करते है हम दोनो यही रहते है
हा अगर तुम यहाँ रहोगी मे भी यही रहुगा
हा तुम यहा खेती बाडी़ करना मे तुम्हारे लिए खाना पकाऊगी   फिर हम दोनो साथ मे  की खेती बाडी़ करेंगे आयशा ने हसँकर कहा 
रघु हसँते हुए बोला  : तुम जहाँ वहाँ मे 
दोनो हँसे जा रहे थे उनको कार से संजय देख रहा था: इतना हसँ रहा है  मन तो कर रहा है यहीं से इसे धक्का देदु 
संजय चिल्लाते हुए बोला  : अब यहीं रहना  है  चलो
रघु आयशा से: चलो आयशा वो बुला रहा  है
रूको यार कुछ देर
चलना  नही  है यही बसना है  रघु  ने मुस्कराकर पूछा
आयशा हसँते हुए  हाहा कुछ देर बस
रघु ने ठीक है कहा
और कितनी  देर जल्दी आओ संजय बोला
वो हमे बुला रहा है चलो रघु ने कहा
कहा ना रुखो आयशा ने झल्लाकर कहा
संजय के कितना बुलाने पर वो नहीं गयी संजय कार से निकल के उनके पास  गया :  कहा हो  यार कितनी देर से इंतजार कर रहा हूँ चलो
सॉरी वो मैंने  सुना नहीं आयशा ने मासूम सा चेहरा बनाकर कहा  रघु उसे  हैरानी से देखने लगा
ठीक है  अब चलो संजय जाने  को हुआ
आयशा ने   संजय को रोककर कहा  : संजय पानी की बोतल लेआ  ढाबे से और कुछ खाने  को भी
संजय ने  ठीक है कहा और वो वहाँ से  ढाबे मे चला गया)
आयशा और रघु कार की तरफ़ जाने लगे
आयशा पीछे बैठ गयी रघु आगे  बैठने को हुआ तबतक आयशा ने उसे  रोककर कहा : रघु
रघु ने उसे देखा  आयशा आगे बोली  : तुम यहा पीछे बैठ जाओ
...... ( रघु को कुछ समज नही आया इसलिए वो बोला भी नही  )
आयशा ने उसे चुप देखा तो बोली : मतलब अगर तुम्हें कोई  परेशानी नहीं है तो .....
मुझे  कोइ परेशानी नहीं है रघु  ने कहा
हम्म फ़िर तुम बैठ जाओ
रघु वहा बैठ गया और आयशा को देखने लगा
आयशा को उसका देखना पंसद नही आया तो वो बोली :  ऐसे मत देखो प्लीज कुछ गलत मत समझना वो मैने ऐसे ही कह दिया था तुम चाहो तो आगे बैठ सकते हो अगर अजीब लग रहा है तो 
ना ना मुझे  बिलकुल अजीब नही  लग रहा है
पक्का तुमारी गल्‌फ़्रे᠎̮न्‍ड्‌ को तो नहीं बताओगे आयशा ने कंनफोर्म करते हुए कहा
रघु को कल रात की बात याद आ गयी : नहीं किसीको अजीब  नहीं लगेगा
आयशा बाहर देखने लगी
रघु खुद से मन मे  बोला :  कहाँ फस गया यार मेरा दिमाग खराब हो गया था जो मैने  बोल दिया  मेरी लव स्टोरी शुरू होने से पहले ही फ्लॉप  हो गयी। ये समझती है मेरी गल्‌फ़्रे᠎̮न्‍ड्‌ है पर मेरे दिल मे तो तुम  हो आयशा क्या करू ऐसा की तुम मुझे गलत ना समझो 
