फिल्म लेख : मछली से मगरमच्छ का बैर
स्त्री अस्मिता और स्वाभिमान का संघर्ष
(सरोज खान, श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित)
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दो को तो आप जानते ही हैं,अच्छे से।तीसरी सरोज खान कौन हैं? यह इन दोनों की गुरु तुल्य और इनके साथ सक्रिय रहीं करीब पच्चीस साल तक।
कुछ गानों से बात आगे बढ़ाते हैं, न जाने कहां से आई है,न जाने कहां को जाएगी यह लड़की (चालबाज), काटे नहीं कटते यह दिन और रात (मिस्टर इंडिया), मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा (नगीना), मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं (चांदनी ), बंजारन तेरा रास्ता देखे,कब आएगा मेरे बंजारे (बंजारन),बेकरार,बेदर्दी (कर्मा,क्लाइमेक्स गीत) और भी बहुत से डांस गीत। इन सब पर श्रीदेवी को बिजली की तरह नृत्य करते आपने देखा बड़े पर्दे पर। एक एक गाना सुपरहिट। श्रीदेवी जो बी ग्रेड फिल्मों हिम्मतवाला, मवाली,जस्टिस चौधरी,जानी दोस्त,मकसद जैसी फिल्मों से उभर रही थी,जूली फिल्म के फ्लॉप होने के पांच साल बाद ,वह ए ग्रेड फिल्मों में आई और लगातार हिट,सुपरहिट देकर सुपर स्टार बनी। उस वक्त श्रीदेवी की फीस हीरो से भी अधिक होती थी। फिल्म चालबाज में रजनीकांत और सनी दियोल साइड में थे और मुख्य कहानी हीरोइन श्रीदेवी की थी।
ऐसे ही यश चोपड़ा की चांदनी,विनोद खन्ना,ऋषि कपूर,हरमेश मल्होत्रा की नगीना,निगाहें ऋषि कपूर,सनी दियोल थे पर फिल्में श्रीदेवी पर आधारित थी और खूब बड़ी हिट हुई।
उन दिनों ,प्रारंभ से संभवतः चांदनी से सरोज खान ने श्री देवी को कोरियोग्राफ (नृत्य निर्देशक) करना प्रारंभ किया। सरोज खान ,करीब पंद्रह वर्ष की उम्र से बड़े बड़े डांस मास्टर को असिस्टेंट कर रही थी,जिसने मास्टर कमल जैसे दिग्गज डांस मास्टर भी थे। बहुत मेहनत से इन्होंने अपना मुकाम बनाया। नए और दिलचस्प डांस स्टेप,संगीत की गहरी समझ के अनुकूल वह नृत्य बनाती जो स्वाभाविक लगता।ऐसा मानो हम अपने घर,समारोह में सहजता से कर लेते हैं। यह सारी फिल्में उन्नीस सौ पिछ्यासी से नब्बे के दशक तक की हैं। सरोज खान नंबर एक की नृत्य निर्देशिका थी। सभी नामचीन निर्देशक सुभाष घई, यश चोपड़ा आदि इन्हें ही बुलाते और यह हर बार उनकी उम्मीदों पर खरी उतरती। कई छोटे निर्माता जो इतनी बड़ी डांस डायरेक्टर,जिनके तीस पेंतीस जूनियर साथ होते को अफोर्ड नहीं कर पाते तो उन्हें एक गाना कोरियोग्राफ करने ही बुलाते। यह जलवा और कद था सरोज खान का उस समय।सुभाष घई,उस वक्त के नंबर एक निर्माता निर्देशक की हर फिल्म में सरोज खान थी, कई वीडियो इनके आप यूट्यूब पर देख सकते हैं।परदेस,ताल सभी में।फिल्मों के हिट होने में अच्छे संगीत का बड़ा योगदान होता है।