There is a threat of rebellion - Ghazal Collection in Hindi Poems by sushil yadav books and stories PDF | बग़ावत का अँदेशा हो रहा है - गजल संग्रह

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बग़ावत का अँदेशा हो रहा है - गजल संग्रह

201…

23.1.25

Mujtas musamman maKHbuun mahzuuf maskn

mufaa'ilun fa'ilaatun mufaa'ilun fe'lun

 

12121122121222

मिरे मुनाफ़े में नुकसान क्या जरूरी है

तेरे इलाक़े ये पहचान क्या जरूरी है

$

यहाँ किसे मिली फ़ुर्सत अभी ज़माने से

यूँ व्यस्तता  का अनु-मान क्या जरूरी है

$

कहें हैं लोग जमाने से  घर के दो बच्चे

तो और पैदा हो सन्तान क्या जरूरी है

$

हमारी सुन के वो बैठे उदास मुँह लेके

अजीब  होवे यूँ   इंसान क्या जरूरी है

$

ठहाके मार के हँसना नहीं मुनासिब भी

कहीं इसी से हो अपमान  क्या जरूरी है

$

ये लोग बहका रहे कर फ़िजूल बातें अब

सुशील को दे दो सम्मान  क्या जरूरी है

$

सुशील यादव दुर्ग (cg)

7000226712

 


 

202..

 

25.1.25

unnamed

faa'ilaatun faa'ilaatun faa'ilaatun fe'

2122  2122  2122 2

वक्त ने अपना मुझें कह के नहीं देखा

फिर शिकायत साथ में रह के नहीं देखा

$

अजनबी मानिंद मुझको घूरता हरदम

भावनाओं की नदी बह के नहीं देखा

$

मै झुकी मीनार हूँ  पीसा जिसे कह लो

कुछ इरादों से डिगा  ढह के नहीं देखा

$

जिन्दगी की राह में तुम क्यों अकेली हो

सीखना था सादगी  सह के नहीं देखा

$

खुश हुआ जाता नहीं आदत कहूँ  कैसे

है दुखी ये लोग इन्हें  महके नहीं देखा

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सुशील यादव दुर्ग (cg)

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203...

25.1.25

मुतकारिब मुसम्मन सालिम

फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन

122122122122

 

मिलो मौत से दिल लगाने से पहले

हुआ कुछ नही चोट खाने से पहले

$

मिजाजो में तल्खी दिखाई गई है

मुहब्बत हकीकत बताने से  पहले

$

नही है खबर हाल क्या है यहाँ पर

हमी जानते सब जमाने से पहले

$

रखा तोड़ के मुझको अपनी ही जिद में

पता तीर  चलता  निशाने से पहले

$

किसे है पड़ी आग को अब बुझा  दे

हवा को जुटे आजमाने   से पहले

$

है तक़दीर का मिल रहेगा तुझे भी

मुझे  लोग हाजिर हटाने से पहले

$

सबब मै दिया तल अँधेरे का जानू

मै जलता रहूँ हर  ठिकाने से पहले

$

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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204....

Kaamil musamman saalim

mutufaa'ilun mutufaa'ilun mutufaa'ilun mutufaa'ilun

11212   11212   11212  11212

#

यही इल्तिज़ा मुझे तू बता, सही रास्ता कोई ज़िन्दगी

कोई है ख़पा कोई है बुझा कहाँ पे भटक रही ज़िन्दगी

#

कभी ठोकरों रखा आदमी, वो  ही शेर आज समान है

जिसे आसमान बिठा दिया  वहीं ढोल पीटती ज़िन्दगी

#

ज़ुदा हो गए  यूँ क़रीब के सभी लोग थे  जुड़े हमसे भी

किसे साथ में  कहें और कौन पराया जानती ज़िन्दगी

#

मैं ख़पा नहीं ये समझ़ सको नहीं बात तूल  दिया करो

ये क़िताब मेरे ही वहम की कई बार ख़ोलती ज़िन्दगी

#

बता दो अभी ये चुनावी दौर है जीत क्या कहीं हार क्या

जिसे जानना है वो जान ले क्या है दाँव पर लगी ज़िन्दगी

 

