Kismat se mila rista - 7 in Hindi Love Stories by सलोनी अग्रवाल books and stories PDF | किस्मत से मिला रिश्ता भाग - 7

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किस्मत से मिला रिश्ता भाग - 7

अब आगे,

अभय की बात सुन, तनवी अभय पर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहती हैं, "क्या भैया, पहले देख तो लीजिए हम कहा है पर नही आप को तो बस गुस्सा करना है...!"

तनवी की बात सुन, अभय तनवी को मानते हुए कहता है, "अच्छा बाबा, ठीक है हो गई मुझसे गलती, अब अपने भैया को माफ नही करोगी क्या..?"

अभय की बात सुन, तनवी अभय के गले से लग जाती है और उस से कहती हैं, "ठीक है, कर दिया माफ पर आप बात बात पर गुस्सा नही करोगे....!"

तनवी की बात सुन, अभय बस मुस्करा देता है और फिर क्या तनवी, अभय को छोड़ जल्दी से अपनी साइड का गाड़ी का दरवाजा खोल बाहर निकल कर विला में जल्दी जल्दी जाने लगती हैं जेसे उस की कोई ट्रेन छूटने वाली हो....!

तनवी के ऐसे जाने से, अभय तनवी को देख के कहता है, "रुक जाओ बच्चा, मै भी तो तुम्हारे पीछे पीछे आ रहा हु ना...!"

अभय को राजपुत विला में आते देख, वहा खड़े सभी नौकर अभय को ग्रीट करने लगते है साथ मे अभय के साथ साथ आकाश भी उस के पीछे आ जाता हैं।

तनवी इतनी खुशी के साथ राजपुत विला की हर एक चीज को ध्यान से देखने लगती है कि तनवी ये भूल ही जाती हैं कि उस के भैया उस को रुकने के लिए कह रहे थे।

राजपुत विला के सारे नौकर, तनवी को बड़ी ही हैरानी के साथ देख रहे होते है क्योंकि नौकरों ने तनवी ऐसा बर्ताव आज पहली बार देख रहे होते हैं।

जब तनवी को लगता हैं कि सारे नौकर अपने काम छोड़ कर बस उस को ही देखे जा रहे है तो तनवी, अभय की तरफ देखते हुए उस से बड़ी मासूमियत के साथ पूछती हैं, "भैया, मेरे चेहरे पर कुछ लगा हुआ है क्या ?"

तनवी की बात सुन, अभय उस से पूछता है, "नही तो बच्चा, क्यू क्या हुआ, तुम ऐसा क्यू पूछ रही हो...?"

अभय की बात सुन, तनवी उदास होते हुए कहती है, "वो क्या है ना यह सब लोग अपना काम छोड़ कर मुझे ऐसे देख रहे हैं जैसे मैं कोई जोकर हू..!"

तनवी की बात सुन, अभय को फिर से गुस्सा आ जाता है क्योंकि अभय एक शॉर्ट टेंपर्ड इन्सान है जिसे बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता हैं और फिर वो उन सभी नौकरों से कहता है, "तुम लोगो के पास और कोई काम नही बचा है क्या...?"

अभय की बात सुन और उस का गुस्सा देख, सब एक साथ कहते है, "सॉरी सर..!" और वहा खड़े सब नौकर अचानक से तीतर बितर हो जाते है और सभी अपने अपने कामों में लग जाते है।

तनवी खुशी से अभय को बताती है, "भैया आप का घर तो बहुत बड़ा और बहुत ही ज्यादा सुंदर है, बिलकुल किसी महल की तरह...!"

तनवी की बात सुन, अभय उस से प्यार से कहता है, "ये घर सिर्फ मेरा नही है बल्कि हम दोनो का है...!"

अभय, तनवी से कहता है, "बच्चा अब तुम अपने कमरे में जाकर फ्रेश हो जाओ और हां आराम भी कर लो, बहुत थक गई होगी ना तुम...!"

अभय आगे कहता है, "और मै तब तक अपना काम निपटा लेता हूं...!"

