तेरे प्यार की कसम - 12 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 12

तेरे प्यार की कसम - 12



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tere pyar ki ksam on pratilipi 




वो तस्वीरें आयशा और रघु थी पहली तस्वीर मे आयशा रघु के ऊपर गिरी हुई थी दुसरी फोटो मैं आयशा और रघु ने एक दुसरे का हाथ पकडा़  हुआ था 
एक फोटो मे दोनो एक दुसरे के बगल में खडे़ थे रघु आयशा को देख रहा था और आयशा कहीं और
प्रिया ने उसे एक और मैजेस  किया हुआ था : अच्छे लग रहे हो दोनो
आयशा ने प्रिया को मैजेस  किया : तू पागल है क्या ये फोटो क्यों  खीची
अच्छी  लग रही है यार प्रिया ने मैजेस भेजा
पागल जैसी बात मत कर डिलीट मार  आयशा ने कहा
यार कितनी अच्छी फोटो आयी है प्रिया ने मुस्कराता हुआ इमोजी भेजकर कहा
अगर रघु ने देखली तो क्या सोचेगा आयशा ने लिखकर भेजा
कुछ नहीं सोचेगा यार फोटो  है चिल मार
आयशा ने 😠😠😠गुस्से वाला इमोजी भेजा)
प्रिया ने  😂😂😂 (हंँसने वाला इमोजी भेजा)
मेरी माँ डिलीट कर दे प्लीज वरना तेरा मू तोड़  दूंगी
प्रिया : अच्छा  कैसे तोडे़गी
आयशा ने मन मे बोलते हुए टाइप किया चुप रहे और डिलीट कर रघु ने देखा ना तो क्या सोचेगा मेरे बारे में
प्रिया ने लिखा :  तुम दोनो एक साथ बहुत क्यूट लग रहे हो नजर न लगे और शादी वाली फोटो मैं तो ऐसा लग रहा है जैसे तुम दो दुल्हा दुल्हन हो
अपनी बकवास बंद कर आयशा उससे परेशान हो गई थी
रघु ने आयशा को देखा तो वो कुछ परेशान सी लग रही थी
रघु ने मन मे कहा :  इसे क्या हुआ इतनी परेशान क्यों लग रही है
ड्राइवर ने गाड़ी मोडी़ मोड़ने के कारण  आयशा के हाथ से फोन छुट गया आयशा हड़बडा़ते हुए अपना फोन ढूंढ़ने लगी
क्या हुआ आयशा रघु  ने उनसे देखकर पूछा
आयशा नीचे ढूंढते हुए बोली : मेरा फोन गिर गया
चिंता मत करो यही कहीं होगा मिल जाएगा मैं ढूंढता हूं (रघु  नीचे हुआ तबतक आयशा चिल्लाकर बोली : नहीं (रघु उसे देखने लगा) मेरा मतलब है मैं देख लूँगी
मैं देख लेता हूँ रघु  भी ढूंढ़ने लगा
आयशा मन मे बोली : भगवान प्लीज मुझे मिलाना अगर इसे मिल गया ना तो मैं गयी काम से
रघु आयशा को नोटिस कर रहा था और वो मन मे बुदबुदाया : इसे क्या हुआ है इतनी टेंशन मे लग रही है कुछ तो गड़बड़  है
कुछ देर बाद आयशा रघु से हिचकते हुए बोली  : क्या हुआ मिला
रघु ने नहीं कहा तो आयशा के मू से  थैंक गॉड निकल गया
रघु ने आयशा को देखकर पूछा : कुछ कहा तुमने
नहीं नहीं आयशा ने कहा : जोर से बोल दिया अच्छा  हुआ सुना नहीं आयशा मन मे बुदबुदाई
रघु मन मे बोला : कहा गया फोन (उसने आयशा को देखा जो परेशन थी) : ये फोन के लिए इतना परेशान क्यों हो रही  है कार मैं ही तो गिरा है मिल जाएगा या कोई और बात है पर क्या बात है
रघु आयशा को दिलासा देते हुए बोला :  मिल जाएगा आयशा जस्ट रिलैक्स
