Invisible: Keeper of the Time Wheel - 5 in Hindi Mythological Stories by jassu books and stories PDF | अदृश्य: कालचक्र का रक्षक - 5

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक - 5

अंधेरा इतना गहरा था कि ऐसा लग रहा था मानो समय खुद थम गया है। आर्यन के कानों में अभी भी उसके पिता की वह चीख गूँज रही थी, जो किसी गहरे कुएं से आई हुई प्रतीत होती थी। जब उसकी आँखें खुलीं, तो वह बनारस की उन तंग गलियों में नहीं था, न ही उस विशाल गुंबद के नीचे जहाँ घड़ियाँ उल्टी चल रही थीं।
​वह एक ऐसी जगह था जहाँ ज़मीन नाम की कोई चीज़ नहीं थी। वह हवा में तैरते हुए पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़ों पर लेटा था। उसके चारों ओर अंतहीन अंतरिक्ष था, लेकिन ताराहीन। सिर्फ एक धुंधली लाल रोशनी दूर कहीं क्षितिज पर चमक रही थी।
​परछाईं का खेल
​"जाग गए, आर्यन?" वही भारी आवाज गूँजी।
​आर्यन झटके से उठ खड़ा हुआ। उसके सामने वही नकाबपोश अजनबी खड़ा था, लेकिन इस बार उसका मुखौटा आधा टूटा हुआ था। मुखौटे के पीछे कोई चेहरा नहीं था—सिर्फ धुआं और दो जलती हुई नीली आँखें थीं।
​"मेरे पिता कहाँ हैं? और यह कौन सी मायावी दुनिया है?" आर्यन ने चिल्लाकर पूछा, उसका हाथ अनजाने में ही गले में लटके उस ल़ॉकेट पर चला गया। ल़ॉकेट अब ठंडा था, लेकिन उससे एक अजीब सी धड़कन महसूस हो रही थी।
​नकाबपोश हंसा, उसकी हंसी सूखी हड्डियों के टकराने जैसी थी। "तुम जिसे 'दुनिया' कहते हो, वह तो बस एक पर्दा है। तुम अभी 'काल-शून्य' (Time Void) में हो। यहाँ न कल है, न आज। यहाँ सिर्फ वह सत्य है जिसे तुम स्वीकार नहीं करना चाहते।"
​तभी, आर्यन के पैरों के नीचे का पत्थर का टुकड़ा कांपने लगा। सामने की धुंध छँटी और एक विशालकाय काली परछाईं उभरी। वह परछाईं धीरे-धीरे ठोस होने लगी और आर्यन के ही कद-काठी के एक युवक में बदल गई। लेकिन उस युवक की आँखें पूरी तरह सफेद थीं।
​"यह तुम्हारा 'अतीत' है, आर्यन," नकाबपोश ने फुसफुसाते हुए कहा। "अगर तुम इसे नहीं हरा पाए, तो तुम कभी अपने पिता तक नहीं पहुँच पाओगे। क्योंकि इस कालचक्र को आगे बढ़ाने के लिए रक्षक को खुद अपने अस्तित्व के अंधेरे से लड़ना होता है।"
​रक्षक का रक्त और कालचक्र
​वह परछाईं (आर्यन का अतीत) बिजली की गति से आगे बढ़ी। उसके हाथ में वही खंजर था जिसे आर्यन ने आईने में देखा था। आर्यन ने बचने की कोशिश की, लेकिन पत्थर की सतह इतनी चिकनी थी कि वह फिसल गया। खंजर उसकी बाजू को छूता हुआ निकल गया।
​दर्द की एक लहर आर्यन के शरीर में दौड़ गई। लेकिन जैसे ही उसका खून पत्थर पर गिरा, एक चमत्कार हुआ। जहाँ-जहाँ खून की बूंदें गिरीं, वहाँ से सुनहरी रोशनी की लकीरें फूटने लगीं। ल़ॉकेट फिर से गर्म होने लगा।
​"रक्षक का लहू!" नकाबपोश की आवाज़ में पहली बार डर सुनाई दिया। "नहीं! अभी समय नहीं हुआ है!"
