🐒 जब मटकू को मिला भोपू(पंचतंत्र शैली की हास्य-व्यंग्य कथा)
जंगल के बीचों-बीच एक बूढ़ा पीपल का पेड़ था—वह पेड़ नहीं मटकू का आंगन था ,
उसी पेड़ पर रहता था एक चंचल बंदर—मटकू।
मटकू जितना फुर्तीला था, उतना ही शरारती भी।
उसका एक ही नियम था—
“जहाँ शांति हो, वहाँ थोड़ी हलचल जरूरी है!”
दूसरों को सताने में उसे बड़ा मजा आता ,
कभी वह किसी की पूँछ खींच देता,
तो कभी किसी के मुँह से फल छीनकर खुद ही खा लेता ।
🎺 भोंपू का मिलना
एक दिन सुबह-सुबह टहलते-टहलते मटकू जंगल के किनारे पहुँचा।
वहाँ उसे एक बैग मिला
मटकू ने उसे उठाया, खोला और सुंघा फिर हल्का फूंका और वह बज उठा उसे बड़ा कोतूहल हुआ ,अब उसने जोर से फूंका फिर एक जोर से आवाज निकला
“भौं ऽऽऽ!”
पूरा जंगल गूँज उठा।
पक्षी उड़ गए, हिरण भागने लगे, और खरगोश बिल में जा छिपे।
मटकू उछलकर बोला—
“वाह! अरे ये तो कमाल का चीज है "
अरे " पतलू, चमटू, सखिया जल्दी इधर आओ देखो मुझे क्या मिला है "
उसमे और तीन भोंपू थे ,फिर क्या चारों ने एक एक भोंपू बांट ली "
😄 भोंपू का आतंक
अब मटकू और उनके दोस्तों ने जंगल में इस कदर आतंक मचाया अब बड़े बड़े जानवर भी इनके भोंपू की आवाज से भागने लगे
कोई पानी पीता—
पीछे से आकर “भोंऽऽ!”
कोई सोता—
कान के पास जाकर “भों ऽऽऽ!”
बेचारे जानवरों का जीना मुश्किल हो गया।
एक दिन तो हद हो गई जंगल का बुढ़ा शेर राजा गरजू सिंह नदी किनारे शीतल छाया में पैर पसारकर सोया हुआ था ,उद्यम मचाता मोटकू का दल आया और सभी ने जोर से दोनों कान पर एक लंबी सांस लेकर जोर से फूंकी , बुढ़े शेर हड़बड़ाकर उठा ,गुस्से से उसका शरीर हिलने लगा कुछ क्षण तो लगा उसके कान के पर्दे फट गए हैं ,शेर ने अपना सिर घुमाया,पर कान से सिर्फ सांय सांय की आवाज आ रही थी ,वह बेहद गुस्से में था ।
चारों दोस्तो का आतंक काफी बढ़ चुका था , बैलों के कान में फूंकते तो बेल बेतहाशा दौड़ते ।
पर एक अच्छी चीज होती जब भी कोई शेर चीते गाय , भैंस, बकरी का शिकार करते चारों दोस्त पहले से जोर से भोंपू बजा देते ,बेचारे शेर हाथ मल के रह जाते शिकार पहले ही भाग खड़े होते ।
शाकाहारी जीवों की चांदी थी परंतु मांसाहारी जीवों की स्थिति अब खराब होने लगी ।
जैसे ही कोई कोई शेर या चीता शिकार पर ध्यान लगाता,
मटकू के दोस्त अचानक पेड़ से कूदकर—
“भौं ऽऽऽ!”
शिकार भाग जाता…
और शेर-चीते भूखे रह जाते।
एक दिन तो एक चीता झुँझलाकर बोला—
“अब शिकार से ज्यादा डर इस भोंपू से लगता है!”
शेर ने भारी साँस लेते हुए कहा—
“अगर यह चलता रहा, तो हमें घास ही खानी पड़ेगी…”
बुढ़ा भालू " सिंह चाचा मुझे भी लगता हैं अब हमे घास फूस खाकर जिंदा रहना पड़ेगा "
सियारों की तो इतनी दुर्गति हुई अब चूहे भी नसीब नहीं ही रहे थे "
वे सब बलवान थे, पर मटकू एवंग उनके दोस्तों की चपलता और शरारती बुद्धि के आगे सब लाचार थे।
🐺 राखाल दादू की शरण
आखिर सबने मिलकर सोचा—
“अब इसका हल बल से नहीं, बुद्धि से निकलेगा।”
और वे पहुँचे जंगल के सबसे अनुभवी सियार—
राखाल दादू के पास।
राखाल दादू… जिनकी चाल धीमी थी, पर बुद्धि गहरी।
कहते हैं, उन्होंने अपनी जवानी में जंगल के प्रतापी राजा गरजू सिंह के दरबार में मंत्री बनकर राजकाज संभाला था।
उन्होंने सबकी बातें सुनीं, आँखें बंद कीं और मुस्कुराए—
“समस्या भोंपू नहीं है… समस्या मटकू और उसके दोस्तों के नासमझी मन की है।”
सब हैरान—“यह कैसी बात!”
