Ye Chaahate : An Unfinished story - 1 in Hindi Love Stories by javy books and stories PDF | ये चाहते : एक अधूरी कहानी - 1

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ये चाहते : एक अधूरी कहानी - 1

अमायरा – एक अलग सी लड़की (भाग 1)
अमायरा एक साधारण-सी, सांवले रंग की और शांत स्वभाव की लड़की थी। उसका नाम अलग था, और शायद उसकी सोच भी। अभी उसने नौवीं कक्षा के पेपर खत्म किए थे। स्कूल से लौटते समय उसके कदम धीमे थे, लेकिन मन में कई सपने और सवाल चल रहे थे।
उसका परिवार कुछ साल पहले गाँव से शहर आया था। शहर में उनका घर न बहुत बड़ा था, न बहुत छोटा — बस एक साधारण-सा मकान, जिसमें दो कमरे, एक छोटा-सा आँगन और रसोई थी। वे न बहुत अमीर थे, न बहुत गरीब। घर में सामान्य जीवन जीने के सभी साधन थे। उसके पापा मेहनती इंसान थे
परिवार में चार भाई-बहन थे — सबसे बड़ा भाई, फिर बड़ी बहन, उसके बाद अमायरा और सबसे छोटा भाई। बड़ा भाई ग्यारहवीं के पेपर दे चुका था। घर में उसकी पढ़ाई को लेकर थोड़ा ज्यादा ध्यान दिया जाता था। सबसे छोटा भाई अभी छोटा था, इसलिए सबका लाड़-प्यार उसे मिलता था।
अमायरा की बड़ी बहन शांत स्वभाव की थी। वह ज्यादा बोलती नहीं थी, पर उसके मन में एक ही इच्छा थी  अपनी जिंदगी में आज़ादी। वह पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। वह शादी के बंधन में जल्दी नहीं बंधना चाहती थी।
लेकिन घर का माहौल अलग था। माता-पिता की सोच साफ थी — “लड़कियों को बारहवीं तक पढ़ा देंगे, फिर शादी कर देंगे।” अमायरा और उसकी बहन को बचपन से यही समझाया गया था कि अगर पढ़ाई के दौरान कोई गलती हुई या कोई शिकायत आई, तो उनकी पढ़ाई तुरंत बंद कर दी जाएगी।
अमायरा एक सह-शिक्षा वाले स्कूल में पढ़ती थी, जहाँ लड़के और लड़कियाँ साथ पढ़ते थे। लेकिन उसने हमेशा खुद को पढ़ाई तक सीमित रखा। उसने कभी किसी लड़के से बेवजह बात नहीं की, न ही किसी के साथ दोस्ती में जरूरत से ज्यादा समय बिताया।
उसे अपने पापा की इज्जत सबसे प्यारी थी। वह जानती थी कि उसके हर कदम पर घर की नजर है। उसे हमेशा कहा गया था  “अगर कुछ गलत हुआ, तो पढ़ाई बंद कर देंगे।” यही डर उसके अंदर जिम्मेदारी बनकर बैठ गया था।
वह समझती थी कि उसका एक-एक कदम बहुत सोच-समझकर उठाना है। उसके लिए स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह थी, न कि किसी और भावना में उलझने की। उसके सपने साफ थे — पढ़ना, आगे बढ़ना और अपनी पहचान बनाना।
रात को जब वह अपने कमरे में बैठकर किताबें खोलती, तो उसे लगता जैसे हर पन्ना उसे आगे बढ़ने की ताकत दे रहा है। उसकी बड़ी बहन कभी-कभी कहती, “हमारी जिंदगी आसान नहीं है, पर हमें हार नहीं माननी चाहिए।”
अमायरा चुपचाप मुस्कुरा देती। उसके अंदर एक अडिग निश्चय था — वह अपने पिता की इज्जत भी रखेगी और अपने सपनों को भी जिंदा रखेगी।
नौवीं की परीक्षा खत्म हो चुकी थी, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी — अपनी आज़ादी और अपने सपनों को बचाए रखने की। एक साधारण-सी लड़की, जो किसी प्रेम कहानी में नहीं उलझी, बल्कि अपने भविष्य को संवारने में लगी रही।
अमायरा की कहानी अभी शुरू हुई थी… और उसके इरादे उसकी उम्र से कहीं ज्यादा मजबूत थे। ✨