आयशा उसे सोचते हुए देखकर मन मे बोली : अपनी गल्‌फ़्रे᠎̮न्‍ड्‌  के बारे मे  सोच रहा होगा कितना सोचता है यार पर  मुझे क्या (वो खिड़की  के  बाहर देखने लगी)
रघु ने मैसेज बाक्स चैक किया जो उसने वीर को भेजा था पर वीर ने देखा नही  था
रघु उस मैजेस को देखकर मन मे सोचने लगा :  ये वीर का बच्चा कितना सोता है अब तक घोडे बैचकर सोया होगा गधा
वहा संजय ढाबे से निकला और  गाडी़ के पास पहुँचा उसने देखा रघु पीछे  बैठा है तो मजबुरन उसे आगे बैठना पडा़
ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की और चल दिया कुछ देर के बाद
आयशा को एक अंजान आदमी और एक छोटा सा बच्चा दिखा उसके साथ बहुत सारा सामान था
आयशा ने कहा :  गाड़ी रोको
संजय ने झल्लाकर कहा :  अब क्या हुआ
वहा पे  देखो वो आदमी उसे  मदद चाहिए होंगी आयशा ने उस तरफ इशारा किया
आयशा हमे  देर हो जाएगी
रघु संजय से बोला : आयशा ठीक कह रही है  उसके साथ छोटा बच्चा है ऐसे मे हमे उसकी  मदद करनी चाहिए 
  और इतनी भी देर नही  होगी यार आयशा ने संजय को देखकर कहा
संजय ने बेमन से हा कहा फिर ड्राइवर से रोक दो कहा
गाड़ी एकदम उस आदमी के सामने रूकी  
संजय ने उस आदमी से पूछा : कहा जाना है
बस जरा आगे जाना है लिफ्ट मिल जाती तो बडी़  मेहरबानी होती  आदमी ने कहा
क्यु नहीं अंकल आयशा ने कहा
संजय और ड्राइवर बहार  निकले और सामान रखने लगे
रघु भी बाहर जा रहा था आयशा ने उसका हाथ पकड़  लिया : तुम  कहा जा रहे  हो
रघु उसे देखकर : मदद करने
संजय  है और ड्राइवर भी तुम यही बैठो
रघु बैठा रह गया आयशा ने उसका हाथ छोड दिया और बाहर  देखने लगी
आयशा मन मे खुद से बड़बड़ाई : शिट यार क्या करती हूँ 
उसने अपना   सर पीठ  दिया
रघु अपने हाथ  को ही देखे जा रहा था संजय ने सारा सामान रखा और कार के आगे  उस आदमी को बैठा दिया
संजय ने आयशा से कहा :  चलो खिसको अब
नही यार मुझे  खिड़की मे बैठना है (रघु से) खिसको इधर
वो रघु की तरफ़ से बैठ गया
संजय बड़बडा़ते हुए : क्या मुसिबत है (ड्राइवर से): चलो अब
गाड़ी  चलती जा रही थी
संजय रघु को तिरछी  नज़रो से देखते हुए मन मे: नवाबजादा बाहर मदद करने नहीं  आया पता नही किस बात की अकड़ है
वहा रघु का फोन बजा उसने अपना हाथ उठाया तो उसका हाथ  आयशा को छूने लगा  सॉरी रघु  ने कहा
इट्स ओके आयशा  खिड़की  के बाहर देखने लगी )
रघु मन मे बोला  :  शायद छोटे का होंगा बाद मे  करूंगा फोन
थोडी दुर चलने के बाद उस आदमी  का घर आ गया  वो आदमी कार से बहार उतरा संजय भी उतरा और सामान निकालने लगा उसने सारा समान  निकाल दिया