आयशा ने मरेमन से  हा हा कहा और मन मे  बोली : मिल तो जाएगा पर तुम्हें मिल गया न तो मैं गयी काम से
रघु को फोन मिला उसमे लॉक नहीं था और व्हाट्स एप खुला था जिस वजह से रघु ने सारी चैटिंग पढ़ ली और साथ में फोटो भी देख ली
रघु आयशा को देखकर  मन मे बोला : ओह अच्छा इसलिय इतनी टैंशन  मैं थी ये
आयशा ने रघु को देखते हुए पाया तो हिचकते हुए पूछा: क्या हुआ मिल गया क्या
नहीं, नहीं मिला पर तुम इतनी टैंशन मे क्यों  हो फोन यही गिरा है मिल जाएगा आयशा ने  हिचककर : हा हा मिल जाएगा कहा
रघु ने फोन साइड किया और अपना फोन निकाला उसने दोनो फोन का ब्लूटूथ ऑन किया और फोटोज ले ली सारी और नोटिफिकेशन हटा दिए
फिर आयशा से बोला :  ये लो मिल गया फोन
आयशा ने रघु के हाथ से फोन छिन लिया : थैंक यू थैंक यू (वो खिड़की के बाहर देखने लगी)
आयशा मन मे सोचने लगी : कहीं इसने फोटो तो नहीं देख ली पूछकर देखु
आयशा ने बड़ी हिम्मत करके रघु से पूछा : सुनो तुमने कुछ देखा तो नहीं
रघु आयशा को देखकर कहा  :क्या देखा ?
कुछ भी नहीं देखा तुमने मेरे फोन मे
नही क्यों  कुछ देखना था क्या रघु  ने अंजान बनकर कहा
नहीं कुछ कुछ नहीं देखना था आयशा ये बोलकर  खिड़की के बाहर देखने लगी बच गयी मै
रघु अपने फोन मे वो फोटो देखने लगा  : कितनी अच्छी अच्छी  फोटो खीची है मेरी सालियो ने  काम की निकली
रघु कभी उन फोटो को तो कभी खिड़की के बहार देखे जा रहा था आयशा भी बहार ही देख रही थी थोड़ी देर बाद आयशा को कॉल आई वो रश्मि की थी : कहा पाँहुच गए हो बेटा
बस आ गए माँ पाँहुच गए हैं आयशा ने कहा और रश्मि ने ठीक है बोलके फोन कट कर दिया थोड़ी देर बाद वो सब आयशा के घर के बाहर रूके सब गाड़ी से उतरे  रश्मि भी आ गई बाहर घर के नौकर सामान रख रहे थे
आयशा रश्मि से मिली संजय और रघु भी मिले वहा नौकर ने कहा : साहब ये कंबल भी निकालना है
हा अंदर रखवा दो रघु  ने कहा
नौकर कंबल पकड़के जाने लगा
रश्मि ने उस कंबल को देखा तो आयशा से बोली : ये दहेज़ किसने दिया
आयशा ने कन्फ्यूज्ड  होकर  दहेज़ कहा
हा लग तो ऐसे ही रहा है ये कंभल तेरी सासुमाता ने दिया है लड़की दहेज ले जाती है पर इस बार उल्टा हो गया लड़की दहेज ला रही है रश्मि मुस्करा दी
क्या बोल रही हो माँ कोई दहेज नहीं है ये रघु लाया है मेरे लिए मतलब  हमारे लिए रास्ते मे ठंड  लग रही थी आयशा ने चिड़कर कहा
मतलब दुल्हा लाया है दहेज
आयशा ने रश्मि को घूरके देखा : क्या माँ
अच्छा अच्छा मजाक कर रही हूँ आओ अंदर रश्मि ने कहा
आयशा रघु और संजय से बोली :  चलो तुम दोनो भी
संजय ने मना करते हुए कहा :  नहीं यार कल मिलेंगे अभी मुझे काम है
तू रहने दे काम वाम चल चुपचाप और खाना खाते है भूख लगी है आयशा ने संजय से कहा फिर संजय ने कहा : नहीं यार कल पक्का
आयशा ने बुरा सा मू बनाते हुए कहा :  क्या यार दोस्त के लिए टाइम नही है
