मेरी शादी इतनी जल्दी तय हो जाएगी, ये मैंने कभी सोचा भी नहीं था।
सब कुछ जैसे अचानक हुआ… और मैं बस हालात के साथ बहता चला गया।
मैंने उसे सिर्फ एक बार देखा था।
वो भी कुछ मिनटों के लिए।
लेकिन उन कुछ मिनटों में ही मुझे एक अजीब सा एहसास हुआ था।
उसकी आँखें… बहुत ठंडी थीं।
ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे देख नहीं रही… बल्कि मेरे अंदर तक झाँक रही हो।
उस नजर में कुछ ऐसा था, जिसने मुझे अंदर से बेचैन कर दिया था।
मैंने उस बात को नजरअंदाज कर दिया।
सोचा, शायद शादी का तनाव होगा।
शादी का दिन आ गया।
घर में चारों तरफ खुशियों का माहौल था।
रिश्तेदार, दोस्त, हँसी-मज़ाक… सब कुछ बिल्कुल सामान्य था।
लेकिन जैसे ही रात हुई… सब बदल गया।
मैं अपने कमरे में अकेला बैठा था।
दिल तेज धड़क रहा था… शायद घबराहट थी।
कमरे में फूलों की हल्की खुशबू थी, लेकिन ना जाने क्यों… मुझे अजीब सा डर महसूस हो रहा था।
तभी दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला…
वो अंदर आई।
लाल साड़ी में वो बेहद खूबसूरत लग रही थी…
लेकिन उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
ना झिझक… ना मुस्कान… बस एक अजीब सी खामोशी।
कमरे का माहौल अचानक भारी हो गया।
मैंने हिम्मत करके पूछा,
“तुम ठीक हो ना?”
वो कुछ सेकंड तक चुप रही…
फिर धीरे से मुस्कुराई।
लेकिन उसकी वो मुस्कान… सामान्य नहीं थी।
उसमें कुछ डरावना था।
अचानक कमरे की लाइट अपने आप बंद हो गई।
मैं घबरा गया।
“ये क्या हुआ?” मैंने जल्दी से कहा।
अंधेरे में उसकी आवाज़ सुनाई दी…
लेकिन वो आवाज़ उसकी नहीं थी।
वो भारी… और डरावनी थी।
“तुम सच जानना चाहते हो?”
मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
हाथ काँपने लगे।
मैंने जल्दी से लाइट ऑन करने की कोशिश की…
जैसे ही रोशनी हुई…
मैं वहीं जम गया।
उसकी आँखें पूरी तरह काली हो चुकी थीं।
वो बिना पलक झपकाए मुझे घूर रही थी।
उसका चेहरा धीरे-धीरे बदल रहा था… जैसे वो अपना असली रूप दिखा रही हो।
मैंने डरते हुए पूछा,
“तुम… तुम हो कौन?”
वो कुछ पल चुप रही…
फिर अचानक जोर से हँसने लगी।
उसकी हँसी इतनी डरावनी थी कि मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
“मैं वही हूँ… जिससे अब तुम्हारी जिंदगी जुड़ी है…”
उसने धीरे से कहा।
अचानक दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
कमरे की हवा एकदम ठंडी हो गई।
मैं पीछे हटना चाहता था… लेकिन मेरे पैर जैसे जम गए थे।
उसने धीरे-धीरे मेरी तरफ कदम बढ़ाया।
हर कदम के साथ मेरा डर बढ़ता जा रहा था।
अब मुझे समझ आ चुका था…
मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती हो चुकी है।
मेरी शादी…
किसी इंसान से नहीं हुई थी।
और उस रात…
मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी।
मैंने हिम्मत जुटाकर एक कदम पीछे लिया, लेकिन तभी उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
उसका स्पर्श… बर्फ की तरह ठंडा था।
मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी झनझनाहट फैल गई।
“भागने की कोशिश मत करो…”
उसने धीमी लेकिन डरावनी आवाज़ में कहा।
मैंने डर के मारे उसकी तरफ देखा।
अब उसका चेहरा पूरी तरह बदल चुका था।
उसकी आँखों में सिर्फ अंधेरा था…
और उसकी मुस्कान अब और भी खतरनाक लग रही थी।
मैंने पूरी ताकत लगाकर अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की…
लेकिन उसकी पकड़ और मजबूत होती जा रही थी।
अचानक कमरे में रखी चीजें अपने आप हिलने लगीं।
काँच का गिलास जमीन पर गिरकर टूट गया।
मेरी साँसें तेज हो गईं।
“तुम अब मेरे हो…”
उसने धीरे से कहा।
उसकी बात सुनकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये सब सपना है या हकीकत।
लेकिन एक बात साफ थी…
मैं अब एक ऐसे जाल में फँस चुका था,
जहाँ से निकलना शायद नामुमकिन था।
और असली डर…
अभी शुरू हुआ था।
(Next Chapter Coming Soon…)