#

#सुशील यादव दुर्ग (cg)

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28.1.25


 

205…

जमील मुसम्मन सालिम

मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन

12122 12122 12122 12122

रुआब मेरा नरम हुआ है , मिज़ाज़ तल्ख़ी दिखाई है अब

निग़ाह की ज़द  हुए हजारो, तुम्हारी सूरत सज़ाई  है अब

$

कमाल था हसरतों का माना ,  ठहर- ठहर रास्तो  से जाना

मिले मँजिल  तो जरा , दुआये इसी ज़माने से पाई है अब

$

निज़ात हमसे पा , दूरियां खुद  से, बढ़ गई फिर हसीन लम्हा

बुझे बुझे मन किसी अँधेरे में  रौशनी झिलमिलाई  है अब

$

मै  गा सका गीत कोई , तेरे ख़याल की बंदिशे सजाए

यहाँ तो पतवार- नाव मेरी , जगह- जगह डगमगाई है अब

$

कहाँ हिफ़ाजत से रख सकूँगा ज़मीन पुरख़ों की जो  मिली है

ख़ुदा ने मेरे हिसाब में कुछ  नरम-दिली भी बताई  है अब

$

मै माँगता ही रहा, ख़ुशी के  हज़ार दिन, ख़्वाब में ग़िना लूँ

'सुशील' तेरी  ये हरकतें,  ज़िन्दगी की पूरी  क़माई है अब

$

 

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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26.1.25

206

221  2121  1221  212

माहौल ख़ुशनुमा यहीं  ज़न्नत बना दिया

हर सादगी को तुमने हक़ीक़त बना दिया

@

वे लोग भी इरादों बनाते नहीं क्या क्या

पत्थर तराश के कहीं मूरत बना दिया

@

नीयत पे जा रहे तो हमे  देखना  ज़रूर

मज़बूरियों कहाँ  पे  ज़रु'रत  बना दिया

@

हमको भी था ग़ुमान शराफ़त का उन दिनों

इतनी सी बात ने यूँ ही अज़मत  बना दिया

@

सौदा हमारा कोई टके भाव पूछता

तेरी पसंद रात ही क़ीमत  बना दिया

@

हमको उछाल तब मिली मदहोश ज़िन्दगी

सम्मान दे के वाकई क़िस्मत बना दिया

@

ख़ामोश कारो -बार किए जा रहे थे हम

अब तेरी  याद ने यहाँ फ़ुर्सत बना दिया

@

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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207...

29.1.25

Ramal musamman saalim maKHbuun mahzuuf

faa'ilaatun fa'ilaatun fa'ilaatun fa'ilun

2122  1122  1122  112

 

देख लो दिल को बचा लाए क़िसी घात से हम

डूबती नाव थी ,हल्के जरा हालात से हम

$

बस ख़यालों  में  बुना करते रहे थे तुमको

दर असल कुछ डरे बैठे थे कोई बात से हम

$

मिलना तुमसे थाज़रूरी, मिलें कैसे बोलो

आ क़िसी मोड़ मिलें, ऐसे अकस्मात से हम

$

आज फारिग हुए बैठे है, बुझे रिश्तों से

होके वापस अभी लौटे क़िसी बारात से हम

$

चैन  से रहना था हमको, वही खो बैठे है

दिल की बस्ती क़्या-क़्या ढूढे गुमे ज़ज्बात से हम

$

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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208..