कल पक्का संजय ने उसे दिलासा देकर कहा
आयशा रघु कि तरफ देखकर बडी़ उम्मीद से बोली :  तुम तो रूक जाओ
मुझे भी काम है रघु  ने आसहजता से कहा
क्या यार मैं भी फ्री नहीं हूं पर आजाओ न एक साथ मजे करेगे
रश्मि आयशा  को तोककर बोली :  वो अपने घर नहीं जाएंगे क्या
आयशा रश्मि कि तरफ देखकर बोली  : माँ क्या ये इनका घर नहीं है फिर उसने रघु और संजय से कहा  : है ना ये तुम्हारा भी घर
संजय ने अजीब तरीके से कहा :  हा हा ये घर मेरा ही है
रघु ने संजय को अजीब तरीके से देखा
आयशा ने रघु कि तरफ देखा और फिर बोली : क्यों रघु तुम्हारा नहीं है
रघु का ध्यान गया उस तराफ उसने  आयशा को देखकर कहा  : हा पर अभी इम्पोर्टेन्ट काम  है आयशा
संजय रघु  कि बात खत्म होने के बाद बोला : हा फिर माँ का भी फोन आया था
ठीक है पर कल मिलना दोनो आयशा ने मरेमन से कहा
दोनो ने  एक साथ  हम्म कहा रश्मि  ने भी दोनो से  कहा : आना बच्चों  कल आयशा और रश्मि अंदर चले गए
रघु ने अपना सामान निकाला
संजय रघु से बोला  : आओ तुम्हें छोड़ देता हूँ
रघु सामान निकालते हुए बोला : कोई जरूरत नहीं है मैं चला जाऊंगा
रघु ने अपना सामान निकाला और दुसरी टैक्सी मैं बैठकर निकल गया
संजय रघु की टैक्सी को देखकर बुदबुदाया  : बहुत अजीब है ये कब क्या करता है बोलता है कुछ पता नहीं
संजय कार मैं बैठ गया और ड्राइवर से कहा :  चल भाई
ड्राइवर ने  जी साहब कहा और  गाड़ी स्टार्ट की और निकल गया रास्ते मे ड्राइवर ने कहा वैसे साहब वो साहब कितने अच्छे हैं
संजय ने हैरानी से पूछा :  कौनसे साहब
वोई जो पीछे बैठे थे जो कंबल खरीद के लाए थे
संजय समझ गया कि वो रघु  कि बात कर रहा है अच्छा क्यों  संजय ने पूछा
देखो ना साहब वो उन मैमसहाब  से प्यार करते हैं इसलिय तो वो उनके लिए कंबल खरीदके लाए उनकी आँखों  मे दिखता है मैमसाहब के लिए प्यार ड्राइवर कि बाते सुनकर संजय को बहुत तेज गुस्सा आया : चुप चाप रहो और गाड़ी चलाओ
ड्राइवर ने  जी साहब कहा और चलाने लगा
संजय ने मुठ्ठी भींच  ली गुस्से मे : प्यार करता है माय फूट संजय गुस्से मे दांत पीसते हुए बोला
वहा रघु घर पंहुचा गार्डन  मे वीर मिला :  भाई आप आ गए  हा छोटे आ ही गया हूँ रघु  ने कहा और दोनो  ने एक दुसरे को  गले लगया
ऑफिस का काम कैसा चल रहा है रघु  ने पूछा
बडी़या  वीर ने कहा फिर रघु  बोला :  तू यहा  क्या कर रहा है ऑफिस नहीं गया
भाई एक फाइल थी वो लेने आया था बस जा  रहा हूँ
अच्छा यही रूक मैं भी आ रहा हूँ
भाई आज आप अराम कर लो वीर ने उसे रोकते हुए कहा
रघु घर के अंदर जाते हुए बोला  : आराम नहीं करना एक इम्पोर्टेन्ट काम है
वीर भी अंदर आके सोफे मे बैठ गया वहा से दादी और रंजना  निकल के आए
तू गया नहीं नालायक दादी ने कहा
वीर कुछ बोलने को हुआ तबतक रंजना बोली : सोफे मे क्यों बैठा है फाइल नहीं मिली
मिल गई है माँ...
