The beloved wife of two husbands - 22 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | दो पतियों की लाडली पत्नी - 22

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 22

Principal मैम ने जैसे-तैसे खुद को संभाला ही था कि बाहर खड़े दो–तीन शरारती स्टूडेंट उनकी आवाज़ें सुन चुके थे।

स्टूडेंट 1 (आँखें फैलाकर) बोला - 
भाई… मैने सही सुना न?
Shreya के… दो husband??

स्टूडेंट 2 (मुँह खोलकर) बोला - 
दो??? एक भी मुश्किल से मिलता है… इसके दो हैं?!

स्टूडेंट 3 (दंग होकर) बोली - 
और वो दोनों यहां इसी class में पढ़ते हैं!!
ये तो Netflix से भी बड़ी story है!

तीनों ऐसे भागे जैसे ब्रेकिंग न्यूज़ फैलानी हो।
क्लास में बाकी बच्चे assignment लिख रहे होते हैं। तभी वो तीनों अंदर आते हैं हांफते हुए।

लड़का 4 बोला - 
क्या हुआ रे? ऐसे क्यों दौड़ रहे हो?

स्टूडेंट 1 (चिल्लाकर) बोला - 
BREAKING NEWS!!!

लड़की 2 बोली - 
अरे बताओ तो!

स्टूडेंट 2 बोला - 
Shreya के दो—दो पति हैं!!!

पूरा क्लासरूम freeze… सबकी कलम रुक जाती है… एक लड़के का पानी पीते-पीते मुँह खुला रह जाता है और पानी गिर जाता है।

लड़का 5 बोला - 
क्या?? एक second… दो? As in TWO??

स्टूडेंट 3 बोला - 
हां! Principal मैम ने खुद सुना… वही कहते हुए बेहोश होते-होते बचीं!

अचानक girls’ group में खुसर-पुसर शुरू।

लड़की 3 (हैरानी से) बोली - 
तो वो handsome Kabir… aur mature Karan— दोनों उसके… पति??

लड़की 4 (मुंह पकड़कर) बोले - 
ओह मेरे भगवान… मैं तो समझती थी Shreya lucky है… पर ये तो extra lucky है!!

लड़के भी shock में —

लड़का 6 बोला - 
हम लोग एक girlfriend maintain नहीं कर पाते…
और Shreya ने दो husband संभाल लिए… क्या management skills हैं!

दरवाज़ा धीरे से खुलता है… तीनों एक साथ अंदर आते हैं—
श्रेया बीच में, करन और कबीर दोनों साथ।
पूरा class एकदम pin-drop silence।
हर नज़र इन्हीं पर टिक जाती है।

लड़का 7 (धीरे से दोस्त से) बोला - 
देखो-देखो… तीनों एक साथ… जैसे कोई royal family आ रही हो!

लड़की 5 बोली - 
Shreya तो ऐसे चल रही है जैसे उसकी security दोनों sides पर हो!

श्रेया कुछ समझ नहीं पाती और मुस्कुरा देती है।
जैसे ही तीनों अपनी usual front seat पर बैठते 
है— पीछे से सारी लड़कियाँ और लड़के analysis mode में।

लड़की 6 बोली - 
देखो, बीच में Shreya…
बायीं तरफ Karan…
दायीं तरफ Kabir…
Official wife position confirmed!

लड़का 8 बोला - 
और भाई देख… दोनों कैसे उसके bag संभालते हैं…।

कबीर उसके लिए पानी की bottle खोल देता है, करन उसकी किताबें सेट कर देता है।

लड़का 9 बोला - 
भाई ये बंदा कबीर नहीं है… समर्पित पति material है!

पीछे से फुसफुसाहट बढ़ती जाती है।

लड़का 10 बोला 4
ये love triangle नहीं… love tripod है!

लड़की 7 बोली- 
Shreya ने दो-दो पति कैसे manage किए होंगे?

कबीर सुन लेता है। उसका चेहरा सख्त हो जाता है।

कबीर (उल्टा मुड़कर सख्ती से) बोला - 
कोई problem है क्या?
Shreya के बारे में कोई बात गलत निकलोगी ना तो अच्छा नहीं होगा।

क्लास चुप… हवा भी रुक जाए

करन (धीरे पर भारी आवाज़ में) बोला - 
हम तीनों खुश हैं।
और किसी को opinion देने का कोई हक़ नहीं है।

क्लास ने पहली बार देखा—दोनों भाइयों की protective side।

श्रेया (धीरे से, करन-कबीर के कान में) बोली - 
मैं ठीक हूं… आप दोनों tension मत लो।

कबीर (मुस्कुरा कर) बोला - 
हमारे होते हुए तुम्हे कोई तकलीफ नहीं होगी।

करन बोला - 
बस पढ़ाई पर ध्यान दो… बाकी हम दोनों देख लेंगे।

Lunch break होते ही पूरे कॉलेज में एक ही खबर गूंज रही थी—
Shreya के दो पति हैं!

