Ayaan: Fire of Hate and Search for Existence - 2 in Hindi Thriller by Irfan ayan Khan books and stories PDF | अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 2

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अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 2

अयान,अपनी झोपड़ी से बाहर निकला, तो सामने का नजारा किसी डरावने सपने जैसा था। वही पुरानी, संकरी गलियां जहाँ कीचड़ और नाले की बहती हुई गंदा पानी,अब उसके फटे हुए जूतों का हिस्सा बन गया था।

हवा में जो कभी विदेशी इत्र की महक हुआ करती थी, वहाँ अब सड़ी हुई मछलियों की तीखी गंध और समंदर का हैवानी शोर था। 

अयान का हर कदम भारी था, वह रास्ते से गुजरते हुए उन मछुआरों को देख रहा था। जो अपनी जालों से सड़े, महकते मछलियां निकलने में मशगूल थे। उनका चिल्लाना, समन्दर की रेत पर बच्चों का नंगे पैर  दौड़ना—यह सब अब अयान का जिंदगी की पहचान थी।

अयान जैसे-जैसे होटल की तरफ बढ़ रहा था, उसने गौर किया कि लोग उसे कैसे देख रहे थे। किसी के लिए वह सिर्फ एक 'अधमरा' मिला हुआ अजनबी था, तो किसी के लिए बस एक फालतू मजदूर।

अयान ने अपनी आस्तीन को एक बार फिर नीचे खींचा। वह प्लैटिनम का कड़ा, जो रॉय खानदान की धमक था, अब उसके कुर्ते के नीचे एक राज की तरह दबा हुआ था। 

उसकी आँखों में अब वो पुरानी चमक नहीं, बल्कि एक अकेलापन था। वह पूरी तरह से इस बस्ती के माहौल में घुल चुका था, जैसे समंदर का खारा पानी किसी कीमती पत्थर को धीरे-धीरे घिस देता है।

"पेट की आग यादों से बड़ी होती है," ये शब्द उसके कान में गूँज रहे थे। वह होटल के करीब पहुँच चुका था, जहाँ बर्तनों का ढेर और मालिक की गालियाँ उसका इंतज़ार कर रही थी।

अयान होटल पहुँचते ही अपने काम में रम गया था। उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी, वह फुर्ती से ग्राहकों के बीच घूम रहा था—कभी किसी को पानी दे रहा था, तो कभी किसी का ऑर्डर ले रहा था।

वह बड़ी सादगी से सबको संभाल रहा था, जैसे उसे अब इस शोर और गंदगी की आदत हो गई हो। तभी अचानक बाहर एक महंगी गाड़ी के टायर चरमराए। धूल का एक गुबार उठा और होटल के दरवाजे पर एक साया खड़ा हो गया।

वो एक रईस लड़का था। उसके महंगे कपड़े और चेहरे का घमंड इस खटारा होटल के माहौल से बिल्कुल अलग था। उसने अपनी नाक सिकोड़ी, जैसे यहाँ फैली गरीबी और लाचारी से उसे घिन आ रही हो। वह शख्स कोई और नहीं, आर्यन था।

अयान एक मेज साफ कर रहा था, पर उस रईस लड़के की आहट सुनते ही उसके हाथ जैसे पत्थर के हो गए। उसने अपनी फटी हुई आस्तीन को और नीचे खींच लिया ताकि वो कीमती कड़ा छिप जाए।

आर्यन होटल के बीचों-बीच खड़ा था, जैसे वहाँ की गरीबी और गंदगी देख कर उसे उल्टी आ रही हो। उसने अपने चारों तरफ एक घिनौनी नज़र डाली और फिर मेज़ साफ़ कर रहे अयान को देखा, जो अपनी फटी आस्तीन को छुपाने की कोशिश कर रहा था।

आर्यन ने बड़े घमंड से हवा में चुटकियाँ बजाईं। उसकी आवाज़ ने होटल के शोर को एक पल के लिए शांत कर दिया।
"ओए लड़के!" आर्यन ने रोब से कहा।