फिर क्यों बैठा है रंजना ने कहा
वीर ने झल्लाकर कहा अरे मुझे बोलने तो दो वीर कुछ बोलने  को हुआ तबतक रघु आ गया रघु रंजना  और दादी के पास आया
दादी : आ गया मेरा नाती
रंजना बोली :  बेटा कुछ खाया तूने भूक लगी होगी
नहीं माँ भूख नहीं लगी खाया है रघु  ने जवाब दिया
: तू कही जा रहा  है रंजना ने सवाल किया
ऑफिस रघु  ने कहा तो दादी बोली : अभी तो आया है आराम कर ले कल चले जाना
आराम करने का वक्त नहीं है फिर  रघु  वीर से बोला : चल
वीर उठा और जाने लगा
रंजना  रघु से बोली : मत जा बेटा वीर है ना वो संभाल लेगा
माँ मैं जल्दी आ जाउंगा ज्यादा काम नहीं है शाम से पहले आ जाऊंगा
ठीक है दोनो संभल के जाना
रघु और वीर दोनो ऑफिस के लिए निकल गए थोड़ी देर मैं गाड़ी ऑफिस के सामने रुकी और दोनो अंदर गए वहा पर अभिनव और राजेश थे
राजेश रघु को देखकर बोला  : तुम आ गए हा पापा रघु  ने कहा राजेश ने कहा : सफर कैसा रहा रघु ने अच्छा था मे जवाब दिया
राजेश ने  वीर से  पूछा : फाइल मिली
वीर ने हा कहा और फाइल राजेश को देदी
रघु अभिनव से मिला
अभिनव ने उससे पूछा :  कैसा रहा हमारी भाभी के साथ सफर
हसीन था अभी भी एक ख्वाब जैसा लग रहा है
अभिनव ने  अच्छा  कहा वीर उनके बीच मे बोला : क्या हुआ बताओ ना रघु ने उन्हे सारी बात बता दी मोहित की बात छोड़कर
वीर ने खुशी से कहा :  वहा  भाई मजे आ गए
हम्म चल अब मुझे मेरा केबिन दिखा वीर ने रघु को उसका केबिन दिखाया : इसमे  कुछ चेंज करना है
क्या भाई रघु ने उसे सब  समझा  दिया
ये सब किस लिए भाई वीर ने पूछा तेरी भाभी के लिए
भाभी  वीर ने कहा
हा वो भी तो आएगी ऑफिस मेरे साथ
वीर को आयशा का ध्यान आया तो वो बोला : अरे हा अच्छा अच्छा
हा चल बाकी का काम देखते हैं थोड़ी देर बाद रघु घर के लिए निकल गया
रघु घर पहुँचा  और  अपने कमरे मैं जाकर सो गया
शाम के छह बजे रघु की नींद खुली
वो फ्रेश होकर  बाहर आया बाहर रंजना  कॉफ़ी लेके आई थी : ले बेटा कॉफ़ी
माँ कॉफ़ी नहीं चाय है रघु  ने पूछा
हा है न बेटा रंजना ने कहा
चाय दोदो फिर रघु  ने थोड़ा सहमकर कहा
तू कबसे चाय पीने लगा रंजना ने चौककर कहा
रघु मन मे बोला  : जब से आपकी बहू मिली
रंजना  बहार जाते हुए बोली  : अभी भिजवाती हूं
थोड़ी देर बाद रघु ने अपना फोन उठाया
काका चाय लेके भी आ गए रघु चाय और फोन के साथ बालकनी मैं आ गया
रघु ने आयशा का नंबर डायल किया दो तीन रिंग जाने के बाद आयशा ने कॉल उठाई : हाय
हैलो ठीक हो आराम किया तुमने
: हा आराम ही आराम जबसे आई हूँ सोई हु तुम बताओ