और संगीत हिट होने में उसके गानों के फिल्मांकन का बड़ा योगदान होता है। महसूस करें आज भी हम टीवी,यूट्यूब पर पूरी फिल्म देखने की बजाय कई बार गाने ही देखते हैं,बार बार देखते हैं। उन गानों में ,नृत्य में यदि जान नहीं होगी,गीतकार के शब्दों के अनुसार हीरो हीरोइन का अभिनय नहीं होगा तो फिल्म लगने पर दर्शक पहले ही दिन निराश होंगे और आगे फिल्म और गाने नहीं चलेंगे। अच्छा निर्माता, निर्देशक यह बात समझता और जानता है।राजकपूर,श्री चार सौ बीस,आवारा,संगम,जिस देश में गंगा बहती है,प्रेमरोग आदि में देखें उनके नृत्य निर्देशक ने उन गानों के स्टेप्स और भाव ऐसे रखे की आज भी वह गाने साठ साल बाद भी तरो ताजा और अपने से लगते हैं। बिमल रॉय,के.आसिफ महबूब खान, मदर इंडिया का हर गाना,अपने आप में बेजोड़ है।यह कमाल डांस डायरेक्टर,(नृत्य निर्देशक) करता है फिल्म के निर्देशक के साथ मिलकर। गुरुदत्त, कालजयी फिल्म मेकर,प्यासा, कागज के फूल, आरपार, सीआईडी आदि वह पहले नृत्य मास्टर ही थे। इनके और राज खोसला के हर गाने में पूरी कहानी ही होती है। आप मेरा गांव मेरा देश, मैं तुलसी तेरे आंगन की,फिल्म का कोई भी गाना देखें,आप पूरी एक कहानी उसमें पाएंगे।
यह हस्ती होती है अच्छे नृत्य निर्देशक की एक फिल्म में।
आजकल के तो नृत्य निर्देशक अधिकतर बेकार और बेसिर पैर के स्टेप्स करवाके फिल्मों को डुबा और देते हैं।
कलाकार का अपमान कला का अपमान
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सरोज खान ने अनेक फिल्मों में अपने डांस स्टेप्स से हर बड़े हीरो और हीरोइन अमिताभ,धर्मेंद्र,जितेंद्र,शत्रुघ्न सिन्हा,अनिल कपूर,रीना रॉय,जीनत अमान,रेखा से लेकर श्रीदेवी तक को उन्होंने नृत्य करवाया और सुपर हिट गाने दिए। यह गाने ही दरअसल आगे कलाकारों के बेहतरीन कमाई का मौका बनते हैं। देश विदेश में स्टेज शो पर कहानी या अभिनय तो होना संभव नहीं न ही इतना समय होता है।तो उस वक्त बड़े बड़े कलाकार की फिल्मों के हिट गानों पर ही परफॉर्मेंस होता है।यह आज भी होता है और आगे भी होता रहेगा। इन शो से कलाकार लाखों की कमाई और कई बार फिल्मों से अधिक कमाई करते हैं।
ऐसे सभी बड़े शो में हर बड़े स्टार के पास जो भी हिट गाने होते वह सरोज खान के होते।
बेहद गरीबी और झोपड़ पट्टी से जीवन शुरू करने वाली सरोज खान, विवाह के बाद वह खान हुई, ने सफलता का लंबा दौर देखा। पर वह हमेशा डाउन टू अर्थ रहीं।उनकी सफलता का राज था मौलिक और नए स्टेप्स ,कड़ी मेहनत। वह बड़े से बड़े स्टार को भी रिहर्सल करवाती,स्टेप जब तक उसको नहीं आ जाते,वह पसीना बहाता, जानता था कि यहां की मेहनत उसे एक शानदार सुपर हिट गाना देगी।
बराबर खुद सरोज खान इन सभी गानों को पहले अपने डांसर्स से करवाके दिखाती फिर हीरो हीरोइन को खुद भी वह पूरा गाना खुद करके दिखाती।इस लेख में जितने भी गानों का जिक्र आएगा सरोज खान के, वह सभी उन्होंने खुद करके कई कई बार दिखाए। सामान्य एक गाने के फिल्मांकन में सात आठ दिन लगते हैं।
आपको आश्चर्य होगा गणेश आचार्य,फरहा खान यह सब आज के टॉप कोरियोग्राफर उनके शागिर्द थे।और बहुत जूनियर असिस्टेंट।