अभय की बात सुन, तनवी उस से पूछती हैं, " भैया क्या आप अब ऑफिस जा रहे हो...?" और अब तक तनवी के चेहरे पर जो खुशी थी वो भी गायब हो चुकी थी।

अभय, तनवी के चेहरे के भाव को समझते हुए उस से कहता है, "नही, बच्चा अभी तो मै स्टडी रूम में काम करने के लिए जा रहा हूं...!"

अभय की बात सुन, तनवी उस से पूछती हैं, "भैया, ये स्टडी रूम क्या होता है..?"

तनवी की ऐसी बचकानी बात सुन, राजपूत विला में खड़े सभी नोकर अपने मुंह पर हाथ रख के हसने लगते है, तो तनवी सब को अपने ऊपर ऐसे हंसता हुआ देख, अभय से पूछती हैं, "भैया, क्या मैने आप से कुछ गलत पूछ लिया...?"

अभय को अब उन नोकरो के ऊपर गुस्सा आ रहा होता है क्योंकि तनवी की याददाश जाने के बाद उस ने अपनी नासमझी में ये सवाल उस से करा होता है और ये सब लोग तनवी के साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं।

अब अभय अपनी आवाज बुलंद कर राजपूत विला में से ही वही खड़े होकर चिल्लाता है, " राज...! राज...!"

अभय के ऐसे चिल्लाने से राज भागता हुआ राजपूत विला के हॉल में पहुंच जाता है और अभय से पूछता है, "जी बॉस, आप ने मुझे बुलाया..?"

राज की बात सुन, अभय उस से गुस्से से कहता है, "इन नौकरों को यहां से लेकर जाओ और इन लोगो की ऐसी मेहमान नवाजी करना कि ये पूरी जिंदगी भूल न पाए कि ये किस की बहन को देख हस रहे थे...!"

अभय की बात सुन, राजपूत विला के हॉल में खड़े वो पांच नोकर जो तनवी की बात पर हस रहे थे वो अभय के सामने गिड़गिड़ा रहे होते है और साथ में उस से कहते हैं, "सर, हमे माफ कर दीजिए, आज के बाद ऐसी गलती कभी भी नही करेंगे...!"

अभय उन पांचों नौकरों की बात पर कोई ध्यान नही देता है और राज, अभय के कहे अनुसार उन सब को अपने कुछ और बॉडीगार्ड्स की मदद से राजपूत विला के हॉल से बाहर निकलने लगता है।

जब राज उन पांच नौकरों को लेकर जा रहा होता है तो तनवी उस को रोकते हुए पूछती है, "राज भैया, आप इन सब को कहा लेकर जा रहे हो..?"

तनवी के मुंह से राज के लिए भैया शब्द सुन, वो पांच नोकर भी हैरान रह जाते हैं और एक दूसरे का मुंह देख रहे होते है साथ में तनवी की बात सुन, राज उस से झूठ बोलते हुए कहता है, "वो, इन लोगो को कुछ दिन छुट्टी चाहिए थी तो बस उस की कुछ फॉर्मेलिटी पूरी करने के लिए लेकर जा रहे हैं...!"

राज की बात सुन, तनवी कुछ बोलने को होती हैं कि अभय उस से कहता है, "तुम्हे लाइब्रेरी का मतलब जानना था न, तो मै तुम्हे बताता हूं...!"

अभय की बात सुन, तनवी राज की बात को भूल, अभय से कहती है, "हां, बताओ ना भैया...!"

तनवी की बात सुन, अभय उस से कहता है, " बच्चा, लाइब्रेरी और स्टडी रूम में थोड़ा सा अंतर होता है...!"


To be Continued....❤️✍️

इस चैप्टर पर अपने रिव्यू दे और कमेंट करके बताए कि आप को चैप्टर कैसा लगा और आगे जानने के लिए पड़ते रहे मेरी नोवेल और अगला एपिसोड सिर्फ मातृभारती पर।