आदमी ने थैंक यू बोला   और गाडी़ आगे निकल गयी संजय आगे बैठ गया
आयशा को नीन्द आ गयी थी वो खिड़की  के सहारे सो गयी रघु ने देखा की उसे ठंडा लग रहा है
रघु इधर उधर देखने  लगा की कही  कोई दुकान खुली मिल जाए  पर कोई खुली नहीं थी
उसने नोटिस किया कि आयशा ने अपने पैर सीट मे रख लिए 
कुछ देर के बाद एक दुकान खुली मिली रघु ने तुरंत कहा : गाडी़  रोको
क्यों  संजय ने कहा
रोको ना जल्दी ड्राइवर ने गाडी़ साइड मे रोकी रघु नीचे  उतरा अब क्या हुआ संजय ने उससे पूछा
मे अभी आया और रघु  वहा से चला गया   (आयशा की नीन्द  भी खुल गयी)
क्या हुआ गाडी़ क्यों रुकी (आयशा ने साइड मे देखा )  ये कहाँ गया
पता  नही  यार उस  दुकान मे गया है (आयशा ने  दुकान की तरफ  देखा)
तू उतरना मत मे अभी उसे  लेके आती हूँ  आयशा उतरी और दुकान कि तरफ चलने लगी
वहा रघु उस  दुकान मे आया वहा  बुढिया औरत बैठी थी वो दुकान ज्यादा बडी़ नही थी 
अम्मा मुझे एक बढिया सा कंबल दिखा दो
अभी दिखाती हूंँ बेटा
अम्मा ने उसे एक  से एक  बढिया कंबल दिखाए  रघु ने  उसमे  से एक गुलाबी रंग का जिसमे गुलाब के फूल बने होने के साथ ही  साथ बेहद नरम था  वो लिया 
अम्मा ये वाला रघु ने कहा अम्मा न उसके रैट  बताए  वहा आयशा भी पहुँची  रघु ने अम्मा को रैट से ज्यादा पैसे दे दिए 
ये तो  बहुत ज्यादा  है बेटा
अम्मा रख लिजीए  ये आपका बेटा दे रहा  है
आयशा अम्मा से बोली : हा अम्मा रख लिजीये
अम्मा न वो पैसे अपने बटुए मे  रख लिए : भगवान करे तुम दोनो हमेशा एक साथ रहो खुश रहो
आयशा ने रघु को देखा एक पल के लिए
रघु आयशा को देखकर बोला : चले अब
आयशा ने हा चलो  कहा और दोनो चलने लगे
तुमने  कंबल क्यों  खरीदा आयशा ने पूछा  
तुम्हारे  लिए तुम्हें  ठंडा लग  रहा था  इसलिए
थैंक यू सो मच कितनी फ़िकर करते हो मेरी जैसे  मे तुम्हारी बीवी होंगी  (मन मे सोंचकर: ओह्! शिट मे क्या क्या कह देती हूँ   पता ही नही होता)!
आयशा रघु से बोली : आई एम रियली सॉरी मे बातो बातो मे  इतना कुछ  बोल जाती हूंँ की  पता ही  नही चलता
रघु मन मे उसे देखकर बोला : जो भी बोलती हो सही कहती हो
दोनो गाडी़ मे बैठे रघु ने आयशा को कंबल दिया
आयशा को उसमे गरमाहत मेहसूस  हो  रही थी थोड़ी देर मे वो अपना सर सीट मे टीका कर सो गयी
संजय ने ड्राइवर से कहा : जल्दी चलाओ गाडी़ हमे  जल्दी पाहुंँचना है 
