Shahad ki Gudiya - 67 in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (67)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (67)

                

                 शहद की गुड़िया- प्रकरण 67

       " वह घर घर का गाना बन गया था."

      " इस फ़िल्म के लिये मनोज कुमार को बहुत सारे अवार्ड्स मिले थे."

      " उस क़े बाद उन्हों ने फ़िल्म' पुरब पश्चिम' फ़िल्म बनाई थी. वह भी एक अलग पहचान थी.  फ़िल्म में 'पुरब पश्चिम ' क़े बीच में छिपे हुए संस्कृति भेद को दर्शाने का उन्होंने प्रयास किया था."

         "क़ोई शर्त होती नहीं प्यार में  

         मगर प्यार शर्तो पे तुमने किया   

         नजर में सितारे जो चमके जरा    

         बुझाने लगी आरती का दिया    

          ज़ब अपनी नजर में ही गिरने लगो   

          अंधेरे में अपने ज़ब घिरने लगो   

           तब तुम मेरे पास आना प्रिये       

           ये दीपक जला हैं जला ही रहेगा    

            तुम्हारे लिये... क़ोई ज़ब तुम्हारा..."

          " हिरो भारत का था ज़ब की फ़िल्म की हिरोइन पश्चिम राष्ट्र की थी जो घमंडी और गुमानी थी. हमारी संस्कृति को स्वीकारने को तैयार नहीं थी."

        "  उस वक़्त मनोज कुमार  एक गीत के जरिये उस का गुमान उतारने की कोशिश करता हैं. "      

        " फिर उस के बाद ' शोर ' ' कलाकार' और ' क्रांति ' बनाई थी. उन का एक सपना था. वह दिलीप कुमार जैसे कलाकार के साथ काम करेंगे जो ' आदमी ' फ़िल्म में साकार भी हुआ था.

      दूसरी बार उन्हो ने खुद ' क्रांति ' फ़िल्म  दिलीप कुमार को कास्ट किया था.

       उस फ़िल्म का गाना..

      जिंदगी की ना छूटे लड़ी      

      प्यार कर ले घड़ी दी घड़ी

     लंबी लंबी उमरिया को  छोड़ो     

      प्यार की बस घड़ी डो घड़ी

       " बी आर चोपड़ा के बाद मनोज कुमार ने मल्टी स्टार फिल्मों को बढ़ावा दिया था. उन की हर एक फ़िल्म में कलाकारों की लंबी भरमार का सिलसिला जारी हो गया था."

       " उन्हों ने  अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा को भी मौका दिया था. "

        लोगो का कहना था मनोज कुमार ने इस फ़िल्म से मल्टी स्टारर दौर शुरू किया था. लेकिन यह बात गलत है. वाकई में बी आर चोपडा ने ' वक़्त ' से मल्टी स्टारर फ़िल्म की शुरुआत की थी. "

         " दादू ने उन की तीन फिल्मे देखी थी. ' एक ही रास्ता' ' नया दौर' और ' साधना'. ऊस वक़्त दादू को उन के बारे में कुछ मालूम नहीं था. "

          " ऊस के बाद उन्होंने  ' धूल का फूल' का निर्माण किया था, जिसे पहली बार उस के छोटे भाई यश चोपडा ने दिगदर्शित किया था. "

             " फ़िल्म में एक नाजायज बच्चे की कहानी थी जिस में मा अपने बेटे कोई जंगल में रोता तड़पता छोड़ देती है जिसे एक मुस्लिम पाल पोषकर बड़ा करता है. "

             "एक बाप जो नायिका की हालत के लिये जिम्मेदार था, अपना बेटा मर जाने पर उसे लेने जाता है. यह फ़िल्म का क्लाइमेकस था. "

             "इस फ़िल्म के बाद ना जाने कैसे और क्यों दोनों भाइयो से एक चिंचाव सा हो गया था. उन की हर एक फ़िल्म 25 हप्ते से ज्यादा चली थी. "

             " उन दिनों बी आर चोपडा ने एक नया प्रयोग किया था, जिस में एक भी गीत नहीं था. फिर भी यह फ़िल्म 25 हप्ते चली थी. "

