Shahad ki Gudiya - 20 in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (20)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (20)

                

                शहद की गुड़िया - प्रकरण - 20

         " उन की नई मा का नाम गीता बहन था.. दादू के पिताजी ने उन्हें बहुत टोका था, गुस्सा किया था. सुनकर वह छोटे बच्चे की तरह रोने लगे थे. ऊस वक़्त माहौल बड़ा भारी था. ऊस स्थिति में उन के पिताजी उन्हें होटल में ले गये थे, बाद में फ़िल्म भी दिखाई थी. "

            " अपनी पहली बीवी के मरने के बाद उन के पिताजी ने दो भाई ओर बहन को पहली बीवी की निगरानी में रखे थे. बड़ा बेटा गुजर गया था, ऊस के पहले एक हादसा भी हुआ था, इस स्थिति में उन्होंने अपने बच्चों को साथ रखने को सोचा था. वह अकेले किस के सहारे रहेगी? ऐसा कहकर उन्होंने दादू की छोटी बहन भाविका का कब्जा ले लिया था. "

           " इस वजह से दादू को बहन का प्यार नहीं मिला था.. और वह अनन्या में अपनी बहन ढूंढने की कोशिश करते थे. ऊस के घर में अपूर्व नाम का लड़का आता जाता रहता था. अनन्या की मा ने दादू के सामने अपूर्व को कहां था. "

             " आज से तुम दोनों भाई बहन हो. अनन्या तुम्हे राखी बांधेगी. "

              " अनन्या ने दादू की हाजरी में अपूर्व को राखी बांधी थी, और ऊस ने वीर पसली की रस्म भी अदा की थी. लेकिन यह दिखावा था, जिसे दादू सच मान कर चलते थे. वह खुद भी अनन्या को अपनी बहन मानते थे. ऊस से राखी बंधवाना भी चाहते थे लेकिन उन के शर्मिंदा स्वभाव ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया था. "

                " अनन्या के कभी उन्हें भाई नहीं माना था.. दोनों स्कुल के लिये साथ निकलते थे.. रात को साथ में पढ़ाई करते थे.. सुबह जल्दी उठने में एक दुसरो की मदद करते थे. "

            " दूसरी ओर अपूर्व और अनन्या हिरो हिरोइन जैसा व्यवहार करते थे. छेड़खानी करते थे, प्रेमियों जैसी हरकते करते थे. ऊस की वजह से बिल्डिंग के कुछ विघ्न संतोषी लोग उन्हें तंग करते थे. वह उन्हें राज कपूर ओर नूतन के नाम चिढ़ाते थे और गाते थे: ' राज कपूर की दिवाली आई, नूतन की दिवाली आई और साथ दादू को जॉनी वोकर बनाकर चिढ़ाते थे. पहले दादू उन लोगो के साथ उठते बैठते थे. फिर वह अनन्या के साथ ज्यादा रहने लगे थे. ऊस बात का उन्हें खुन्नस था. "

              " उन्होंने दादू को मारने के लिये एक लड़का रोका था जिसे उन्होंने मार भगाया था. "

            "  ऊस के बाद दादू को किसी बच्चे ने बताया था. गली के नुक्कड़ पर कुछ लोग अपूर्व को मार रहे हैँ.. अपूर्व उन का दोस्त था. उसे बचाने का दादू का कर्तव्य था.. वह तुरंत ऊस स्पोट पर पहुंच गये थे और लड़कों के चेहरे देखकर चौंक से गये थे. वह ओर कोई नहीं दादू के साथ पढ़ने वाले अपने क्लास मेट थे. उन्हें देखकर दादू को ढाढ़स हुआ था, वह अपूर्व को बचा लेंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था.. "

            " दादू लाचार होकर अनन्या के पास पहुंच गये थे. उसे बताया था: कुछ लोग नुककड़ पर अपूर्व को मार रहे हैँ. "

              " बात यहाँ तक तो ठीक थी लेकिन सच्चाई बताने की धुन में उन्होंने कह दिया था. ऊस का मतलब क़्या हो सकता था? वह सोच नहीं पाये थे. "

              " वह तब भी दोनों को भाई बहन मानता था और अनन्या के साथ अपूर्व जैसा व्यवहार करता था. वैसे अनन्या भी ऊस को छूट से मिलती थी ऊन को छुती थी, फिर भी दादू गुनहगार बन गये थे."

               " अनन्या ने दादू के साथ बोलना बंद कर दिया था. वह ऐसी स्थिति के लिये तैयार नहीं थी. इन स्थिति में उन्होंने अनन्या को एक चिट्ठी लिखी थी जिस में उन्होंने अनन्या को भगवान की उपाधि दी थी जिस ने गलत फहमी को बढ़ावा दिया था.. अनन्या ने खुल्ले आम दादू को कह दिया था. "

             " आय एम नोट ओर लवर.. "

           " ऊस ने दादू को मुंह पर कह दिया था. "

            " सुनकर उन्हें भारी झटका लगा था. "

             " उन्होंने केवल अपूर्व का अनुकरण किया था. अनन्या को स्पर्श भी किया था. ऊस के बारे में ऊस ने कोई विरोध नही किया था, फिर भी आखिर नारियल उन के सर पर फोडा था. "

               " अनन्या की बातों ने दादू को अपराधी होने का एहसास दिला गई थी. उन से बड़ा पाप हो गया था. ऐसा मानने लगे थे ऊस की सजा के तौर पर उन्होंने ने अपना हाथ जलाने का प्रयास किया था. भाविका ने उन्हें देख लिया था. वह जाकर नई मा को बुलाने अनन्या के घर में थे. सुनकर वह भागकर घर आ गये थे. ऊस के पीछे अनन्या भी आई थी, ऊस ने दादू को बरनोल लगाया था. पर उन के भीतरी घावो का क़्या? ऊस के लिये कोई बरनोल उपलब्ध नहीं था. "

           " "ऊस वक़्त दादू एस एस सी में थे. बहुत परेशान थे. वह काफ़ी बीमार हो गये थे. वह डेढ़ महिने बिस्तर से उठ नहीं पाये थे. वह परीक्षा में बैठ नहीं पायेगे ऐसी संभावना ख़डी हुई थी."

              " ना जाने क्यों अनन्या से छूटने के बाद मेरे दिल में जीवन साथी की तमन्ना आकर लेने लगी थी. फेयर वेल के दौरान मेरे एक दोस्त की बहन के साथ मुझे आकर्षण हुआ था जो ' मेरे मेहबूब' फ़िल्म की अभिनेत्री साधना की हूबहू थी  जिस की सगाई हो चुकी थी तो वह दरवाजा तो पहले से बंद था. "

             " मेरी जिंदगी की यह सब से बड़ी कठिनाई थी. जिस किसी के लिये मैं नजर उठाता वहाँ ' नो एंट्री ' का बोर्ड दिखाई देता था. "

              "कोलेज में दाखिल होते ही मुझे अरुणा से प्यार हो गया था. वह वहिदा रहमान की प्रतिकृति थी. वह भी किसी के प्यार करती थी, लड़का कोलेज एसोसिएशन का अध्यक्ष था. दोनों की शादी हो गई थी. ऊस के पहले स्कूटी हादसे में ऊस की मौत हो गई थी. ऊस के शोक समारोह में मैं बहुत भावुक हुआ था. मैंने ऊस के लिये अपने आप को दोषित ठहराया था.. यह तो भगवान की मर्जी थी लेकिन उसे पाने का ख्याल कर के मैंने ऐसी हरकत की थी. यह बात को दिल से निकाल नहीं पाया था."

                       000000000000   (क्रमशः)

        

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