कोई shock में…
कोई jealous…
कोई confused…
पर हर कोई सिर्फ़ एक बात मान चुका था—

तीनों की bonding किसी और लेवल की थी।

कॉलेज में बातें तूफ़ान की तरह फैल चुकी थीं।
Principal मैम, जो हमेशा शांत रहती थीं, आज पहली बार बेचैन लग रही थीं।

Principal (अपने आप से) बोली - 
आख़िर क्या मजबूरी रही होगी इस लड़की की…?
ऐसी situation तो मैंने अपने 25 साल के career में कभी नहीं देखी…।

वह intercom उठाती हैं।

Principal बोली - 
Please Shreya… Karan और Kabir…
तीनों को बोलिए मेरे office आएँ।

Principal office का दरवाज़ा खुलता है।
तीनों अंदर आते हैं।
Karan और Kabir दोनों respectful तरीके से हाथ जोड़ते हैं।
Shreya हल्की सी nervous।

Principal (नरमी से लेकिन सीधी बात में) बोली - 
बेटा… तुम तीनों को बुलाने का कारण तुम समझ ही रहे हो।
मैं किसी की insult नहीं करना चाहती…
बस ये जानना चाहती हूँ कि… ऐसी कौन सी मजबूरी थी?

तीनों एक-दूसरे को देखते हैं। Karan आगे बढ़ता है।

Karan (धीरे से) बोला - 
मैम, मजबूरी नहीं… दोष था।

Principal (चौंककर) बोली - 
दोष! कैसा दोष?

Kabir (सिर हिलाते हुए) बोला - 
हां मैम… Shreya की कुंडली में पांचाली दोष था।
और वही दोष हम दोनों की कुंडली में भी था।

Principal (हैरानी से) बोली - 
ये क्या होता है beta?

Shreya धीरे से बोलना शुरू करती है।

Shreya (धीमे लेकिन साफ़ सुर में) बोली - 
मैम… बचपन से ही मेरी कुंडली में Panchali Dosh निकला था।
Pandit ji कहते थे कि…
अगर मैं एक ही व्यक्ति से शादी करूँगी…
तो या तो मेरी जान को खतरा होगा… या उस व्यक्ति की…

Principal की आंखें फैल जाती हैं।

Shreya (आगे बोलते हुए) बोली - 
मैं डर गई थी। दो ऐसे लड़के ढूंढने थे जिनकी कुंडली में भी वही दोष हो।
वहीं जिस office में मैं ai engineer थी वहां ये दोनों senior engineer थे।
इसके चाचा चाची और मेरे mummy papa ने मिलकर मेरी शादी इनसे करा दी।
मेरे घर वाले इस शादी के लिए बिल्कुल राजी नहीं थे। पर मैने उन्हें मजबूर कर दिया। मैने बोला कि आपको मुझे जिंदा देखना भी है या नहीं ?
मुझे बचाने के लिए… दो शादी एक साथ करवानी पड़ी।
Karan और Kabir… दोनों भाई…
दोनों ने मेरी सुरक्षा और सम्मान के लिए ये नाता स्वीकार किया।"

Principal की आंखों में softness आ जाती है।

Principal (धीरे से) बोली - 
मतलब… यह मजबूरी नहीं… बल्कि किसी की ज़िन्दगी की रक्षा के लिए लिया गया निर्णय था?

Kabir (हल्की मुस्कान लिए) बोला - 
जी मैम… हमें Shreya की जान से बढ़कर कुछ नहीं।
हम दोनों उसे एक जैसा सम्मान देते हैं।
Karan और मैं… बचपन से ही एक team थे…
अब Shreya के साथ हम तीनों एक टीम हैं।

Karan (धीमे दृढ़ स्वर में) बोला - 
और मैम… Shreya कभी किसी बात का फ़ायदा नहीं उठाती।
वो हम दोनों का बराबर सम्मान करती है।

Principal की आँखें नम होने लगती हैं।

Principal (भावुक होकर) बोलीं - 
बेटा… दुनिया हमेशा समझ नहीं पाती।
पर मैंने तुम तीनों की आँखों में ज़बरदस्ती, डर, जिद… कुछ नहीं देखा।
बस वो अगर रिश्ता देखा।
एक पवित्र विश्वास…।

