Ansh, Kartik, Aryan - 11 in Hindi Crime Stories by Renu Chaurasiya books and stories PDF | अंश, कार्तिक, आर्यन - 11

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अंश, कार्तिक, आर्यन - 11

आर्यन अपने कमरे में
जब से आर्यन के पिता से मिल कर लौटे थे तब से कार्तिक चुप चाप कुछ सोच रहा था।
आर्यन सोफे की बैक पर हाथ टिकाकर खड़ा था।
चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब-सी नरमी आ गई थी। तुम अभी तो सिर्फ मेरे पिता से मिले हो और तब से तुम्हारी बोलती बंद है। उसने मजाक में कहा ।“तुमने अभी तक मेरी माँ को नहीं देखा है, कार्तिक…”उसने धीमे से कहा।अगर तुम उससे मिलोगे तो क्या करोगे?“पहली नज़र में तुम्हें वो बिल्कुल साधारण लगेंगी।”वह हल्का-सा हँसा।“साड़ी पहनती हैं, बहुत धीरे बोलती हैं, और हमेशा मुस्कुराती रहती हैं।
उन्हें देखकर कोई भी कहेगा—बस एक शांत, घर संभालने वाली औरत।”आर्यन कुछ पल के लिए चुप हो गया।
फिर उसने धीरे से कहा—“लेकिन सच बताऊँ?”उसकी आवाज़ थोड़ी गंभीर हो गई।“इस घर में अगर कोई सबसे खतरनाक इंसान है…तो वो मेरी माँ हैं।
”कार्तिक चुपचाप उसकी तरफ देख रहा था।
आर्यन आगे बोला—“पापा तो बस ताक़त से कम करते हैं । लेकिन उनके पीछे जो ताकत खड़ी है ,वो है मेरी माँ का दिमाग ।
पापा हर फैसले लेने से पहले मां से सलाह लेते हैं। माँ समझती हैं कि कौन-सा फैसला कब लेना है।
  उनके सामने कोई भी झूठ बोलकर उन्होंने धोखा नहीं दे सकता । “आर्यन की आँखों में अब गर्व था।“और अगर कोई आदमी पापा के खिलाफ जाने की हिम्मत करे…तो आर्यन बस मुस्कराया ....उसने कार्तिक का हाथ पकड़ा ओर उसे अपनी ओर खींच लिया ।
कार्तिक कटी पतंग स लड़खड़ाता हुआ आर्यन के सीने से टकरा गया ।
उसने चीड़ कर आर्यन की तरफ घूर कर देखा ,उसकी आंखों में हल्की सी नाराजगी नजर आ रही थी ।
तुम क्या कर रहे हो आर्यन मे गिर गया होता ।
आर्यन जो उसकी कमर को पकड़े हुए था उसके होठों पर शरारत की हंसी निकली ।उसने ठहाका लगाया जैसे मे तुम गिरने दुगा बेबी।
मुझे उस नाम से मत बुलाओ में कोई बच्चा नहीं हूँ। कार्तिक ने गुस्से में कहा पर उसके कान हल्के से लाल हो गए थे ।चलो तुम्हे में अपनी मां से मिलाता हू ।
”महल का ड्रॉइंग रूम बहुत विशाल था।
सफेद संगमरमर का फर्श, ऊँची छत, और बीच में झूमर जिसकी रोशनी पूरे कमरे को सुनहरी चमक दे रही थी।आर्यन और कार्तिक सीढ़ियाँ उतरकर नीचे आए।
तभी सामने सोफे पर बैठी एक महिला दिखाई दी। 
वह बेहद शांत मुद्रा में बैठी थीं।
हल्की रेशमी साड़ी पहने, सलीके से बंधे बाल, और चेहरे पर बहुत ही सौम्य मुस्कान थी।
पहली नज़र में उन्हें देखकर कोई भी यही सोचता—बस से एक साधारण, सभ्य महिला है।
आर्यन ने कहा—“माँ…”महिला ने धीरे से नज़र उठाई।उनकी आँखें सीधे कार्तिक पर आकर ठहर गईं।
एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे वह उसे देख नहीं रहीं…बल्कि पढ़ रही हों।
आर्यन मुस्कुराया,“माँ, ये कार्तिक है।
”महिला धीरे से उठीं।
उनकी चाल में जल्दबाज़ी नहीं थी।
हर कदम नपा-तुला था।
वह कार्तिक के सामने आकर रुकीं।“तो… तुम कार्तिक हो।
”उनकी आवाज़ बहुत शांत थी।कार्तिक ने हल्का-सा सिर झुकाकर कहा—“जी।
 नमस्ते”महिला की आँखें अब भी उसी पर टिकी थीं।उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—“आर्यन तुम्हारे बारे में काफी बात करता है।
”आर्यन थोड़ा गर्व से मुस्कुराया। लेकिन कार्तिक ने महसूस किया—यह मुस्कान सिर्फ औपचारिक थी।
असल में वह उसे परख रही थीं।
महिला ने धीरे से पूछा—“तुम कहाँ से हो, कार्तिक?ऑस्ट्रेलिया से मेम , लेकिन मेरे पिता भारत से हैं।
”महिला की आँखों में हल्की चमक आई। 
ओह… इसलिए तुम्हारे चेहरे में दोनों जगहों की झलक है।
”फिर उन्होंने धीरे से कहा—“लेकिन इंसान की असली पहचान उसके चेहरे से नहीं…उसकी आँखों से होती है।
”कार्तिक कुछ पल चुप रहा।
उसे लगा जैसे वह उसके अंदर तक झाँकने की कोशिश कर रही हैं।
कमरे में कुछ सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया।
फिर उन्होंने अचानक मुस्कुराकर कहा—“आर्यन, अपने दोस्त को खड़ा क्यों रखा है?उसे बैठने को कहो।
”आर्यन हँस पड़ा।“देखा कार्तिक, मैंने कहा था ना—माँ बहुत अच्छी हैं।
”महिला ने धीरे से चाय का कप उठाया।लेकिन उनकी नज़र अब भी कार्तिक पर ही थी। जैसे उनके दिमाग में कोई सवाल घूम रहा हो। फिर उन्होंने बहुत शांत आवाज़ में कहा—“कार्तिक…
”कार्तिक ने उनकी तरफ देखा। “इस घर में आने वाले लोग दो तरह के होते हैं। ”उन्होंने चाय का घूंट लिया।“कुछ लोग मेहमान बनकर आते हैं…”“और कुछ…किस्मत बदलने। ”उनकी आँखों में एक पल के लिए अजीब-सी चमक आई।“मुझे उम्मीद है कि तुम पहली तरह के हो। ”कार्तिक ने हल्की मुस्कान दी।
“उम्मीद तो मुझे भी यही है मेम। 
”आर्यन को यह बातचीत सामान्य लगी। लेकिन कार्तिक समझ गया—यह महिला उसे बातों बातों में धमकी दे रही है ।
वह मुस्कुराते हुए भी खतरनाक सवाल पूछ सकती हैं।और शायद…उन्हें पहले ही महसूस हो गया था कि कार्तिक सिर्फ दोस्त बनकर इस घर में नहीं आया था ।शाम का समय था।
महल का लिविंग रूम हल्की सुनहरी रोशनी में डूबा हुआ था।
आर्यन कहीं बाहर गया हुआ था। कमरे में सिर्फ दो लोग थे—कार्तिक… और आर्यन की माँ। वह सोफे पर बैठी थीं,हाथ में चाय का कप,चेहरे पर वही शांत मुस्कान। “कार्तिक…”उन्होंने बिना उसकी तरफ देखे कहा।
“तुम यहाँ आराम से हो?”कार्तिक खिड़की के पास खड़ा था। उसने बाहर अंधेरे को देखते हुए जवाब दिया—“जी… ”महिला हल्का-सा मुस्कुराईं।
“अच्छा जवाब है।
”फिर उन्होंने धीरे से उसकी तरफ देखा।
“तुम बहुत सोचते हो, है ना?
