Title: दुश्मनी के दरमियान इश्क
Part 14: भरोसे की दरार
रात की खामोशी में दो अलग-अलग जगहों पर…
दो दिल एक ही सवाल से जूझ रहे थे।
भरोसा…
क्या सच में इतना कमजोर होता है?
Myra अपने कमरे में बैठी थी।
हाथ में वही फोटो…
जिसने उसके दिल में एक तूफान खड़ा कर दिया था।
कबीर…
और एक अजनबी लड़की।
दोनों इतने करीब…
जैसे कोई रिश्ता हो।
“Myra… ये झूठ है…”
उसने खुद से कहा।
मगर उसका दिल…
अब सवाल पूछ रहा था।
“अगर ये झूठ नहीं हुआ तो?”
उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे।
वो उस फोटो को देखती रही…
जैसे उसमें छुपा सच खुद सामने आ जाएगा।
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उधर…
कबीर उस अंधेरी जगह पर खड़ा था।
उसके सामने वो अजनबी शख्स।
“तुम्हारा खेल क्या है?”
कबीर ने गुस्से में पूछा।
शख्स हल्का सा हंसा।
“खेल?”
उसने कहा,
“ये खेल नहीं है… ये बदला है।”
कबीर की भौंहें सिकुड़ गईं।
“किस बात का बदला?”
शख्स धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
“तुम्हारे खानदान ने… बहुत कुछ छीना है,”
उसने कहा।
“अब… बारी मेरी है।”
कबीर की आँखों में गुस्सा था।
“जो भी है… मुझसे बात करो,”
उसने कहा,
“Myra को बीच में मत लाओ।”
शख्स की मुस्कान और गहरी हो गई।
“वही तो करना है…”
उसने कहा,
“तुम दोनों को अलग करना…”
कबीर का दिल एक पल के लिए रुक गया।
“तस्वीर देखी उसने?”
शख्स ने पूछा।
कबीर चौंक गया।
“तुमने भेजी थी वो फोटो?”
उसने गुस्से में कहा।
शख्स ने सिर हिलाया।
“और वो शुरुआत है…”
कबीर ने मुट्ठी भींच ली।
“अगर तुमने उसे चोट पहुँचाई…”
उसने सख्त आवाज़ में कहा,
“तो मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं।”
शख्स हंसा।
“तुम्हें लगता है… तुम मुझे रोक सकते हो?”
उसने कहा।
फिर वो धीरे से बोला—
“अब तक तो तुम खुद को ही नहीं बचा पाए…”
कबीर चुप हो गया।
ये सच था।
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अचानक…
उस शख्स ने एक और फोटो कबीर की तरफ फेंकी।
कबीर ने उसे उठाया।
उसकी आँखें फैल गईं।
फोटो में…
Myra किसी लड़के के साथ खड़ी थी।
दोनों के बीच दूरी नहीं थी।
कबीर का दिल जैसे टूट गया।
“ये…”
उसके होंठों से निकला।
शख्स ने कहा—
“भरोसा… दोनों तरफ से टूटेगा…”
“तभी कहानी खत्म होगी।”
कबीर ने उस फोटो को कसकर पकड़ा।
“ये झूठ है…”
उसने कहा।
मगर इस बार…
उसकी आवाज़ में पहले जैसी मजबूती नहीं थी।
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उधर…
Myra अब भी उसी फोटो को देख रही थी।
उसका दिल अब उसे धोखा दे रहा था।
“कबीर… तुम ऐसा नहीं कर सकते…”
उसने कहा।
मगर फिर…
एक ख्याल आया—
“अगर वो भी यही सोच रहा हो…”
उसकी सांसें तेज़ हो गईं।
दोनों तरफ…
एक ही खेल खेला जा रहा था।
भरोसे को तोड़ने का।
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अगली सुबह…
Myra कॉलेज पहुँची।
उसका चेहरा शांत था…
मगर अंदर से वो पूरी तरह टूटी हुई थी।
कबीर भी वहाँ आया।
दोनों की नजरें मिलीं।
कुछ पल के लिए…
सब कुछ थम गया।
वो दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े थे।
मगर इस बार…
उनके बीच वो दूरी थी…
जो किसी दीवार से कम नहीं थी।
“Myra…”
कबीर ने धीरे से कहा।
Myra ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों में दर्द था…
और साथ ही सवाल।
“तुम कुछ कहना चाहते हो?”
उसने पूछा।
कबीर कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा—
“तुम बताओ…”
Myra का दिल और टूट गया।
“तो तुम भी मुझसे कुछ नहीं पूछोगे?”
उसने कहा।
कबीर ने उसकी आँखों में देखा।
“क्या पूछूं?”
उसने धीरे से कहा।
Myra ने अपने हाथ में पकड़ी फोटो उसकी तरफ बढ़ाई।
“ये…”
उसने कहा।
कबीर ने फोटो देखी।
उसका चेहरा सख्त हो गया।
“और ये…”
उसने अपनी जेब से फोटो निकालकर उसे दिखाई।
Myra की आँखें फैल गईं।
दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे।
सवाल वही था…
जवाब किसी के पास नहीं।
“तो… ये सच है?”
Myra ने कांपती आवाज़ में पूछा।
कबीर ने कहा—
“तुम बताओ…”
ये शब्द…
उन दोनों के बीच आखिरी वार जैसे थे।
Myra की आँखों से आँसू गिर गए।
“शायद… हमें दूरी बनाए रखना ही सही था,”
उसने कहा।
कबीर चुप रहा।
उसने कुछ नहीं रोका।
और यही…
सबसे बड़ा जवाब था।
Myra मुड़ी…
और चली गई।
कबीर वहीं खड़ा रहा।
उसकी मुट्ठी में वो फोटो अब भी थी।
और दिल में…
एक दरार पड़ चुकी थी।
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दूर कहीं…
विक्रम वर्मा खड़े थे।
उनके चेहरे पर संतोष था।
“अब…”
उन्होंने कहा,
“ये खुद ही खत्म हो जाएंगे।”
मगर उन्हें ये नहीं पता था…
कि इश्क अगर टूटता भी है…
तो उसका दर्द और खतरनाक हो जाता है।