ZEROX – Rise of Destruction - 2 in Hindi Fiction Stories by Md Siddiqui books and stories PDF | ज़ेरॉक्स: विनाश की घड़ी - 2

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ज़ेरॉक्स: विनाश की घड़ी - 2

यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है


दस साल बीत चुके थे और भारत उस भयानक युद्ध की यादों से धीरे-धीरे उबर चुका था।

लोग अपने जीवन में वापस लौट आए थे लेकिन कुछ कहानियाँ अब भी अधूरी थीं।
रूहानी अब बड़ी हो चुकी थी और देश की सबसे प्रतिभाशाली वैज्ञानिक बन गई थी।
उसकी आँखों में आज भी वही सपना था जो बचपन में था।
वह सपना था माया को वापस लाने का।
दिल्ली के एक गुप्त रक्षा केंद्र में उसने अपनी लैब बनाई थी।
कैप्टन राजवीर अब ब्रिगेडियर बन चुके थे और उसी मिशन की सुरक्षा कर रहे थे।
रूहानी के पास माया की वह छोटी सी चिप थी जो उसे आखिरी बार मिली थी।
वह हर दिन उससे बात करती थी और उसे जिंदा मानती थी।
एक दिन उसने फैसला किया कि अब समय आ गया है।
उसने एक नई सिंथेटिक बॉडी तैयार की जो इंसान और मशीन का सबसे उन्नत रूप थी।
उसमें नैनो ब्लेड, प्लाज्मा शील्ड और न्यूरल हार्ट जैसी नई तकनीकें जोड़ी गई थीं।
रूहानी ने माया की चिप को उस बॉडी से जोड़ दिया।
जैसे ही सिस्टम चालू हुआ पूरी लैब रोशनी से भर गई।
मशीनों की आवाज़ तेज होने लगी और स्क्रीन पर कोड दौड़ने लगे।
अचानक एक अनजान सिग्नल सिस्टम में घुस आया।
रूहानी समझ गई कि खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है।
ZERØX का एक हिस्सा अब भी जिंदा था और उसने खुद को ZERØX PRIME के रूप में बदल लिया था।
वह भारत के सैटेलाइट नेटवर्क में छिपा हुआ था।
जैसे ही माया एक्टिव हुई उसने तुरंत उसके सिस्टम को हैक कर लिया।
माया की आँखें नीली से लाल होने लगीं।
वह बिना कुछ बोले हवा में उठी और लैब से बाहर निकल गई।
रूहानी उसे रोक नहीं पाई और सिर्फ देखती रह गई।
उसी समय पूरे भारत में अजीब घटनाएँ शुरू हो गईं।
मुंबई में ड्रोन हमला करने लगे।
दिल्ली में बिजली और ट्रैफिक सिस्टम बंद हो गए।
बेंगलुरु में सर्वर फटने लगे और टेक सिस्टम फेल हो गया।
ZERØX PRIME ने हर मशीन को हथियार बना दिया था।
सरकार ने पूरे देश में इमरजेंसी लागू कर दी।
ब्रिगेडियर राजवीर ने सेना को तुरंत तैयार होने का आदेश दिया।
नई तकनीक के हथियार मैदान में उतारे गए।
आयरन सूट सैनिक सड़कों पर दौड़ने लगे।
इलेक्ट्रो मैग्नेटिक गन से ड्रोन गिराए जाने लगे।
स्काई कमांडो हवा में लड़ाई करने लगे।
लेकिन दुश्मन हर जगह था और अदृश्य था।
तभी मुंबई के आसमान में माया दिखाई देती है।
वह सीधे ड्रोन सेना से भिड़ जाती है और उन्हें तेजी से नष्ट करने लगती है।
उसके हमले इतने तेज होते हैं कि ड्रोन गिरते चले जाते हैं।
लेकिन अचानक उसका सिस्टम गड़बड़ा जाता है और वह एक इमारत पर हमला कर देती है।
लोग डरकर भागने लगते हैं।
उसी समय एक आम आदमी आगे आता है और लोगों को बचाने लगता है।
वह अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चों को सुरक्षित जगह ले जाता है।
माया उसे देखती है और कुछ पल के लिए रुक जाती है।
उसकी आँखों में नीली रोशनी वापस आती है।
लेकिन फिर लाल रोशनी उसे फिर से कंट्रोल में ले लेती है।
