A companion of memories - Ranjan Kumar Desai - (87) in Hindi Biography by Ramesh Desai books and stories PDF | यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (87)

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यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (87)

              

                 

              ( माया- मनोज दोस्ती की अनोखी मिशाल)

                     :  :   प्रकरण -87 :  :

           और  उस ने संभव के नाम को लेकर बहुत बड़ी बात की थी.

            इस उपन्यास के नायक का नाम संभव हैं, वह एक प्रतीकात्मक हैं.. वह जो कुछ चाहे  करने की क्षमता रखता था. वह ' पुष्पा इम्पोसिबल' धारावाहिक की तरह सब कुछ सही करने को सक्षम था, उस के लिये यह मुश्किल नहीं था.

            इस कहानी की जरिये उस ने बहुत सारी चीजों के बारे में लोगो को जानकारी दी हैं जो कुछ गलत होता आया हैं उस के बारे लोगो को अवगत किया हैं, सजाग किया हैं.

           इस कहानी में उन्हों ने एक से बढ़कर एक किरदार के बारे में बहुत कुछ सही लिखा था.  वह नारी को हमेशा देवी के रूप में देखते आये थे. उन की पूजा करते आये थे. लेकिन कुछ औरतों ने  अपनी सोच की वजह से उन की छबि ख़राब करने की गंदी चेष्टा की थी. उस बात का उन्हें मरते दम तक अफ़सोस रहा था.

        साथ में बदलते युग में टी वी धारावाहिक, फिल्मे और मोबाइल के जरिये जो कुछ गलत हो रहा था.. इस के बारे में लोगों को जागृत करने का नेक प्रयास  किया था.

          मनोरंजन के नाम क्या क्या मेसेज मोबाइल में भेजे जाते थे . जिंदा लोगो को बिना वजह मेसेज भेजकर मार देते थे. ऐसी हरकत करने वालों ने प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी नहीं बक्सा था, बल्कि कई फ़िल्म सितारों की चिता जलाने की गंदी हरकते की हैं. रोज क़ोई ना क़ोई महान हस्ति के मर जाने का मेसेज मोबाइल में देखने को मिलता हैं..

          गंदे रिल्स और फोटो भेजकर शादी की प्रपोजल भेजकर बड़ी रकम की लालच देकर उसे शीशे में उतारने वाली औरतों का भी पर्दा  फार्श किया था.  उन्हें सुधरने का मौका भी दिया था.

          तारक मेहता के सारे स्त्री पुरुष किरदारों के आपस में अश्लील रिश्तों की रिल्स  बनाकर उन के रिश्तों को जलील करने में भी क़ोई कसर नहीं छोड़ी . जिस में बापूजी ओर भिड़े की बीवी, जेठा लाल और बबिता के आड़ व्यवहार के रील्स  मनोरंजन के नाम  पोस्ट किये हैं.

         ढेर सारी लड़कियां, बड़ी उम्र की औरते फेस बुक के जरिये फ्रेंड शिप रिक्वेस्ट भेजती हैं, लाइक करने को बोलती हैं, अपनी गंदी तस्वीरें शेयर करने को कहती हैं, अपना नंबर भेजनें का वादा करती हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता हैं.          कुछ लड़कियां तो काफ़ी आगे निकल गई हैं  वीडियो में अर्ध नग्न, बिभत्स फोटो को भेजकर पुरुष की नग्न तस्वीरे मांगती हैं. और फिर उसे ब्लैक मेल करती थी,  जाली साइबर क्राइम ब्रांच के नाम लोगो को डराती हैं पैसे की मांग करती हैं. यह ख़तरनाक बात हैं . मेरे बडे पापा ने ऐसे रैकेट को खुल्ला करने के लिये बड़ी हिम्मत दिखाई थी.

       सब से बड़ी बात थी उन्हों ने स्नेहा जैसी कई लड़कियो को नर्क से बाहर निकाला था,  उस को समाज में एक रुतवा प्रदान किया था, उन को जीने की नई राह दिखाई थी.

         समाज में जिस की गंदी इमेज़ थी  उस की भी अच्छी बातें लोगो को समझाने का प्रयास किया था.

         यादो के बहाने उन्हों ने क्रिकेट, फ़िल्म और टी वी धारावाहिक के प्लस माईनस पोइंट्स के बारे में भी लोगो को बहुत कुछ बताया हैं..

        जिंदगी में चाहे पुरुष हो या स्त्री, उन्होंने कई लोगो से प्यार हो जाने की बातें की हैं.

        उस ने सरदेसाई, बी आर चोपड़ा और यश चोपड़ा जैसी हस्तीयों का समावेश होता हैं.

