The beloved wife of two husbands - 18 in Hindi Love Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | दो पतियों की लाडली पत्नी - 18

Featured Books
Categories
Share

दो पतियों की लाडली पत्नी - 18


बाथरूम की लाइट हल्की-सी काँप रही थी।
Shreya वॉशबेसिन के सहारे खड़ी थी, एक हाथ से अपना पेट दबाए हुए। उसकी साँसें तेज़ थीं।
माथे पर पसीना और आँखों में डर। अचानक उसे तेज़ मिचली आती है। वो झुककर वॉशबेसिन की ओर उल्टी करती है। उसी पल उसकी नज़र अपनी उँगलियों पर जाती है— खून। 
Shreya घबरा जाती है।

Shreya (काँपती आवाज़ में) बोली - 
न… नहीं… ये क्या…?

वो जल्दी से नल खोलती है, पानी में हाथ धोती है,
लेकिन खून रुकने का नाम नहीं लेता।
उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है। वो शीशे में खुद को देखती है, चेहरा सफ़ेद पड़ चुका है, आँखों में डर साफ़ है।
Shreya दीवार के सहारे बैठ जाती है। एक हाथ पेट पर, दूसरा मुँह पर।

Shreya (फुसफुसाकर) बोली - 
ये अचानक… आज ही क्यों…?

बाहर से किसी के क़दमों की आहट आती है। Shreya घबराकर अपने आँसू पोंछती है, और बाथरूम का दरवाज़ा बंद ही रहने देती है।
कमरे में सन्नाटा है… लेकिन Shreya के अंदर तूफ़ान उठ चुका है।

Shreya (अंधेरे में फुसफुसाते हुए, अपने आप से) बोली - 
ये क्या हो रहा है…?
सिर्फ अभी…?

उसका दिल तेज़ धड़क रहा था।
Shreya थोड़ी देर के लिए सहम गई।
लेकिन एक ख्याल ने उसके दर्द को और गहरा कर दिया—

Shreya (मन में) बोली - 
दोनों पति… कितने खुश हैं…।
अगर उन्हें पता चला तो उनका दिन खराब हो जाएगा।
मैं चुप रहूँगी।

Shreya ने अपने आप से कहा—
“चुप ही रहूँगी…
मैं अपने दर्द को…
अपने आँसुओं को…
खुद संभालूँगी।”

वो अपने दोनों हाथों से चेहरा ढक लेती है। आँखें बंद कर के गहरी साँस लेती है, जैसे खुद को संभाल रही हो, जैसे टूटने से पहले खुद को जोड़ रही हो।
कुछ पल बाद वो बाथरूम से बाहर आती है। कदम बहुत हल्के हैं, आवाज़ न हो—इसका पूरा ख़याल।

वो चुपचाप अपने बेडरूम में जाती है।
और Kabir और Karan के पास आकर
उनके करीब सिमट जाती है, मानो सब कुछ बिल्कुल सामान्य हो।
Kabir और Karan दोनों उसके पास बैठे हैं।
दोनों के चेहरों पर वही सच्ची, बेफ़िक्र मुस्कान है—
वही खुशी जिसे Shreya ने कभी टूटने नहीं दिया…
और आज भी नहीं देने वाली थी।
Shreya चुपचाप बिस्तर पर लेट जाती है,
अपने छुपे हुए परेशानी के साथ सो जाती है।

लोग कहते हैं, ज़्यादा खुशी को नज़र लग जाती है…
शायद मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ।
लेकिन मैं चाहती हूँ…
कि उनके चेहरे पर हमेशा वही खुशी रहे…
चाहे मुझे कितना भी दर्द क्यों न हो।
Kabir और Karan ने Shreya को सिर्फ अपने हाथों से गले में लिया, बिना जाने कि उसके अंदर कितनी परेशानियाँ हैं।

Shreya का छुपाना और sacrifice एक छोटी सी रियलिटी है—
जो दिखती नहीं, लेकिन उसकी मोहब्बत और केयर की गहराई दिखाती है।

Kabir (चुपचाप Karan से) बोला - 
लगता है… Shreya अभी भी थोड़ी weak feel कर रही है, पर हमेशा के लिए नहीं।

Karan बोला - 
हाँ… बस हम उसके साथ हैं। बस यही काफी है।

Shreya ने अपनी आँखें बंद कर लीं, और दोनों की warmth में खुद को safe महसूस किया।

एक दिन Shreya डॉक्टर के पास गई।

डॉक्टर ने उसके टेस्ट और रिपोर्ट्स ध्यान से देखीं,
फिर गंभीर लहजे में Shreya से बोले—

Doctor बोली - 
Shreya, आपको एक rare और अजीब बीमारी है।
इसके कारण आपको सिर्फ migraine नहीं, बल्कि बहुत ज़्यादा दर्द होता है।
आपके periods में 4 गुना ज़्यादा दर्द होता है,
मुंह से खून आ सकता है,
बॉडी weak और टूटने जैसी महसूस करती है,
hallucinations भी हो सकती हैं,
और सीने में भी दर्द होता है।

Shreya डॉक्टर की ओर देखती रह गई, अंदर ही अंदर shock में। उसका दिल तेज़-तेज़ धड़कने लगा।
लगभग heart attack आने वाला था, लेकिन किसी तरह बच गई।

डॉक्टर से मिलने के बाद Shreya घर लौटी।
कदम भारी थे, लेकिन चेहरे पर वही पुरानी नरमी।

घर में दाख़िल होते ही उसने देखा—
Karan और Kabir दोनों मुस्कुराते हुए उसके लिए खाना लेकर आए थे। उनकी आँखों में खुशी थी,
जैसे बस उसका इंतज़ार ही कर रहे हों।

