Shahad ki Gudiya - 22 in Hindi Detective stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (22)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (22)

          

              शहद की गुड़िया -- प्रकरण -22

         " गरिमा की सगाई टूट जाने की खबर मिलते ही दादू बिल्कुल हटप्रभ हो गये थे. "

          " ऊस समय एक स्कूली यार ने तेल में घी डालने की दुष्टता की थी, जिस की वजह से दादू की तबियत ओर ख़राब हो गई थी. ऊस ने कहीं बात दादू के मन में समा चुकी थी. ऊस ने आगाज किया था."

           " तुम्हारे सारे दोस्त निठल्लू और बेकार हैं, किसी पर भरोसा मत करना. "

            " यह बात भी दादू के जहम में जहर की तरह फेल गई थी. "

             " उन का सभी मित्रो पर से विश्वास उठ गया था. और गरिमा की सगाई की बात गलत होने का ख्याल उन के झहम में घर गया था. "

             " ऊस में रिजल्ट के पहले गरिमा दादू को अपनी छोटी बहन के साथ रास्ते में मिल गई थी.. उन्होंने पास होने का अभिनन्दन दिया था. और साथ में जानकारी व्यक्त की थी. "

            " दो स्टूडेंट नापास हुए हैं और उन के दुख प्रगट किया था. "

             " उन के दोस्त की शादी होने वाली थी. लड़का उसी की बिरादरी का था और गरिमा ने उसे देखा था. दादू ने उसे दोस्त की शादी के लिये इन्वाइट किया था तो ऊस ने कहां था. "

              " मैं तो उसे पहचानती नहीं तो कैसे आ सकती हूं? "

               " तुम आ जाओ, पहचान हो जायेगी. मैं तुम्हे कल इनविटेशन कार्ड दे दूंगा. "

                " ठीक हैं कल इसी समय आप को यहाँ मिलूंगी आप मुझे कार्ड दे दे देना. "

                " ऊस पर दादू बहुत खुश हो गये थे. उन्हों ने अपने ऊस दोस्त के घर जाकर कार्ड ले लिया था. और दूसरे दिन अपने स्कूली यार के साथ ऊस जगह पहुंच गये थे. एक घंटे का इंतजार किया था लेकिन वह नहीं आई थी. "

                 " ऊस ने दादू को नाराज कर दिया था. "

                  शादी में उन के एक प्रोफेसर भी मौजूद थे. दादू ने दो बिछड़ हुए लोगो के मिलन को लेकर एक गीत लिखा था. शादी में भी दो अकेले लोगो का मिलन होता हैं. ओर मैं शादी में यह गीत सुनाता चाहता था. मैंने प्रोफेसर को अपील की थी, लेकिन उन्हों ने कोई दयान नहीं दिया था. "

                 " ऊस के बाद दादू की हालात बिगड गई थी. स्कुल के दोस्त ने उन्हें होरोस्कोप की किताब दिलाई थी. ऊस में साफ लिखा था, तुम जिसे चाहते हो ऊस के साथ तुम्हारी शादी होगी. "

              " इस बात ने भी दादू को गरिमा की सगाई की बात नहीं मानने के लिये उकसाया था. और वह ऊस से शादी करने की जिद पकडकर बैठ गये थे. "

             " इस हालात में उन के दोस्त कोलेज क्लार्क से गरिमा का पता लेकर ऊस के घर पहुंच गये थे. "

              " ऊस को सारी बात बताई थी, और ऊस ने फोन पर दादू से बात की थी और दूसरे दिन घर आने का वादा किया था : "

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          " और दूसरे दिन ठीक दो बजे अपनी सहेली को साथ लेकर दादू के घर आई थी. "

          " दादू  ऊस वक़्त गरिमा के इंतजार में बाहर चाली में खडे थे. और रेडियो पर गीत बज़ रहा था."

          " बहारो फूल बरसाओ मेरा मेहबूब आया हैं "

           ऊस गीत ने दादू को जोश दिलाया था की उन की शादी गरिमा से ही होगी. "

            " वह दादू के कमरे में दाखिल हुई थी, घर में बहुत लोग उन के पिताजी ने जमा कर दिये थे. दादू ने ऊस की आगता स्वागता की थी. और बताया था की उन्हें कुछ नहीं हुआ था घर वालों ने उन्हें बेकार में बीमार क़र दिया था! "

            " उन्होंने बिना कुछ कहे गरिमा को कहां था.

            " चलो भीतर, हम भगवान का आशीर्वाद अर्जित करते हैं. "

            " ऊस वक़्त अनन्या भी वहाँ मौजूद थी ऊस ने दादू को रोकते हुए कहां था. "

             " रुको! गरिमा को कुछ कहना है. "

              " हा बोलो. "

               " मेरी सगाई हो गई हैं. "

               " ऊस वक़्त अनन्या ने उन्हें कहां था. अब तो वह तुम्हारी बहन हो गई ना? ऊस से राखी बंधवालों. "

               " और दादू ने तुरंत अपना दाया हाथ आगे बढ़ा दिया था. "

                " लेकिन गरिमा ने उन्हें राखी नहीं बांधी थी.. "     

                " दादू तुरंत भीतर चले गये और नत मस्तक होकर माफ़ी मांगी. और जाहिर किया. "ईश्वर गरिमा मेरी बहन हैं. "

               " बाहर आकर उन्होंने ने माथे पार हाथ रखकर सौगंध खाई : थी

               " अब से तुम मेरी बहन हो मैं कभी दूसरी नजर से नहीं देखूंगा अगर ऐसा हुआ तो मैं यह दुनिया छोड़ दूंगा. "

            " और वह ' जाती हूं कहकर चल गई थी.."

             " ऊस के जाने के बाद दादू बहुत दुखी हो गये थे. वह अलमारी पर जोर जोर से अपने पैर मारकर छोटे बच्चे की तरह रोने लगे थे. उन की इस हालत से सब कोई परेशान हो गये थे. उन के रोने की आवाज नीचे गरिमा के कानो तक पहुंची थी. पल भर ऊस के कदम जमीन से चिपक गये थे. ऊस वक़्त ऊस की सहेली हाथ पकडकर उसे बिल्डिंग से बाहर ले गई थी.  "

              " दूसरे दिन सुबह चाली के कथघरे से एक राखी मिली थी. जिसे देखकर दादू का दुख और बढ़ गया था. गरिमा राखी लेकर आई थी लेकिन उसे राखी नहींबांधी थी. मतलब वह राखी के भी लायक नहीं थे. उन्होंने अपनी पीड़ा अपनी मा को बताई थी ओर पूछा था. "

              " क़्या मेरी हरकत राखी के काबिल भी नहीं थी? "

               " तब मा ने उन्हें समजाया था.. "

                " बेटा तुमने बड़ी आसानी से उसे बहन स्वीकार लिया ऊस स्थिति में राखी के लिये कोई अवकाश ही नहीं बचा था. "

             " ऊस वक़्त दादू को दो बातें समझ नहीं आई थी. ज़ब वह उन के नसीब में ही नहीं थी. तो ऊस वक़्त आकाश वाणी रेडियो पर ईश्वर ने यह गीत क्यों प्रसारित किया था.. "

             " बहारो फूल बरसाओ मेरे मेहबूब आया हैं. "

              "और होरो स्कोप में क्यों लिखा था, तूम जिसे चाहते हो ऊस से शादी होगी. "

                      000000000000  (क्रमशः)