30.1.25

KHafef musaddas maKHbuun mahzuuf maqtuu.a

faa'ilaatun mufaa'ilun fe'lun2122121222

#

तू नहीं तो ज़हान  है ख़ाली

दिल का मानो मकान है ख़ाली

#

सब नफ़रतों  जमीन से उप्पर

क़ायरों कोरी  शान है ख़ाली

#

छोड़ दे आदमी ज़माने को

पास क्या है इमान है ख़ाली

#

वो तसल्ली से देगा अपनापन

अब यही तो समान है ख़ाली

#

ज़ाल फ़ैलाए बैठे रिश्वतो के

ये वही साहिबान है ख़ाली

#

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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209..

30.1.25

Hazaj musamman aKHrab makfuuf mahzuuf

maf'uul mufaa'iil mufaa'iil fa'uulun

 

221 1221  1221  122

इस दौर के नायक हमी तो कल के रहेंगे

बदलो कहीं खुद या कहो सम्हल  के रहेंगे

@

राहों में मिले अज़नबी अनचाहे यहाँ भी

छोड़ें  किसे साथी यही  दलदल के रहेंगे

@

सुर्ख़ी में मेरा नाम लिख़ा है कभी तुमने

अख़बार यही  बात तो चल- चल  के रहेंगे

@

यादों से उतर जाना  अख़रता  ही  गया है

रिश्ते कोई क़मजोर क्या छिन- पल के रहेंगे

@

दावे सभी झ़ूठे हैं कहा मानो हमारा

क़लयुग में सभी बोझ़  क्या अक्कल  के रहेंगे

@

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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210...

2.2.25बसंत पंचमी

KHafef musaddas maKHbuun mahzuuf maqtuu.a

faa'ilaatun mufaa'ilun fe'lun

2122121222

#

क्या कहें  कारवाँ अलग है कुछ

जंग में अब तो जुबाँ अलग है कुछ

#

जानो- जी  हम लगे मिला करते

बोल मत  रायगाँ अलग है कुछ

#

बस्तियों को जला के जीते पर

फैलता अब धुआँ अलग है कुछ

#

मुफ्त की आदतों पी ले पानी

कौन देखे   कुआँ अलग है कुछ

#

हम मुसाफिर अभी वहीं ठहरे

बदला अपना कहाँ अलग है कुछ

#

राएगाँ=- मेहनत बर्बाद जाना,

सुशील यादव दुर्ग (cg)

7000226712

 


 

211...

 

11.2.25

फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन

#

होगा वही जो हो सकता है

हाथो आ के  खो सकताहै

#

मेरे तेरे बीच  की बातें

कोई  अकेला रो सकता  है

#

जो तासीर में गर्मी  रखते

रिदा वही तो  भिगो सकता है

#

बचपन की नाव चली थी कब

नाखुदा कश्ती डुबो सकता है

#

अब ये  सुबह उसकी  नहीं लगती

वो और देर    सो सकता है

#

शौक गुबारों का रखते हो

वक्त  सुई भी चुभो सकता है

#

कुम्भ  नहा के देख जरा  सा

पाप यही तेरा धो सकता है

#

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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212..

 

Mujtas musamman maKHbuun mahzuuf

mufaa'ilun fa'ilaatun mufaa'ilun fa'ilun

121211221212112

#

अगर मैं चीज़ ज़रूरी हूँ आज़माए मुझ़े

अगर हूँ ख़ौफ का सामान तो हटाए मुझ़े

#

इसी निग़ाह ने देखा बरहना सा तुझ़को

हया के ज़लसे अभी कौन फिर बुलाए मुझ़े

#

ये लोग आज़ तो मुमकिन है भूल जाएँ फिर

है कौन सा वो तमाशा यहाँ दिखाए मुझ़े

#

अगर मै रूह हूँ बच के चला करो मुझ़से

अगर मियाद  किसी याद का, बढाए  मुझ़े

#

अगर है ख़ोट भी नीयत में तो बता दे तू

‘सुशील’ हद में रहा कौन है सताए मुझ़े

#

सुशील यादव दुर्ग (cg)

7000226712

 


 

213..