Karan बोला - 
लो, तुम्हारे लिए। आज तुम्हारी पसंद का बनाया है।

Kabir बोला - 
और हाँ… ज़्यादा बहस नहीं। पहले खाना।

Shreya ने कुछ नहीं कहा। बस हल्की-सी मुस्कान के साथ दोनों को प्यार से देखा—
वो मुस्कान, जिसमें दर्द छुपा था और मोहब्बत बेहिसाब।

उसने उनसे कुछ नहीं बताया। न डॉक्टर की बातें,
न रिपोर्ट्स का सच, न वो डर… जो अभी भी सीने में धड़क रहा था।

Shreya (अपने आप से, फुसफुसाकर) बोली - 
ये दर्द… ये कमजोरी…
उन्हें नहीं बताना।
उनकी खुशी और सुकून के लिए
मैं सब सह सकती हूँ।

वो उनके बीच बैठ गई, खाने की प्लेट हाथ में थी—
लेकिन दिल में एक ख़ामोश फ़ैसला।
कुछ सच ऐसे होते हैं जो कहे नहीं जाते… सिर्फ निभाए जाते हैं।

रात हुई।
Kabir और Karan दोनों सो चुके थे।
Shreya चुपचाप उनके बीच अपनी जगह लेती है।
बाहर सन्नाटा था, लेकिन उसके अंदर तूफ़ान।
रात भर उसका दर्द उसे तड़पाता रहा—
कभी सीने में, कभी पेट में, कभी सिर में…

 (Shreya की आवाज़) —
उनकी नींद और सुकून के लिए मैं चुप रही हूँ…
पर अपनी बॉडी का दर्द और कमजोरी मुझे रात भर तड़पाता है। ये बीमारी… ये दर्द… सिर्फ मेरा secret है।

Shreya ने अपनी आँखें बंद कर लीं। चुपचाप, दर्द में अपने आप को संभालते हुए, सांसें गहरी और स्थिर करने की कोशिश की।
Kabir और Karan ने उसकी किसी परेशानी को नहीं देखा। लेकिन उन्होंने उसे प्यार से अपने बीच रखा।
बस यही उनका pyar था, बिना कुछ जाने, बिना कुछ कहे।

Shreya का struggle और उसकी silent strength उसके प्यार और care को और गहरा बनाती है। बीमारी का दर्द, जो दिखाई नहीं देता,
लेकिन हर पल महसूस होता है… यही Shreya की असली bravery है।

Kabir (चुपचाप Karan से, सच को जाने बिना) 
बोला - 
उसके बिना हम incomplete हैं…
सोचता हूँ, काश हमेशा ऐसे खुश और healthy रहे।

Karan बोला - 
हाँ… बस हम उसके साथ हैं। यही काफी है।

Shreya चुपचाप उनके पास लेट जाती है।
अपना छुपा हुआ दर्द और प्यार अपने अंदर सँभाले हुए। और धीरे-धीरे, उन्हीं की warmth में सो जाती है।
रात के अंधेरे में Shreya को अपनी बीमारी का extreme pain महसूस होता है। पेट, सिर और सीने में दर्द एक साथ आता है।

Shreya अपने आप से internally कहती है—
मैं इतना दर्द नहीं सह पा रही…
पर उन्हें परेशान नहीं करना।

दर्द के तेज़ पल में वो instinctively Kabir के सीने से चिपक जाती है। Kabir की आँखें खुलती हैं…
और वो देखता है कि Shreya थोड़ी परेशानी के साथ उसके पास चिपकी हुई है।

Kabir (सोचता है, हल्की मुस्कान के साथ) बोला - 
शायद ये सिर्फ comfort के लिए है…
या शायद वो हम दोनों के करीब आना चाहती है।”

Shreya ने धीरे-धीरे अपनी position बदल दी
और Karan के सीने से चिपक गई।
Karan ने उसके बालों को हाथ से ठीक किया
और उसके सिर को अपने chest पर secure कर दिया।

Karan (अपने आप से, softly) बोला - 
लगता है… दर्द के अलावा भी कुछ है
जो उसे हमारे करीब ला रहा है।

Shreya दोनों के बीच होती है—
कभी Kabir के करीब, कभी Karan के करीब।

और दोनों यह naturally feel कर रहे हैं—
Shreya हमारे साथ रहना चाहती है…
हमारी warmth में safe feel करना चाहती है।

रात भर Shreya के छोटे-छोटे moans और सीने में चिपकने की movements दोनों पति को पता चलती हैं। लेकिन दोनों चुप रहते हैं और सिर्फ प्यार और care में उसे support करते हैं।

Kabir (सोचते हुए, Karan को देखते हुए) बोला - 
हमने हमेशा protect किया…
पर अब लगता है… Shreya हम दोनों के साथ emotionally और physically अपनी comfort ढूंढ रही है।

Karan (मुस्कुराते हुए) बोला - 
हाँ… जो distance पहले था… अब खत्म हो गया…
ये दर्द भी एक reason बन गया है हमारे और करीब आने का।

Shreya की आँखें धीरे-धीरे बंद हो जाती हैं।
दोनों पति उसे gently hold करके सो जाते हैं।

(Shreya का perspective)
जब दर्द बहुत बढ़ जाता है… तब मैं दोनों के करीब जाती हूँ। उनकी warmth… उनका प्यार… बस वही मुझे सुकून देता है। और शायद… यही मेरी strength है… कि मैं अपनी problems छुपाकर भी उनसे प्यार कर सकती हूँ।”

Narration (Kabir और Karan का perspective) —Shreya हमारे बीच है…
उसका दर्द हमेशा हमने feel किया,
पर अब हम जानते हैं…
हर pain के पीछे एक छुपी हुई love और trust होती है।