अब तक ....
ठीक उसी वक्त, कहीं दूर स्टेशन पर एक ट्रेन रुकती है…
और उस ट्रेन में चढ़ती है श्री — कांपते हाथों से टिकट पकड़कर, चेहरे पर डर और उम्मीद दोनों लिए।
ट्रेन धीरे-धीरे चल पड़ती है…
ट्रेन की खिड़की से बाहर झांकते हुए श्री धीरे से फुसफुसाती है —
“अब जो भी होगा… वो भगवान भरोसे।"
आगे.....
श्री आपने मन में अभी ये सोची ही रही थी कि उसे याद आता है उसने तो अभी तक अपनी friend को बताया ही नहीं वह दिल्ली आ रही है ....
वो जल्दी से अपना फोन निकलती है और कॉल लिस्ट चेक करने लगती है । उसके फोन में ज्यादा नंबर नहीं थे। बस उसके चाचा , कुछ स्कूल , कॉलेज के टीचरों और उसके फ्रेंड्स के जरूरी नंबर थे । फोन स्क्रॉल करते वक्त उसकी निगाह एक नंबर पर आकर रुकती है । उस नंबर को देख उसकी आंखों के सामने कुछ पुराने दृश्य घूमने लगते है ....
एक लड़की जिसने डार्क ग्रीन long कुर्ती के साथ फॉर्मल ट्राउजर पहने हुए है , उसके काले लंबे बाल जो एक पानी में बंधे हुए थे। एक बड़ी सी बिल्डिंग के बाहर खड़ी है । कमर पर एक छोटा सा बैग लटकाए हुए पूरी बिल्डिंग अपनी उन बड़ी बड़ी आंखों से निहार रही थी । तभी पीछे से एक आवाज आती है ... " Excuse me क्या आप भी यहां क्लास अटेंड करने के लिए आई हो ... "
वह लडकी पीछे मुड़कर देखती है तो वहां एक लड़की खड़ी थी जो उसे ही देख रही थी ... उसने ब्लैक रफ jeans के साथ एक व्हाइट क्रॉप टॉप पहना हुआ था।
दिखने में वह बहुत ही एलिगेंट लग रही थी ।
ये देखकर पहली लडकी बोलती है ... " जी हां और आप "
इस पर वह लडकी बोलती है ... " एक्चुअली में यहां फर्स्ट टाइम आई हूं ... वैसे में delhi से हूं ... वो क्या है कि कुछ दिनो के लिए मेरी मम्मा नानी के घर आई ... तो मैं भी उनके साथ आ गई .... । मामा जी बोल रहे थे ... जब तक मैं यहां कुछ न सही तो कंप्यूटर classes ही ले लूं । ये मुझे भी ठीक लगा इसलिए इस कॉलेज आ गई ।
" मेरा नाम रित्या विश्वकर्मा है " ... और तुम्हारा ..
इस पर वह पहली लडकी बोलती है ... "श्री आर्या " ....
" Nice to meet you " श्री जितना प्यारी तुम हो उतना ही प्यार तुम्हारा नाम है ... " तो बताओ तुम यहां किस पर क्लास लेने वाली हो " .... रित्या ने श्री के गाल खींचते हुए कहा ..... " अम्मम ... में यहां O–Lable की क्लास लेने आई हूं ...। " श्री ने हल्का सा मुस्कराकर कहा...
"सेम मुझे भी इसी की classes अटैंड करनी है "... रित्या ने चहकते हुए कहा .... " क्या तुम्हारा first day है" " हम्म " श्री ने छोटा सा जवाब दिया ... " Ok कोई नहीं मेरा भी first day " है l रित्या ने कहा...
