Dedicated To All The Brave & Bold Souls Out There ....
- Rupall Jadav 🤍
1. सम्हार
बिना किसी हथियार के भी हु
खुद में ही में सम्पूर्ण शस्त्रागार
आंखों से ही हु तुम्हारे दिल को
छलनी करती में महिधार
बिना छुए भी तुम्हारी हु रूह तक
जला कर खाक कर देने वाली में अंगार
तुम्हारे किये गए हर वार को कर दे
जो नाकाम वो हु में प्रतिवार
मीठास देने वाला शहद नही पर हु
तड़पा तड़पाके मारने वाला में ज़हर कारगार
माफ कर भूल जाने वाली नही बल्कि
हु बदला लेके बर्बाद करने वाली वो में सम्हार
ज़ुकने वाला सन्मान नही बल्कि हु
कभी ना टूटने वाला में अहंकार
छोटा सा घाव देने वाला खंजर नही बल्कि
हुसीना चिर देने वाली में तलवार धारदार
©rupal_jadav
2. ज़हरीला खंजर
तुम पढकर अपने दील मे उतार लोगे
ऐसी कोइ कीताब नही हु मे
तुम्हारे दील के आरपार उतर कर
तुम्हारी जान लेलु वो जहरीला खंजर हु मे
सोचना छोड़ दो की मुजसे जीत जाओगे
हार बर्दाश्त करलू वैसी चीज़ नही हु में
सपने देखकर भी कुछ नही कर पाओगे
क्योंकि तुम हासिल ना कर सको वैसा ख्वाब हु में
तुम्हे कई मन्नतो के बाद मिल जाऊ
वैसा कोई आशीर्वाद नही हु में
तुम्हारे झहन में अपने प्यार का रंग भरकर
तुम्हारी ज़िन्दगी बर्बाद कर दु वो श्राप हु में
©rupal_jadav
3. सारथी
धर्म के पथ पे तू प्रयाण तो कर वो पथ
तेरा अपने आशीर्वाद से प्रकाशित कर देगा
डाला है उसने दुविधा में तुझे तो
वो ही इस दुविधा से निकाल भी देगा
निस्वार्थ कर्म करता रेह तो
वो तेरे हर कर्म का तुझे योग्य फल भी देगा
अथाग मेहनत से कार्य कर अपना
वो मेहनत का यथायोग्य परीणाम भी देगा
तू शुद्ध मन से कर भक्ति
वो मुसीबत में अथाग शक्ति भी देगा
श्रद्धा हो तो कर सवाल हर सवाल का
मेरा नाथ सामने जवाब भी देगा
संसार की मोह माया त्याग दे
वो अंत समय में तुझे दुनिया से मोक्ष भी देगा
धैर्य और विश्वास रख तो कृष्ण रूप में
वो सारथी बन रणमैदान में साथ भी देगा
©rupal_jadav
4. एक अलग जहान
टुकड़े भले हुए हो तेरे सपनो को
तू खुद ही एक एक टुकड़ा समेट ले
चाहे कोई तुझे ना अपना समझे पर
तू खुद को तो अपना समझ ले
साथ कोई ना चले राहों में तो
तू खुद के साथ ही अकेले राह पे चल ले
किसी और के लिए नही तो बस
खुद के लिए तो तू खुल के जी ले
किसी और की खुशीयो में नही
तू खुद ही में अपनी खुशियो का पिटारा ढूंढ ले
और कोई चाहे ना प्यार करे तुझे
तू खुद ही से बिन शर्ती प्यार कर ले
जहान की फिकर छोड़ दे तू
बस खुद ही में अपना एक अलग जहान बसा ले
©rupal_jadav
5. गुरुर
कागज़ों की गजल नही जिदंगी को पढ़के
जिंदगी को लिखने का हुनर रखती हूं
इश्क तुम्हरा सच्चा हो तो आखिरात तक
साथ निभाने की में ताकत रखती हु
जूठ से ढकी दुनिया में भी बेधड़क
सच्चाई दिखाने की हिम्मत रखती हु
डर कर भागने में नही मगर मौत तक का
सामना करने का हौसला रखती हु
जिस से इश्क हो उसे उस ही से
हासिल करने की जुर्रत रखती हु
नापाक और बईमान इस दुनियाईं
जिंदगी में भी अपना ईमान पाक रखती हु
