The Allure of Rashili Bhabhi in Hindi Comedy stories by Md Siddiqui books and stories PDF | रशीली भाभी का जलवा

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रशीली भाभी का जलवा

यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है। इसका वास्तविक जीवन या किसी व्यक्ति, स्थान या घटना से कोई संबंध नहीं है


नूरनगर एक छोटा सा शहर जहाँ खबरें हवा से भी तेज फैलती थीं।
लेकिन कुछ महीनों से एक ही नाम हर गली हर नुक्कड़, हर चाय की दुकान पर गूंज रहा था 
 रशीली भाभी

अब ये नाम क्यों पड़ा ये तो कोई ठीक से नहीं जानता था

लेकिन जिसने भी उन्हें देखा बस देखता ही रह गया 
उनकी चाल में ऐसा आत्मविश्वास था कि लगता था जैसे सड़क भी उनके लिए बिछी हो
और उनकी मुस्कान वो तो जैसे सीधे दिल पर वार करती थी।


एक दिन नूरनगर की सबसे मशहूर चाय की दुकान कल्लू टी स्टॉल पर हमेशा की तरह भीड़ लगी थी।
पप्पू गुड्डू और टिल्लू तीनों बैठे गप्पें मार रहे थे।
तभी
धीरे-धीरे एक खुशबू आई
फिर कदमों की आहट
और सबकी नजरें एक साथ उसी तरफ घूम गईं।
रशीली भाभी आ चुकी थीं।
पप्पू ने धीरे से कहा:
भाई ये कौन है
गुड्डू:
नई आई लगती है लेकिन एंट्री तो हीरोइन जैसी है
टिल्लू (दिल पकड़कर)
मुझे तो अभी से प्यार हो गया 
भाभी का अंदाज़ 
रशीली भाभी ने चाय वाले को देखा और हल्की मुस्कान दी
भैया, एक स्पेशल चाय बना दोगे
कल्लू तो जैसे फ्रीज ही हो गया 
ह हाँ भाभी अभी लाया
बस भाभी शब्द वहीं से शुरू हुआ और पूरे शहर में फैल गया।
भाभी ने एक नजर चारों तरफ डाली
और फिर पप्पू की तरफ देखते हुए बोली
आप लोग यहाँ रोज आते हो
पप्पू का गला सूख गया 
ह हाँ मतलबnकभी-कभी
भाभी मुस्कुराई
अच्छा है अच्छे लोग लगते हो
बस यही लाइन काफी थी।
तीनों दोस्त उसी वक्त अच्छे लोग बनने के लिए तैयार हो गए 


कुछ दिनों में रशीली भाभी पूरे मोहल्ले में फेमस हो गईं।
वो हर किसी से मीठी बातें करती
हल्की-हल्की शरारती नजरें डालती
और सामने वाला खुद ही उनसे जुड़ता चला जाता।
एक दिन उन्होंने पप्पू को अलग बुलाया।
पप्पू जी आपसे एक काम था
पप्पू
आप बस बोलिए मैं सब कर दूंगा
भाभी ने थोड़ा पास आकर धीरे से कहा:
दरअसल मुझे थोड़ा पैसों की जरूरत है एक छोटा सा काम है बाद में दोगुना करके लौटा दूंगी
पप्पू के दिमाग में कुछ नहीं बस भाभी की आवाज गूंज रही थी 
कितना चाहिए
बस 10,000
पप्पू ने बिना सोचे दे दिए।

दो दिन बाद
पप्पू पैसे लेने गया — भाभी गायब।
उधर गुड्डू और टिल्लू भी परेशान थे।
गुड्डू बोला:
यार उसने मुझसे भी 15,000 लिए थे
टिल्लू
अबे! मुझसे तो 25,000 और बोली थी मैं ही खास हूँ
तीनों एक-दूसरे को देखते हैं
हम सब कट गए
पूरी चाय की दुकान हंसी से गूंज उठती है।
भाभी का असली खेल 
असल में रशीली भाभी कोई साधारण महिला नहीं थी।
वो शहर-शहर घूमकर लोगों को अपने अंदाज़ से फँसाती
थोड़ा भरोसा थोड़ा फ्लर्ट और फिर पैसा लेकर गायब।
हर शहर में उनका नया नाम नया किरदार होता।
कहीं वो सीमा भाभी
कहीं पूजा मैडम
और यहाँ रशीली भाभी


अब बारी थी नए शिकार की — राजू सेठ।
शहर का अमीर आदमी लेकिन दिल का थोड़ा कमजोर 
भाभी ने उसे मार्केट में रोका
सेठ जी आपसे एक जरूरी बात करनी थी
राजू सेठ तो पहले ही फिदा था 
आप कहिए
भाभी ने धीरे-धीरे अपनी कहानी सुनाई 
मैं एक छोटा सा बिज़नेस शुरू करना चाहती हूँ लेकिन भरोसेमंद इंसान नहीं मिल रहा
राजू सेठ
मैं हूँ ना आपके साथ
भाभी मुस्कुराई
मुझे पता था आप ही मदद करोगे
बस 50,000 का खेल हो गया।

धीरे-धीरे शहर में शिकायतें बढ़ने लगीं।
हर कोई एक ही बात कह रहा था 
एक खूबसूरत भाभी आई… पैसे लिए और गायब हो गई
पुलिस के पास भी कई केस पहुंच गए।
एंट्री इंस्पेक्टर विक्रम 
केस मिला इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को।
वो समझ गया 
ये कोई आम ठगी नहीं ये दिमाग और अंदाज़ का खेल है
उसने फाइल देखी
हर जगह एक ही पैटर्न
पहले दोस्ती
फिर भरोसा
फिर पैसा
और फिर गायब
विक्रम मुस्कुराया:
अब देखता हूँ ये खेल कितने दिन चलता है
भाभी की चाल 
उधर रशीली भाभी फिर से नई प्लानिंग में लगी थी।
नूरनगर में अब ज्यादा दिन रुकना ठीक नहीं
उन्होंने सोचा।
लेकिन जाते-जाते एक आखिरी बड़ा शिकार करना था 

उसी समय शहर में एक नया अमीर आदमी आया 
विक्रम मल्होत्रा (असल में इंस्पेक्टर विक्रम का ही भेस)
महंगे कपड़े बड़ी गाड़ी और रौबदार अंदाज़।
भाभी ने दूर से ही देख लिया ये तो बड़ा मालदार लगता है
खेल शुरू 
भाभी उसके पास गई लगता है आप नए हैं शहर में
विक्रम (मुस्कुराते हुए)
और लगता है आप यहाँ की सबसे खास हैं
दोनों की नजरें मिलीं
और यहीं से शुरू हुआ असली खेल