" चलो क्लास लेते है । " इतना कहकर ... रित्या श्री के साथ अंदर चली जाती है .... ।
दरअसल श्री ने 12th क्लास के रिजल्ट के बाद एक सरकारी फॉर्म डाला था । जिस वजह से उसे कंप्यूटर डिप्लोमा करने का मौका मिल गया। वरना तो उसके चाचा और चाची ने उसे आगे पढ़ाने से मना कर दिया था । ये कहकर कि .... उनके पास उसे आगे पढ़ाने के पैसे नहीं है अगर वह श्री को ही पढ़ाते रहे तो ... घर का काम कौन करेगा। और उनके अपने भी तो बच्चे है।
श्री ने आगे पढ़ने के सपने छोड़ दिए थे। पर वह अपनी जरूरत के खर्चे के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी थी। पर एक दिन न्यूज़पेपर में देखकर उसने गवर्नमेंट computer डिप्लोमा के लिए अप्लाई कर दिया ... और श्री सिलेक्ट भी हो गई। तो फिर उसके चाचा ने भी आगे कुछ नहीं कहा। श्री अपना सारा खर्चा खुद उठाती थी।
श्री और रित्या की दोस्ती कुछ दिनों में ही गहरी हो गई थी । जिस कारण दोनों ने अपने नंबर भी एक्सचेंज कर लिए थे। अब तक लगभग रित्या को श्री के बारे में सब कुछ पता चल चुका था।
श्री की याद था कि एक बार रित्या श्री से कहा था कि कभी तुम्हें मेरी हेल्प चाहिए तो उसे बता देना कभी दिल्ली आना घूमने मेरे पास।
श्री अभी ये सब सोच ही रही थी कि एक आवाज आती है .... " टिकट " "मैडम अपना टिकट दिखाइए " ... श्री ने अपना सिर ऊपर उठा कर देखा ... तो यह आवाज ट्रेन में टिकट चेक करने वाली टीटी की थी ... " जी ये लीजिए ..." श्री ने कहा ... इस पर वह टीटी कुछ पल उसे देखता है। फिर हां मैं सर हिला कर आगे बढ़ जाता है। टीटी ने टिकट पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। श्री अब चुपचाप अपनी सीट पर बैठी विंडो के बाहर देख रही थी ... " अरे बेटा तुम अकेली जा रही हो क्या मुंबई ... क्या तुम्हारे साथ कोई बड़ा नहीं है " ... श्री ने पलट कर देखा ...
यह बात एक मिडिल age औरत ने कही... जो उसके बगल वाली सीट पर बैठी थी।
" क्या यह ट्रेन मुंबई जाएगी... " श्री ने चौंकते हुए कहा... " हां , क्या तुम्हें नहीं पता " उसे औरत ने हैरान होकर शसे श्री से कहा ...
" नहीं वह मुझे दिल्ली जाना था शायद में जल्दी-जल्दी में गलत ट्रेन में बैठ गई... अब मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। " श्री ने लगभग घबराई हुई आवाज में कहा ...
"अरे कोई नहीं बेटा अब तुम आ ही गई हो तो घबराओ मत मैं हूं ना तुम्हारे साथ... " उसे औरत ने श्री को दिलासा देते हुए कहा...
इस पर श्री कुछ शांत हुई और फिर से विंडो के बाहर देखने लगी। कुछ देर की चुप्पी के बाद उसे औरत ने श्री से पूछा... " क्या तुम घर से भाग कर जा रही हो ?"
श्री ने कुछ पल उसे दिखा फिर कहा ... " नहीं तो मैं तो बस अपनी फ्रेंड से मिलने जा रही थी। "
" मेरा वह मतलब नहीं था मैंने तो बस तुमसे ऐसे ही पूछ लिया " उसे औरत ने कहा...
" कोई बात नहीं आंटी " श्री ने कहा... कुछ पल श्री को देखने के बाद.. उस औरत ने कहा... "मैं अभी आता हूं .. बेटा मेरे सामान का ध्यान रखना "
श्री ने उस औरत को देखा और कहा... "जी मैं ध्यान रख लूंगी आप जाइए" ...
इतना सुनने के बाद वह औरत ट्रेन की दूसरी तरफ चली जाती है। श्री एक नजर सामान को देखकर फिर से ट्रेन के बाहर के नजारे देखने लगती है और अपनी आगे की जिंदगी के बारे में सोचने लगती है। इस बात से अनजान की उसकी आने वाली जिंदगी में क्या होने वाला है।
ट्रेन की दूसरी तरफ एक कोने में एक औरत किसी से फोन पर लगातार बात कर रही थी और बोल रही थी.... "अरे... तुम क्या जानो ... निरंजन ... क्या माल मिला है मुझे... एक बार देख लिया तो देखते ही रह जाओगे बहुत खूबसूरत है वो अगर हमारे कोठी पर आ जाए तो मुंबई की शान बन जाएगी..."
एक औरत जो किसी लड़की की तरफ देखते हुए
डेविल स्माइल के साथ फोन के दूसरे तरफ के आदमी से बोल रही थी।
कौन थी वह औरत?ओर किस लड़की के बारे में बात कर रही थी ? क्या होगा श्री की आने वाली जिंदगी में ? जानने के लिए पढ़िए मेरी नोबेल " Mafia's Obessed Love " 💕 😘
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