रघु सिप लेते हुए बोला : मै ऑफिस गया फिर आके सो गया
: क्या यार मतलब मैं ही निकंबी हूं संजय और तुमने काम किया और मैं जैसी  आई खाना खाके सो गई मैं तो बहुत थक गई थी
रघु चाय का सिप लेते हुए बोला : थक तो मैं भी गया था
आयशा ने उससे पूछा  : वैसे तुम पी क्या रहे हो
रघु ने  चाय मे जवाब दिया तो
आयशा ने नौटंकी करते हुए कहा : मुझे नहीं पिलाई बुलाया भी नहीं मुझे अकेले अकेले
आ जाओ पीने रघु  ने कहा तो आयशा ने फौरन कहा  : तुम आजाओ
मैं तो अभी उड़ के आ जाउ अगर तुम कहो आयशा हसँ  दी रघु भी मुस्कराया :  कल पीएंगे चाय वही जहां हम मिले थे उसी कैफे मै   हा पक्का मिलेंगे आयशा ने कहा फिर दोनो अंजली  की शादी की बात करने लगे
तुम्हें शादी मैं मजे तो आए बोर तो नहीं हुए आयशा ने पूछा नहीं बहुत मजे आए नए दोस्त बन गए सबसे जान पहचान हो गई
आयशा ने उससे खाने के बारे मे पूछा : वहा का खाना टेस्टी  था ना
हा  बहुत अच्छा खाना था रघु  ने कहा
ऐसे ही उनकी बात चलती रही
थोड़ी देर बाद आयशा ने कहा : चलो बाय मुझे काम है
रघु ने हा ठीक है कहा और फोन रख दिया
रात के आठ बज गए थे आयशा और बाकी सब खाना खाने के लिए बैठे थे
राज ने आयशा को देखकर पूछा :  कैसी रही शादी
बडिया थी पापा
मजे आए होंगे तुमने अंजली  को बधाई कह दिया था मेरी और रश्मि  की तरफ से
आहना : हा पापा बोल दिया था वो आप से थोड़ी नाराज तो थी पर मैने मना  लिया था उन्हे
राज रश्मि से बोले  : क्यों  ना कल हम राजेश का वहा चले हमने उसका घर भी नहीं देखा
रश्मि ने हामी भरकर कहा :  क्यों नहीं चलो मैं अपनी दोस्त से भी मिल लुंगी तुम क्या कहती हो लड़कीयो
आहना मन मे सोचने लगी :  उस छिपकले के वहा जाना पड़ेगा क्या
जैसा आप लोग ठीक समझो आयशा ने कहा
आहना ने  मरेमन से से हम्म कहा
ठीक है फिर कल नो बजे निकलेंगे राज ने कहा
आयशा मन मे बोली  : हम्म रघु को कोट भी दे दूंगी देना ही भूल गई
सबने खाना खत्म किया आयशा कमरे मैं आई उसने रघु को मैसेज  करा  : कल हम नहीं मिल पायेंगे सॉरी और सो गई
वहा रघु का परिवार भी खाना खा रहा था  कैसा रहा टूर
अच्छा था पापा बहुत मजे आए रघु  ने राजेश कि तरफ देखकर कहा
वीर रघु के कान मे बोला :  मजे तो आए ही होंगे भाभी जो थी
रघु ने उसके कान के पास कहा : धीरे बोल ले भाई
वक्या भाई अपने ही पापा है उनसे क्या शर्माना और फिर प्यार किया तो डरना क्या
तू चुप रहे और खाना खा रघु  ने झल्लाकर कहा
वीर चुपचाप खाने लगा सबने खाना खतम किया और अपने कमरे मैं चले गए