रघु मन मे : इसे इतनी जल्दी क्यों  हो रही  है काम तो मुझे भी है पर आयशा के साथ सफर करना कितना अच्छा है मन तो है सारी उम्र ऐसी ही तुम्हारे साथ रहूँ
वहा गाडी़ की स्पीड  तेज होने की वजह से आयशा का सर रघु के जांघ मे जा गिरा
आयशा  उसकी जांघ मे आराम से लैट गयी उसने उसका हाथ आहना समज के पकड़ लिया
आयशा उसके हाथो मे उगलिया फेरते हुए : आहना तेरे हाथ इतने  कड़क  क्यो  हो गए
तुम मुझे  आहना समज रही हो मै रघु  हूँ (उसका सर प्यार से मसलते हुए ) तुम्हारा रघु 
आयशा ने उसका हाथ टाइट से पकड़  लिया और सो गयी  रघु  को भी नींद आ गयी थकान की वजह से
सब थकान की वजह से सो  गए  गेहरी नींद मे
शाम के 5 बज गए थे
रघु की नींद टुटी संजय और आयशा अभी भी  सोये थे  रघु ने आयशा को देखा जिसने उसका हाथ अभी भी टाइट से पकडा़ था वो उसके  सर  को सेहलाने लगा
रघु ड्राइवर से  भाईसहाब गाने चला दो नींद नही आएगी तुम्हें  ड्राइवर ने  गाना चलाया
तेरे बिन जी ना पाऊँगा सच मुच मर ही जाऊंँगा
ये तय है ये तय है हँसना रोना तुझसे ही मेरा होना तुझसे ही ये तय है ये तय है
मौजूद है हर सांँस में तू हर दफ़ा ये तय है तू है दवा या दर्द है पर है मेरा ये तय है
मौजूद है हर सांँस में तू हर दफ़ा ये तय है तू है दवा या दर्द है पर है मेरा ये तय है
तेरे बिन जी ना पाऊँगा सच मच मर ही जाऊंँगा ये तय है ये तय है
तू नसीबों सा मेरे हाथों पे शुरू से लिखा है मेरे हक़ है तू आसमानों से मुझे जोड़ता है तेरे क़दमों पे जहाँ रख दूंँ मैं कभी जो कहे तू कोई सक हो तो अजमा लेना किसी दिन मुझे
मौजूद है हर सांँस में तू हर दफ़ा ये तय है तू है दवा या दर्द है पर है मेरा ये तय है मौजूद है हर सांँस में तू हर दफ़ा ये तय है तू हर दवा या दर्द है पर है मेरा ये तय है
तेरे बिन जी ना पाऊँगा सच मच मर ही जाऊंँगा ये तय है ये तय 
रघु आयशा  का सर सहलाए  जा रहा  था
ड्राइवर न साइड मे गाडी़ रोकी और बोला : अभी आया साहब
रघु ने आयशा का सर सीट मे रखा और वो भी उतर  गया
थोडी़ देर बाद वो कार मे  बैठने के लिय गया उसने  देखा  की आयशा जाग चुकी थी :  क्या हुआ गाडी़ क्यों रोकी
कुछ नही बस ऐसे ही रघु  बैठ गया और गाडी़  शुरू हुई और चल दी
गाना खत्म हो गया था ड्राइवर ने दुसरा गाना बजा दिया
ड्राइवर ने बाते करते हुए कहा : मुझे  पुराने गाने अच्छे लगते है   
  अच्छा अंकल आपको  पुराने गाने पसंद है
हा आजकल के गानो मे रखा ही  क्या है
रघु आयशा से बोला : अंकल जी  को पुराने जमाने के गाने अच्छे  लगते हैं आयशा हँस दी
वहा गाना बजा .....