”कार्तिक उसकी तरफ मुड़ा। 
उसकी नीली आँखें शांत थीं।
“सोचना कोई बुरी बात नहीं होती है न मेम ।
”महिला ने सिर हिलाया।
“बिल्कुल नहीं…”उन्होंने कहा,“बस… कभी-कभी ज्यादा सोचने वाले लोग गलत जगह आ जाते हैं।
”कमरे में हल्का-सा सन्नाटा फैल गया।कार्तिक कुछ कदम आगे बढ़ा।
अब वह उनके सामने खड़ा था।“और कभी-कभी…”उसने धीमे से कहा,“कुछ जगहें सही लोगों को खुद बुला लेती हैं।”महिला की मुस्कान थोड़ी गहरी हो गई।
उन्होंने कप टेबल पर रखा।“तुम्हें पता है, कार्तिक…”उन्होंने बहुत शांत स्वर में कहा,“इस घर में हर किसी का एक मकसद होता है।”“कोई ताक़त चाहता है…कोई सुरक्षा…और कुछ लोग—”उन्होंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—“कुछ लोग यहां किसी और ही मकसद से आते है। तुम इस घर में मेहमान बनकर आए हों कही हमेशा के लिए इस घर में रहने की मत सोच लेना ।
”कार्तिक की उंगलियाँ हल्की-सी सख्त हो गईं।
लेकिन चेहरे पर कोई भाव नहीं आया।में उन लोगों में से नहीं हूँ ”उसने धीरे से जवाब दिया,।
”महिला की आँखों में एक पल के लिए चमक उठी “सच में?”वह हल्का-सी हँसीं। 
अगर तुम उन में से नहीं हो तो यह क्यों हो । में यहा रहने नहीं आया हूं।आर्यन ने जिद की इस लिए मुझे आना पड़ा अलग ऐसा है तो आर्यन से दूर रहो इसी में तुम्हारी भलाई है ।”कार्तिक थोड़ा झुका…और करीब आया फिर…”उसने धीरे से कहा,तुम मुझे तो रोक सकती हो क्या उस इंसान को रोक सकती हो जो मुझे यह लाया है। अब दोनों के बीच की दूरी बहुत कम थी।कमरा शांत था—पर हवा भारी। 
महिला ने पहली बार अपनी मुस्कान थोड़ी कम की।“
तुम अलग हो…”उन्होंने कहा।“और अलग लोग…या तो बहुत काम के होते हैं…या बहुत मासूम तुम कैसे हो मुझे अभी समझ नहीं आया।
”कार्तिक सीधा खड़ा हो गया।
“फिर तो आपको तय करना होगा—मैं कैसा हूँ मेम। ”महिला उठ खड़ी हुईं। उनकी चाल अब भी शांत थी,पर आँखें तेज़।
वह उसके पास आकर रुकीं।“मैं तय कर चुकी हूँ…”उन्होंने बहुत धीमी आवाज़ में कहा। कार्तिक ने उनकी तरफ देखा। “तुम…”उन्होंने उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए कहा—“…अभी एक सवाल हो।”“और मुझे सवाल पसंद नहीं हैं। ”एक पल के लिए दोनों की नज़रें टकराईं। फिर अचानक—महिला मुस्कुरा दीं। जैसे कुछ हुआ ही न हो। “डिनर का टाइम हो गया है,”उन्होंने सामान्य आवाज़ में कहा। और मुड़कर चल दीं। कार्तिक वहीं खड़ा रहा। उसकी साँसें हल्की-सी भारी थीं। उसने महसूस किया—ये महिला बहुत ही चालाक है मुझे इससे बच कर रहना होगा ।
डाइनिंग हॉल रोशनी से भरा हुआ था। लंबी टेबल पर तरह-तरह के व्यंजन सजे थे—
महँगी कटलरी, चमकते ग्लास,सब कुछ परफेक्ट था
पर उस परफेक्शन में…एक अजीब-सा सन्नाटा था।
टेबल के शीर्ष पर विक्रम मल्होत्रा बैठे थे । उनकी पत्नी,उनके दूसरी तरफ बैठी थी ।आर्यन…और कार्तिक।
एक दूसरे के बगल में बैठे थे । नौकर चुपचाप खाना परोस रहे थे। कोई आवाज़ नहीं। बस चम्मच की हल्की खनक। विक्रम ने एक नज़र कार्तिक पर डाली।
“तो कार्तिक…”
उन्होंने शांत स्वर में कहा—“यहाँ सब कैसा लग रहा है?”