4.2.25

Hazaj musamman saalim

mufaa'iilun mufaa'iilun mufaa'iilun mufaa'iilun

1222 1222 1222 1222

सितम सहने अगर कहता तो आँखें भीग जाती है

रुआँसा देख लूँ चेहरा  तो आँखे  भीग जाती है

#

वहां  पे मौत का ताँडव तुझे भाया नहीं होगा

जहाँ अपना दिखे  मरता तो आखें भीग जाती है

#

न जाने कौन सी बिजली गिरी होगी वहां  तुम पर

अकेले  में  कभी  सोता  तो आखे भीग जाती  है

#

कोई सैलाब में लाशो के पहचाना दिखा हो तब

वो बीता पल कहीं रुकता तो आखें भीग जाती है

#

चिरागों का  घरों बुझना  समझ से है परे बातें

बदलता  वक्त का  चेहरा  तो आखें भीग जाती है

#

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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214..

4.2.25

ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू

फ़ाएलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

2122 1212 22

#

मोम जैसे पिघल रहा हूँ मै

मार के मन को जल रहा हूँ मै

#

अब जमाने को मार के ठोकर

खुद जमाना बदल रहा हूँ मै

#

चाहती कब मुझे खयालों में

फिर भी ख्वाबो दखल रहा हूँ मै

#

आज भी मै नहा लिया करता

बारिशो भीगा कल रहा हूँ मै

#

बाग यादों का तुम लगा बैठी

बस वहीं पे टहल रहा हूँ मै

#

मै गिरा था  तुझे उठाने  में

साजिशो से सँभल रहा हूँ मै

#

लोग माने कहाँ अभी  शायद

बात अपनी अटल रहा हूँ मै

#

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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215...

7.2.25

Mujtas musamman maKHbuun mahzuuf

mufaa'ilun fa'ilaatun mufaa'ilun fa'ilun

1212 1122 1212 112

ये दिल तमाम जगह शर्मसार बन के रहा

वही समय मुझें बस यादगार बन के रहा

#

यूँ रंजो-गम हो हज़ारों भी ख्व़ाहिशें  लेकिन

मै  इश्क़ में सदा बस तलबग़ार बन के रहा

#

जिसे  नहीं पता हो रास्ता तिरी ग़ली का

मै रास्तों में फ़क़त ऐ-तबार बन के रहा

#

शरीक़ था उसी ज़लसे  जहाँ पे तूफां थे

किनारे मैं नदी में  ख़ुश- ग़वार बन के रहा

#

मुझें  निकाल रहे ज़िंदगी से जाने क्यों

दिलो जा जिसके लिए ख़ाक़सार बन के रहा

#

तिरे  चुनाव   ख़रा मै  उतर नहीं पाया

मै ख़ारिज़ों का ही उम्मीदवार बन के रहा

#

सुशील यादव दुर्ग (cg)

7000226712


 

216..

7.2.25

Ramal musamman mahzuuf

faa'ilaatun faa'ilaatun faa'ilaatun faa'ilun

212221222122212

कुछ पुरानी बात अपनी, तुम मोहब्बत  रहने दो

टूट जाना रिश्तों को बस, फिर अदावत रहने दो

@

एक मेरा जख्म ऐसा जो अचानक बोलता

वो तुम्हारी याद की फिर कोने  हसरत  रहने दो

@

मेरा क़्या है सारे उन्मादों में आदी  जीने का

तेरी ख़ातिर सोचता, अब क़्या लूँ मोहलत रहने दो

@

अपने लोगों  बीच बैठा, तब भी तन्हा रहता मैं

होती है,  कैसी ये चाहत, औऱ दहशत रहने दो

@

भेद मन का मन ही जाने, औऱ जाने भी कहाँ

बात कितनी  है दबाने, बस  बगावत रहने दो

@

सुशील यादव दुर्ग (cg)