​आर्यन को समझ आ गया कि यह ल़ॉकेट उसकी कमजोरी नहीं, उसकी ताकत है। उसने अपनी आँखें बंद कीं और उस डर को महसूस किया जो उसे सालों से सता रहा था—अपने पिता के खोने का डर। उसने उस डर को समेटा और ल़ॉकेट को कसकर पकड़ लिया।
​"मैं काल का गुलाम नहीं, उसका रक्षक हूँ!" आर्यन ने पूरी ताकत से चिल्लाते हुए ल़ॉकेट को अपनी छाती से सटा लिया।
​एक जोरदार धमाका हुआ। सुनहरी रोशनी ने उस अंधेरी दुनिया को चीर दिया। वह परछाईं चीखते हुए धुएं में बदल गई। नकाबपोश अजनबी पीछे की ओर उड़ता चला गया, उसका बचा हुआ मुखौटा भी चकनाचूर हो गया।
​रोशनी धीरे-धीरे कम हुई। आर्यन ने खुद को एक पुराने पुस्तकालय जैसी जगह में पाया। चारों तरफ धूल से भरी हज़ारों किताबें थीं। उसके सामने एक बड़ी सी मेज थी, जिस पर एक दीया जल रहा था।
​मेज के दूसरी तरफ एक व्यक्ति पीठ फेरकर बैठा था। वह कुछ लिख रहा था।
​"पिताजी?" आर्यन ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा।
​वह व्यक्ति धीरे से मुड़ा। आर्यन की सांसें रुक गईं। वह उसके पिता ही थे, लेकिन वे एक पल भी बूढ़े नहीं हुए थे। वे ठीक वैसे ही दिख रहे थे जैसे दस साल पहले गायब होने के दिन दिखते थे।
​"आर्यन... तुम यहाँ नहीं आना चाहिए था," उसके पिता ने उदासी भरी मुस्कान के साथ कहा।
​"मैं आपको बचाने आया हूँ! चलिए मेरे साथ!" आर्यन उनकी तरफ बढ़ा।
​लेकिन उसके पिता ने अपना हाथ उठाकर उसे रोक दिया। उन्होंने अपनी आस्तीन ऊपर की, और आर्यन ने जो देखा उससे उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसके पिता की कलाई पर वही अजीबोगरीब ज्यामितीय आकृतियाँ बनी थीं जो उस नकाबपोश के मुखौटे पर थीं।
​"मैं यहाँ कैद नहीं हूँ, आर्यन," उसके पिता ने ठंडी आवाज़ में कहा। "मैं ही इस कालचक्र का रचयिता हूँ। और जिस नकाबपोश से तुम लड़ रहे थे... वह कोई और नहीं, बल्कि भविष्य का तुम ही थे, जो मुझे इस चक्र को पूरा करने से रोकना चाहता था।"
​तभी पुस्तकालय की दीवारें दरकने लगीं। आर्यन के गले का ल़ॉकेट अब काला पड़ने लगा था। उसके पिता की आँखों का रंग अचानक नीला होने लगा—बिल्कुल उस नकाबपोश की तरह।
​"अब चुनाव तुम्हारा है, पुत्र। क्या तुम रक्षक बनोगे, या इस कालचक्र को तोड़ने वाले अपराधी?"
​बाहर से हज़ारों घंटों के बजने की आवाज़ आने लगी, जैसे पूरा बनारस एक साथ जाग गया हो। आर्यन के सामने उसके पिता खड़े थे, लेकिन उनकी परछाईं एक भयानक दानव की तरह फर्श पर फैल रही थी।
क्या आर्यन अपने ही पिता के खिलाफ खड़ा हो पाएगा? क्या वह नकाबपोश वाकई भविष्य का आर्यन था? और सबसे बड़ा सवाल—अगर कालचक्र का रचयिता ही रक्षक का दुश्मन बन जाए, तो दुनिया को कौन बचाएगा?