हुआ यूं कि फिल्म कर्मा,सुभाष घई,की शूटिंग थी या किसी और फिल्म की श्रीदेवी रिहर्सल पर नहीं आई। सरोज खान और उनका पूरा समूह,अन्य कलाकार,निर्देशक इंतजार करते रहे,वह दो दिन नहीं आई। पता किया तो उन्होंने कहा कि वह समय नहीं निकाल पा रही तो सरोज जी को उनकी फला फिल्म के सेट पर भेज दो,वह वहां उनसे बात करके स्टेप देख लेंगी। श्रीदेवी उस वक्त नंबर एक हीरोइन बन चुकी थी।पर ऐसे बात बड़े से बड़े स्टार ने नहीं कही थी।
आज की माधुरी दीक्षित तब बीएससी करके कथक डांस सीखने जाती थी। किसी ने कहा पतली दुबली माधुरी से की फिल्मों में कोशिश करो तो कर चुकी थी। अबोध फिल्म अमोल पालेकर के साथ आकर सुपर फ्लॉप हो चुकीं थी। वह किसी मराठी माणुस से घर बसाने की ,एक दो साल के बाद सोच रही थी।
सरोज जी तो निर्माता,निर्देशक के पैसों की पूरी कीमत देती थी शानदार गाने बनाकर उनको। वह थोड़ी शांत रहीं,बुरा नहीं लगा और वह श्रीदेवी के सेट पर अगले दिन गई भी। वहां उन्हें दो घंटे इंतजार के बाद श्रीदेवी ने बुलाया और उनसे अपने सामने डांस करवाया। सोचे सुपरहिट डांस डायरेक्टर,अपनी स्टार के सामने नाच कर दिखा रही। श्रीदेवी ने उसमें मीन मेंख निकाले और कहा यह यह करूंगी,यह यह नहीं।
कोई बात नहीं पर निर्देशक का नुकसान होता।सरोज जी वापस आ गईं। बड़ी हीरोइन के बड़े नखरे।सहन किए उन्होंने।
फिर श्रीदेवी ने उन्हें अपनी कुछ फिल्मों से हटवाना प्रारंभ किया। सरोज खान को पता चलना ही था, पता चला।पर बड़ी हीरोइन,जिसने अपने बूते कई हिट फिल्में दी,की सब मानते। पूरी इंडस्ट्री देख रही थी कि किस तरह सरोज खान को खत्म किया जा रहा था।कुछ तो कहते भी ,"सरोज जी,हम आपके साथ काम करना चाहते हैं आपने हमें हिट गाने दिए हैं पर बड़ी हीरोइन को नाराज नहीं कर सकते।"
यहां जो बात एक लेखक और चिंतक के रूप में मैं कहना चाहता हूं कि दो स्त्रियां,अपने फील्ड की दिग्गज परंतु एक अधिक ऊंचाई पर,सुपरस्टार दूसरी संघर्ष और परिश्रम से एक एक इंच सरक सरक कर अपनी मेहनत से दूसरों को पर्दे पर छाते,वाह वाही लूटते देखती।और चुपचाप पर्दे के पीछे अपना काम करती रहती।
तो क्या किया जा सकता? फिल्म इंडस्ट्री तो वैसे ही पुरुष प्रधान और चढ़ते सूरज को सलाम करती है।
सरोज खान के हाथ में विरोध करना या शिकायत करना भी नहीं था,न ही वह ऐसी औरत थीं। वह ईमानदार,अपने मेहनत पर गर्व करने वाली,परिश्रमी और फन की कद्रदान थी।
कोई दस फिल्मों से और दो वर्षों तक बॉयकॉट चला।
उसके बाद क्या? कोई कॉम्प्रोमाइज ? कोई झुका?. झुकता कौन? कमजोर?
लेकिन इस देश में प्रतिभा,मेहनत और लगन से जब भारती शंकराचार्य को पशोपेश में डाल देती है, सीता जी ,श्री राम को सवालों में ले आती हों तो फिर ?
पर यहां मुकाबला बराबरी का तो छोड़ो था ही नहीं कोई मुकाबला।क्योंकि फिल्मों की नंबर वन ,स्थापित सुपर स्टार श्रीदेवी से कोई नहीं मुकाबला कर सकता।खासकर जब बोनी कपूर जैसा जुगाड़ू प्रोड्यूसर और कई बड़े बैनर उसके पीछे हो। क्या बिसात फिल्म के एक हिस्से को संभालने वाले ,वह भी पर्दे के पीछे से, की?