रघु ने फोन पकडा़  और बालकनी मैं आ गया उसने
आयशा का मैसेज खोला तो परेशान  हो गया : आयशा को क्या हो गया आचानक से  प्लान कैंसिल कर दिया
उसने आयशा को  मैसेज  किया : क्या हुआ क्यों नहीं मिलना चाहती कुछ हुआ है क्या
वो वहा चक्कर लगाने लगा थोड़ी देर बाद उसने फोन देखा तो मैसेज अनसीन था : इसे क्या हो गया आचानक एक काम करता हूं कॉल करता हूं पर आयशा ने कॉल भी नहीं उठाई
उसने दोबारा मैसेज किया : बोलो आयशा क्यों नहीं मिलना चाहती
पर उसे  कोई रेस्पॉन्ड नहीं आया थोड़ी देर बाद उसने
अपने दिमांग पर जोर दिया उसे याद आया की आयशा को लगता है कि उसकी कोई गर्ल फ्रेंड है
रघु अपना सर पीट कर बोला  : ओह! शिट मै कैसे भूल गया (वो वहा से तेजी से दोड़कर वीर के कमरे मैं गया)
वहा वीर सो गया था रघु ने वीर की चादर खीची और एक लाथ मार दी उसके बम मे
आ... किसने  मारा (वीर ने देखा की रघु खड़ा है)
वीर बम को सहलाते हुए बोला  : क्या भाई  कौन मारता है अपने छोटे से प्यारे से भाई को
रघु उसके पेट मैं घूसा मारते हुए कहा  : आज तो मैं तुझे छोडूंगा नहीं जान से मार दूंगा
वीर बेड  के ऊपर खड़ा हुआ और भागने लगा : क्या भाई क्यों  मार रहे हो मैंने क्या कर दिया
रघु उसे पकड़ने की कोशिश करते हुए झल्लाकर बोला  : तू आ तो सही बचेगा नहीं
वीर भागते हुए : क्या है यार कभी चैन से सोने नहीं देते जब देखो नींद मे ही परेशान करेंगे
पहले तू आ तो सही पकड़ मैं तब बताता हूं
वीर सोफ़े मैं कुद गया और बोला  : क्या हुआ बता तो दो
रघु सोफे मे गया : अब तेरे पास तेरे भाई के लिए ही टाइम  नहीं है अभी बताता हूं बम मैं मार मार के सुजा दूंगा
वीर वहा से बेड पर खुद गया और चिड़कर बोला  : यार पहले वो छिपकली कम थी जो आप भी मारने लगे
मैंने तुझे मैसेज किया था उसका जवाब देना जरूरी नहीं समझा तूने  रघु  ने उसे घूरकर कहा
अरे भाई फोन किया था मैंने आपने उठाया ही नहीं
रघु ने वीर को पकड़  लिया रघु ने वीर के कान पकडे़ : दोबारा  नहीं कर सकता था फोन
वीर दर्द मे बोला  : आ...... भाई दर्द हो रहा है छोडो़
मै क्यों छोडू
भाई बात क्या है बताओ रघु ने वीर के कान छोड़ दिए और सोफे मे बैठ गया : एक बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई है यार
क्या हुआ बताओ रघु उदासी से बोला  : तेरी भाभी...
वीर बीच मे बोला : क्या हुआ भाभी को
भाभी को कुछ नहीं हुआ यार फिर आप उदास क्यों हो
वो ना तेरी भाभी को लगता है की..
वीर ध्यान से सुन रहा था  : की...
