One out of four fools is one-eyed in Hindi Children Stories by prem chand hembram books and stories PDF | चार मूर्खों में एक काना

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चार मूर्खों में एक काना

🌿 चार मूर्खों में एक "काना" 
बहुत पहले की बात है।
झारखंड के सुदूर वन-प्रांतीय इलाके में भयंकर अकाल पड़ा।
धरती सूख गई, नदियाँ थम गईं, और लोग भूख-प्यास से तड़पकर असमय ही काल के गाल में समाने लगे।
तत्कालीन राजा श्रद्धा सिंह असहाय थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इस विपत्ति का सामना कैसे करें।
राज्य में चोरी और लूट का ऐसा दौर चला कि व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
खजाना खाली था, और जिनके पास थोड़ा-बहुत अन्न था, वह भी सुरक्षित नहीं था।
अकाल ने केवल शरीर ही नहीं तोड़े—
उसने लोगों का विवेक भी छीन लिया।
लोग चावल का माड़ पीकर दाने सुखा देते,
और फिर वही दाने भी चोरी हो जाते।
भूख ने इंसान को चोर बना दिया था,
और चोरी का अन्न खाकर बुद्धि भी तर्कहीन हो चली थी।
इसी राज्य के भुदनीडीह गाँव में चार दोस्त रहते थे—
जिनकी मूर्खता पूरे इलाके में प्रसिद्ध थी।
चारों में एक काना (एक-आंख वाला) था,
पर वही सबसे चालाक और समझदार माना जाता था।
बाकी तीनों उसे अपना गुरु मानते थे।
उनमें से बदरी का दिमाग थोड़ा सुस्त था,
लेकिन बंटवारे के समय उसकी समझ बहुत तेज हो जाती थी।
🌙 चोरी की रात
एक रात चारों चोरी के इरादे से एक घर में घुसे।
घर का मालिक गहरी नींद में सो रहा था—मौका एकदम सही था।
काना ने बाहर खड़े होकर निर्देश दिया—
“सुनो!
बदरी, इस बार गलती नहीं होनी चाहिए।
घर में जो सबसे भारी चीज हो, वही उठाना—
भारी चीज का दाम ज्यादा मिलता है।”
और राहु-केतु से बोला—
“तुम दोनों जो भी बजने वाली चीजें हों, सब उठा लेना।”
तीनों ने एक स्वर में कहा—“हाँ गुरु!”
संयोग देखिए—
वह घर एक नाटक कंपनी के उस्ताद का था।
अंदर ढेर सारे वाद्ययंत्र रखे थे।
बदरी की नजर पड़ी एक भारी चक्की पर—
वह खुश होकर बोला,
“आज तो बड़ा माल हाथ लगा है!”
वह किसी तरह चक्की को पीठ पर लादकर बाहर निकल गया।
उधर राहु और केतु—
एक हारमोनियम उठा लाया,
दूसरा ढोल।
दोनों मुस्कराए—
“आज तो गुरु बहुत खुश होगा!”
🌳 बरगद के नीचे
गाँव के बाहर बरगद के पेड़ के नीचे
तीनों इकट्ठा हुए और काना का इंतजार करने लगे।
जब काना पहुँचा और सामान देखा—
हारमोनियम… ढोल… और चक्की!
वह सिर पकड़कर बैठ गया।
“अरे मूर्खों!
मैंने भारी चीज लाने को कहा था—
पर यह नहीं कहा था कि बेवकूफी उठा लाओ!
और तुम दोनों—
मैंने ‘बजने वाली’ चीजें इसलिए कहा था
कि इस बार गलती न करो!
पिछली बार बदरी प्लास्टिक पत्तल उठा लाया था,
और तुम लोग मिट्टी के बर्तन!
अरे, कांसे के बर्तन, चांदी के सिक्के—क्या नहीं बजते?”
काना झुंझलाकर बाल नोचने लगा—
“खोदा पहाड़, निकली चुहिया!”
⚡ संकट की घड़ी
रात गहरी थी, उमस भरी गर्मी थी।
तभी दूर से लोगों की आवाज सुनाई देने लगी।
चारों के होश उड़ गए।
काना ने हिम्मत बांधी—
“कोई नहीं भागेगा!
भगवान सबकी मदद करते हैं—चाहे चोर हो या साधु।”
पल भर में चारों पेड़ पर चढ़ गए।
नीचे हारमोनियम और चक्की छूट गए।
कुछ ही देर में 10–12 लोगों का एक दल पेड़ के नीचे आकर बैठ गया।
उन्होंने गठरी खोली—
उसमें चांदी के सिक्के, गहने और कांसे के बर्तन थे।
काना तुरंत समझ गया—
यह कुख्यात सरदार शंकरा का गिरोह है।
🎭 बुद्धि की जीत
गिरोह में एक आदमी बोला—
“सरदार! इस पेड़ के नीचे डायन नाचती है…मैने अपने दादू से बहुत बार सुना है 
यह चक्की और हारमोनियम उसी के हैं!”
सरदार " अबे चुप हो जा मै डायन का भी सरदार हूं " 
पर दूसरे ही पल एक और साथी ने कहा " सरदार बुरेश ठीक कह रहा है हमे यहां से जल्दी चलना चाहिए " 
"डायन आने के पहले अजीब सी आवाज करती हैं मैने भी अपनी दादी से सुन रखा है "
बस, काना के लिए इतना संकेत काफी था।
उसने पेड़ से अजीब-सी डरावनी आवाज निकाली—
जैसे कोई प्रेत लौट रहा हो।
फिर अचानक जोर-जोर से ढोल बजा दिया।
अचानक कान फाड़ू आवाज से राहु-केतु भी नीचे गिर पड़े—
धड़ाम!
इतनी जोरदार आवाज हुई कि
सारे चोर जान बचाकर भाग खड़े हुए।
चारों नीचे उतरे—
और इस बार सच में “माल” उनके हाथ लग गया।
🌿 सीख
👉 विपत्ति केवल शरीर नहीं, बुद्धि की भी परीक्षा लेती है।
👉 मूर्खों के बीच थोड़ा-सा विवेक भी नेतृत्व बन जाता है।
👉 और सबसे बड़ी बात—
जिसके पास बुद्धि है, वही संकट को अवसर बना लेता है।
अंत में यही सत्य झलकता है—
भगवान जब किसी अंग में कमी करते  हैं,
तो कहीं न कहीं बुद्धि को तीक्ष्ण कर देते हैं।
Jayguru 🙏🙏🙏