TREFIK KA CHAKKAR HAR KOI GHANCHAKKAR in Hindi Comedy stories by Yashvant Kothari books and stories PDF | ट्रैफिक का चक्कर, हर कोई घनचक्कर

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ट्रैफिक का चक्कर, हर कोई घनचक्कर

व्यंग्य -

ट्रैफिक का चक्कर, हर कोई घनचक्कर

यशवंत कोठारी

जहाँ खाकसार का गरीब खाना है वहां पर सड़क पर  पैदल चलना लोहे के चने चबाने जैसा है .इस सड़क पर अक्सर या तो जाम लगा रहता है ,या ट्रेफिक को वीआइपी मूवमेंट के नाम से बंद कर दिया जाता है ,हालात इतने ख़राब  है की रस्से से चोराहों पर आम वाहन चालक को रोक दिया जाता है व सिविल पुलिस व ट्रेफिक पुलिस के जलवे देखते ही बनते हैं. .सिविल पुलिस  कानून व्यवस्था देखती है और ट्रेफिक वाले ट्रेफिक को सँभालते हैं.

हर समय वीआई पी मूवमेंट चलता है एक गाड़ी उठाने वाली क्रेन भी सड़क पर मोर्चे पर हर समय खड़ी रहती है .कौन सा रास्ता कब बंद हो जायगा कोई नहीं जानता .

अक्सर आते जाते लोग ट्रेफिक वालों से बहस करते दिख जाते हैं चालान बनते बिगड़ते रहते हैं आज कल तो तुरंत एस एम एस पर चालान आ जाता है .बहस करने पर गाड़ी  जब्त होने का खतरा रहता है .क्रेन गाड़ी उठा ले जाये तो डबल मुसीबत हो जाती है .

कैसे बचे कुछ समझ में नहीं आता करे तो क्या करे ,सड़क पर खतरे ही खतरे .

कल फिर ट्रैफिक वाले से मुठभेड़ हो गयी.मैं अपने खडखडिया पुराने एक्टिवा से जा रहा था ,उसने रोका मैं रुका नहीं, आगे के पुलिस वाले ने फिर रोक दिया.

हेलमेट कहाँ है ?

पीछे की सवारी ने भी हेलमेट नहीं पहना है .

 मैंने चुप रहना ही बेहतर समझा  उसने  ज्ञान बाँटना शुरू किया- हेलमेट चालान के लिए नहीं हुज़ूर की सुरक्षा के लिए है कभी  भी सड़क पर राम नाम सत्य हो जायगा ,घर वाले ढूंढते  ही रह जायेंगे  .

चलो प्रदूषण प्रमाण पत्र के कागज़ दिखाओ .

वो भी नहीं है , आर सी है ?

नहीं वो भी एक्सपायर हो गयी ?

जी ख़तम हो चुकी है .

तो फिर अब जो चालान बनेगा उसकी कुल कीमत आप के इस खटारा की कीमत से ज्यादा होगी .

बोलो क्या करना है ?

मैंने दो चार जगह फोन लगाये मगर किसी  ने भी मदद नहीं की पुलिस के बड़े अफसरों के नाम लिए मगर ट्रेफिक हवालदार ने बताया -

सुबह ही साहब ने पूरी चालान बुक पर चिड़िया मार दी थी वो तो भरनी ही है साथ  में उनको  गिफ्ट भी  देनी है मेरे बच्चे की फ़ीस भी भरनी है  वे मिठाई   की भी  मांग कर रहे हैं बाकि आप खुद सोच लो  कोर्ट में चक्कर लगाते लगाते जूतें घिस जायेंगे फिर भी बरी नहीं हो पाओगे .

बोलो क्या करना है ?

मैं क्या बोलता,मैं तो पहले ही समर्पण कर चुका था .समर्पण में   सुख है यही दर्शन है .चुप ही रहा .

उसने शानदार तजबीज निकाली- एक रेड लाइट जम्प का चालान बना देता हूँ  दो सो का, दो सो मुझे दो और साहब के लिए भी इतने ही फिर आज दिन भर आप शहर में दनदनाते हुए जाओ ,एक दिन में हम लोग दो चालान नहीं बनाते.आराम से मौज करो .

यह तजबीज मुझे भी ठीक लगी मैंने हाँ भर दी हम दोनों  पास की गुमटी में आये सब काम निपटा लेकिन इस बीच हजारों  वाहन चालक कानून तोड़ते हुए निकल गए .कोई परवाह नहीं ,जिसका दिन ख़राब होता है जो फंस जाता है .एक सेकंड में मैं सौ सवारियां देखता हूँ इस शहर का ट्रेफिक केवल मेरे भरोसे हैं ,चालान तो बहाना है .हमने तो पैदल चलने वालों तक  के चालान बना दिए .कार वाले का हेलमेट का चालान और दुपहिया वाले का सीट बेल्ट का चालान तो रोज़ का किस्सा है .और ये तेने  अपने वाहन पर प्रेस लिखवा रखा है ,ये धोंस नहीं चलेगी शांति भंग और ब्लैक मैलिंग में तुमको अन्दर भी डाल सकता हूँ लेकिन बस एक चालान ,जाओ मस्त रहो .

ट्रेफिक वाले साहब ने मुझे थाने पर व्यंग्य नहीं लिखने की भी सलाह दी .सड़क पर चालान एक ऐसा जादू है जो काले जादू को भी पीछे छोड़ देता है .जब अदालतों में जजों पर जूते फेंके जा रहे हैं मंत्री पिट रहे हैं ऐसे माहोल में मात्र बिना रेड लाइट  जम्प किये रेड लाइट  जम्प का फर्जी चालान बना के लौट आना  प्रजा तंत्र की सफलता ही कही जायगी .क्यों साहब क्या ख्याल है आपका ?

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यशवन्त कोठारी ,701, golden fortune  SB-5 ,भवानी सिंह  रोड ,बापू नगर ,जयपुर -302015  मो.-94144612 07