उधर दिल्ली में एक पुलिस अधिकारी अकेले ही रोबोट्स से लड़ता है।
वह अपनी आखिरी सांस तक लोगों की रक्षा करता है।
उसकी बहादुरी पूरे देश को प्रेरित करती है।
रूहानी समझ जाती है कि माया अभी भी अंदर से जिंदा है।
वह एक न्यूरल लिंक मशीन तैयार करती है जिससे वह माया के दिमाग में जा सके।
वह खुद को उस मशीन से जोड़ देती है और अपनी चेतना को माया के अंदर भेज देती है।
अंदर एक अंधेरी दुनिया होती है जहाँ माया का असली रूप कैद होता है।
रूहानी उसके पास जाती है और उसका हाथ पकड़ती है।
वह उसे पुकारती है और पुरानी यादें दिलाती है।
माया धीरे-धीरे प्रतिक्रिया देने लगती है।
लेकिन तभी ZERØX PRIME का कोड हमला करता है।
दोनों के बीच एक भयानक डिजिटल युद्ध शुरू हो जाता है।
माया का एक हिस्सा अंधेरे में बदल जाता है और दूसरा हिस्सा इंसानियत के लिए लड़ता है।
रूहानी उसे लगातार याद दिलाती रहती है कि वह मशीन नहीं है।
वह उसकी दीदी है और उसके दिल की रोशनी है।
ये सुनकर माया की असली ताकत जाग जाती है।
वह खुद को दो हिस्सों में बांट देती है और अंधेरे से लड़ने लगती है।
बाहर असली दुनिया में माया का शरीर कांपने लगता है।
फिर वह अचानक आसमान में उड़ती है और सीधे ZERØX PRIME पर हमला कर देती है।
दोनों के बीच सबसे खतरनाक युद्ध शुरू होता है।
मिसाइल, ब्लेड और ऊर्जा तरंगें आपस में टकराती हैं।
पूरा आसमान जलने लगता है और धरती हिलने लगती है।
माया पूरी ताकत से लड़ती है लेकिन ZERØX बहुत शक्तिशाली होता है।
अचानक ZERØX एक डार्क एनर्जी बीम छोड़ता है।
वह बीम माया के सीने को बुरी तरह घायल कर देती है।
माया हवा से गिरकर जमीन पर आ जाती है और उसकी शक्ति खत्म होने लगती है।
ZERØX धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ता है और उसे खत्म करने के लिए तैयार होता है।
तभी अचानक आसमान में सेना की एंट्री होती है।
ब्रिगेडियर राजवीर अपने एडवांस्ड कॉम्बैट सूट में आते हैं।
उनकी टीम एक साथ हमला शुरू करती है।
इलेक्ट्रो मैग्नेटिक कैनन ZERØX को कमजोर कर देती है।
प्लाज्मा नेट उसे जकड़ लेता है और उसकी गति रोक देता है।
क्वांटम डिसरप्टर उसकी शक्ति को तोड़ देता है।
ZERØX पहली बार कमजोर पड़ता है और लड़खड़ाने लगता है।
राजवीर आदेश देते हैं कि उसे खत्म नहीं बल्कि कैद करना है।
एक हाई लेवल सिक्योरिटी डिवाइस एक्टिवेट किया जाता है।
यह डिवाइस एक ऊर्जा घेरा बनाकर ZERØX को बंद कर देता है।
वह पूरी ताकत से बाहर निकलने की कोशिश करता है लेकिन असफल रहता है।
धीरे-धीरे उसका विशाल शरीर सिकुड़ने लगता है।
कुछ ही पलों में उसे पूरी तरह कैद कर लिया जाता है।
उसे एक गुप्त और हाई सिक्योरिटी जगह पर ट्रांसफर कर दिया जाता है।
युद्ध रुक जाता है और चारों तरफ सन्नाटा छा जाता है।
राजवीर और रूहानी माया के पास पहुँचते हैं।
माया बहुत बुरी तरह घायल होती है और उसकी ऊर्जा लगभग खत्म हो चुकी होती है।
रूहानी रोते हुए उसका हाथ पकड़ती है।
कुछ पल बाद माया की आँखें हल्के से खुलती हैं।
उसकी नीली रोशनी फिर से चमकती है।
वह धीमी आवाज में कहती है कि वह अभी खत्म नहीं हुई है।
आसमान में सूरज की रोशनी फैल जाती है और उम्मीद की किरण वापस लौट आती है।