देश है तो हम हैं
कमल चोपड़ा
अगले दिन वे दीदी से मिले और दीदी को सारी बात बतायी तो दीदी ने कहा, “हाँ, ये ऐसे बाबा हमारे देश के दुश्मन हैं। जितने भी ऐसे बाबा हैं सबके सब निन्यानवे परसेन्ट ढोंगी और पाखण्डी हैं। भगवान इन्हें अपनी शक्तियाँ क्यों देगा? अगर ये दुनिया त्याग चुके साधु-संत हैं तो इन्हें जनता से क्या लेना! धर्म की आड़ में ऐसे बाबा देश की कई लाख करोड़ की संपत्ति दबाये बैठे हैं। भोले-भाले लोगों को फँसाकर धन तो कमा ही रहे हैं और साथ में नाम भी कमा रहे हैं।”सजग ने पूछा, “दीदी! इस भस्मानंद जी महाराज का क्या करें?”दीदी गंभीर होकर सोचने लगीं। कुछ देर बाद बोलीं, “पुलिस तो इसमें कुछ करेगी नहीं क्योंकि ये धर्म और आस्था का मामला है। अंधविश्वासी और नासमझ लोग भड़क सकते हैं। कहीं दंगा न भड़क जाये? समाज में गड़बड़ी न फैल जाये? कानून का रास्ता बहुत लम्बा है। सालों-साल लग सकते हैं। एक रास्ता है कि इस ढोंगी का किसी तरह भण्डाफोड़ हो जाये। इसकी असलियत जनता के सामने आ जाये?”“लेकिन यह बहुत मुश्किल काम है। बहुत सोच-समझकर ही कदम उठाना पड़ेगा। इसमें खतरा है, पर नामुमकिन नहीं। वहाँ से वे आश्रम के पास पहुँचे और काफी देर तक इधर-उधर घूमने के बाद सजग बाबा भस्मानंद जी महाराज के दरबार में जा पहुँचा। बारी आने पर सजग ने भस्मानंद जी महाराज के सामने पहुँचकर, बाबा भस्मानंद जी महाराज का जयकारा लगाया। बाबाजी की जय हो, के साथ सजग ने कहा, “बाबाजी, आप तो साक्षात भगवान हैं। आपको देखकर ही हमारे कष्ट दूर हो जाते हैं।”अपनी प्रशंसा सुनकर भस्मानंद जी महाराज फूले नहीं समा रहे थे। उनसे अपनी खुशी सँभाली नहीं जा रही थी। सजग ने कहा, “धन्य है यह भारत देश जहाँ आपने जन्म लिया, पर बाबा जी, हमारे देश पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आप यहाँ बैठे हैं। आप चलकर देश की सीमा पर बैठिये और दुश्मन को श्राप देकर भस्म कर दीजिये। आप बॉर्डर पर बैठ जाना, जैसे ही कोई दुश्मन टैंक, हवाई जहाज, सैनिक कुछ भी आये आप उन्हें श्राप देते जाना, वे भस्म होते जायेंगे। पहले तो पाकिस्तान की सीमा पर से दुश्मनों का सफाया कर दीजिये फिर चीन की सीमा पर आपके होते हमारी सीमा पर आये दिन हमारे जवान मरते रहते हैं वो नहीं मरेंगे। हमारे देश को अपनी सुरक्षा के लिये अरबों-खरबों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वे। सारे के सारे बच जायेंगे। गाड़ी मँगवायें, चलिये ......। आपके पास तो अपनी गाड़ी होगी?”वहाँ मौजूद सभी लोग हँसने लगे। बाबा के माथे पर बल पड़ गये।बोले-“ऐ लड़के! देख नहीं रहे हो यहाँ भक्त लोग बैठे हैं। मुझे इनके दुख दूर करने हैं।”बहुत भोला और अबोध-सा बनते हुए सजग ने कहा, “हाँ बाबा जी! आप तो इनके दुखों का इलाज कर रहे हैं। चलिये बाबाजी देश को तो देश की सेना बचा लेगी। लेकिन आप यहाँ बैठे इन सौ-दो सौ लोगों का दुख दूर करेंगे। हमारे देश में तो लाखों-करोड़ों बीमार दुखी हैं। दिल्ली के बड़े एम्स अस्पताल में चलकर आप बैठिये.......“मरीज आपके पास लाइन लगाकर आते रहेंगे। आप उन्हें भभूत देते रहना, वे ठीक होते जायेंगे। सरकार को इतने बड़े-बड़े अस्पताल खोलने पड़ रहे हैं। उन्हें चलाने के लिये हजारों-करोड़ो रुपया खर्च करना पड़ रहा है?”भस्मानंद जी महाराज का चेहरा तमतमाने लगा था। उनकी आँखें लाल हो आई थीं-“बदतमीज लड़के! मेरा मजाक उड़ाता है। बाबा की शक्ति की परीक्षा लेना चाहता है।”‘दुष्ट’, सजग ने बहुत धीरे से कहा-“महाराज! आपके पास शक्ति है तो दिखाओ? मुझे तो लगता है आपकी शक्ति तो आपके नौकर-चाकर हैं?”सजग का व्यंग्य बाबा की क्रोधाग्नि में घी का काम कर रहा था।“बाबाजी, मैं तो कह रहा था आप इसी वक्त यहीं बैठे-बैठे मेरी टाँग ठीक कर दीजिये। आपमें शक्ति है और आप भगवान हैं तो.......?”हॉल में एकदम सन्नाटा छा गया था। बाबा गुस्से से फट पड़े, “मेरा मजाक उड़ाता है? मुझ पर शक करता है? अब तू देख मेरी शक्ति? बहत्तर घंटे के अंदर तुझे तेरे किये का फल मिल जायेगा। बहत्तर घंटे के अन्दर तुझे यह संसार छोड़ कर जाना पड़ेगा।”बाहर निकलकर श्रेयस ने कहा, “मैंने इस सबकी वीडियो बना ली है। मैं इसे दीदी को भेज रहा हूँ।”थोड़ी देर बाद दीदी का फोन आया-“मैंने वीडियो देख ली है। तुमने यह बहुत बड़ा रिस्क ले लिया है। ये लोग तो खतरनाक गुण्डे हैं। अब ये खुद ही सजग का कत्ल करवा देंगे ताकि सबके सामने कही गई बाबा की बात सही सिद्ध हो जाये। सजग और तुम लोगों को बहुत सँभलकर रहना पड़ेगा।” हर तरफ यही चर्चा हो रही थी-क्या बाबा की भविष्यवाणी सच होगी। न्यूज चैनलवाले आ-आकर सजग से पूछ रहे थे-“क्या आपको लगता है बाबा की भविष्यवाणी सत्य होगी? क्या आपको डर लग रहा है? आप बहत्तर घंटे के बाद भी जीवित रह पायेंगे?”सजग बड़े आत्मविश्वास के साथ जवाब दे रहा था-“बाबा ढोंगी है, मुझे कुछ नहीं हो सकता?”उसके माँ-बाप डर रहे थे। लेकिन वे उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे। बाबा के श्राप से तो खैर कुछ नहीं होगा पर अपने गुण्डों से कुछ कर-करा तो सकते हैं।दीदी ने भी उसे समझाया-वो कुछ भी कर सकते हैं। दीदी बेहद चिन्तित थीं।