एक दिन आप यूं हमको मिल जाएंगे फूल ही फूल राहों में खिल जाएंगे मैंने सोचा न था एक दिन ज़िंदगी इतनी होगी हसीं झूमेगा आसमा, गाएगी ये ज़मीं  मैंने सोचा न था
रघु आयशा को देखे जा रहा था जो बाहर देख रही थी
एक दिन आप यूं हमको मिल जाएंगे फूल ही फूल राहों में खिल जाएंगे मैंने सोचा न था एक दिन ज़िंदगी
इतनी होगी हसीं झूमेगा आसमा, गाएगी ये ज़मीं  मैंने
सोचा न था आयशा ने उसे देखते हुए नोटिस किया तो उसने रघु  मे नज़र मारी 
वहाँ  गाना आगे बजा
दिल की डाली में कलियां सी खिलने लगीं जब निगाहें निगाहों से मिलनें लगीं दिल की डाली में कलियां सी खिलने लगीं जब निगाहें निगाहों से मिलनें लगीं एक दिन इस तरह होश खो जाएंगे पास आएंगे मदहोश हो जाएंगे मैंने सोचा न था एक दिन ज़िंदगी इतनी होगी हसीं झूमेगा आसमां, गाएगी ये ज़मीं मैंने सोचा न था जगमगाती हुई जागती रात है रात है या सितारों की बारात है एक दिन दिल की राहों में अपने लिए जल उठेंगे मोहब्बत के इतने दीये मैंने सोचा न था मैंने सोचा न था
ऐसे ही उनकी आधी रात कट गयी संजय उठ गया था ड्राइवर को उबासिया आ रही थी इसलिए रघु ड्राइवींग सीट मे बैठ गया और गाडी़ चलाने लगा ड्राइवर रघु  के बगल मे  संजय आयशा के बगल मे बैठ गया
रघु  ने  गाना चेंज किया और मिरर को आयशा मे फोक्स कर दिया
आयशा ने संजय को कंबल देकर कहा :  ये ले ओड़ ले
संजय ने भी कंबल ओड़ लिया और सो गया आयशा भी सो गयी रघु  ने गाने की वॉल्यूम तेज कर दी  
रघु  को पाँच से छह घंटे हो गए थे कार चलाते चलाते
सुबह के पाँच बज गए थे रघु  भी थक चुका था सब नींद से जाग चुके थे ड्राइवर ने कहा सहाब अब मे चला लेता हूँ
रघु  ने हम्म कहा और  उसने गाडी़ साइड मे रोकी )
वो लोग बस पहुँच ही गए थे वहाँ उन्हे एक दुकान दिखी
सब बहार निकल गए तीनों दुकान मे चले गए वहाँ से उन्होंने कुरकुरे के तीन चार  पैकेट  लिए  खाने पीने का कुछ ओर समान भी 
आयशा गाडी़ मे जाने को हुई रघु  भी उसके पीछे पीछे आ गया।
आयशा ने रघु को देखा तो बोली : तुमने पुरी रात गाडी़ चलायी
रघु  उसे देखकर : पुरी रात नही आधी रात
क्यों पर
रघु  बीच मे बोला : क्यों क्या  वो थक गया था वो भी तो इंसान है आधी नींद  मे चला रहा था ऊपर से रात हो रही थी कही एक्सीडेंट हो जाता इससे अच्छा मै ही चला लेता हूँ  ताकि उसे भी आराम मिल जाए
तुम्हें समझना इम्पॉसिबल है आयशा ने कहा
क्यों ! इतना बुरा हूँ  क्या रघु  ने उसे देखकर कहा
तुम्हें देखकर लगता ही नही है कि तुम अमेरिका से हो
ऐसा क्यों लगता है तुम्हें
: तुम्हारी सोच अलग है वरना आजकल के अमीर जादे अपने आप को ही समझते है ड्राइवर को छोटा समझते है पर तुम नही तुम्हारे साथ जो रहेगा वो लकी
होगा तुम्हारी गल्‌फ़्रे᠎̮न्‍ड्‌ बहुत लकी है
रघु  को आयशा के मू से अपनी तारीफ सुनकर अच्छा लग रहा था पर गल्‌फ़्रे᠎̮न्‍ड्‌ सुनकर बुरा
रघु  ने आयशा को देखकर कहा  :  लकी तो मे हूँ जो वो मेरी जिदंगी मे है
आयशा ने  हम्म कहा और दोनों गाडी़ मे बैठ गए संजय आगे बैठ गया ड्राइवर के साथ
आयशा ने अपना फोन निकाला टाइम देखने के लिए
उसने प्रिया का मैसेज देखा तो हैरान हो गयी :  ये सब !
हर हर महादेव 

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