कार्तिक ने बिना झिझक जवाब दिया—
“ सब कुछ शांत सर।”एक पल का विराम और नियंत्रित।”विक्रम भी हंस पड़े उनके होंठों पर हल्की मुस्कान आई।“अच्छा है कम से कम तुम देख तो रहे हो।” आर्यन ने बीच में कहा—डैड, वो सिर्फ देख नहीं रहा…समझ भी रहा है।उसकी आवाज़ में गर्व था।
माँ चुप थीं। पर उनकी नज़र बार-बार कार्तिक पर टिक रही थी। जैसे वह हर शब्द को…तौल रही हों।
अचानक उन्होंने पूछा—“कार्तिक,तुम्हें यहाँ सबसे अजीब क्या लगता है?”कार्तिक ने उनकी तरफ देखा।
कुछ सेकंड सोचा। फिर बोला—“यहाँ… कोई सच में हँसता नहीं है।”कमरे में सन्नाटा छा गया।
नौकरों के हाथ तक रुक गए ,उन ने पहली बार किसी को 
 मालकिन को जवाब देता दिखा था । विक्रम ने धीमे से हँसी छोड़ी—यहाँ हँसी…जरूरी नहीं होती।”
कार्तिक ने हल्का-सा सिर झुका दिया—शायद यहा किसी के पास हंस ने की कोई बजा ही न हो ।
एक पल के लिए सब कुछ थम सा गया । फिर खामोशी छा गई।
”रात और गहरी हो गई महल के ज़्यादातर कमरे अंधेरे में डूब चुके थे। लेकिन एक कमरा अब भी रोशनी में था—आर्यन की माँ का निजी कमरा। वह अकेली बैठी थीं।टेबल पर कुछ फाइलें, एक लैपटॉप… और आधी ठंडी हो चुकी चाय राखी थी । उनकी आँखों में अब वो नरमी नहीं थी जो दिन में दिखती थी। अब वहाँ सिर्फ़ सवाल थे।उन्होंने धीरे से फोन उठाया और एक नम्बर मिलाया कुछ देर में फोन उठाया गया ।“राघव…”आवाज़ बहुत धीमी थी। "जी मैडम... “मुझे एक लड़के के बारे में पूरी जानकारी चाहिए। ”दूसरी तरफ़ से तुरंत जवाब आया—“नाम, मैम?“कार्तिक। ”कुछ सेकंड की खामोशी।“कौन कार्तिक, मैम?”महिला ने हल्का-सा मुस्कुराया।“यही तो पता करना है। मुझे एक घंटे में उसके बारे में सब जानकारी चाहिए। जी मेम हो जाएगा।

”कुछ घंटे बाद…महल के पीछे वाले हिस्से में एक छोटा-सा कमरा था—जहाँ आमतौर पर कोई नहीं आता।वहीं राघव खड़ा था—मल्होत्रा परिवार का सबसे भरोसेमंद आदमी। उसके हाथ में एक फाइल थी। महिला अंदर आईं। और बोली बताओ।”राघव ने फाइल खोली।“मैम, नाम—कार्तिक राय…पिता भारतीय, माँ ऑस्ट्रेलियन…”महिला चुपचाप सुनती रहीं। “पढ़ाई में तेज़, कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं…साफ़ प्रोफाइल सीधा साधा मां पिता की मौत के बाद पिता के परिवार के पास देश लौट आया नागरिकता ऑस्ट्रेलियाई पढ़ाई के वीजा पर आया है । ”महिला ने धीरे से पूछा— यहां क्यों विदेश में तो पढ़ाई यहां से अच्छी है । है पर माता पिता के बाद वहा अकेलापन यहां पिता के नाम पर कुछ संपत्ति है। “राघव ने उनकी तरफ देखा और फाइल आगे बढ़ा दी। महिला ने फाइल अपने हाथ में लेते हुए कहा बहुत ही परफेक्ट। एक-एक पन्ना देखा।