शहद की गुड़िया - प्रकरण 29
" फिर तो हसमुख सुहानी का दिवाना हो गया था. वह रोज रात को घर में आता था , फिर भी सुबह में कोई न कोई बहाने ऊस के कोलेज जाते समय घर में आता था और ऊस के साथ कोलेज तक जाता था. "
" वह सुहानी के बारे में सब कुछ जानता था. इम्तिहान के दौरान दादू और सुहानी देर रात तक साथ बैठकर पढ़ाई करते थे. दादू ने भावुक होकर एक बार अपनी साली की गोद में सर रख दिया था और सुहानी ने उसे बड़े प्यार से सहलाया था. ऊस वक़्त एक ऊक्ति दादू को याद आती थी. "
" साली आधी घर वाली होती हैं. "
" दादू ने ऊस के साथ गलत हरकत की थी. सुहानी को गले भी लगाया था. ऊस ने कोई दिक्क़त नहीं जताई थी. और ऐसा दो तीन बार हुआ था जिस का दादू को अफ़सोस था. "
" सुहानी ने दादू की हरकत के बारे में बताया था और हसमुख को भी ऊस से सब कुछ करने का परवाना मिल गया था. वह भी सुहानी की छेड छाड़ करता था. दोनों का व्यवहार सुरेश भाई और ललिता बहन जैसा हो गया था. हसमुख की बीवी बहुधा गांव में रहती थी और उसे सुहानी से मनमानी करने का मौका मिल गया था.."
" महाबलेश्वर से दोनों अकेले मुंबई आये थे. ललिता पवार ने उसे बहुत छूट थी. वह अनीस के कारण जल्दी मुंबई आ गई थी और पुष्पा बहन- बड़ी मा के घर खाना पीना खाती थी और खुद अपने घर में अकेली रहती थी. हसमुख रोज उसे मिलने आता था और दोनों देर तक साथ में अकेले रहते थे. "
" वह सही नहीं था. खुद ऊस ने एक बार गाड़ी में मौका देखकर एक लड़की से दुर्व्यवहार किया था. और अपने मुंह से इकरार किया था. "
" सुहानी एक बार ऊस के साथ खाना खाने भी गई थी. अनीस के साथ ऊस का चक्कर चालू था. दादू ने कई बार उन्हें गलत करते हुए देखा था. "
" अनीस को भी वह हसमुख से मिलती थी, बातें करती थी यह बात पसंद नहीं थी. वह उसे रोकता था. लेकिन वह अपनी मा से कई गुना आगे निकल गई थी. ऊस का अनीस के साथ अफेयर्स चालू था फिर भी यकायक ऊस ने अपना प्रेमी बदल दिया था, पुराने प्रेमी के साथ हो गई थी. वह बिंदास्त थी. ऊस ने खुद दादू को बताया था. "..
" दादू उसे आरती के साथ उसे फ़िल्म देखने ले गए थे तो वह लड़का आया था. फ़िल्म खत्म होने के बाद सब लोग साथ घर को निकले थे तब सुहानी ने अपने जीवन की यह ट्विस्ट से आगाह किया था. "
" लेकिन यह ट्विस्ट ज्यादा देर टिकी नहीं थी. कुछ ही दिनों ने बड़ी मा ने दादू को बताया था.
" सुहानी प्रेग्नेंट है ऊस का गर्भ निकाल करवाओ और किसी को कानोकान खबर ना हो पाये. "
" दादू ने बहुत बड़ा जोखिम लिया था. "
" एक बार रात को सोये थे तो सुहानी रोती रोती उन के पास गई थी और दादू को बताया था : "नीचे कुछ लडके मेरे अनिस को मार रहे हैं. वह तुरंत उठकर कमीज पहनकर नीचे दौड़े थे और अनीस की बचाने लिये ऊन के साथ मारा मारी की थी. दादू को सिर से खून निकला था. उसे देखकर सुहानी रोने लगी थी. बात बढ़ गई थी और मुआमला पुलिस स्टेशन तक गया था. "
" ऊस के बाद हसमुख की वजह से उल्टा किस्सा घटा था. एक सुबह हसमुख सुहानी को नीचे बुलाकर बातें कर रहा था . ऐसी क़्या बात थी? जो वह घर में सब के सामने नहीं कर सकता था. दादू को कुछ संदेह हुआ था. अगले ही दिन साली बहनोई के बीच कुछ तकरार हुई थी. सुहानी उन के लिये सर दर्द बन गई थी इस हालत में दादू ने पहली बार सिगरेट मुंह लगाई थी. "
" ऊस बात को बताने के ऊस ने सुहानी को नीचे बुलाया था, ऊस के अलावा ही उन के लिये बातें करने के लिये उसे नीचे बुलाया था. वह बात में कोई शंका नहीं बची थी. सुहानी के ऊपर आते ही उन्होंने आरती को आदेश दिया था: " सुहानी को बुलाओ. "
" और वह तुरंत अपनी बहन को बुला लाई थी. और तुरंत घर में दाखिल हुई थी. ऊस के आते ही दादू ने सिगरेट का पैक फेंक कर बताया था."
" मुझे डॉक्टर के पास ले चलो मेरी तबियत ख़राब है. "
"यह सुनकर पिताजी को रोकते हुए सुहानी ने कहां था.
" ऊस का मतलब निकलता था दादू झूठ बोल रहे थे. सुनकर दादू को गुस्सा आया था और उन्होंने सुहानी के पेट पर लात मारी थी और वह रोती रोती अपने घर गई थी. वह अपनी मा के लेकर आई थी दादू ने उन्हें अपमानित कर के बाहर निकाल दिया था.
" और वह लोग दादू को पुलिस स्टेशन ले गये थे. "
" दादू को वोर्निंग देते हुए कहां था: "यह तुम्हारा पहला गुनाह हैं इस लिये छोड़ देते हैं. "
" तब दादू सत्यवादी हरीश चंद्र बन गये थे. "
" सर! यह मेरा पहला नहीं दूसरा गुनाह हैं.,
" सुनकर इंस्पेक्टर को भी ताजुब हुआ था.
" दादू को पुलिस स्टेशन ले गये तब उन की बिरादरी की एक औरत साथ में थी. वह दादू को दोषित मानती थी. लेकिन उन्होंने पुलिस को सारा लेखा सुनाया था, जिस से ऊस को यकीन हो गया था.. सारे मुआमले में दादू का कोई दोष नहीं था, वह केवल संजोगो के बलि चढ़ गए थे. "
" अपने ससुराल के बाजु में रहना दादू के खतरा बन रहा था. ऊस स्थिति में उन्होंने बोरिवली शिफ्ट किया था . "
000000000000 ( क्रमशः )