करियर खत्म या कुछ और हुआ
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साल उन्नीस सौ चौरासी,पतली दुबली ,मराठी लड़की माधुरी दीक्षित अपने डांस के वीडियो लेकर संघर्ष कर रही। सुभाष घई,बहुत बड़ी फिल्म कर्मा,दिलीप कुमार,जैकी श्रॉफ,अनिल कपूर,श्रीदेवी,पूनम ढिल्लो, अनुपम खेर के साथ बना रहे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का भव्य संगीत और नृत्य निर्देशक सरोज खान। सुभाष घई शायद इकलौते ऐसे फिल्म निर्देशक निर्माता थे,जिन्होंने श्रीदेवी के कहने पर भी सरोज खान को नहीं हटाया।
उसकी शूटिंग कश्मीर में। सरोज खान ने घई से बात की और माधुरी की तारीफ की। घई बहुत गंभीर,जिम्मेदार और संगीत ,कला के पारखी। सरोज खान कुछ कह रही तो उन्होंने गौर किया,वीडियो देखा।माधुरी को बुलाया गया।कर्मा फिल्म के लिए एक नृत्य गीत उन पर फिल्माया गया। माधुरी उस वक्त कोई नहीं,श्रीदेवी, सुपरस्टार की फिल्म में एक डांस नंबर। सोचें ,सेट पर श्रीदेवी का जलवा,उनका बड़ा सा स्टॉफ और दबदबा। माधुरी,सहमी,सिमटी सी,अपने संघर्ष को जीती और मेहनत, लगन की मूर्ति,किसी तरह श्रीदेवी को सलाम ठोक,विश कर अपना काम,नृत्य करती।
आप देखेंगे,फिल्म कर्मा सुपर डुपर हिट हुई पर उसमें माधुरी का कोई सीन नहीं,गाना तो दूर की बात है।
क्या हुआ? क्या सुभाष घई भी झुक गए? फिर सरोज खान की मेहनत क्या हुई?
सुभाष घई,वह शख़्स जो चुनौतियों को आगे बढ़कर लेता, सामना करता और अपने दृढ़ निश्चयी स्वभाव और क्राफ्ट की बढ़िया जानकारी के बूते सफल होता ,हर बार। चाहे पहली फिल्म कालीचरण हो,जिसमें उसने फिल्मी के जाने माने खलनायक को हीरो बनाकर पेश किया,शत्रुघ्न सिन्हा स्टार बन गए। या फिर उन्नीस सौ बयासी में बिलकुल नए,सामान्य,अपरिचित लड़के जयकिशन श्रॉफ और दक्षिण भारतीय सांवली सी मीनाक्षी शेषाद्रि को लेकर हीरो फिल्म बनाई हो।और वह सुपर हिट रही, ऐसा बड़ा और आत्मविश्वासी निर्देशक सब समझ और सोच रहा था। उसकी पारखी निगाहों ने माधुरी पर शूट किया गाना देखा,जिसे सरोज खान ने कर्मा के लिए तैयार किया था। नई अभिनेत्री माधुरी की लगन,मेहनत और नृत्य में प्रवीणता ने उस गाने में खास बात पैदा की। घई के करीब दस लाख रुपए खर्च हुए थे उस गाने पर लेकिन उन्होंने सरोज खान और माधुरी दीक्षित से कहा,"इस गाने में इसे हम वेस्ट नहीं करेंगे।आगे इसके साथ एक फिल्म बनाएंगे।" सोचें वर्ष उन्नीस सौ चौरासी का प्रारंभ,कर्मा शूट हो रही अभी,पूरी होगी,रिलीज होगी,उसके बाद कोई अगली फिल्म सुभाष घई सोचेंगे,कम से कम तीन साल। तीन सालों में कोई और अभिनेत्री आ गई,माधुरी ही कहीं खो गईं, या श्री देवी ही और जबरदस्त हो गईं? तो गई आगामी फिल्म। लेकिन यहां ईश्वर अपने बंदों को सहनशीलता,भरोसा और कर्म करने की राह दिखाता है। माधुरी ने सरोज खान और सुभाष घई की बात मानी,विश्वास किया। वह गाना श्रीदेवी पर फिल्माया गया,सरोज खान ने नृत्य निर्देशन किया और क्या खूब किया। क्लाइमेक्स में वह गाना है आप जरूर देखे यूट्यूब पर।अनुपम खेर ने अपने अभिनय और सरोज खान के शानदार फिल्मांकन और श्रीदेवी के नृत्य ,हालांकि यह स्टेप नगीना में भी कुछ थे,से गाने में कॉमेडी भी पैदा कर दी है।
उन्नीस सौ पिचयासी में फिल्म आई और बेहद सफल रही।
