अयान की आँखें जब खुलीं, तो उसे अहसास ही नहीं हुआ कि वो जाग चुका है।
उसे लगा जैसे वो किसी हसीन ख्वाब के मखमली बिस्तर पर लेटा है। चारों तरफ की दीवारें सोने की तरह चमक रही थीं, छत से लटके हुए झूमर सूरज की तरह रौशनी बिखेर रहे थे।
वहाँ कुछ लोग खड़े थे—सूट-बूट पहने, एकदम सलीके से, जिनकी आँखों में अयान के लिए वैसी ही फिक्र और इज़्ज़त थी जैसी किसी सल्तनत के वारिस के लिए होती है।
अयान के दिमाग में सवालों का बवंडर उठा ही था कि तभी एक बेहद नर्म और ममता भरे हाथ ने उसके माथे को छुआ। उस एक छुअन में ऐसी राहत थी, जैसे कोई बरसों का प्यासा दरिया के किनारे पहुँच गया हो।
पर वो सुकून... वो बस एक पल का छलावा था।
"आह!" अयान एक झटके से उठ बैठा। उसके हलक से एक चीख निकल गई।
मखमली बिस्तर गायब था। उसकी जगह अस्पताल का वो सख्त, पथरीला और ठंडा बेड था। उस बड़े से हवेली और उसके फर्श की खुशबू अब दवाइयों की उस कड़वी गंध में बदल चुकी थी।
जो सीधे नाक में जाकर अयान को बेचैन कर रहे थे।
सामने करीम चाचा बैठे थे। उनके चेहरे की झुर्रियां और कांपते हाथ बता रहे थे कि वो कितनी देर से अयान के जागने की दुआ कर रहे थे।
अयान पसीने में नहाया हुआ था। उसने हड़बड़ा कर चाचा का हाथ पकड़ा, "चाचा... वो लोग? वो महल जैसा घर? कहाँ गया सब? अभी तो वो सब यहीं था!"
करीम चाचा ने फिक्र से अयान के सिर पर हाथ रखा, "बेटा, कैसा बंगला? तू होश में तो है? मुझे तो एक अनजान लड़की का फोन आया था, बेचारी की आवाज़ डर से कांप रही थी। उसी ने बताया कि होटल में तेरे साथ क्या हादसा हुआ है।"
अयान का सिर चकराने लगा।
'क्या वो सब सपना था? या मेरी यादों का कोई कोना जो धूल झाड़कर बाहर आना चाहता है? और वो लड़की... उसने मुझे 'सर' क्यों कहा? इस फटेहाल वेटर के पीछे आखिर कौन सा अमीर अयान छुपा है?'
तभी कमरे का दरवाज़ा एक भारी आवाज़ के साथ खुला। डॉक्टर नितिन अंदर आए। उनके चेहरे पर गंभीरता थी। उन्होंने करीम चाचा के कंधे पर हाथ रखा और अयान की रिपोर्ट देखते हुए बोले।
"देखिए चाचा, अयान की हालत अभी उस जलते बुझते बल्ब जैसी है जो ज़रा से खिंचाव पर बंद पड़ सकता है। इसकी याददाश्त एकदम से वापस नहीं आएगी। ये टुकड़ों में आएगी, जैसे टूटे हुए शीशे के टुकड़े।"
डॉक्टर ने अयान की आँखों में सीधे देखते हुए कहा, "हो सकता है कभी कोई पुराना चेहरा देखकर तुम्हें सब याद आ जाए, पर डर इस बात का है कि अगले ही पल वो यादें फिर से धुंधली हो जाएं।
याद रखना अयान, दिमाग पर ज़ोर मत डालना। अगर यादों का बोझ ज़्यादा हुआ, तो दिमाग की नसें जवाब दे सकती हैं। जान भी जा सकती है।"
अयान खामोश रहा। उसके अंदर एक जंग चल रही थी—एक तरफ जान का डर था, तो दूसरी तरफ अपनी असली पहचान जानने की तड़प।
अस्पताल की सीढ़ियों से उतरते वक्त अयान का मन भारी था। तभी अचानक टायरों के ज़मीन पर घिसटने की एक कान फाड़ देने वाली आवाज़ आई—'चर्रर्रर्र!'
एक लाल कार उनके ठीक सामने आकर रुकी। कार का दरवाज़ा खुला और बाहर निकली नीली ड्रेस में एक लड़की। उसकी खूबसूरती ऐसी थी कि अस्पताल का वो उदास मंजर भी फीका पड़ गया। उसके चलते ही एक महँगे परफ्यूम की खुशबू हवा में घुल गई।
अयान के पैर जैसे ज़मीन में धंस गए। उसका दिल सीने में हथौड़े की तरह बजने लगा। उसने झिझकते हुए चाचा का कुर्ता पकड़ा, "चाचा... ये... ये वही लड़की है। होटल वाली!"
वो लड़की तेज़ी से अयान की तरफ बढ़ी। उसकी आँखों में वो डर नहीं था जो होटल में था, बल्कि एक अजीब सी राहत थी। अयान के करीब आकर वो रुकी, अपनी पलकें झुकाईं और बड़े ही अदब से बोली,"सर... मुझे पहुँचने में थोड़ी देर हो गई। माफ़ कर दीजिएगा।"
अयान हक्का-बक्का रह गया। "तुम? तुम यहाँ कैसे? और ये 'सर' क्या लगा रखा है? तुम मुझे कैसे जानती हो? उस दिन मेरे लिए होटल में क्यों रो रही थी तुम?"
लड़की ने एक गहरी सांस ली। उसने अपनी नज़रें अयान की आँखों में गड़ा दीं, जैसे वो उसके अंदर का सच पढ़ना चाहती हो।
"सर, क्या आपको वाकई कुछ याद नहीं? मैं 'दिया' हूँ... आपकी पी.ए. (P.A.)। आप इस शहर के सबसे रईस और ताकतवर 'रॉय खानदान' के इकलौते वारिस हैं।"
(लेखक के कलम से..)
अयान रॉय... एक ऐसा नाम जो रातों-रात मिट्टी में मिल गया और अब उतनी ही तेज़ी से अपनी पहचान की तरफ लौट रहा है।
दोस्तों, कहानी की ये तेज़ रफ़्तार अयान के उस बिखरे हुए दिमाग की तरह है, जहाँ यादें बिजली की तरह कौंध रही हैं।
अब असली खेल शुरू होगा, जहाँ हर कदम फूँक-फूँक कर रखा जाएगा। क्या आप तैयार हैं अयान के अतीत की उन गहरी गलियों में उतरने के लिए? बने रहिए पार्ट 5 अयान एक नफरत की आग या वजूद की तलाश में।
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