एक बार छोड़ दिया तो मुड़ कर भी ना देखू
तुम्हे इतना तो खुद में गुरुर रखती हु
जिद पर अड़ जाऊ तो कदमों में अपने
सारे जहान को जुकाने का जूनून रखती हु
©rupal_jadav
6. पंचतत्व
सृष्टि के इन पंच तत्वों सी सरल पर गहरी में
तुम यूं ना मुझे सरलता से समज पाओगे
मुझे शांत समंदर का पानी समझते तुम
मुझमें ही गहराई तक भीतर डूबते चले जाओगे
क्रोध के स्वरूप में धधकती ज्वाला सी में
क्रोध की आग से राख में तुम मिल जाओगे
आकाश जैसी अनंत और बादलों से घिरी रहती में
तुम जग के इन पैमानों में मुझे कभी ना नाप पाओगे
हरियाली से हरीभरी और मिट्टी से सजी सुनहरी धरती सी में
मेरी सुंदरता और छुपे रहस्यों से मंत्रमुग्ध तुम हो जाओगे
वायु की तरह हर जगह कण ओर क्षण में बस्ती में
अंत में मुझ में ही मिल कर तुम विलीन हो जाओगे
सृष्टि के इन पंच तत्वों सी सरल पर गहरी में
तुम यूं ना मुझे सरलता से समज पाओगे
©rupal_jadav
7. खोया हुआ वजूद
बहार क्या ढूंढने निकला है जरा आंखे खोल के देख
तो खुद में ही तुझे तेरा सारा जहान नजर आयेगा
हर दर दर मत ढूंढ उसे एक बार अपने अंदर तो जांख
खुद में ही कही तु अपना खोया हुआ वजूद पायेगा
दूसरो से नहीं मगर एक बार खुद से तो इश्क करके देख
तुझे खुद ही में अपनी खुशियों का खजाना मिल जायेगा
इन बेगानो के नाम और शोहरत के दम पर नहीं मगर कर
खुद पे भरोसा बढ़ आगे तेरा नाम भी एक दिन छायेगा
किसी के भी बुने हुए खवाबो के पिंजरे में तू ना बंध रख
यकीन एक दिन तू खुद की ख्वाबों की दुनिया सजायेगा
गैरो की कामयाबी से जलकर नही पर खुद को बेहतर बनाके देख
सिर्फ तू ही नही सारा जहान तेरी कामयाबी का जश्न मनायेगा
इन गैरो को नहीं मगर खुद को तवज्जो देना सीख क्योंकि
सिर्फ एक तू ही आखरी मंजिल तक खुद का साथ निभायेगा
©rupal_jadav
8. बहन
जिस रास्तों पर चलना भी हो दुशवार
उन रास्तों पर भी वो मेरे साथ होती है
थक कर ज़िंदगी से जब हार जाऊ तब
हर डगर पे मेरे वो हाथ थामती है
कठिनाइयों से भरे हुई रास्तों पर भी
हर कदम कदम मेरे वो साथ चलती है
तकलीफों में देख मुझे दुखी होती वो भी
हर पल मेरे लिए अंदर से जलती है
मेरी खुशी में खुश होती वो उससे ही
मेरी जिन्दगी खुशियों से सजती है
खुद की जरूरतों को परे रख कर
मेरी ख्वाहिशों का वो पहले सोचती है
कभी पिता बन लाड और प्यार करती
वो मुझे मां बन गलतियों पे भी समझाती है
वो सिर्फ बहन ही नही है मेरी
उसमे तो मेरी पूरी जिन्दगी बस्ती है
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9. मलंग
हो के खुद में मलंग तू खुद ही में
खुद की खुशियों का खजाना ढूंढ ले
दुनिया की इस रीत की बेड़ियों को तोड़
तू आसमान में ऊंची उड़ान भर ले
कब तलक ख्वाहिशों को कैद रखेगा खोल
पिंजरा और ख्वाहिशे सारी पूरी कर ले
लोगों की इन बेबुनियादी बातो से
अपने खुद का पल्ला तू जाड़ ले
दूसरो को खुद की मुस्कान की वजह मत बना
तू खुद ही खुद के मुस्कान की वजह बन ले
दुनिया की उलझनों के बीच में तू