सुभाष घई ने उससे पूर्व माधुरी को अपने होम प्रोडक्शन की फिल्म उत्तर दक्षिण में एक चांस दे दिया था। अशोक घई,निर्माता थे,रजनीकांत, जैकी श्रॉफ फिल्म में थे।फिल्म कुछ खास नहीं चली। माधुरी एक दो छोटी छोटी फिल्मों में काम करती रही।आवारा बाप,राजेश खन्ना,स्वाति पर कोई चली नहीं।
फिर दो वर्ष संघर्ष के बाद सुभाष घई ने फिल्म ऐलान किया "राम लखन" मुख्य हीरोइन माधुरी दीक्षित, और स्क्रीन,फिल्म वीकली अखबार में बड़े बड़े सात आठ पेज में अपनी कंपनी मुक्ता आर्ट्स की नई हीरोइन से मिलवाया,अपने खास अंदाज में,वह उस वक्त के नंबर एक फिल्म निर्माता निर्देशक थे। एक पूरे पेज पर सिर्फ आंखे, दूसरे पर होठों का क्लोज अप,तीसरे पर हाथों की नृत्य मुद्राएं,अगले पर आधे से कम चेहरा फिर आखिर में पूरा चेहरा ।
तहलका मचना था मचा।हंगामा हो गया।इतना बड़ा प्रोडक्शन हाउस एक नई लड़की को लॉन्च कर रहा,भव्य अंदाज में।कौन है? कौन है माधुरी दीक्षित? कोई नहीं जानता। श्रीदेवी और उनकी टीम ने सुना,देखा और कान से मक्खी उड़ाई,"आती रहती हैं बहुत ऐसी तो।"
माधुरी दीक्षित,कच्ची मिट्टी सी ढलने को तैयार तो सरोज खान चट्टान सी साथ
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शास्त्रीय नृत्य में भाव भंगिमाएं महत्वपूर्ण होती हैं।वह माधुरी ने अपने कथक गुरु से सीखा था। फिर माधुरी का भावपूर्ण,फ्रेश चेहरा और शरीर की लोच,लचक बाकी कार्य टॉप के अभिनय गुरु रोशन तनेजा,सरोज खान और सुभाष घई ने किया। योग्य शिष्या की भांति माधुरी ने बेहद बारीकी से हर बात सीखी। इसके साथ ही एन चंद्रा की तेजाब और इंद्र कुमार की दिल भी उन्हें मिली।
यह ध्यान रहे कि इससे पहले लगभग चार फिल्में फ्लॉप हो चुकीं थी,एक मराठी की थी।
तो सुभाष घई के जीवट,हिम्मत और पारखी निगाह और सरोज खान की पूरी मेहनत और अनुभव ने वह जादू किया स्क्रीन पर की ऐसे नृत्य परफॉर्मेंस,माधुरी का अभिनय और उन पर नृत्य ,आवाज का सधा हुआ जादू और मासूमियत ने दोनों फिल्मों को ब्लॉक बस्टर बना दिया। तेजाब का एक दो तीन गाना तो पूरे देश की धड़कन बन गया। तो राम लखन के गानों और माधुरी के नृत्य ने धूम मचा दी। चारों ओर माधुरी दीक्षित के चर्चे। फिर आई दिल आमिर खान हीरो और इंद्र कुमार की पहली निर्देशित फिल्म।यह भी सुपर हिट रही।अभी नब्बे का दशक शुरू ही हुआ था कि बेटा,इंद्र कुमार,राजा,खलनायक,सुभाष घई, तीनों सुपर हिट।
खास बात यह रही कि इन फिल्मों की नृत्य निर्देशक सरोज खान थीं और हर फिल्म में माधुरी दीक्षित के नृत्य और मौलिक,अनूठे स्टेप्स ने क्या युवा और क्या बड़ा,आम और खास हर एक का मन मोह लिया।
बेटा का "धक धक करने लगा" हो , खलनायक का ,"चोली के पीछे क्या है" ,राजा का "कभी अंखियां मिलाऊं कभी अंखियों चुराऊँ" हर गाना बेजोड़ शानदार कोरियोग्राफ किया हुआ।
इन छह फिल्मों पर चार फिल्म फेयर माधुरी दीक्षित को मिले। और वह देश की नंबर वन हीरोइन बन गई। सरोज खान की परम शिष्या। उनकी हर फिल्म में सरोज खान का नृत्य निर्देशन होता।