🧠 बुद्धि की योजना
राखाल दादू बोले—
“जिसे शरारत में आनंद मिलता है, उसे डराकर नहीं…
अनुभव से समझाना पड़ता है।”
और उन्होंने एक योजना
बनाई।
राखाल शाम के समय मोटकू और उनके दोस्तों के यहां गए ,बाहर हल्की ठंड थी मोटकू और उनके दोस्त एक जगह सिकुड़ के बैठे थे उन्होंने भोंपू को अपने पेट में छिपा कर रखा था ।
राखाल सियार धीरे धीरे उनके सामने गए फिर बोला
",मैने सुना है तुमलोग ने जंगल राजा रह चुके बूढ़े गरजू सिंह के कान का पर्दा फाड़ दिए हो इतनी शरारत ठीक नहीं ,पहले वह तो बहुत बिगड़ा पर मैने थोड़ा शांत किया है ।
मोटकू ' क्या वे बुढ़े राजा थे ?
राखाल सियार" जी हां "
" हमे क्या करना होगा "
राखाल",एक छोटा सा काम अगर तुमलोग करोगे तो उनके गुस्से का शिकार नहीं बनोगे मै वादा करता हूं '
बेटा ' तुम सब को पता है अभी दो साल से बारिश नहीं हुई है नदी नाले तालाब अभी कुछ ही दिन में सुख जाएंगे।
बेटा मुझे सपने में इंद्र देव ने कहा है अगर कोई जीव पुरानी गुफा के पास जाकर जोर जोर से भोंपू बजाए तो इंद्रदेव अति प्रसन्न होंगे फिर अच्छी बातिश होगी ।
"बेटा तेरे हाथ में सभी का जीवन है कल सुबह दस बजे अपने दोस्तों को ले समय पर अवश्य आओगे।"
🎭 गुफा का रहस्य
अगले दिन जंगल में खबर फैल गई—
“आज एक अद्भुत गुफा खुलेगी है, जहाँ भोंपू बजाने से ‘जंगल देवता’ प्रकट होते हैं!”
🦁 सत्य से सामना
दूसरे दिन ठीक दस बजे मटकू और उनके दोस्त हाजिर थे ,
मटकू और उनके दोस्तों ने छाती फुलाकर भोंपू बजाया—
“भोंऽऽऽऽ!!!”
आवाज़ गुफा में गूँजी… और कई गुना बढ़कर लौटी।
तभी अंदर से एक भयंकर गर्जना हुई—
“कौन है जो शांति भंग कर रहा है?”
असल में, अंदर शेरों का दल पहले से बैठा था!
शेरों की गर्जना इतनी तीव्र थी मटकू और उनके दोस्तों के प्राण सुख गए ,फिर भोंपू की क्या पड़ी है जोर से उछलकर ऊंची डाली पे जा बैठे ।
मटकू के तो प्राण सूख गए।
भोपू की क्या पड़ी है जान बचा के भागे ।
सभी जानवरों ने राखाल दादू की बुद्धि की दाद दी ,अब वे कल से शिकार कर पाएंगे , कितनो ने तो सप्ताह सप्ताह भर शिकार नहीं किया था ,पानी चाट चाट कर हड्डी दिखने लगी थी ।
🌿 समझ का उदय
वह सीधे राखाल दादू के पास पहुँचा—
“दादू! मुझसे गलती हो गई… मैंने सबको बहुत परेशान किया…”
राखाल दादू ने स्नेह से कहा—
“बेटा मटकू,
"शक्ति का उपयोग हित में होने चाहिए न कि भय का वातावरण बनाने में "
शक्ति का दुरुपयोग दूसरों के लिए दुःख बन जाती है।
और वही शक्ति जब सामने आती है,
तो डर बन जाती है।”
मटकू चुप हो गया…
पहली बार उसकी शरारत के स्थान पर समझ जागी।
🌸 परिवर्तन और शांति
उस दिन के बाद मटकू ने भोंपू कभी नहीं बजाया।
अब वह छोटे जानवरों की मदद करता, उन्हें हँसाता।
धीरे-धीरे जंगल में फिर से शांति लौट आई।
और मटकू—
अब शरारती नहीं, समझदार मटकू कहलाने लगा।
🌿 कथा का संदेश
👉 शक्ति का उपयोग भलाई में होना चाहिए, न कि दूसरों को डराने में।
👉 अहंकार का अंत हमेशा सत्य के सामने होता है।
👉 बुद्धि और धैर्य से हर समस्या का समाधान निकल सकता है।🌿📖
जयगुरु🙏🙏🙏🙏
वंदे पुरुषोत्तमम