की मेरी गर्लफ्रेंड है रघु  ने उसका  सेंटेंस पूरा किया
वीर ये सुनकर  चौक गया : क्या ! किसने कहा उनसे की आपकी गर्लफ्रेंड है बताओ मुझे
रघु उदासी से बोला  मैने ही यार वीर  हैरानी से मू से निकल गया : क्या ! क्यों ?
रघु ने उसे सारी बात बता  दी  ओह शिट भाई ये क्या गड़बड़  कर दी रघु ने कुछ नहीं कहा
अब क्या करोगे कुछ बोलो
रघु ने झल्लाकर कहा : क्या बोलू यार इससे बड़ी मुशीबत हो गई है
वीर ने चौककर कहा : और क्या हो गया
रघु ज़मीन को देखकर बोला  : कल हम मिलने वाले थे उसका मैसेज  आया है की कल हम नहीं मिल सकते
क्यों  कोई वजह बतायी वीर ने पूछा
रघु उदासी से ना मे सर हिला दिया
: आपने फोन किया मैसेज किया
हा फोन भी किया और मैसेज भी लेकिन कोई जवाब नहीं
लेकिन हुआ क्या होगा अचानक प्लान कैंसिल क्यों  किया वीर से सोचते हुए कहा
पता नहीं यार मुझे रोना आ रहा है मेरी लव स्टोरी   शुरू होने से पहले ही फ्लॉप हो गई रघु  ने परेशान होकर कहा
भाई ऐसा नहीं है कोई और बात है
रघु ने उसे देखा और कहा : अच्छा  तुझे कैसे पता
उन्हे नाराज होना था तो पहले ही हो जाती पर नहीं हुई अब और कोई बात होगी वीर ने कहा
रघु ने वीर को देखकर खुशी से कहा :  सही कह रहा है तू फिर उदासी से बोला : पर उसने फोन क्यों नहीं उठाया और ऐसा मैसेज क्यों भेजा
भाई इतनी रात हो गई है वो सो  गई होगी यार कल पूछ लेना
हा सही कह रहा है रघु  ने कहा और
वीर ने राहत कि सांस लेकर कहा : अब जाओ भाई सोने दो निठल्ले  सोया रहे तू रघु  वहा से  ये बोलकर चला गया
क्या भाई वीर ने मू बनाकर कहा और वो भी बेड मैं जाकर सो गया रघु अपने कमरे मे  आया और बेड मैं लेट गया उसने फोन उठाया और आयशा का मैसेज देखने लगा
रघु मन मे सोचने लागा  : क्या हुआ आयशा तुम मुझसे नाराज हो क्या
रघु की आंखो में नींद ही नहीं थी वो उस मैसेज का मतलब समजने की कोशिश कर रहा था और वहा आयशा घोडे़ बेचकर सो रही थी आयशा के घर में रश्मि और राज का कमरा राज बिस्टर मे मैगजीन पढ़ रहा था
रश्मि कमरे  मे आई और राज से बोली : रंजना  का बेटा है ना रघु वो आयशा के लिए कैसा है
अच्छा है राज ने कहा
बात करू कल रंजना  से रश्मि ने कहा
नहीं भाग्यवान अभी नहीं अभी आयशा को थोड़ा टाइम दो और हमे पता भी नहीं है की वो उसे पसंद करती भी है  या नहीं
और कितना समय एक साल हो तो गया
अब भूल जाना चाहिए
भाग्यवान उसे समय दो ऐसी शादी शादी करके उसके पीछे मत पड़ो वो स्ट्रॉन्ग है और बात रही रघु की तो हा वो बहुत अच्छा लड़का है शायद वही हो जो हमारी बेटी से शादी करे पर उससे पहले आयशा को वक्त दो
हा आप ठीक कह रहे हैं सो जाओ  काफ़ी देर  हो गयी है फिर कल जाना भी है राज ने  मैगजीन साइड मे रखते हुए  हा कहा और लाइट ऑफ की और दोनो सो गए
बारा बज गए थे रघु को नींद ही नहीं आ रही थी वो उठा और बालकनी मैं चला गया वहा वो सोफे मैं बैठकर उस चांद को देखने लगा उसके हाथ मे फोन था उसने फोन से गाने चला दिए और आयशा और अपनी तस्वीरें निकाली उन तस्वीरों को देखने लगा वह गाना बजा
ओह ... हाय ..