अभी तो यह शुरुआत थी।आगे इतिहास में दर्ज होने वाली फिल्में आनी थीं। फिर आई "हम आपके हैं कौन" निर्देशक सूरज बडजात्या,जो दशकों तक भारतीय सिनेमा इतिहास ने सर्वाधिक कमाई करने वाली फिल्म रही।पूरी तरह नायिका प्रधान और नृत्य निर्देशन सरोज खान। यह बताना प्रासंगिक होगा माधुरी दीक्षित को फिल्म में सलमान खान से अधिक रकम दी गई,वर्ष था उन्नीस सौ तिरियानवे।भारतीय सिनेमा नए,समझदार और संगीतमय दौर में प्रवेश कर चुका था। सरोज खान पर ऐसा जूनुन सवार था कि वह माधुरी जी हर फिल्म पर जी तोड़ मेहनत करती।भले ही फिल्म छोटे बैनर की होती हंड्रेड डेज,खिलाफ, वह इतने बढ़िया नृत्य बुनती और माधुरी से करातीं की यह दोनों फिल्में एक में जैकी श्रॉफ तो दूसरे में चंकी पांडे हीरो,भी हिट हो जाती। क्योंकि गाने जबरदस्त हिट होते पर्दे पर।
यह सरोज खान की मेहनत,लगन से अधिक अपने फील्ड और सिने जगत में यह दिखाना था कि एक फनकार अपने हुनर में माहिर होता है। वह स्टार का मोहताज नहीं होता। श्रीदेवी का इन सात वर्षों में एक भी गाना,नृत्य हिट नहीं हुआ। फिल्में फ्लॉप और हुई।
आगे दिल तो पागल है,यश चोपड़ा,शाहरुख खान के साथ और फीस शाहरुख से अधिक,देवदास ,संजय लीला भंसाली ,शाहरुख खान, हम तुम्हारे हैं सनम,बेहद मामूली कहानी,शाहरुख,सलमान और माधुरी दीक्षित,पर फिल्म हिट,की लाइन लग गई। युवा ऐश्वर्य राय के साथ देवदास के डोला रे डोला गाने को देखिए कभी, माधुरी इक्कीस साबित हुई।जबकि यहां नृत्य निर्देशक खुद संजय लीला भंसाली थे। यह होता है प्रतिभाशाली को योग्य गुरु ,द्रोणाचार्य, वशिष्ठ जैसा मिलना।
इतिहास में सबसे सफल फिल्में देकर माधुरी दीक्षित सर्वाधिक लोकप्रिय अभिनेत्री बनी। एक साधारण,मराठी लड़की,जो बीएससी करके,नृत्य सीखकर,घर बसाकर बैठने वाली थी। पर किस्मत को सरोज खान का अपमान,फिल्मों से निकलवाकर करियर खत्म करने का जवाब सरोज खान से ही दिलवाना था। साध्य के साथ साधन भी योग्य और मेहनती था तो बस इतिहास लिख गया। माधुरी ने प्रहार,नाना पाटेकर,मृत्युदंड प्रकाश झा,वजूद,एन चंद्रा के साथ कला फिल्में भी की और अपनी अभिनय क्षमता को और निखारा। श्रीदेवी यह सब करने की नहीं सोच सकीं। फिर माधुरी ने आदर्श भारतीय लड़की की तरह ,जब वह कुछ वर्ष और राज कर सकती थी,विवाह कर लिया एक हार्ट सर्जन श्री राम नेने से।हाथ की फिल्में पूरी कर अमेरिका चली गई और दोनों बच्चों के बड़े होने तक करीब बारह वर्ष फिल्मों से दूर,बिलकुल घरेलू महिला रही।अभी वह वेबसरीज मिसेज देशपांडे और संगीत के कार्यक्रमों में दिखती हैं।
पर एक बात कहनी पड़ेगी कि माधुरी दीक्षित ने कभी भी श्रीदेवी के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा।सरोज खान ने भी कभी भी श्रीदेवी की सामने आलोचना नहीं की। बाकी पूरी इंडस्ट्री ने देखा और महसूस किया किस तरह लगन और मेहनत से सरोज खान ने अपनी कला,योग्यता और क्षमता का सही उपयोग करके सुपरस्टार से हुए अपने अपमान को रचनात्मक मोड़ दिया। यही वह उम्मीद और जिजीविषा है जो हम सभी में परमात्मा ने दी है बस उसका उपयोग और खुद को योग्य समझ आगे आने की जरूरत है। ऐसे ही अमिताभ ने भी किसी का घोर अपमान किया था तो उस व्यक्ति ने क्या किया? उसने अपने काबिलियत से वह करिश्मा एक बार नहीं तीन बार दोहराया। वह अगली बार।
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(डॉ.संदीप अवस्थी , कथाकार,आलोचक,फिल्म लेखक
804,विजय सरिता एनक्लेव
बी ब्लॉक,पंचशील,अजमेर,305004
मो 7737407061)