7000226712


 

217…

Ramal musamman maKHbuun mahzuuf maqtuu.a

faa'ilaatun fa'ilaatun fa'ilaatun fe'lun

2122  1 122 1122  22

हुश्न का कम कभी रुतबा नहीं होने देते

जिंदगी तेरा तमाशा नहीं होने देते

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खैरियत पूछते हैं हर बे-जुबानों की हम

हर किसी को यूँ ही रुसवा नहीं होने देते

@

बाँटते  हैं  ख़ुशी  अपनों में हमी लेकिन अब

रेवड़ी रोज बताशा  नहीं होने देते

@

अब चलन दूर  है दस्तूर  शराफत वाला

रास्ता छोड़ के रिश्ता नहीं होने देते

@

ख्याल मुझको भी रहा करता है तेरा लेकिन

हम  उलझने  कहीं  पैदा  नहीं होने देते

@

अब गले लग सभी  दुश्मन से मिला करना तुम

दोस्ती वाले तो अच्छा नहीं होने देते

@

तीर  खाकर जो संभलना भी नहीं सीखे हों

वैसे लोगों का बढ़ावा नहीं होने देते

@

सुशील यादव दुर्ग (cg)

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218…

8.2.25

Muzare.a musamman aKHrab makfuuf mahzuuf

maf'uul faa'ilaat mufaa'iil faa'ilun

221 2121  1221 212

इस  बात पर ये खून मिरा खौलता भी है

किस-किस निगाह से मुझें वो तौलता भी है

$

मै छोड़ती हूँ जिस गली को आने -जाने में

अब सर-फिरा तो रोज वहीं  दीखता  भी है

$

जिसने कटे परों के कबूतर हटा  दिए

वो अब कबूतरों को यहाँ पालता भी है

$

मेरे निशाने में कहीं तो आप आते हैं

फिर  आप से कहीं जरा दिल टूटता भी है

$

सोचा बहुत ही याद तुझे करना छोड़ दूँ

दिल है कि बारहा तुझी  को सोचता भी है

$

सुशील यादव दुर्ग (cg)

7000226712

 


 

219...

10.2.25

Hazaj musaddas mahzuuf

mufaa'iilun mufaa'iilun fa'uulun 

1222  1222 122 

@

बग़ावत का अँदेशा  हो रहा है

तले दीपक अँधेरा हो रहा है

@

उसे बीमार कैसे कहते हो तुम

पुराने  आदमी सा हो रहा है

@

यहाँ तुमको मिला हो कीमती घर

ख़िलाफत का वॉ हल्ला हो रहा है

@

ये फ़रमाइश भी मेरी थी उसी से

मिरे कहने पे सज़दा हो रहा है

@

इरादे  जानता हूँ हरक़तें भी

ठिकानों मेरे हमला हो रहा है

@

सुशील यादव दुर्ग (cg)

7000226712


 

220..

 

14.2.25

21 22 1122 1122  22

 

फूल पेड़ों में अभी   सज़ने नहीं आए हैं

खुद बहारें  सुरों में बजने नहीं आए हैं

$

इन इरादों अभी वो लम्हे नहीं आए हैं

सुन इबादत मिरी हम  बटने नहीं आए हैं

$

खार- काँटों  की तरह हमको सज़ा देते हो

ये बता दें  यहां हम चुभने नहीं आए हैं

$

तुम सवारी में सियासत की लगे होते हो

तिफ़्ल  के पैर तो क्या  घुटने  नहीं आए हैं

(तिफ्ल = बच्चा )

$

ख़ामुशी के घने जंगल जहाँ डर रातों का

बादलों साथ हमी  फटने नहीं आए हैं

$

पैर अपने किसी मकसद का रखो आहिस्ता

ज़ख्म हालात के फिर दुखने नहीं आए हैं

$

 सुशील यादव दुर्ग छत्तीसगढ़

 7000226712