हर लाइन…हर डिटेल। फिर उन्होंने धीरे से कहा—“जो लोग सच में साफ़ होते हैं…उनकी ज़िंदगी में खामियाँ दिखती हैं।”उन्होंने फाइल बंद कर दी।“और परफेक्ट लोग बहुत किस्मती होते हैं…”उन्होंने राघव की आँखों में देखा—“…या बहुत खतरनाक उस पर नज़र रखो।”वो किससे मिलता है…क्या करता है…किससे बात करता है…”उनकी आवाज़ अब ठंडी हो चुकी थी।“और सबसे ज़रूरी आर्यन के साथ उसकी नजदीकिया सच या लालच”राघव ने सिर झुका दिया—“जी मैम। ”दूसरी तरफ…कार्तिक 
रात का सन्नाटा ओर भी गहरा हो गया था कार्तिक अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ा…दूर फैले अंधेरे को देख रहा था। सब कुछ शांत था—बहुत ज़्यादा शांत। पर उस के अंदर एक सौर था। आज उसे निंद नहीं आ रही थी।
कुछ बेचैन थी। एक अजीब-सी हलचल। जैसे कोई अनजानी डोर उसे खींच रही हो। उसने आँखें बंद करने की कोशिश की पर बार बार उसे एक आवाज सुनाई दी
और उसी पल—आंखे खुल गई। उसे महसूस हो रह था।
जैसे कोई…बहुत दूर से उसे पुकार रहा हो। 
कोई आवाज़ नहीं थी—पर एहसास साफ़ था। मुझे बचा लो । कार्तिक की साँसें हल्की तेज़ हो गईं।
उसने आँखें खोलीं। कौन…?”उसके होंठों से धीमी आवाज़ निकली। कोई जवाब नहीं। सिर्फ वही एहसास—
और गहरा। जैसे कोई दर्द में हो…जैसे कोई इंतज़ार कर रहा हो। उसका दिल अजीब ढंग से धड़कने लगा।
यह डर नहीं था…ये दर्द था । अंजना सा दर्द जो उसको सता रहा था । कुछ ऐसा…जो समझ नहीं आ रहा था।
उसने धीरे-धीरे कमरे से बाहर कदम रखा।
महल का गलियारा खाली था। पर उसे लग रहा था—वह अकेला नहीं है। उसके कदम अपने-आप आगे बढ़ने लगे। जैसे उसे रास्ता पता हो। जैसे कोई उसे बुला रहा हो—और वह… जवाब दे रहा हो। वो चलता रहा जब तक अंधेरे में उसे दूर सीढ़ियां नहीं दिखाई दी वो सीढ़ियों के पास पहुँचकर
वह अचानक रुक गया। नीचे…महल का वो हिस्सा था
जहाँ आमतौर पर कोई नहीं जाता। वो सीढ़ियों के नीचे उतरना चाहता था तभी किसी ने उसे पीछे खींच लिया।
ओर वहां एक कठोर सीने से टकरा गया ।कार्तिक का शरीर एक दम अकड़ गया ।
जब उसने सीने के मालिक को देखा तो वो स्थिर हुआ।
तुम कहा जा रहे हो बेबी आर्यन ने धीमी आवाज में कहा मुझे नींद नहीं आ रही थीं। ओर मुझे प्यास भी लगी थीं इसलिए में पानी लेने जा रहा था। पर तुम्हारा महल इतना बड़ा है कि मुझे रास्ता नहीं समझ आया। आर्यन उसे अपने कमरे में ले आया और पानी दिया।फिर बोला कार्तिक उस सीडी के पास मत जाना वहां पुराना कावड भरा हुआ है ।
