Shahad ki Gudiya - 31 in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (31)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (31)

                 शहद की गुड़िया - प्रकरण 31

        " महाबलेश्वर से दादू और बड़ी मा मुंबई आ पहुंचे थे. दादू अपने घर के चिराग को देखने उतावले हो रहे थे. लेकिन ऊस वक़्त तीन बजा था. मुलाक़ात का समय चार बजे का था, इस लिये उन्हें एक घंटे का इंतजार करना पडा था. "

         " चार बजते ही दोनों प्रसूति होम पहुंच गये थे. ऊस वक़्त गीता बहन भी वहाँ आ गये थे. दादू अपने पुत्र की सूरत देखकर बड़े प्रभावित हो गये थे. "

         " पुत्र जन्म के कुछ ही दिनों में दादू को एक बुजुर्ग की मदद से ' प्रेम सन कंपनी में जोब मिल गया था 150 रूपये के वेतन पर. "

         " दादू शादी सुदा थे, ऊन को एक बच्चा भी था  इस बात को मदय नजर रखते हुए कंपनी के जूनियर भागीदार सुरेश कुमार ने दादू को कहां था. " आप को दो सो रुपया सेलेरी मिलेंगी. ".     

        " दादू ने दो साल से अधिक प्रेम सन में काम किया था. और बहुत कुछ सिख लिया था. प्रेम सन उन के लिये एक स्कुल था. "

         " दादू टाइपिंग के आलावा ओफिस के सब कामों से माहिर हो गये थे. वह आउट डोर ड्यूटी भी करते थे. लाइसेंसिंग अथॉरिटीज के दफ्तर में भी जाते थे. "

          " वहाँ एक दिन उन की मुलाक़ात चरित्र अभिनेता शेख मुख़्तार से हुई थी. फ़िल्म इंडस्ट्री में ज्यादा उन की बोलबाला नहीं थी. लोग ज्यादा उन्हें पहचानते नहीं थे. दादू ने उन्हें एक दो फिल्मो में देखा था. उन्होंने ऊस हस्ती को पहचान  लिया था और उन से बात भी की थी. "

           " उन्होंने खुद अपना दुखड़ा रोते हुए शिकायत की थी : हमारे देश में क्लासिकल फिल्मो की कोई कद्र नहीं. उन्हो ने ' नूरजहाँ नाम से एक फ़िल्म बनाई थी जिसे ' मुग़ले आझम' की कक्षा में रखी जा सकती थी. यह फ़िल्म टिकिट बारी पर पूरी तरह पिट गई थी. फ़िल्म बनाने में उन की सारी मुड़ी खर्च हो गई थी. "

           " उन्हें उन की बातें सुनकर बुरा लगा था. फ़िल्म इंडस्ट्री में कई और लोग थे जिन्होने ने फ़िल्म बनाने का प्रयास किया था जिस ने उन्हें निराशा और नुकसान के सिवा कुछ नहीं दिया था. "

           " दादू ने ऐसी दो मिशाले पेश की थी."

           " एक मोती लाल जिन्होंने अपने भतीजे मोती सागर को लेकर छोटी छोटी बातें बनाई थी."

           " और दूसरे थे गीतकार शैलेन्द्र जिन्होंने तीसरी कसम फ़िल्म बनाई थी. "

          " दादू बेहद संवेदनशील थे, वह पराये अंजान लोगो के लिये भावुक हो जाते थे.. "

          " प्रेम सन में वह पूरी तरह सेट हो गये थे लेकिन कंपनी के सीनियर भागीदार से वह नाराज रहते थे. वह हर चीज में शंका करते थे. धंधा बढ़ाने में उन का बड़ा हाथ था. छोटा भाई सुरेश  कुमार कंपनी के अन्य भागीदार थे. उन्हें धंदे से ज्यादा ऐयासी में ज्यादा दिल चस्पी थी. उन की बीवी को दादू पहचानते थे. जो पड़ोस में रहने वाली बूढी औरत की पोती थी. दादू ऊस के साथ खेले कूदे थे. "