             " इस फ़िल्म में अशोक कुमार ने - जिसे लोग दादा मुनी नाम से जानते थे डबल रोल निभाया था. वह खुद न्यायाधीश थे अंत में फांसी की सजा के खिलाफ आवाज उठाते है और उसे बंद करने की गुजारिश करते है. "

            " कानून की तरह उन की अगली फिल्मो में कोई ना कोई सन्देश था. "

             " एक ही रास्ता में उन्होंने विधवा विवाह की हिमायत की थी. "

              " नया दौर में मशीन की वजह गरीब लोगो की रोजी रोटी छिन जाने की परिस्थिति का चित्रण किया था.

               " साधना में एक वेश्या कोई उजले समाज में स्थान देने की बात की थी और ' धुल का फूल ' में नाजायज बच्चे को रक्षण देने का मुद्दा उठाया था. "

            " ऊस के बाद उन्होंने कई फिल्मे बनाई थी..' गुमराह, ' वक़्त', ' इत्तेफ़ाक़', ' आदमी और इंसान' धुंद' ' जमीर ' दास्तान '  बर्निग ट्रैन जो उन्होंने ने विदेशी फ़िल्म' towering inferno' उसी के क्रूक के साथ बनाई थी. फिर ' इंसाफ का तराजू,' ' आज की आवाज ' और बागबान, बाबुल और भूतनाथ फिल्मे भी बनाई थी. "

          ऊस के साथ कई निर्माता निर्देशक मैदान में आये थे. ऊस के पहले मेहबूब खान जिन्होंने ने मदर इंडिया, आन, अंदाज और सन ओफ इंडिया फिल्मे बनाई थी ऊस के अलावा वी शांता राम, बिमल रॉय, एल वी प्रसाद, रामानंद सागर, मनमोहन देसाई, प्रकाश मेहरा इत्यादि लोगो ने भी अलग अलग प्रकार की फिल्मे बनाकर अपनी कला का जोहर दिखलाया था.  ऊस के आलावा कई और लोग है जो यादों की  सहेलगाह में शामिल करने के लिये मेरे दादू असमर्थ है इस के लिये मैं पाठको की क्षमा चाहती हूं. "

            " निर्माता निर्देशक के अलावा कई हस्तीया शामिल थी . जिस में गायक, गीतकार और संगीतकार थे.

             गायक में के एल सैगल, पंकज मालिक, सी एच आत्मा, मोहम्मद रफ़ी, मुकेश, मन्ना डे, हेमंत कुमार, सुबीर सेन, तलत मेहमूद, मनहर, पंकज उधास, नितिन मुकेश, शैलेन्द्र सिंह इत्यादि.. इत्यादि. "

            गीत लिखने में भी कहीं लोग थे जिसे भूले भुलाया नहीं जाता. "

             " शैलेन्द्र, हसरत जयपुरी, आनंद बक्शी, साहिर, संतोष आनंद, असद भोपाली, कैफ़ी आज़मी  इत्यादि... इत्यादि "

             "  इन सभी में एक नाम गलती से छूट गया है ऊस के लिये मैं पाठको की तहेदिल से माफ़ी मांनती हूं."

              " और वह सब से बड़े शो मैन राज कपूर जिस का हमारे देश में ही नहीं विदेशो भी नाम था. "

              " उन्होंने ने आग से शुरू कर के ढेर सारी फिल्मे बनाई थी."

          " आह,' आवारा, श्री 420, बरसात, बूट पोलिश, जागते रहो, अब दिल्ली दूर नहीं और जिस देश में. गंगा बहती है. यह सब ब्लेक एंड वाइट फिल्मे थी जिस में अब दिल्ली दूर नहीं और जिस देश में गंगा बहती है कोई छोड़कर नरगिस ने काम किया था. "

           " और उन के यूनिट में मुकेश, शैलेन्द्र, हसरत जयपूरी, और शंकर जयकिशन शामिल थे. "

               000000000000  ( क्रमशः)