महल के उस हिस्से में कई सालों से सफाई नहीं हुईं है इसलिए वहां कोकरेज ,सांप,बिच्छू, हो सकते है। समझे
उसने सिर हिलाया जी ठीक है । फिर आर्यन ने कहा अगर तुम्हे नींद नहीं आ रही तो यही सो जाओ मेरे कमरे में । नहीं तुम्हारी मां को पता चला तो क्या सोचेगी कार्तिक ने कहा । तो कुछ नहीं होगा में संभाल लूंगा तुम सो जाओ। कार्तिक सोफे पर लेट गया आर्यन ने उसे बिस्तर पर बुलाने की कोशिश की पर उसने नहीं मानी। कार्तिक सोफे पर लेट गया उसने अपनी आंखे बंद कर ली। पर उसका दिल और भारी होता जा रहा था। जैसे वह किसी सच्चाई के करीब पहुँचने वाला हो।
महल के नीचे…जहाँ रोशनी पहुँचने से डरती थी—
वहीं था वो तहखाना। दिन और रात का कोई फर्क नहीं था। एक कोने में…एक इंसान पड़ा था।कमज़ोर…टूटा हुआ…पर अभी भी जिंदा।उसका शरीर घावों से भरा था।
उसकी साँसें भारी थीं । लेकिन दिल…अब भी हार मानने को तैयार नहीं था। उसने धीरे से आँखें खोलीं। अंधेरा था। हर बार की तरह। पर आज…कुछ अलग था।
उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। जैसे…जैसे कोई उसके पास आ रहा हो। उसने काँपते होंठों से फुसफुसाया“कोई है…?”कोई जवाब नहीं। पर फिर भी—उसे एहसास हुआ।
वो अकेला नहीं है। उसकी आँखों से आँसू बह निकले।
“भगवान…”उसने टूटी हुई आवाज़ में कहा—“अगर कहीं हो…तो अब और मत आज़माओ मुझे…”उसने अपनी मुट्ठी कस ली। मैं थक गया हूँ…”उसकी आवाज़ कांप रही थी—“बहुत… थक गया हूँ…”कुछ पल के लिए वह चुप हो गया।फिर बहुत धीरे से—दिल से—एक पुकार निकली।अगर मेरी कोई आत्मा है…अगर मेरा कोई अपना है…”
उसकी साँसें टूटने लगीं। तो उसे भेज दो…”
अंधेरे में उसकी आवाज़ गूंजकर लौट आई। पर इस बार—कुछ अलग था। जैसे कहीं दूर…किसी ने उसे सुन लिया हो।
उसके होंठों पर एक हल्की-सी उम्मीद आई।“मुझे… यहाँ से निकाल लो…”उसने फुसफुसाया—“मैं और नहीं सह पाऊँगा…”उसकी आँखें धीरे-धीरे बंद होने लगीं।
उसकी हर सांस टूट रही थी पर वो हार नहीं रहा था।उसके दिल में एक उम्मीद जागी थी।जैसे कोई…सच में आ रहा हो।
ऊपर महल में—कार्तिक ने अचानक आँखें खोल दीं।
उसकी साँस तेज़ हो गई। दिल जोर से धड़क रहा था।
दोनों अलग जगह थे पर एक ही पल में दोनों ने एक-दूसरे को महसूस कर रहे थे। अंधेरे में एक पुकार उठी थी—
और किसी ने उसे सुन लिया था।


क्या कार्तिक समझ पाएगा ये किसकी पुकार है।