: : प्रकरण 54 : :
रणधीर कपूर की दो बेटियां थी. फिर भी उस की बीवी भाग गई थी.
करिश्मा कपूर और करीना कपूर. दोनों ने फिल्मो में काम किया था. उन के साथ कपूर परिवार में बेटियां भी फिल्मों में काम करने लगी थी.
दोनों ने अपनी कला का करतब दिखाया था. अपना नाम बनाया था.
दोनों की शादी हो गई थी.
आगे जाकर करिश्मा की शादी टूट गई थी
करीना ने नवाब ओफ पटौड़ी और शर्मीला टैगोर के शहजादे सैफ अली खान से की थी, जिस की बीवी अमृता सिंह थी. उन का ब्रेक अप हो गया था.
ऋषि कपूर का बेटा भी रणबीर कपूर भी फ़िल्म में आ गया था..
एक हीं घर में ना जाने कितने सितारे चमक रहे थे..
लेकिन अफ़सोस की बात हैं. फ़िल्मी सितारों के लड़के लड़की में बहुत कुछ लोग थे. जिन्होंने अपने मा बाप का नाम उजागर किया था.
उस में सुनील दत्त - नरगिस का बेटा संजय दत्त, धर्मेंद्र के दो बेटे सनी और बोबी देओल, शोभना समर्थ की दो बेटियां नूतन और तनूजा, रमेश देव और सीमा का बेटा,.. इत्यादि.. इत्यादि..
उस के सामने दिलीप कुमार, देव आनंद, राजेंद्र कुमार, मनोज कुमार, राजेश खन्ना, जितेंद्र, फिरोज खान, इत्यादि.. इत्यादि की पीढ़ी नाकाम हुई थी. उन में एक मात्र जितेन्द्र की बेटी एकता कपूर ने अपनी मा की भागीदारी में टी वी पर बालाजी फिल्म्स के बैनर तले ढेर सारी धारावाहिक बनाई थी.
फ़िल्मी अभिनेता और अभिनेत्री के बीच भी कई शादियां हुई थी, जो नाकाम हुई थी.
धर्मेन्द्र और राज बब्बर ने दो शादिया क्रमांनुसार हेमा मालिनी और स्मिता पाटिल से की थी. उस के अलावा विनोद मेहरा ने बिंदया गोस्वामी से शादी की थी.
बड़ी उम्र में दिलीप कुमार ने अपने से आधी उम्र की लड़की सायरा बानू से की थी. राजेंद्र कुमार के साथ उस ने दो तीन फ़िल्में की थी. दोनों एक दूसरे को प्रेम करने लगे थे. इस स्थिति में उस के मा बाप ने उस का विवाह दिलीप कुमार से करवा दिया था, जो उन की हीं बिरादरी से थे.
यश चोपड़ा के पुत्र आदित्य ने रानी मुख़र्जी से शादी की थी जो तनूजा के देवर की लड़की थी. तनुजा की अपनी बेटी ने खूब नाम कमाया था और अभिनेता अजय देवगन से शादी की थी.
नूतन के पुत्र मोहनीश बहल को भी चरित्र अभिनेता की भूमिका में कई फिल्मे मिली थी जिस में राजश्री फिल्म्स की फिल्मों का अहम हिस्सा था.
खलनायक की भूमिका में सब से ऊपर प्राण का नाम था. बाद में जीवन, मदन पुरी, रहमान, प्रेम चोपड़ा, अमरीश पुरी, गुलशन ग्रोवर, कुलभूषण खरबन्दा, अमजद खान, उस का भाई इम्तियाज़ खान और दोनों के पिता जयंत, मन मोहन, अजित इत्यादि इत्यादि...
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ऐसा नहीं कह सकते मोबाइल आने से सब कुछ गलत हो रहा हैं. उसके आगमन निजी जीवन में भगा दौड़ी कम हो गई हैं. खर्चे में बहुत कुछ कमी आ गई हैं.
पहले हमें कुछ कागजात या जरूरी दस्तावेज भेजनें होते थे तो हम उसे पोस्ट या आंगड़िया के जरिये भेजते थे जो पहुंचने तक भी इंतज़ार करना पड़ता था. पहुंचा के नहीं उस की भी फ़िक्र होती थी.
