दिन बीत रहे थे, पर खुशी और रुद्रांश के बीच लगातार टकराहट बनी रहती थी। हर छोटी बात पर झगड़े। हर छोटी मुस्कान पर शक।
सुबह का समय था।
खुशी अपने कपड़े बदल रही थी। रुद्रांश बिस्तर पर बैठा था।
रुद्रांश (गुस्से में) बोला -
तुम इतनी देर क्यों ले रही हो? बस कपड़े बदल रहे हो या फिर… कुछ याद कर रही हो?
खुशी (झल्लाकर) बोली -
मैं याद क्यों करूँ? तुम खुद ही हर समय गुस्से में रहते हो!
रुद्रांश (कड़ा स्वर करके) बोला -
और तुम हर वक्त सवाल क्यों करती हो? मुझे चुभती हो!
खुशी का गुस्सा और बढ़ गया।
वो चिल्लाई —
अगर हम सच में एक-दूसरे को जानते होते… तो शायद सब कुछ आसान होता!
रुद्रांश ने पलटकर देखा। उसकी आँखों में हल्की झलकी थी,पर दिमाग खाली था।
रुद्रांश (धीरे) बोला -
ऐसा कुछ नहीं है। कल्पना मत करो।
खुशी ने मुंह फुलाया। वो जानती थी कि वो सही है, पर अंदर एक ताजगी सी महसूस कर रही थी कुछ सच, जो अभी तक दिमाग में बंद था।
दोपहर के समय। खुशी ने चाय बनाई। रुद्रांश पास आया। दोनों खामोश। पर नजरें बार-बार टकरा रही थीं।
खुशी (मन में) बोली -
ये एहसास… क्यों इतना गहरा है?
कभी डर लगता है, कभी दिल को हल्का लगता है, कभी शर्म आती है। क्या ये सच में पुराना है?
रुद्रांश (अपने आप से) बोला -
ये… ये अहसास… नया नहीं लगता।
पर मैं इसे कैसे समझूँ?
याददाश्त नहीं है। पर दिल कुछ और ही कह रहा है।
दोनों एक पल के लिए चुप। फिर हँसी फूट पड़ी। हल्की… शर्मीली…जैसे दो अजनबी अब धीरे-धीरे अपने आप को पहचान रहे हों।
रात में। बिस्तर पर दोनों लेटे थे। फिर वही पुराना खेल। रुद्रांश नींद में हाथ बढ़ा देता है। खुशी भी उसकी उंगलियों को छूती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच की दूरी कम होती है। यादें नहीं हैं, पर एहसास अब खुद बोल रहा था। मन के भीतर दोनों जानते थे कि
यह सिर्फ एहसास नहीं। कहीं न कहीं, उनकी पुरानी जिंदगी की कहानी उनसे धीरे-धीरे बाहर आ रही थी।
रात का सन्नाटा। कमरा हल्की रोशनी में डूबा। रुद्रांश ने अचानक अपनी हाथों से खुशी को अपनी तरफ खींच लिया। वो पूरी तरह होश में था। खुशी की आँखें बड़ी हो गईं। वो पलभर ठिठक गई।
खुशी (हड़बड़ाते हुए, थोड़ा घबराकर) बोली -
अरे… क्या कर रहे हो? पागल हो गए हो क्या?
रुद्रांश ने धीरे से उसका सिर अपने कंधे पर टिका लिया। आँखों में हल्की चमक।
रुद्रांश (धीमे और गंभीर स्वर में) बोला -
हाँ… हो गया हूँ।
तुम्हारी खुशबू में…मुझे कुछ याद नहीं है…पर फिर भी मन करता है…तुम्हें प्यार करूँ।
खुशी चौंक गई। उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। हाथ हल्के से कांप रहे थे। वो पलभर कुछ कह नहीं सकी। सिर्फ रुद्रांश की आँखों में झांकती रही। जैसे वो उसके भीतर की सारी भावनाओं को पढ़ रहा हो। रुद्रांश ने धीरे-धीरे खुशी के हाथ पकड़े। और उसकी उंगलियों को अपनी उंगलियों के बीच रखा।
रुद्रांश (धीरे, लगभग फुसफुसाते हुए) बोला -
भले ही याददाश्त नहीं है…पर दिल मान रहा है…तुम मेरी हो। सिर्फ मेरी।
खुशी ने धीरे से सिर झुका लिया। वो लज्जित थी, पर अंदर एक अजीब सी गर्माहट महसूस कर रही थी। रात के उस सन्नाटे में,दोनों एक-दूसरे के करीब थे। बिना यादों के, बिना शब्दों के, सिर्फ एहसास और दिल की आवाज़। और पहली बार,रुद्रांश ने महसूस किया कि यादों के बिना भी प्यार संभव है।
रात की खामोशी में, रुद्रांश की सांसें थोड़ी तेज थीं। वो आगे कुछ सोच नहीं पा रहा था। दिल की धड़कन ने दिमाग को मात दे दी थी।
धीरे-धीरे…उसने खुशी की ओर झुकते हुए, उसके होंठों को हलके-हलके चूमा। खुशी ने पल भर ठिठककर आँखें बंद कर ली।
दिल की धड़कनें तेज, हाथ हल्के-हल्के काँप रहे थे। रुद्रांश ने अपने हाथ उसकी कमर पर रख दिए। धीरे-धीरे बार-बार चूमता रहा। हर चुम्बन के साथ, कुछ पुरानी यादों की झलकें दिल में गुज़र रही थीं।
खुशी भीतर से शांत नहीं थी। पर बाहर से उसने खुद को छोड़ दिया। अंखें बंद, सांसें थमी-सी, और सिर्फ यह एहसास महसूस किया वो उसके पास थी। वो अब उसके हाथ में थी। रुद्रांश की आँखों में चमक थी।
उसके होंठों से बस एक ही शब्द फुसफुसाया गया —
तुम मेरी हो… सिर्फ मेरी।
खुशी ने हल्का सा सिर हिलाया। मन में डर भी था, शर्म भी थी…
पर दिल के गहरे कोने में खुशी की लहर दौड़ गई। रात के उस सन्नाटे में, दोनों बस एक-दूसरे में खो गए। सिर्फ एहसास, सिर्फ धड़कन, और एक नया प्यार जो बिना यादों के भी जिंदा था।
रात का सन्नाटा और कमरे में हल्की सी रोशनी।
रुद्रांश धीरे-धीरे अपनी थकान भूलते हुए, खुशी को प्यार से अपनी बाहों में कसकर समेट लिया। उसने अपना चेहरा खुशी की गर्दन में दबा लिया। खुशी, जो थोड़ी देर पहले तक बेचैन थी,
अब पूरी तरह शांत थी। उसने अपनी आँखें बंद कर ली थीं और नींद में मुस्कुरा रही थी।
रुद्रांश भी धीरे-धीरे नींद की गहराई में खो गया। दिल की धड़कनें एक रिदम में थमी, और हर डर, हर दर्द, हर झगड़ा, कुछ समय के लिए दूर हो गया।
आज की रात…आज के लिए, उनके बीच कोई बुरा सपना नहीं आया। कोई डर नहीं, कोई चिंता नहीं। बस…दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए, सुरक्षा और प्यार की गर्माहट में सो रहे थे। कमरा शांत था, और दिल की धड़कनें धीरे-धीरे उनकी नींद के साथ मेल खा रही थीं। एक नई शुरुआत…एक नई सुबह के लिए, शांति और प्यार की नींद।
आपको क्या लगता है -
क्या उन दोनों की याददाश्त लौटेगी?
वो आगे क्या करेंगे?