खुद के लिए भी फुरसत के दो पल निकल ले
एक ही तो ज़िंदगी है मेरे जानी तो इस
एक जिन्दगी को तू दिल खोल के जी ले
©rupal_jadav
10. जिंदगी की कहानी
खुद के लिए नही तो अपनो
के लिए तो खुश रहना पड़ता है
सवरने के लिए भी यहा एक बार
तो खुद पूरा बिखरना पड़ता है
खुद को मजबूत बनाने के लिए यहां
कई हादसों से गुजरना पड़ता है
मुस्कुराते चेहरों के पिछे कई
अनकहे दर्दों को छुपाना पड़ता है
जज़्बात की कदर ना होने पर
दिल को भी पत्थर बनाना पड़ता है
मन का न हो तो मन मारकर भी
मन को मनाना पड़ता है
सबसे से आगे बढ़ने के लिए भी
यहां सब पिछे छोड़ना पड़ता है
घाव नासूर ना बन जाए इसलिए कई बार
खुद ही मरहम बनना पड़ता है
ये जिन्दगी है जनाब ना चाहते
हुए भी इसको पूरा जीना पड़ता है
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11 . शक्ति – भवानी
भवानी स्वरूप में मृदुता से पर्याप्त वो
स्मशान काली रूप में करे नर संहार
ममतामयी भाव से पूर्ण मां भवानी वो
करती मेरे इस पावन हृदय में विहार
भवानी से उत्पन्न हुई पश्यात महाकाली
जो स्मशान की राख से सजे श्रृंगार
बाजुओं में अद्भुत ताकत और जिह्वा पर लहू
चक्षु रक्त से लाल जैसे आग से धधकते अंगार
क्रोध शौर्य व पराक्रम प्रथम गुण है जिनके
काट अधर्मी शीश गले में धारण करे वे हार
बन रण वीरांगना वो आई युद्ध के मैदान
धारण कर अधर्मी के लहू से लिप्त तलवार
प्रबल बल से भरपूर है हस्त सहस्त्र जिनके
अत्यंत भयावह है जिनका रौद्र रूप अवतार
अपार शक्ति समाई थी उनकी एक बाहु में
किया केवल मस्तक पे एक ही तलवार प्रहार
लहू के अंश से उत्पन्न हुए लाखों रक्तबीज अंत में
शीश काट व पूर्ण लहू पी किया रक्तबीज सम्हार
भवानी स्वरूप में मृदुता से पर्याप्त वो
स्मशान काली रूप में करे नर संहार
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12. भूल गई
दुनिया को हसना सिखाते हुए
में खुद ही में कही हसना भूल गई
सब के लिए जीते हुए में खुद के
लिए ही अब जीना भूल गई
लोगो को समजाते हुए में कही
खुद ही को समजाना भूल गई
भाग दौड़ से भरी हुई इस ज़िंदगी मे
में कही पर थमना ही भूल गई
अपनो की खुशियों के लिए सोचते हुए कही
अपनी खुशी के लिए सोचना ही भूल गई
लोगो की आवाज़ बनते हुए में
खुद ही कि आवाज़ सुनना भूल गई
दुसरो की परछाई बनके रहते हुए में
कही खुद ही कि पहचान भूल गई
हर ज़िम्मेदारीओ को संभालते हुए
में खुद ही में कही सम्भलना भूल गई
बिखरी हुई जी ज़िंदगीओ को संवारते हुए
में खुद ही कि ज़िन्दगी सवारना भूल गई
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13 . नाकाम
ज़िंदगी की इन मुश्किलो से
हार जाएं वो इंसान नही हु में
एक बार हुई गलती को दोबारा
दोहराऊं उतनी नादान नही हु में
ऐसे बुरे हालतों से डर में भाग जाउ
उतनी कायर नही हु में
खुद ही के सामने शिखसत हो
जाउ इतनी कमज़ोर नही हु में
किसी के जाने के गम में जीना ही छोड़ दु
इतनि तो नासमझ नही हु में
अंजाम से डर कर सहम के बैठ