अयान के हाथ वहीं थम गए। उसने धीरे से सर उठाया, पर नज़रें नीची ही रखीं। आर्यन ने अपनी महंगी घड़ी ठोंकते हुए कहा, "सुन, बैठने लायक तो जगह है नहीं यहाँ, पर जल्दी से एक गरमा-गरम सूप ला। और देख, ढंग के साफ़ बर्तन में लाना, तेरी इस बस्ती की मिट्टी नहीं होनी चाहिए उसमें।"

अयान का दिल धक-धक करने लगा। वो चुटकी बजाने का तरीका और वो आवाज़... उसे अंदर ही अंदर कुछ याद दिला रही थी, जैसे कोई पुराना जख्म फिर से हरा हो रहा हो। बिना कुछ बोले, अयान ने बस सर झुकाया और चुपचाप किचन की तरफ निकल गया।

अयान रसोई से गरमा-गरम सूप का कटोरा लेकर बाहर निकला। उसका पूरा ध्यान उस सूप पर था और उन बातों पर, जो उसे अंदर ही अंदर कुछ याद दिला रही थीं।

होटल के फर्श पर मछलियों का गंदा पानी और कीचड़ फैला हुआ था।

अयान अभी आर्यन की मेज़ के पास पहुँचा ही था कि, अचानक उसका पैर बुरी तरह फिसल गया।"अरे...!" अयान के मुँह से बस इतना ही निकला। खुद को संभालने की कोशिश में अयान का बैलेंस बिगड़ा और वो खौलता हुआ सूप सीधा आर्यन के ऊपर जा गिरा।

आर्यन के सफेद और महंगे कपड़े पल भर में सूप से सन गए।
होटल में सन्नाटा छा गया। अयान जमीन पर पड़ा था और उसका हाथ कांप रहा था। आर्यन की आँखों में खून उतर आया। उसने अपने गंदे कपड़ों को देखा और फिर अयान को, जैसे वो उसे अभी कच्चा चबा जाएगा।

आर्यन ने अपने सफेद कुर्ते पर फैले उस सूप को देखा, और उसकी आँखों में जैसे आग लग गई। उसने आव देखा न ताव, ज़मीन पर गिरे अयान के सीने पर अपनी महंगी जूती से एक ज़ोरदार लात मारी।

"साले भिखारी! तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे ऊपर ये गंदगी गिराने की?" आर्यन दहाड़ा।

अयान दर्द से कराह उठा, और पीछे की तरफ घिसट गया। पर आर्यन का गुस्सा इतने से शांत नहीं हुआ। उसने चिल्लाकर पूरे होटल को सर पर उठा लिया, "मैनेजर! कहाँ मर गया मैनेजर?"

होटल का मैनेजर हाथ जोड़ता हुआ, कांपते पैरों से दौड़कर आया, "जी साहब! माफ़ कर दीजिए साहब!"

आर्यन ने मैनेजर की कॉलर पकड़ी और उसे झकझोरते हुए बोला, "ये क्या कचरा पाल रखा है तूने यहाँ? कैसे-कैसे भिखारियों को यहाँ काम पर रख लिया है? अकल नहीं है क्या इसे? मेरे एक जूते की कीमत, इस पूरी बस्ती की औकात से ज़्यादा है! 


लेखक की कलम से...)
"दोस्तों, आर्यन का वो घमंड और अयान की वो बेबसी... क्या अयान इस ज़िल्लत को पीकर चुप रह जाएगा? क्या मैनेजर अपने होटल को बचाने के लिए अयान को आर्यन के पैरों में डाल देगा?

और सबसे बड़ा सवाल—क्या अयान के अंदर सोया हुआ वो 'रॉय खानदान' का वारिस इस लात का जवाब देगा या फिर अपनी पहचान खोकर इस बस्ती की मिट्टी में मिल जाएगा? 

अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर बताएं... क्योंकि अगले चैप्टर में एक ऐसा चेहरा सामने आने वाला है, जो अयान की पूरी दुनिया हिला कर रख देगा! नफरत की आग अब और दहकने वाली है..."