कबीर ने सृष्टि को तुरंत कार में बिठाया। उसका हाथ उसके हाथ में कसकर था। सृष्टि लगातार रो रही थी। चेहरा दर्द और डर से तिरछा था।
सृष्टि बोली -
कबीर जी… दर्द… दर्द…
उसकी आवाज़ काँप रही थी। कबीर ने गहरी साँस ली।
वो बोला -
मैं हूँ ना… बस मैं हूँ।
उसने ड्राइव तेज़ कर दी। हाथ अपनी बाँह में कसकर पकड़ रखा था। कुछ ही मिनटों में वे अस्पताल पहुँच गए। सृष्टि दर्द से चीखती रही। कबीर ने उसे स्ट्रेचर पर धीरे से रखा।
कबीर बोला -
रुको, सब ठीक हो जाएगा।
पर उसका खुद का दिल भी धड़क रहा था। डॉक्टर और नर्सें तुरंत दौड़ पड़ीं। सृष्टि को ICU में ले जाया गया।बडॉक्टर ने कबीर की ओर देखा चहरे पर चिंता और डर साफ़ था।
Doctor ने गंभीर आवाज़ में कहा।
आप बाहर ही रहें।
लगता है… समय से पहले ही delivery करनी पड़ेगी।
हमारी पूरी कोशिश रहेगी… लेकिन अभी स्थिति गंभीर है।
कबीर ने सिर हिलाया। उसकी आँखों में डर, गुस्सा और पसीने के कतरे थे। वो ICU के बाहर खड़ा रह गया।
सिर्फ़ सोच रहा था—
अब कोई भी इसे…मेरे हाथों से छीन नहीं सकता।
मेरी बीवी… और मेरा बच्चा…मैं किसी कीमत पर खोने नहीं दूँगा।
सृष्टि की चीखें कबीर के कानों में गूंज रही थीं। लेकिन अब वह जान चुका था ख़तरा सिर्फ़ बाहर ही नहीं, अंदर भी था। कबीर ICU के बाहर खड़ा था। उसका दिल बेतरतीब धड़क रहा था। हाथ में पसीना और आँखों में डर। कुछ देर बाद डॉक्टर बाहर आई। चेहरा गंभीर था।
उसने धीमी और ठंडी आवाज़ में कहा—
Mr. कबीर…हम किसी एक को ही बचा सकते हैं।
आप बताइए—
आप अपनी पत्नी को बचाएँगे या आपके बच्चे को?
कबीर की सांसें थम गईं। पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी आँखें फैल गईं। चेहरा सख़्त और डरावना। दिल जैसे रुक गया हो।
उसने अपना सिर झुकाया। आँखें बंद की।बधीरे-धीरे गहरी साँस ली। बहुत सोचने के बाद…
उसने ठोस और कड़क आवाज़ में कहा—
आप मेरी पत्नी को बचाइए।
डॉक्टर ने गंभीरता से सिर हिलाया।
Doctor बोलीं -
ठीक है, हम पूरी कोशिश करेंगे। लेकिन स्थिति अभी भी नाज़ुक है।
कबीर ने ICU के दरवाज़े को देखा। अंदर सृष्टि के दर्द और चीख़ें
उसके दिल में घुस रही थीं। उसने अपने हाथ जकड़ लिए।
वो मन ही मन बोला—
मेरी पत्नी… चाहे कुछ भी हो जाए…मैं उसे खोने नहीं दूँगा।
उसका चेहरा अब पूरी तरह गुस्सा, डर और प्यार से भर गया था।
डॉक्टर ICU में लगे हुए थे। हर पल सृष्टि की हालत बदल रही थी।
उनका एक ही लक्ष्य था सृष्टि को बचाना। कबीर ICU के बाहर खड़ा था। हाथ अपने चेहरे पर रखे थे। हर धड़कन सृष्टि के लिए चिंता और डर से भरी थी। कुछ देर बाद डॉक्टर बाहर आए। चेहरा गंभीर था। लेकिन उन्होंने एक बार फिर कबीर की तरफ देखा।
Doctor बोली -
हमने पूरी कोशिश की, आपकी पत्नी सुरक्षित है।
लेकिन बच्चा बचाया नहीं जा सका।
माफ़ कीजिए… miscarriage हो गया।
