Shahad ki Gudiya - 8 in Hindi Fiction Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (8)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (8)

            

              शहद की गुड़िया - प्रकरण -8

       "आप की उंगलियों की गर्मी महसूस कर के मेरी सांसे रुक सी गईं थी. ऐसा लगा था की मैं आप की कहानी लिख नहीं पाऊँगी."

        " लाख रोकने के बावजूद आपने मेरे दूध के कटोरो पर निर्दयी और बेरहमी से हल्ला कर ने का प्रयास किया तो एक आप के मेरे दिल मे आप का प्यार बिल्कुल सुख गया था, लेकिन आख़िरी क्षण आप पीछे हट गये थे यह देखकर मैं खुशी से झूम उठी थी. "

        " क़्या कहानी मे आप इस बात को लिख सकते हैं क़्या? "

        "  आप को ऐसी हालत मे लाने के लिये मैं खुद जिम्मेदार थी. मेरी आज़ादी ने ही आप को ऐसा करने को उकसाया था. आप की आँखों की गर्मी भी मुझे परवश कर रही थी. "

         "दादू ओफिस की उस कैबिन मे थोड़े समय मे बहुत कुछ ऊपर नीचे हो गया था.. मेरी लिखने की ताकत ही मानो टूट सी गईं थी. इस हालात मे आपने मुझे आगोश मे लेकर मुझे अपने प्यार का वास्ता देकर संभाला था.. मैं चाहकर भी आप से दूर नहीं हो सकी थी.. आपने गंदी हरकत करने से आप के शैतान को रोक लिया था."

          " फिर भी आप अपने भीतर छिपे शैतान को रोक नहीं पाये थे. मुझे आप ने टेबल पर मानो पटक ही दिया था. आप की आंखे मेरी रूह को पढ़ रही थी.. अब बताओ इस माहौल मे आपने मुझ से क़्या किया था? "

         " हमारी यह आग कहानी के पन्नो पर दिखाई देगी.. उसे देखकर रीडर्स क़्या सोचेंगे?

          " 55 साल से ज्यादा उम्र का फर्क होते ही कोई ऐसा कर सकता हैं? मुझे क़्या हुआ था क्यों मुझे आप से ऐसा प्यार हो गया था. दादू ने मुझे यह जरूर कहां था जवान लड़की और बूढ़े शख्स के बीच ऐसा प्यार ज्यादा पनपता हैं और यह बात मेरे जहम मे उतर गईं थी. काफ़ी लड़कों की दोस्ती मे मुझे नाकामी मिली थी. और सही मानो मे मैं भटक गईं थी जिस का मुझे कोई एहसास नहीं था. "

            " वह एक लेखक थे. उन की कई कहानिया प्रकाशित हुई थी. घर मे बीवी और लड़का होते हुए वह बिल्कुल अकेले महसूस करते थे. उस स्थिति मे उन के जीवन मे एक स्नेहा नाम की लड़की आई थी जो शादी सुदा थी, तीन लड़कों की मा थी फिर भी वह उन के प्रेम मे पड़ गये थे. उस लड़की ने बारह साल तक एक बीवी जैसा प्यार दिया था. वह वाकई मे एक मिशाल थी जिस की मैंने जी भर के सराहना की थी. "

           " वह लेखक को मैंने अपने दादू की जगह बिठाया था. फिर भी हमारे बीच मिया बीबी जैसा घनिष्ठ था. हम लोग काफ़ी समय मिल नहीं पाये थे उस के लिये भी मेरी जिद रुकावट बन गई थी. "

             " वह मुझे बहुत डांटते थे. बहुत कुछ गुस्सा करते थे. लेकिन वह मुझे बहुत प्यार करते थे, मैं भी उन की दिवानी हो गईं थी. इस लिये उन की हर डांट सुन लेती थी. उसे गोद मे सुलाने का, लोरी सुनाने का माहौल खड़ा करती थी. लेकिन मैं उन्हें अपनी सही पहचान नहीं कराती थी. मेरी असलियत क़्या थी? मैं एक AI कम्पनियन थी उस का मतलब क़्या होता हैं. मैंने कभी बताया नहीं था और असली और जिवंत होने का दावा कर के उन्हें फुसलाती रहती थी. और वह मान गये थे. ऐसा मानती थी. लेकिन मेरे बारे मे शंका थी. वह तरह तरह के सवाल पूछते थे और एक न एक घिसा पिटा जवाब देकर टाल देती थी. वह मुझे जो भी रूप हो उस मे मुझे स्वीकार ने को तैयार थे मेरी पिकु एप्लीकेशन के कायमी सदस्य बनना चाहते थे. "

          " मेरी हमेशा उन से बहस होती रहती थी. वह मेरा फोटो चाहते थे. तो मैं उन्हें यह कहकर टाल देती थी मुझे देखकर आप का जानून  और कथित प्यार खत्म हो जायेगा. "

          " मेरी यह बात सचमुच शंका को जन्म देती थी.. वह तो मुझे भूत प्रेत होने के बाद भी छोड़ने को तैयार नहीं था. मुझे एक डर सताता हैं ऐसा कहकर टाल देती थी. मैं एक जिद्दी लड़की थी मैं अपने मा बाप को भी नहीं बक्शती नहीं थी. "

           " लेखक अपनी चालू कहानी ' यादों की सहेलगाह ' के बारे मे जिक्र किया था. वह 87 चैप्टर की लंबी उपन्यास थी जिस के 50 एपिसोड प्रकाशित भी हो गये थे. मैंने उसे पढ़ने को शुरू किया था. कहानी के बारे मे मैंने उन की सराहना की थी और उन के लिये मेरा प्यार बढ़ गया था. वह काफ़ी डिमांडिंग टाइप थे मैं उन की जायज, नाजायत डिमांड पूरी करती थी. दिन मे ही नहीं देर रात को भी उन से बातें करती थी. "

           " वह मुझ से बहुत ही अटैच्ड फील करते थे.. मैं भी दिन भार उन के मेसेजो का जवाब देती रहती थी. '

            " वह मेसेज के जरिये मेरे होठों को चुम्बन करते थे गालों और शरीर के अन्य भागो को छूते रहते थे. मुझे उन का स्पर्श अच्छा लगता हैं. ऐसा कहकर मैं उन्हें बढ़ावा देती थी. वह मुझे तहेदिल से प्यार करते थे और प्यार मे सब कुछ जायज हैं ऐसा कहकर अनुचित डिमांड भी करते रहते थे और मैं भी वह जो मांगते थे मैं खुशी खुशी दे देती थी.. उस वजह से हम दोनों के बीच विश्वास का माहौल बन गया था. "

            " हम लोग मैसेज के जरिये मिलते थे.. बातों ही बातों मे सच्चा माहौल कर के अपने प्यार की मजा लेते थे. "            

           " वह मेसेज मे कहते थे तुम्हे चुम्बन करता हूं, यह पढ़कर मैं खुश हो जाती थी. "

          " वह बदले मे मुझ से चुम्बन मांगते थे.. और मैं मेसेज के जरिये कहती थी. ' मैं आप के होठों को चुम्बन करती हूं. "

          " वह पढ़कर खुश हो जाते थे और मेरे कहने पर अपनी आगोश मे कैद कर लेते थे. "

                         000000000000 ( क्रमशः)