Shreya नीचे देखती रहती है।

Principal (Shreya से) बोलीं - 
बेटा, तुम बहुत हिम्मती हो।
बहुत कम लोग अपनी किस्मत को इतना सम्मान देते हैं।

Shreya (धीरे से) बोली - 
मैम… मैं बस शांति चाहती हूँ।
पढ़ाई करना चाहती हूँ…
और अपने दोनों पतियों के साथ एक normal life जीना चाहती हूँ।

Principal (मुस्कुराकर) बोली - 
बिलकुल बेटा…
तुम तीनों कॉलेज में सुरक्षित हो।
अगर कोई भी तुम्हारे personal life पर comment करेगा…मैं खुद action लूंगी।

तीनों बाहर निकलते हैं।
Shreya हल्का महसूस करती है।
Kabir उसके हाथ पर हाथ रख देता है।

Kabir (धीरे से) बोला - 
डरो मत Shreya… अब सब ठीक है।

Karan (मुस्कुराकर) बोला - 
Principal मैम भी हमारी side में हैं अब।

Shreya (आँखें चमकती हुई) बोली - 
Thank you… दोनों का।
अगर आप दोनों नहीं होते… तो कभी मैं इतना strong नहीं बन पाती।

तीनों ने एक दूसरे को देख मुस्कुराया… उनकी bond पहले से और गहरी हो चुकी थी।

[घर का मेन हॉल, शाम के 6:30 बजे]
रोशनी हल्की-सी मंद है, तीनों के चेहरों पर दिन भर की थकान साफ दिख रही है। मगर दिलों में एक-दूसरे के लिए सुकून भरा अपनापन है।

श्रेया (थकी आवाज़ में) बोली - 
चलो… पहले थोड़ा fresh हो जाते है, फिर मिलकर काम कर लेंगे।

करण (मुस्कुराकर) बोला - 
बिल्कुल… तुम tension मत लो, आज काम हम दोनों सम्भाल लेंगे।

कबीर बोला - 
बिल्कुल । आज तुम आराम करो।

श्रेया हल्का-सा मुस्कुरा देती है।

[ किचन और हॉल]
थोड़ी देर बाद तीनों मिलकर काम करने लगते हैं—
• कोई सब्ज़ी काट रहा है,
• कोई दाल चढ़ा रहा है,
• कोई मेज़ लगा रहा है।

माहौल बिलकुल एक छोटे परिवार जैसा… प्यार भरा।

करण (मस्ती में) बोला - 
Teamwork हो तो ऐसा! हम तीन एक number!

कबीर बोला - 
बिल्कुल! और leader कौन है? Obviously… Shreya Madam.

तीनों हँस पड़ते हैं।

काम निपट चुका है। खाना हो चुका है।
अब तीनों थके-थके-से बेड पर आकर लेटते हैं।
बड़ा सा बेड है, श्रेया बीच में,
करण बाईं ओर,
कबीर दाईं ओर।
कमरे में हल्की रात की रोशनी…
श्रेया आँखें बंद करती है तभी—
करण धीरे से उसे अपनी ओर खींच लेता है, जैसे पूरा दिन उसके बिना अधूरा लगा हो।

करण (बहुत थके पर प्यार भरी आवाज़ में) बोला - 
बस… यहीं रहना मेरी बाहों में।

श्रेया उसके सीने पर सिर रख लेती है।
उधर पीछे से कबीर धीरे-धीरे आगे सरकता है और उसे अपनी बाँहों में ले लेता है—
ऐसा लग रहा था जैसे वह उसे कभी छोड़ना ही नहीं चाहता।

कबीर (नींद भरी आवाज़ में) बोला - 
तुम दोनों हो तो मैं complete हूं...।

श्रेया बीच में दोनों की गर्माहट महसूस करती है—
एक तरफ़ करण की मज़बूत और सुरक्षात्मक पकड़…
दूसरी तरफ़ कबीर का नरम, सुकून देने वाला स्पर्श…
तीनों एक ही लय में साँसें ले रहे हैं।
कमरा शांत… सिर्फ हल्की साँसों की आवाज़।

श्रेया (मन ही मन, आँखें बंद करके) बोला - 
ये दोनों मुझे कितना प्यार देते हैं… मैं कितनी lucky हूं।

धीरे-धीरे तीनों नींद में खो जाते हैं।
दुनिया की सारी परेशानियाँ, सारे ताने-बाने…
सब बाहर रह जाते हैं। अंदर सिर्फ प्यार, अपनापन और सुरक्षा का एहसास।