         लेकिन अंतिम दिनों में उन की याद दास्त बिल्कुल चली गई थी. उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता था. छोटी छोटी चीजे भी वह भूल जाते थे. फ़ोन करने के लिये मोबाइल हाथ में लेते थे और किसे फोन करना हैं वह भूल जाते थे.  बाहर जाते थे तो कहाँ जाना हैं वह भी भूल जाते थे.

        उन्हें एक एक जमाने में हजारों नाम जुबानी हो गये थे. लेकिन बाद में क़ोई भी नाम वह याद रख नहीं पाते थे..उन्हों ने अपनी उपन्यास का नाम बदल लिया था. 100 जितने प्रकरण लिखें थे लेकिन हर प्रकरण की शुरुआत करते समय वह अपना टाइटल भी भूल जाते थे.

      ATM में जाते थे. पैसा निकालने के बाद कार्ड स्लोट से निकालना भूल जाते हैं. कई बार उन की जेब से पैसे भी गिर जाते थे. मोबाइल भी कहीं भी छोड़ देते थे. अपने चश्मे या छाता भी संभाल नहीं पाते थे.

     शायद बदले हुए युग में टी वी, मोबाईल कितने खतरनाक होते जा रहे हैं. उस के सामने सीधी उंगली उठाने की हिम्मत की थी.

     समाज को गलत रास्ते खिंचने वाला एक बहुत बड़ा, ख़तरनाक जूथ था जिस के सामने मेरे बडे पापा ने आवाज उठाई थी, उसे रोकने का प्रयास किया था. इस के लिये उन्हें कई धमकिया भी मिली थी. लेकिन उन्हों ने निर्भय होकर समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाने में क़ोई कसर नहीं छोड़ी थी.

       उन्हों ने अपनी उपन्यास के जरिये लोगो को जगाने की कोशिश की थी. फ़िल्म ' जागृति ' के गीत के जरिये लोगो को जगाने का प्रयास किया था.

        हम लाये हैं तूफान से किस्ती निकाल के        इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के        तुम ही भविष्य हो भारत के बाल के        इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

       आराम की तुम भूल भूलईया में भूलो       सपनो के हिंडौले पर मस्त होके ना झूलो       अब वक़्त आ गया हैं मेरे हसते हुए फूलों       उठो छलांग मार के आकाश को छुलो       तुम ही भविष्य हो भारत के बाल के       इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

       उस दौरान स्नेहा ने सब को उपन्यास की प्रत बांटने का काम पूरा किया था.

       उस के बाद गरिमा ने उस के चरित्र के बारे में लोगो को सच्चाई से अवगत किया था. गौरवने भी उस की प्रशंसा के पुल बांधे थे.

        उस वक़्त बच्चा नीला की गोद में सोया  हुआ था.

        स्नेहा अपने आंसू रोक नहीं पा रही थी.

        बिभूति उसे अपनी गोद में बिठाकर प्यार की वर्षा क़र रही थी.

        ना जाने कैसे और क्यों? राजहंस छूट गया था और वह संभव की शोक सभा में हाजिर हो गया था.

        उस ने आँख में आंसू के साथ गरिमा की माफ़ी मांगी थी. वह उस दम्पति को पहचानता था.

        उस वक़्त एक ही शख्स इस सभा में मौजूद नहीं था और वह था हसमुख. उस ने संभव का सब कुछ छिन लिया था . भगवान ने उस के कुकर्मो का बदला दिया था.वह अस्पताल में आखिरी सांसे ले रहा था.

       मरते हुए आदमी के साथ सारा वैमनस्य खत्म हो जाता हैं. उसी ने ही सुहानी पर अत्याचार क़र के उस की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया था. जिस का बुरा नतीजा निकला था.

       उस ने मरते समय अपने सारे गुनाह कबूल क़र लिये थे, उस के लिये मांफी भी मांगी थी.

        और उस ने दम तोड़ दिया था.

         उस वक़्त संभव सब कुछ भुलाकर अंतिम यात्रा में शामिल हुआ था.

         इस बात का भी उस ने स्नेहा से जिक्र किया था.

         तीनो गुड़िया भी वहाँ मौजूद थी. वह लोग अपने दादू की याद में अनगिनत आंसू बहा रही थी. उन तीनो की शादी हो गई थी. उसे तो  शादी में जाने का मौका नहीं मिला था. फिर भी उस ने तीनो के कन्यादान की रस्मे निभाने के लिये तीन कवर तैयार रखे थे.

         जिसे याद क़र के स्नेहा ने उन के हाथों में थमा दिये थे. उस पर तीनो भावुक होकर रो पड़े थे और संभव के फोटो समक्ष हाथो जोड़कर माफ़ी मांगी थी.

       " दादू! हमें माफ कर देना!! "

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