दो नैन सितारे हैं चांद सा मुखड़ा क्या कहना उसका.. आफरीन! दावत में जैसे हो शाही टुकड़ा उसके जैसी ना कोई नज़रें शाही जोड़ा पहन के आई जो बन थन के वही तो मेरी स्वीट हार्ट है शर्माए सी बगल में जो बैठी है दुल्हन के वही तो मेरी स्वीट हार्ट है  शर्माए सी बगल में जो बैठी है दुल्हन के वही तो मेरी स्वीट हार्ट
वो आयशा के साथ बिताए हुए पल याद करने लगा जब आयशा उसकी बाहो मे गिरी थी और जब वो उसका बटन लगा रही थी वो दिन उसके लिए सपने से कम नहीं थे
वहा  गाना आगे बजा
साडे़ एक बज गए थे रघु सोफे मे ही सो चूका था
सुबह के आठ बजे आयशा अंगदाई लेते हुए उठी और फ्रेश होने चली गई थोड़ी देर मे वो बहार निकली चाय के साथ बालकनी मे चली गई
लगबाग नो बज गए थे आयशा तैयार हो चुकी थी उसने फोन उठाया उसमे  रघु की कॉल और मैसेज आए थे आयशा ने रघु के मैसेज देखे : इतने सारे मैसेज और कॉल ऐसा क्या हुआ (फिर उसे अपने मैसेज देखा) ओह मैंने मिलने से मना कर दिया इसलिये आए होंगे मैं अभी कॉल करती हूँ  उसने डायल किया फिर उसने सोचा रहने देती हूँ जा तो रही हूं उसने  फोन कट कर दिया
वो नीचे चली गई वहा सब थे
आ गए चलो सब वरना  देर हो जाएगी
आयशा ने  हा पापा कहा और सब गाडी़ मे  बैठे गाडी़ चलने वाली थी
आयशा को याद आया उसने  एक मिनट कहा और  गाड़ी से उतरी और कमरे मे चली गई उसने  सूटकेस से रघु का कोट निकाला और एक पैकेट मैं रख लिया और बहार गाडी़  मैं बैठ गयी गाडी़  चलती गई रास्ते में आयशा को संजय का कॉल आया :  हा संजय
तू कही  बिजी है संजय ने पूछा
हा हम पापा के दोस्त के वहा जा रहे हैं आयशा ने जवाब दिया
संजय ने अच्छा कहा  फिर आयशा ने पूछा :  क्या हुआ कुछ काम था
: हा काम तो था पर कोई नहीं जब तू फ्री होगी तब कर लेना
: मैं अभी इंस्टिट्यूट मैं जाऊंगी आयशा ने कहा
कितने देर मे  संजय ने पूछा
वो  तो पता नहीं मैं फोन कर दूंगी आयशा ने कहा संजय ने ठीक है कहकर फोन कट कर दिया
हर हर महादेव 

hello reader I hope aapko story pasand aa rhi hongi agar pasand aa rhi hai tou ek favour kr dijiye iss story ke part yaha par tabh post honge jab Pratilipi par poori story ho jaayngi wo kya hai na ismai bhi likhne mai time lgta hai aur kabhi kabar bhool jaati hoon so plz follow me on pratilipi iss story ke aage ke parts mill jaaynge waha par so go now readers jisne bhi yahapar follows kiya hai wahapar bhi kr dijiye aur jb story pratilipi par complete hogi tabhi aage parts continue krungi ismai I am waiting readers go now and follow me on pratilipi  I hope aapko psand aayi hongi abhi tou kaafi raaj hai khulne baaki hai 

tere pyar ki ksam on pratilipi