शहद की गुड़िया - प्रकरण 45
" दूसरे दिन दादू औऱ जरीवाला दोनों तीन घंटो से भी अधिक समय साथ थे. लेकिन वह कुछ नहीं बोला था.. वह गिल्ट फील रहा था. उसे सचमुच डर लगा था.. दादू ऊस का भांडा फोड़ देंगे. "
" वह दादू को होटल ले गया था, उन्हें खाना खिलाया था, फिर भी पूछ नहीं पाया था. क्यों उन्होंने ने ऐसा किया था? "
" जरीवाला ने पहली बार दादू की अंगत जिंदगी के लिये सवाल किया था. "
" आप के लडके के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ. ऊस के साथ क़्या हुआ था? क़्या ऊस की आंखे ठीक नहीं हो सकती? "
" दादू ने उसे जवाब दिया था: " दुनिया में ऊस का कोई इलाज नहीं. "
" सुनकर जरीवाला ने हमदर्दी जताई थी.. "
" कस्टम से चेक लेकर दोनों अपने घर चले गये थे. शनिवार का दिन था ओर ओफिस दो बजे बंद हो जाती थी. "
" ऊस के बाद जरीवाला का बाह्य व्यवहार बदल गया था लेकिन ऊस की भीतर कोई बदलाव नहीं आया था. वह पीछे से दादू पर वार करने से नहीं हिचकिचाता नहीं था. "
" दादू को इस बात का एहसास था.. जरीवाला ने सामने उन्हें दूसरी कंपनी में जोब के लिये ऊस के पाले हुए कुत्ते के साथ भेजा था.. लेकिन वहाँ कुछ नहीं हुआ था. दादू को चालाकी से कंपनी से बाहर निकालने की साजिश की थी.. लेकिन नाकामी हांसिल हुई थी. "
" ऊस दौरान दादू को मालूम पडा था कंपनी के अन्य डिपार्टमेंट में एक लड़का अमेरिका जा रहा था, जो कुमार भाई के हस्तक था. दादू तुरंत ऊस के पास पहुंच गये थे ओर गुजारिश की थी. "
" अगर मौका दोंगे तो मैं आप के साथ काम करने को तैयार हूं, वरना मुझे ओफिस छोड़ना पड़ेगा. मैं जर के साथ काम नहीं क़र सकता. "
" कुमार भाई दादू को अपने साथ लेने को तैयार थे क्यों की उन्होंने कुछ काम किये थे ओर वह उन्हे जानते थे. "
" ऊस समय दादू को एक किस्सा याद आया था."
" ऊस दिन भी शनिवार था ओर ओफिस दो बजे बंद होता था. दादू ऊस वक़्त पैक अप कर रहे थे तब एक अन्य भागीदार का फोन आया था. "
" वह तुरंत ही उन के पास पहुंच गये थे. ऊस दिन जरीवाला नहीं था तो ऊस को पूछने का भी सवाल नहीं था. दादू तैयार हो गये थे. भागीदार ने उन्हें बताया था. "
" मुलुंड में डायलीसिस के कंटेनर स्टफ हो रहे हैं, आप को तुरंत वहाँ जाना होगा. "
" ओर दादू तुरंत मुलुंड को निकल गये थे.. "
" घर देरी से पहुंचने की पूर्ण सम्भावना थी इस लिये उन्हो ने शाम को घर फोन किया था. ऊस वक़्त टेलिफोन सर्विस ठप्प हो गई थी. ओर काम खत्म होने में रात के दो बज गये थे. दूसरे दिन उन का जन्मदिन था और फ्लोरा घर आने वाली थी इस स्थिति में वह भागीदार को बताकर रिक्शा में घर आने को रवाना हो गये थे."
" दूसरी और देर रात तक घर ना पहुंचने की स्थिति में घर वाले टेंशन में आ गये थे. दादू के पिताजी ने थककर पुलिस में FIR दर्ज की थी. वह पड़ोस के लडके को लेकर पुलिस स्टेशन से घर लौट रहे थे तब चौराहे पर बाप बेटे आमने सामने हो गये थे. "
" घर पहुंचकर दादू पर सब ने सवालों की बौछार कर दी थी. सब ने एक ही सवाल किया था.. " फोन क्यों नहीं किया?, "
" दादू ने सब लो बडी मुश्किल से समझाया था. अड़ोस पड़ोस के लोगो ने भी कंसर्न जताया था. "
" सब को बिना वजह काफ़ी परेशानी भुगतनी पड़ी थी. "
" लेकिन ऊस का दादू को बड़ा फायदा हुआ था. उन को कुमार भाई के डिपार्टमेंट में काम करने का मौका मिला था इतना भी वह जरीवाला की तरह डिपार्टमेंटल हेड नियत हुए थे. जरीवाला ने कोई बड़ी गलती की थी ऊस की वजह से कंपनी को बहुत बड़ा नुकसान हुआ था. इस हालत में पोस्ट बेनिफिट्स के सभी काम दादू के हाथ में आ गये थे. "
" ओर जरीवाले को खाने का जो मौका मिलता था, वह बंद हो गया था ओर उसे धूल चाटने की नौबत आई थी. "
" यह देखकर ऊस के दोनों कुत्ते जलकर राख हो गये थे. "
" उन का पगार नहीं बढ़ा था, लेकिन उन्हें बार बार दिल्ली, बड़ोदा, अहमदाबाद, भुज, कंडला इत्यादि जगह जाना पड़ता था. ऊस के लिये हवाई यात्रा ओर फाइव स्टार होटल की सहूलियत प्राप्त थी. वह कुछ भी खर्चा कर सकते थे. ऊस के बारे में कुमार भाई कोई सवाल नहीं करते थे..वह केवल काम से मतलब रखते थे.. "
" दादू पहले से ज्यादातर काम करते थे इस लिये वह ज्यादा पगार के हकदार बने थे.. ऊस के लिये कंपनी से उन्होंने मांग की थी तो मैनेजमेंट ने उसे नाकबूल करते हुए उन्हेंजरीवाला के डिपार्टमेंट में भेजनें की बात की थी तो दादू ने साफ कह दिया था.."
" अगर ऐसा कुछ होता हैं तो मैं जोब छोड़ दूंगा. दादू ने बहुत मेहनत की थी ओर नुकसान सरभर किया था इस स्थिति में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ओर संस्थापक अजित भाई ने उन का पगार बढ़ा दिया था. ऊस से जरीवाला के कुत्ते नाराज हो गये थे. "
" कंपनी में सब कोई दादू को मिले प्रमोशन देखकर छक रह गये थे. सब को जलन थी लेकिन कुछ लोगो ने दादू की modus operandi देखकर खुशाली व्यक्त की थी. "
" दादू के हाथ नीचे तीन लोग काम करते थे.. एक अच्छे घर का खाता पीता लड़का था.. दादू की ऊस से खूब बनती थी. उन्होंने अमित को सब कुछ सिखाया था अब वह दादू की जगह सरकारी दफ्तर का काम संभालता था. "
" ऊस ओफिस के वरिष्ठ अधिकारी भी काम करता था. ऊस से दादू को बहुत कुछ सिखना मिला था.
000000000000 ( क्रमशः)