शहद की गुड़िया - प्रकरण - 30
" दादू बड़ी मा के कहने पर सुहानी को अपने घर ले आये थे. ज़ब से दादू ने ऊस के पेट पर लात मारी थी सुहानी ने उन के घर जाना बंद कर दिया था. इस लिये सुहानी को देखकर उन के माता पिता चकित हो गये थे. "
" जरूर कोई बात थी लेकिन वह अपने माता पिता को बता नहीं सके थे. लेकिन सारी बात उन्होंने ने अपनी डायरी में दर्ज कर ली थी और मा की नजर में आये ऐसे रख दी थी. "
" दूसरे दिन वह सुबह में सुहानी को लेकर मेटरनीटी होम पहुंचे थे.. "
" ऊस समय बिल्डिंग की एक औरत ने उन्हें सुहानी के साथ प्रसूति होम मे जाते हुए देखा था. वह क़्या सोचेगी? दादू को टेंशन आ रहा था. "
" वह तुरंत सुहानी को लेकर डोक्टर की केबिन मे दाखिल हुए थे. डोक्टर को बताया था.."
" डोक्टर यह मेरी बीवी आशा हैं. वह बहुत कमजोर हैं. प्रसूति करवाने के लिये असमर्थ हैं. हम लोग इस स्थिति मे बच्चा नहीं चाहते तो ऊस का क़्या इलाज हैं? "
" क्यूरिटीन!डोक्टर ने इलाज सुझाया था और खर्चा भी बताया था. "
" दादू! तैयार हो गये थे. उन्होंने पूछा था. " कितना समय लगेगा? "
" बस एक से डेढ़ घंटा और बाद मे दो तीन घंटा आराम आप तीन चार बजे घर जा सकते हो. "
" डोक्टर ने कुछ एडवांस मांगा था, और दादू ने वह दे दिया था. "
. " सुहानी को ओपरेशन थियेटर ले गये थे और दादू टेंशन मे आ गये थे."
" उन्होंने घर मे आरती को फोन किया था, तुम 300 रूपये लेकर उषा प्रसूति होम मे आ जाना. कैसा जीवन का यह मोड़ था. साली को बीवी बनाना पडा था और बीवी को भाई. "
" एक घंटे मे सुहानी पर क्यूरिटीन प्रक्रिया शुरू हो गई थी और दादू बड़े अस्वस्थ फील क़र रहे थे, डर रहे थे सुहानी को कुछ हो गया तो? "
" वहाँ की नर्स भी उन्हें देखकर परेशान हो रही थी. ऊस ने दादू को बार बार समझाया था. " डरो मत सब ठीक हो जायेगा. कलोरोफार्म की वजह से आप की बीवी बेहोश हैं. उन्हें भान मे आने को समय लगेगा. "
" ऊस वक़्त आरती भाभी बनकर प्रसूति होम आई थी वह खबर पूछकर, पैसे देकर चली गई थी. साथ मे ऊस ने कहां था तुम्हारे मम्मी पापा को कोई प्रोब्लेम नहीं हैं. वह आप जो क़र रहे हो ऊस बात से पूर्णतः सहमत हैं. "
" शाम को चार बजे सुहानी को लेकर वह घर पहुंचे थे तो घर मे उन की दो मौसरी बहने वहाँ पर मौजूद थी. दादू सुहानी को लेकर घर लौटे थे.. वह लोग नहीं जानते थे वह कौन थी. उस समय आरती ने खुलासा किया था.
" यह मेरी छोटी बहन हैं, हमारे मामा के घर आई थी. आप के भैया उसे यहाँ ले आये है. वह कुछ नादुरस्त हैं. "
" कुछ देर बैठकर वह चले गये थे. और गीता बहन ने अपने अच्छे कर्म के लिये शाबाशी दी थी. वह दादू के लिये बहुत बड़ा उपहार था."
" दादू ने सुहानी को संकट मुकत किया था. इस लिये वह बहुत खुश थी ऊस ने दादू की मनसा पूरी की थी. ऊस ने दादू को बड़ा भाई कहना कबूल किया था.. दादू ने उसे अपील की थी."
" मुझे राखी बांधो. "
" तब ऊस ने इन्कार करते हुए कहां था. "
" मेरी मा मना करती हैं. कहती हैं रिश्ते को बदलना नहीं चाहिए. भगवान ने हमें जो रूप मे भेजा है ऊस का हीं स्वीकार करो. "
" हसमुख भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखता था."
" ऊस वक़्त दादू को अपनी सांस की दो बातें याद आ रही थी. "
" एक तरफ वह बोलते थे स्त्री किसी को भी अरे अपने पति को भी राखी बांध सक्ती हैं और दूसरी और वह अपनी बेटी को जीजू को राखी बांधने के लिये रोक रही थी. "
" वाकई मे उन्हें राखी क़्या हैं ऊस की अहमियत का पता नहीं था. उन्होंने इस पवित्र धागे का अपमान किया था. अपनी हवस की आड़ मे भाई बहन के पवित्र रिश्ते को लांछन लगाया था. "
" अपनी सांस की बेतुकी बातों का दादू को कोई गम नहीं था. "
" सांस के मना करने पर उन्हें कोई अफ़सोस नहीं हुआ था. "
" सांस के बर्ताव को दादू ने नजर अंदाज किया था.."
" और वह खुश किस्मत दिन आया था.. एक लड़का सुहानी को देखने आया था. उसे सुहानी की प्रेगनेंसी का पता चल गया था.. और उन्होंने ने रिश्ते के लिये मना किया था.."
" तब ऊस का पुराना प्रेमी अनिकेत ऊस के साथ शादी करने को तैयार हो गया था. ऊस के पिताजी नहीं थे.. मा घर की मुख्या थी, ऊस ने बेटे को इस लिये शादी करने से मना किया था. क्यों की वह दोनों मा बेटी के सारे कारनामो से वाकिफ थी. "
" अनिकेत इतनी हद तक सुहानी से ओबसेस हो गया था, वह मा की मर्जी के खिलाफ सुहानी को ब्याह कर घर लाया था. घर ऊस के नाम से था तो मा और ऊस का भाई उसे घर से बाहर निकाल नहीं पाये थे.. "
" शादी को पांच साल हो गये थे लेकिन सुहानी ने कोई वारिस पैदा नहीं किया था. ऊस के सामने ऊस के छोटे भाई की बीवी ने दूसरे साल घर को वारिस दिया था और सुहानी की तरफ सासु मा लापरवाह हो गई थी. ऊस ने सुहानी को मानसिक त्रास देना शुरू किया था. उसे ठीक से खाना भी नसीब था. घर के सारे काम ऊस के सर लाद दिये थे. वह कमजोर, कंकाल जैसी हो गई थी.. ऊस की पूरी हड्डी या दिख रही थी. ऊस का कोई भरोसा नहीं था. भाऊ बीज के दिन दादू सुहानी के घर जाते थे. लेकिन यह सिलसिला बांज होने से खत्म हो गया था., "
" और वह ख़ुदकुशी कर के दुनिया छोड गई थी. नये साल के दिन ऊस की लाश बरामद हुई थी.
000000000 ( क्रमशः)