           " वह दूसरे की कंपनी में पैइंग गेस्ट की हैसियत से अपना धंधा करते थे. कंपनी मैनेजमेंट सुरेश कुमार की हरकतों से नाराज थे. उन्हो ने कई बार चेतावनी दी थी. "

            " सुरेश कुमार बिना वजह लड़कियों को काम पर बुलाते थे,  देर रात तक काम के बहाने रोकते थे और फिर उसे होटल में ले जाकर गुलछड्डे उडाते थे. "

            " सुरेश कुमार अपनी हरकतों से बाज नहीं आया था ऊस समय ओनर ने जगह खाली करने का नोटिस जारी किया था. और उन्होने अपनी ओफिस दूसरी जगह शिफ्ट की थी और सुरेश कुमार को बाथरूम या टॉयलेट में लड़कियो से बदतमीज़ी करने का मौका मिल गया था. "

            " दादू के लडके के लिये पहली दिवाली थी.. खूब फटाखे फूटे थे जिस की आवाज से उन के लडके की आँखे टेड़ी हो गई थी. यह देखकर ललिता पवार परेशान हो गये थे. "

            " ऊस दौरान मुंबई में एक अमेरिकन आँखों के एक्सपर्ट डोक्टर दीक्षित का नेत्र शिबिर आयोजित किया गया था. खबर मिलते ही दादू अपने बेटे को ऊस शिबिर में ले गये थे. ओपरेशन से ऊस की आँखे सीधी हो गई थी. लेकिन अपने बेटे को दूसरी बीमारी थी जो ऊस के मामा से मिली थी. "

            " दूसरी तरफ दादू प्रेम सन में अपने आप को कंफर्टबल  महसूस नहीं करते थे.. "

            "सुरेश कुमार ने दादू की दोस्त डोना को भी पटाने की कोशिश की थी लेकिन ऊस ने दाद नहीं दी to उसे ओफिस से दूर करने के प्रयास शुरू कर दिये थे. ऊस के लिये दादू को बलि का बकरा बनाने का प्रयास किया था, लेकिन सजाग थे.. डोना ने उन्हें सब कुछ बता दिया था. "

            "सुरेश कुमार डोना को दूर करने की कोशिश करते थे लेकिन ऊस का इल्जाम अपने सर नहीं ओढ़ना चाहते थे, इस लिये उन्हो ने दादू को सवाल किया था."

            " हम लोग दो लड़की में से एक को कंपनी निकाल बाहर करना चाहते है. तुम्हारी नजर में कौन बेहतर है मंदा या डोना? "

            " दादू ने जवाब टालते हुए कहां था. आप कंपनी के मालिक हो वह आप को ज्यादा मालूम होगा. आप बीच में क्यों मुझे घसीट रहे हो? "

            " और कुछ दिनों में उन्हो ने डोना को जोब से निकाल दिया था. ऊस के लिये जूठा बहाना पेश किया था. "

             " तुम्हारा काम बराबर नहीं है और तुम अपनी हरकतों से ओफिस का शिस्ट भंग करती आई हो, बोस के आदेश का पालन नहीं करती हो. "

            " डोना ने उन की हर बात मानी थी लेकिन ऊस की ऐयासी को दाद नहीं दी थी. वह उन के आदेश का उल्लंघन बन गया था. "     

             " डोना सिर ऊँचा क़र के गर्व से ओफिस से बाहर निकल गई थी. "

             " कुछ दिन बाद वह उसे रास्ते में मिल गई थी. ऊस ने जो बात कहीं थी ऊस से दादू चौंक गये थे.. सुरेश कुमार ने ऊस के कानो पर यह बात डाली थी. ऊस का जोब दादू की शिकायत की वजह से गया था. "

                        00000000000  ( क्रमशः)