niyati (naseeb) :ek stya ghatna pr aadharit in Hindi Short Stories by pink lotus books and stories PDF | नियति (नसीब) :एक सत्य घटना पर आधारित

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नियति (नसीब) :एक सत्य घटना पर आधारित

    ​लोग कहते हैं नसीब खराब है... पर सच तो कुछ और ही है।

​हम सब कहते हैं कि "मेरा नसीब खराब है," "मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?" लेकिन रियलिटी पता है क्या है? नियति (Destiny) तुम्हें ऐसा बना रही है जहाँ तुम किसी और पर निर्भर (dependent) न रहो। वो तुम्हें मजबूर कर रही है कि तुम सिर्फ खुद के लिए जियो और खुद से प्यार करो।

​पता है, किस्मत बहुत सेल्फिश है। हाँ, बहुत ज्यादा मतलबी! पर वो हमारे लिए सेल्फिश है। जब नियति हमारे बारे में सोचती है, तो वो सिर्फ "हमें" देखती है, हमारे आस-पास के इंसानों को नहीं। वो अंधी है, पर इसलिए नहीं कि उसे दिखता नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि वो न्याय की देवी है। उसने अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली है ताकि वो न सामने देखे, न दायें-बायें, वो बस वही देखे जो "सही" है।

​किस्मत का छीनना बुरा नहीं है। सब बोलते हैं कि किस्मत ने मेरा सब कुछ छीन लिया। पर हकीकत यह है कि वह बस हमें देखती है। जो चीज़ या जो इंसान हमें बाँधता है, जो हमें कमज़ोर बनाता है, नियति उसे हमसे छीन लेती है ताकि हम आज़ाद बन सकें। नसीब बुरा नहीं है, नसीब बहुत अच्छा है क्योंकि वह हमसे ज़्यादा हमारी सोचता है। जब वह कुछ छीनता है, तब हम "नये" बनते हैं। अगर वह न छीनता तो शायद यह दुनिया हमें कब की खा गयी होती। हम किसी और के मोह (Attachment) में खुद को भूल चुके होते।
​नियति एक माँ जैसी है, पर सख्त माँ। वह एक ऐसी माँ है जो अपने बच्चे को कड़वी दवा पिलाती है क्योंकि वह उसे ठीक होते देखना चाहती है। वह कर्मा और सत्य देखती है। सब कहते हैं नसीब खराब है, पर वह बस तुम्हें बेहतर या दर्दनाक बनाना चाहता है ताकि तुम दुनिया के लिए नहीं, खुद के लिए जीना सीखो। वह तुम्हारी सबसे "पसंदीदा" चीज़ छीन लेती है, क्योंकि उसे पता है कि तुम्हें यह सफर अकेले ही तय करना है। सच कड़वा हो सकता है, पर यही सच है।

(मेरी मानो तो दर्द सब को होता है मुझे भी हर किसी को पर हमारा तकत्वर बना बोहोय जरूरी है ये दुनिया बेरहेम यहाँ तकते कमज़ोरी यो पर ज्यादा वार करती है) 

​एक सच्ची कहानी बताती हूँ... शायद आप समझ पायें...🥀

​जब उसने पहली बार हकीकत का सामना किया।
​एक 7 साल की मासूम बच्ची थी। उसके घर एक डॉगी आया, वह बहुत खुश थी, उसे उससे बहुत लगाव था। धीरे-धीरे वह बड़ा हुआ, 2-3 साल बीते। फिर नियति ने अपना खेल दिखाया। उस डॉगी को कोई बीमारी हुई या किसी ज़हरीली चीज़ ने काट लिया, पता नहीं... पर वह 10 दिन तक मौत की हालत में रहा। उस बच्ची ने भगवान से बहुत प्रार्थना की, "मत लो इसे, मत लो!" वह रोई, उसे बहुत दर्द हुआ। पर आखिरी में वह डॉगी मर गया।
​पर पता है हैरानी की बात क्या थी? उस दिन वह बच्ची बिल्कुल नहीं रोई। उसने उसी वक्त तय कर लिया कि जो जाने वाला है, उसे वह रोक नहीं सकती, चाहे कुछ भी हो जाए। तो फिर रोना क्यों? रोकना ही क्यों?
​उस दिन से उसके लिए इंसान, परिवार और सब सिर्फ "लोग" बन गए। उसने सीख लिया कि किसी से वैसे दिल नहीं लगाना जो तुम्हारी ताकत छीन ले। आज वह लड़की (मेरी छोटी बहन) इतनी स्ट्रॉन्ग है कि वह सब समझती है। उसे आज भी उन बेज़ुबानों के लिए बुरा लगता है, पर वह अब टूटती नहीं है। अगर नसीब ने उससे उसका पसंदीदा डॉगी न छीना होता, तो वह आज इतनी मज़बूत न होती।
अंत में बस इतना...

   ​नसीब तुम्हें अकेला करता है ताकि तुम अपनी ताकत पहचानो। जो दर्द तुम्हें मिल रहा है, वह तुम्हें "जला" (Burn) नहीं रहा है, बल्कि तुम्हें "निखार" (Polish) रहा है। जब तुम लायक बनोगे, तो सब कुछ वापस आएगा, या फिर उससे भी बेहतर मिलेगा। जो चीज़ तुम्हें पीड़ा (Pain) दे रही है, वह तुम्हारे काम की नहीं है। वह बस एक बाधा है। खुद को जीने दो, खुद से प्यार करो। यही नियति का असली चेहरा है।
​फिर भी लोग कहते हैं—

"यार, मेरा नसीब ही खराब है।"
द्वारा: pinklotus ❤️🌸

​पाठकों के लिए संदेश:

​दोस्तों, मैं चाहती हूँ कि आप इसे पढ़ें क्योंकि यह चीज़ जानना बहुत ज़रूरी है। मुझे पता है कि हर किसी के मन में बहुत से सवाल होते हैं, लेकिन हर सवाल का जवाब भी कहीं न कहीं ज़रूर होता है।