कबीर का दिल धड़क गया। साँसें तेज़ हुईं। आँखों में पानी भर आया। पर उसके अंदर एक अजीब सी राहत और खुशी भी थी।
उसकी बीवी जिंदा थी। सृष्टि उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी क़ीमती चीज़ थी। उसने चुपचाप ICU में जाकर सृष्टि का हाथ पकड़ा।
आँखों में आँसू थे, पर होंठों पर हल्की मुस्कान भी।
उसने धीरे से कहा -
बस तुम ठीक हो जाओ…बाकी सब कुछ… मैं संभाल लूंगा।
सृष्टि ने अपनी आँखे खोली। कबीर को देखते ही अजीब-सा शांति भरा भरोसा मिला। हालांकि दर्द और डर अभी भी था, पर उसने महसूस किया कबीर हमेशा उसके पास है। कबीर ने उसे कसकर बाँहों में भर लिया।
कबीर ने दिल ही दिल में शपथ ली—
अब कोई भी उसे या हमें कभी नुकसान नहीं पहुँचा सकेगा।
मैं उसकी रक्षा अपनी जान से भी करूँगा।
सृष्टि ICU में बिस्तर पर कबीर के सीने से लगी थी थी। चेहरा दर्द से लाल था। आँखों में आँसू चमक रहे थे।
धीरे-धीरे उसकी यादें उसके मन में घूमने लगीं उसका बच्चा… उसका नन्हा सा जीवन…जो अब दुनिया में नहीं था।
सृष्टि ने कांपती हुई आवाज़ में कहा—
कबीर जी… हमारा बच्चा… क्या हुआ?
कबीर ने उसका हाथ कसकर पकड़ा। आँखों में दर्द और पछतावे के आँसू थे।
धीरे से बोला—
सृष्टि… हमारा बच्चा… उसका miscarriage हो गया…
मैंने सब किया…बस तुम्हें बचाने के लिए…।
सृष्टि ने उसे सुना, पर उसके कानों में ये शब्द जैसे आग भर रहे थे।
उसका सब्र अब टूट चुका था।
उसने चीख़ते हुए कहा -
सब आपकी वजह से हुआ है!
क्यों किया आपने ऐसा?
क्यों…?
उसकी आँखों में सिर्फ़ आक्रोश और निराशा थी।
वो बोली -
मैं… मैं जी नहीं पाऊंगी…इतना दर्द… इतना सब…आपने क्यों किया?
कबीर ने उसे समझाने की कोशिश की।
कबीर बोला -
सृष्टि… मैं केवल तुम्हें बचाने की कोशिश कर रहा था…
अगर मैं कुछ भी करता, तो…
पर सृष्टि ने उसे बीच में रोक दिया। उसकी आवाज़ ठंडी और सख़्त थी।
वो बोली -
मैं अब और नहीं सह सकती। मैं आपके साथ नहीं रहूँगी।
जितना प्यार मैं आपसे करती थी…वो अब खत्म हो गया।
कबीर की आँखें भर आईं। दिल टूट गया। लेकिन उसने जान लिया सृष्टि अब अपने गुस्से और दर्द में कोई फैसला ले चुकी थी।
सृष्टि ने अपना सिर पलट लिया। चेहरा उसके पीछे से ही कबीर की आँखों में धुंधला सा दिखाई दे रहा था। कबीर चुपचाप बैठा रहा। आँखों में पछतावा, हाथों में बेबसी।
वो पल था—
जब प्यार, गुस्सा, दर्द और हृदय का टूटना सब एक साथ मिलकर मौजूद थे।
सृष्टि आगे क्या कदम उठाएगी?
क्या वो कबीर को छोड़ देगी?
क्या सृष्टि इस आग में जलती रहेगी?
क्या कबीर सृष्टि को जाने देगा ?
To be continued.....
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Shristi aage kya karegi vo kabir ko chhodegi ya uske pas rahegi?
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