Ayaan: Fire of Hate and Search for Existence - 3 in Hindi Thriller by Irfan ayan Khan books and stories PDF | अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 3

Featured Books
Categories
Share

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 3

आर्यन ने अपने सूप से सने हुए कपड़ों को देखा, और फिर नफरत भरी नज़रों से ज़मीन पर पड़े अयान को। उसने मैनेजर का गला पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और दहाड़ते हुए बोला—
"ओए मैनेजर! इस भिखारी को बोल, अभी के अभी घुटनों पर बैठे और मेरे जूतों के साथ-साथ ये कपड़े भी साफ़ करे। और हाँ, बिना माफ़ी माँगे ये यहाँ से हिलना नहीं चाहिए!"

पूरे होटल में मौत सा सन्नाटा छा गया। सब लोग अपनी जगह जम गए। अयान ने धीरे से अपना सिर उठाया, उसकी आँखों में एक अजीब सी तड़प थी।

आर्यन ने अपना पैर आगे बढ़ाया और अयान के चेहरे के पास ले जाकर बोला, "क्या देख रहा है बे? चल, शुरू हो जा! अपनी इस गंदी जुबान से माफ़ी माँग और इन जूतों को चमका, वरना तेरी इस बस्ती को अभी आग लगवा दूँगा।"

अयान के हाथ मुट्ठियों से कस गए। उसे अपनी कलाई पर, उस कड़े का भारीपन महसूस हो रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई पुरानी यादें उसके कान में चीख रही हो, पर वो खामोश था। 

मैनेजर ने डरते हुए अयान को इशारा किया, "अयान... कर दे बेटा, वरना ये रईस लोग हमें ज़िंदा गाड़ देंगे।”

अयान ने जमीन पर पड़े-पड़े ही अपना सिर उठाया, उसकी आँखों में आंसू तो थे पर नीची नहीं थीं। उसने कांपती हुई आवाज़ में, पर साफ़ लफ्जों में कहा—

"साहब, माफ़ी माँगता हूँ, गलती हो गई। मेरा पैर फिसल गया था, मैंने जानबूझकर नहीं किया। पर... पर मैं घुटनों पर बैठकर माफ़ी नहीं माँगूँगा। ये हादसा था, कोई चोरी नहीं किया।

अयान की ये बात सुनते ही होटल में जैसे सन्नाटा पसर गया। आर्यन का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा, उसकी आँखों में खून उतर आया। उसे यकीन नहीं हुआ कि ये मामूली सा 'भिखारी' उसके सामने सर उठा रहा है।

"तेरी इतनी हिम्मत...!" आर्यन दहाड़ा।
आर्यन ने आव देखा न ताव, बगल वाली मेज़ पर रखी कांच की खाली प्लेट उठाई और पूरी ताकत से अयान के सर पर दे मारी।
कड़ाक!

कांच के टुकड़े हवा में बिखरे और अयान का सर एक तरफ को झुक गया। उसके माथे से खून की एक पतली लकीर निकलकर, उसकी आँखों के पास से होती हुई, ज़मीन पर गिरने लगी। 

अयान वहीं सुन्न होकर गिर पड़ा, उसे बस अपनी कलाई पर उस कड़े का ठंडा अहसास हो रहा था और कानों में एक शोर गूँज रहा था।

मैनेजर और वहाँ खड़े लोग दहशत से पीछे हट गए। आर्यन हाफ रहा था, उसका हाथ अभी भी उस टूटी हुई प्लेट के हिस्से को थामे हुए था।

तभी, होटल के भारी शीशे के दरवाज़े जैसे किसी तूफ़ान के दबाव से खुल गए। एक बेहद खूबसूरत और ताकतवर लड़की, नीली मंहगी ड्रेस, आंखों में चश्मा और हाथ में छोटा सा पर्स लिए होटल के अन्दर दाखिल हुई।

जैसे ही उसकी नज़र खून से सने अयान पर पड़ी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

उसकी चीख ने पूरे हॉल को थर्रा दिया— "अयान सर!!!"
वहाँ मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। दिया भागती हुई आई और अयान का सिर अपनी गोद में ले लिया। "सर! जागिए! मैं आ गई हूँ... आपको कुछ नहीं होने दूँगी!" वो दहाड़ें मारकर रो रही थी।

अयान ने आखिरी बार अपनी धुंधली नज़रों से दिया को देखा और उसके होठों से सिर्फ एक लफ्ज़ निकला— "तुम कौन...?" और बेहोश हो गया। 

वो अनजान लड़की ने अयान के सर का खून पूछते हुए कहा"       सर मै, दिया--- आप ठीक तो है न? 

दिया ने गुस्से में अपनी नज़रें घुमाकर आर्यन की ओर देखा। उसकी आँखों में वो मौत थी जिसे देखकर आर्यन की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। 

दिया ने अपना फोन निकाला और किसी को अयान  की हालत की खबर दी।
उसने अपने आदमियों को ज़ोर से इशारा किया। उसके बंदे तुरंत आगे बढ़े और अयान को उठाकर बाहर खड़ी गाड़ी की पिछली सीट पर लिटा दिया। 

(लेखक के कलम से..)

दोस्तों, अयान की ज़िंदगी में ये तूफ़ान इतनी तेज़ी से आया है कि उसे सँभलने का एक पल भी नहीं मिला। शायद ये रफ़्तार ज़रूरी थी...
क्योंकि जब किस्मत पलटती है, तो वो सोचने का मौका नहीं देती।

एक मामूली वेटर और एक रईस शहज़ादे के बीच की ये टक्कर तो
बस एक शुरुआत है। क्या अयान इस तेज़ रफ़्तार धोखे को झेल पाएगा? अपनी राय कमेंट में ज़रूर दें..."

अब कहानी इस मोड़ पर आकर रुक गई है जहाँ कई अनसुलझे सवाल हवा में तैर रहे हैं। अयान की इस हालत ने सबको झकझोर कर रख दिया है, लेकिन असली सस्पेंस तो अब शुरू हुआ है।

अयान का अगला ठिकाना क्या होगा? दिया उसे गाड़ी में डालकर किस अनजान मंज़िल की तरफ ले जा रही है? क्या वो सिर्फ एक हॉस्पिटल है, या अयान की पुरानी ज़िंदगी का कोई बंद दरवाज़ा?

अपनी राय comment में जरूर दे दोस्तों अगले पार्ट के लिए बने रहिए हमारे साथ नफ़रत की आग या वजूद की तलाश में।