जाउ उतनी बुज़दिल नही हु में
एक हार से कौशिश ही करना छोड़ दु
उतनी नाकाम नही हु में
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14 . दोस्ती
दुनीया के ये सारे रीश्ते खुदा से मीली सोगात है पर
तेरे जैसा दोस्त मीला ये मेरी कीस्मत की बात है
याद है तुजे जब हम पहली बार मीले थे पर
तब ऐक दुसरे से अनजान थे ये अलग बात है पर
अब तेरे साथ दिल का रीश्ता बन गया ये
मेरे लीये खुदा की इनायत की बात है
नही करना हे भरोसा मुजे कीसी और पे कयुंकी
सारे यहा मतलब के रीश्ते है ये सच बात है पर
पता है तुजपे दुनीया से ज्यादा भरोसा हे कयुंकी
दुनीया मे तु ही एक समजता मेरे दिल की बात है
प्यार की क्या उम्मीद रखु मे इस मतलबी दुनीया से कयुंकी
इस दुनीया के लीये पैसो के अलावा सब बेफालतु की बात है
बडी ही खुशकीस्मत मानती हु मे खुद को कयुंकी
तेरे जैसा दोस्त मीला कया ये कोइ छोटी बात है
प्यार ने जब दिल तोडा और बीच रास्ते छोडा तो
लोगो ने ये कहा के प्यार मे धोखा तो आम बात है
पर तब तुने ही मुजे संभाला़ ओर होसला देकर
मुजे नइ जीदंगी दी ये मेरे लीये यही मायने की बात है
दुनीया मे खुन से जुडे इतने सारे रीश्ते है फीर भी
हमारी इस दोस्ती के रीश्ते मे कुछ अलग बात है
दुनीया के यो सारे रीश्ते खुदा से मीली सोगात है पर
तेरे जैसा दोस्त मीला ये मेरी कीस्मत की बात है
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15 . शमशेर
अगर चोट पहूंचाने वाला तीर हो तुम तो
उस तीर से भी बत्तर मौत दे वो ज़ेहर हु में
हवा की आंधी हो तुम तो उस आंधी को खुद में
समा कर तोड़ दे वो समंदर की तेज लेहर हु में
शांत सा पानी हो तुम तो उस पानी को भी
जला के हवा बना दे वो आग का केहर हु में
हसीन ढलती शाम हो तुम तो उस हसीन शाम
को अपने उजाले से खत्म कर दे वो सेहर हु में
कठोर अभिशाप हो तुम तो उस अभिशाप को
चकनाचूर कर के रख दे वो मेहर हु में
ज़ख्म दे कर घायल वाली तलवार हो तुम तो
एक ही वार में जो जिस्म छलनी करदे वो समशेर हु में
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16. सपनो की उड़ान
पैरों से बंधी इन जंजीरे को खोल
बस तू आगे बढ़ते रहना
दुसरो का सोचना छोड़ थोड़ा
खुद के लिए भी तू जीना
पिंजरा तोड़ बहार निकल अपने पर खोल
खुले आसमानो में तू उड़ना
कठिनाइयों से भारी ज़िन्दगी में मिलाके आंखे
सामना उन कठिनाइयों का तू करना
दुनिया नही हरा सकती तुझे
बस तू खुद से ही मत हार जाना
ज़िंदगी के रणमैदान में कायर नही
बल्कि एक वीरांगना की तरह तू लड़ना
अबला नही पर एक शशक्त नारी बन
तू अपने सपनो की उड़ान भरना
©rupal_jadav
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" All Souls Out There Who Stuck In Any Difficult Phase Of Their Life , Just Remember One Thing This Is The Phase That Will Made Your Character So Overcome With Bravery And Boldness ”
- Rupall Jadav 🤍
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