मोबाइल में वही चीज हम वाट्सअप या ई मेल के जरिये भेज सकते हैं जो उन्हें उसी घड़ी मिल जाता हैं. किसी को पैसा भेजना भी बड़ा आसान हो गया हैं.. बैंक के ATM कार्ड, G Pay, फोन पे , भीम एप्लीकेशन के जरिये भेज सकते हैं जो सामने वाले को ताबड़तोड़ मिल जाता हैं.
मोबाईल की वजह से काम जल्दी होता हैं, पैसा और समय बचता हैं. कागज, शाही और अन्य स्टेशनरी का खर्चा भी बच जाता हैं..
परिवार में सगे संबंधी के कोई बीमार हो तो दौड़कर उस के पास जाने की जरूरत नहीं रही. शादी या अन्य फंक्शन का न्योता व्हाट्सप्प के जरिये दे सकते हैं. कार्ड छपवाने की गुंजाईश भी बची नहीं हैं.
एक मेसेज करने से सारे परिवार, रिश्तेदार, दोस्त और परिचितो को एक हीं मेसेज के जरिये खबर दी जा सकती हैं.
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' तारक मेहता का उलटा चश्मा ' इस धारावाहिक के किरदारों के बीच अवैध रिश्ते होने का नया ट्रेंड शुरू हुआ हैं. धारावाहिक के किसी दो विजातीय स्त्री पुरुष के बीभत्स फोटो, वीडियो दिखाना शुरू हो गया हैं. यह क्यों और कैसे हो रहा हैं. क्या यह सब धारावाहिक के किरदारों की जानकारी में हो रहा हैं?
क्या बापू जी और बबिता को मालूम हैं की मोबाईल पर नंगी तस्वीरे दिखाई जा रही हैं? क्या उस के लिये अलग से थैली भर कर पैसे दिये जाते हैं?
इसी तरह धारावाहिक के अन्य विजातीय किरदारों के फोटोज दिखाये जाते हैं. उस को रोकना अति आवश्यक हो गया था. सीरियल में सब कुछ सही बताया जा रहा हैं. ' गोकुल धाम ' सोसाइटी के सभी मेंबर्स के बीच प्यार और संप, एकता का माहौल हैं उस के पीछे ऐसी दकियानुसी हरकत कौन करता हैं?
उसे पकड़ना और सजा देने आवश्यक हो गया हैं.
मैं मेरी कहानी के मिडिया और टी वी माध्यम को आगाह कर रहा हूं. उसे आगे बढ़ने को रोकना जरूरी हैं.. नहीं तो हमारे सांस्कृतिक देश की छबि बिगड जायेगी.
साथ मैं तारक मेहता की टीम को सवाल पूछ रहा हूं. पहला सवाल मैं बापूजी से कर रहा हूं..
' क्या मोबाईल में आप का बबिता जो फोटो बताया जाता हैं वह सच हैं? क्या उस के बारे में आप को मालूम हैं? "
" यह कौन बंदा खड़ा हुआ हैं. जो आप के टी वी के पावक रिश्तों पर कीचड उछाल रहा हैं..? "
" आप लोग खुद इन्क्वायरी कमिशन बिठाओ और सच्चाई का पता लगाओ. "
तुम्हारी तरफ से कोई बचाव नहीं हुआ तो लोग उसे सही मान लेंगे. बाद में किसी के सामने खुलासा करने कोई मतलब नहीं होगा. लोग धारावाहिक देखना बंध कर देंगे और इतनी पुरानी धारावाहिक को भी धब्बा लग जायेगा. धारावाहिक बंद करने का भी दबाव आ सकता हैं.
हार एक एपिसोड के अंत में तारक मेहता जो विवरण करते हैं उस की जगह किरदारों की इज्जत की धज्जिया ना उड़ जाये इस बात का दयान रखकर सच्चाई को बाहर लाना महज जरूरी हैं. नहीं तो धारावाहिक को काला रंग लग जायेगा और जो चित्र लेखा में धारावाहिक के रूप में प्रकाशित ' दुनिया नी आंखे उंधा चस्मा के लेखक ' तारक मेहता ' की इज्जत की धज्जिया उड़ जायेगी.
00000000 ( क्रमशः)