Pahli Nazar ka Jaadu - 2 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | पहली नज़र का जांदू - 2

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पहली नज़र का जांदू - 2

एपिसोड 2: कॉफी का पहला स्वाद

रिया की उंगलियां फोन पर रुकीं। आरव का मैसेज स्क्रीन पर चमक रहा था: "हाय रिया, आज का मिलना याद रहेगा। कल कॉफी मिलेंगे?" दिल की धड़कन तेज़ हो गई। मां की बातें कान में गूंज रही थीं – राजेश, शादी, घर की ज़िम्मेदारी। लेकिन आरव की स्माइल... वो आंखें... "एक बार मिल लूं, क्या हर्ज़ है?" रिया ने रिप्लाई किया: "ठीक है, कल दोपहर 3 बजे मॉल के कैफे में।" भेजते ही हाथ कांपे। प्रिया को फोन किया, "प्रिया, कल मॉल जा रही हूं। एक लड़के ने मैसेज किया है।" प्रिया चिल्लाई, "क्या? वो ही जिसका कार्ड मिला था? वाह रिया, लव स्टोरी शुरू!"

अगली सुबह स्कूल में रिया बेचैन थी। बच्चे गिनती पढ़ा रहे थे, लेकिन उसका दिमाग मॉल पर अटका था। "मैम, आप ठीक तो हो?" छोटी सी नेहा ने पूछा। रिया मुस्कुराई, "हां बेटा, बस सपनों में खोई हूं।" शाम को घर लौटकर तैयार हुई – सिंपल सलवार सूट, हल्का मेकअप। मां ने देखा, "कहां जा रही बेटी?" रिया झूठ बोला, "प्रिया के साथ शॉपिंग।" मन ही मन प्रार्थना की, "भगवान, ये सही हो।"

दोपहर 3 बजे, मॉल का कैफे 'कॉफी हाउस'। आरव पहले से आया था – ब्लू शर्ट, जींस, टेबल पर फूल रखा। रिया को देखते ही उठा, "वाह रिया, कितनी खूबसूरत लग रही हो!" रिया शरमाई, "थैंक यू। तुम भी... मतलब आप।" दोनों हंसे। वेटर आया, "क्या लेंगे सर?" आरव ने कहा, "दो कॉफी, और लिट्टी चोखा प्लेट – पटना स्टाइल!" रिया चौंकी, "तुम्हें पता है लिट्टी?" आरव हंसा, "मैं पटना का ही हूं रिया। मुंबई गया पढ़ाई के लिए, लेकिन दिल यहां का है। फैमिली बिज़नेस संभाल रहा हूं। तुम?"

रिया ने बताया – टीचर होना, घर की कहानी, सपने। "मैं कहानियां लिखती हूं। प्यार, धोखा, खुशी – सब कुछ। लेकिन रियल लाइफ में..." आरव ने हाथ पकड़ा, "रियल लाइफ में भी हो सकता है। कल से शुरू हो गया न?" उनकी उंगलियां छुईं, स्पार्क सा लगा। कॉफी आई, दोनों बातों में खो गए। आरव ने अपनी स्टोरी शेयर की – पापा की मौत, मां का प्रेशर। "मां चाहती हैं अमीर घर से बहू, लेकिन मैं दिल की सुनता हूं।" रिया ने कहा, "मेरी मां भी राजेश नाम के लड़के की बात कर रही हैं। लेकिन दिल कहता है इंतज़ार करो।"

समय उड़ गया। बाहर गंगा घाट की सैर का प्लान बना। मॉल से निकले, आरव की कार में। गंगा किनारे सूरज डूब रहा था। ठंडी हवा, चाय की दुकानें। "पटना की खूबसूरती यही है," आरव ने कहा। हाथ पकड़कर घूमे। पहली बार रिया ने महसूस किया – ये प्यार है। आरव रुका, "रिया, मैं सीरियस हूं। तुम्हें पसंद करती हूं।" रिया की आंखें नम, "मैं भी... लेकिन हमारा बैकग्राउंड?" आरव ने गले लगा लिया, "प्यार बैरियर तोड़ता है।"

घर लौटते वक्त प्रिया का फोन आया। "रिया, राजेश की मां आ गईं! शादी की डेट फिक्स करने को कह रही हैं। कहां हो तुम?" रिया घबरा गई। आरव ने सुना, "कौन राजेश?" रिया ने बताया। आरव उदास, "मिलना होगा?" रिया ने हां कहा।

उधर मुंबई में आरव की मां को शक हुआ। "बेटा इतना खुश क्यों लग रहा? कोई लड़की तो नहीं?" आरव ने टाल दिया। रात को रिया बिस्तर पर – आरव का मैसेज: "आज का दिन जिंदगी का बेस्ट। कल फिर मिलें?" लेकिन तभी दरवाजे की घंटी बजी। मां ने खोला – राजेश खड़ा था, हाथ में गिफ्ट। "रिया जी, बात करनी है।"

रिया का चेहरा सफेद। क्या करे? प्यार या फैमिली?

(एपिसोड समाप्त। अगले एपिसोड में: राजेश का सरप्राइज़ और आरव का जलन भरा कॉल।)