Tanha Safar: Love drenched in the shade of emotions - 24 in Hindi Love Stories by Babul haq ansari books and stories PDF | तन्हा सफ़र: जज़्बातों की छांव में भीगा इश्क़ - 24

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तन्हा सफ़र: जज़्बातों की छांव में भीगा इश्क़ - 24

तन्हा सफ़र: जज़्बातों की छांव में भीगा इश्क़

  भाग 24: “खेल के पीछे का खिलाड़ी”

रचना: बाबुल हक़ अंसारी

[पिछले भाग से…]

“अब असली खेल शुरू होगा… जहाँ ना मोहब्बत काम आएगी… ना नफ़रत…”

अंधेरे में गूंजती उस आवाज़ ने तीनों के दिलों की धड़कनें तेज़ कर दी थीं।

[अंधेरे का सच…]

कमरा पूरी तरह अंधेरे में डूब चुका था।

सिर्फ़ स्क्रीन की हल्की नीली रोशनी चेहरों पर पड़ रही थी।

रिया ने अयान का हाथ कसकर पकड़ लिया—

“मुझे डर लग रहा है…”

अयान ने धीमे स्वर में कहा—

“डरना मत… जब तक मैं हूँ, कुछ नहीं होगा।”

लेकिन इस बार उसकी अपनी आवाज़ में भी हल्की कंपकंपी थी।

[रहस्यमयी चेहरा…]

अचानक स्क्रीन पर हलचल हुई।

धुंधली परछाई धीरे-धीरे साफ़ होने लगी।

डॉ. वर्मा की आँखें फैल गईं—

“नहीं… ये… ये ज़िंदा नहीं हो सकता…”

आर्यन ने हैरानी से पूछा—

“कौन है ये?”

स्क्रीन पर चेहरा साफ़ हुआ…

और अगले ही पल—

अयान जैसे पत्थर बन गया।

“ये… ये कैसे मुमकिन है…?”

उसके होंठों से मुश्किल से शब्द निकले—

“वेद…”

[सबसे बड़ा ट्विस्ट…]

रिया चौंक गई—

“वेद? ये कौन है, अयान?”

अयान की आँखों में सदमा था—

“ये… मेरा बड़ा भाई है…

जिसे मैंने पाँच साल पहले… मरते हुए देखा था…”

कमरे में सन्नाटा जम गया।

[वेद की वापसी…]

स्क्रीन पर खड़ा आदमी मुस्कुराया—

उसकी आँखों में एक अजीब ठंडक थी।

“मौत… हमेशा अंत नहीं होती, अयान…”

डॉ. वर्मा पीछे हट गया—

“ये नामुमकिन है… मैंने खुद देखा था—”

वेद ने उसकी बात काट दी—

“तुमने जो देखा… वो भी एक प्रयोग था, वर्मा।”

[खेल का असली मालिक…]

वेद की आवाज़ अब और भारी हो गई—

“तुम खुद को खिलाड़ी समझते थे…

लेकिन असली खेल तो मैं खेल रहा था।”

रिया और आर्यन एक-दूसरे को देखने लगे।

अयान आगे बढ़ा—

“अगर तू ज़िंदा था… तो इतने साल कहाँ था?”

वेद की आँखों में एक काली चमक उभरी—

“वहीं… जहाँ तुम थे…

बस फर्क इतना है कि तुम प्रयोग बने…

और मैं… प्रयोग करने वाला।”

[सच का ज़हर…]

स्क्रीन पर अचानक कई फुटेज चलने लगे—

वेद लैब में…

मशीनें कंट्रोल करते हुए…

लोगों की फाइलें देखते हुए…

यहाँ तक कि—

कबीर का नाम भी उन्हीं फाइलों में था।

आर्यन दंग रह गया—

“मतलब… कबीर को भी तूने ही…?”

वेद मुस्कुराया—

“नफ़रत को बस एक चिंगारी चाहिए होती है…

और मैंने वो चिंगारी दी।”

[भाई बनाम भाई…]

अयान की आँखों में गुस्सा भड़क उठा—

“तू मेरा भाई नहीं हो सकता…

मेरा भाई ऐसा नहीं था!”

वेद की आवाज़ अचानक ठंडी हो गई—

“तुम्हारा भाई उसी दिन मर गया था…

जिस दिन तुमने मुझे अकेला छोड़ दिया था।”

अयान सन्न रह गया—

“मैंने…?”

[अतीत का घाव…]

वेद की आँखों में दर्द की झलक आई—

“जब उस हादसे में मैं मर रहा था…

तुमने मुझे बचाने की जगह… भागना चुना।”

रिया ने चौंककर अयान की ओर देखा—

“ये सच है…?”

अयान की आँखें झुक गईं—

उसके चेहरे पर पछतावा साफ़ था।

“मैं… डर गया था…”

[इश्क़ की अग्निपरीक्षा – भाग 2]

वेद हँसा—

“और आज मैं तुम्हें वही डर महसूस करवाऊँगा…

लेकिन इस बार दांव पर सिर्फ़ तुम्हारी जान नहीं…

तुम्हारा इश्क़ भी होगा।”

अचानक कमरे की ज़मीन फिर से हिलने लगी।

तीनों के नीचे एक नया प्लेटफ़ॉर्म खुल गया—

जो धीरे-धीरे नीचे जाने लगा।

रिया घबरा गई—

“ये क्या हो रहा है?!”

[नई मौत की घाटी…]

नीचे एक बड़ा हॉल था—

चारों तरफ़ लोहे की सलाखें…

बीच में एक गोल एरिया…

और चारों ओर—

लाइव कैमरे।

वेद की आवाज़ गूंजी—

“Welcome… to the final level.”

[क्लिफहैंगर…]

वेद ने आखिरी बात कही—

“यहाँ तुम तीनों में से सिर्फ़ दो ही जिंदा बाहर निकलोगे…”

रिया का हाथ काँप गया—

“नहीं… ये नहीं हो सकता…”

अयान ने उसकी ओर देखा—

फिर आर्यन की ओर…

उसकी आँखों में अब एक खामोश फैसला उतर चुका था।

 अगले भाग में:

क्या अयान खुद को कुर्बान करेगा?

या इश्क़ और दोस्ती के बीच कोई ऐसा रास्ता निकलेगा जो सबको बचा ले?

  भाग 25: “तीन में से दो”

रचना: बाबुल हक़ अंसारी