विमान धीरे-धीरे स्विट्जरलैंड के पहाड़ों और झीलों के ऊपर से गुजर रहा था। नीले आकाश और सफेद बर्फीले पहाड़ों का दृश्य सबके दिल को आनंदित कर रहा था।
कार्तिक, संस्कृति, मोहन और पारो अपने नए ऑफिस पहुँचे।
कार्यालय बहुत बड़ा, मॉडर्न और ग्लास से ढका हुआ था।
हर जगह कर्मचारी व्यस्त थे, लेकिन स्वागत और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। कार्तिक ने टीम का ध्यान खींचा।
कार्तिक बोला -
यहाँ हम सब मिलकर काम करेंगे।
हमारी टीम के लिए ये एक बड़ा अवसर है।
और मैं चाहता हूँ कि हम सब साथ रहें और साथ आगे बढ़ें।
संस्कृति ने मुस्कान के साथ मोहन और पारो की ओर देखा और बोली -
सबसे ज़रूरी बात ये है कि हम टीम के साथ तालमेल बनाएं।
और हाँ… काम के साथ अपनी खुशी भी बनाए रखें।
फ्लाइट में डरने वाली पारो अब ऑफिस के हर कोने में उत्साहित थी।
मोहन ने उसका हाथ थामा और कहा —
देखो पारो… हम यहाँ सिर्फ काम करने नहीं आए हैं,
हम यहाँ अपनी दुनिया बनाने आए हैं।
पारो ने मुस्कान दी और कहा —
आप हो तो सब आसान लग रहा है।
कार्तिक और संस्कृति अपने नए ऑफिस की टीम से मिल रहे थे।
संस्कृति ने डिजाइन टीम को देखकर कहा —
हमारे प्रोजेक्ट में क्रिएटिविटी सबसे ज्यादा ज़रूरी है।
और आप लोग इसे शानदार बनाएँगे।
कार्तिक ने अपने नए कैप्टन के रूप में नोट किया कि टीम बहुत पेशेवर है। लेकिन उसे सबसे ज़्यादा खुशी मोहन और पारो को देखकर हुई। दोनों के बीच प्यार और समझदारी अब ऑफिस में भी साफ़ दिख रही थी।
काम के बाद सभी ऑफिस के टेरेस पर खड़े थे। नीला आसमान, बर्फ़ीले पहाड़ और ठंडी हवा…मोहन ने पारो का हाथ कसकर थामा।
मोहन बोला -
देखो… ये सब हमारे नए सपनों का हिस्सा है।
पारो ने धीरे से कहा —
हमारा जीवन अब सच में नई दिशा ले रहा है।
आप सब के साथ होना सबसे बड़ी खुशी है।
संस्कृति ने कार्तिक की ओर देखा।
हमने जो सपना देखा था… अब सच में बदल रहा है।
कार्तिक मुस्कराया और बोला—
और ये सिर्फ शुरुआत है।
नई जिम्मेदारियाँ, नए रिश्ते और नए रोमांच।
हम सब मिलकर इसे और शानदार बनाएँगे।
स्विट्जरलैंड में उनका नया फ्लैट बहुत सुंदर और मॉडर्न था।
दो बेडरूम वाला फ्लैट था — बड़ा सा लिविंग रूम, खिड़कियों से बर्फ़ीले पहाड़ों का दृश्य और हर जगह साफ-सुथरी जगह।
मोहन और पारो ने अपना रूम चुना। फ्लैट का एक कोना उनका था — दोनों साथ में और नया जीवन शुरू करने के लिए तैयार।
कार्तिक और संस्कृति लिविंग रूम में बैठे थे।
मोहन और पारो को देखकर संस्कृति मुस्कुराई और बोली—
तो… अब तुम लोग यहाँ खुशकिस्मत हो, है ना?
मोहान हल्की हँसी के साथ बोला —
हाँ… लेकिन भाभी, आपको तो पता है… हमें अभी भी इंतज़ार है कि कब ये खुशखबरी आएगी।
पारो भी पीछे से हँसते हुए जुड़ी —
और हाँ, भैया… अब तो हम दोनों भी आपकी तरह उधम करेंगे।
तो जल्दी बताइए, खुशी की खबर कब मिलने वाली है?
कार्तिक ने मुस्कराकर संस्कृति की तरफ देखा।
संस्कृति ने शरारती अंदाज़ में कहा —
लगता है… अब हमारी बारी है उन्हें चिढ़ाने की।
मोहान और पारो थोड़ी देर के लिए चुप रहे।
फिर पारो ने फुसफुसाते हुए कहा —
भाभी, आप लोग तो वैसे भी हर काम में जल्दी नहीं करते…
तो ये खुशखबरी भी दे देंगे या नहीं?
संस्कृति और कार्तिक हँस पड़े।
संस्कृति बोली -
अब देखो… धैर्य का फल कितना मीठा होता है, जल्दी ही पता चलेगा।
लेकिन उनके चेहरों पर हल्की मुस्कान ये साफ़ बता रही थी कि वो भी इंतज़ार का मज़ा ले रहे थे। लिविंग रूम में हल्की हँसी, चिढ़ाना और प्यार की ये नन्हीं लड़ाई…ये दिखा रहा था कि अब सब कुछ न सिर्फ नया था, बल्कि पहले से भी ज्यादा मज़ेदार और परिवार जैसा बन गया था।
रात गहरी हो चुकी थी। स्विट्जरलैंड की ठंडी हवा खिड़की के बाहर धीरे-धीरे बह रही थी। दूर पहाड़ों पर जमी बर्फ चाँदनी में चमक रही थी। मोहन और पारो अपने कमरे में जा चुके थे। पूरा फ्लैट अब शांत था। कार्तिक और संस्कृति भी अपने कमरे में थे। इतनी लंबी लड़ाइयाँ… इतने संघर्ष… इतने आँसू…सब कुछ जैसे अब पीछे छूट चुका था।
कार्तिक बिस्तर पर लेट गया। संस्कृति धीरे से उसके पास आई… और उसके सीने पर सिर रखकर लेट गई। कुछ देर दोनों चुप रहे।
वो चुप्पी अजीब नहीं थी… वो सुकून वाली चुप्पी थी।
संस्कृति ने धीरे से कहा —
कार्तिक जी… अब हम खुशखबरी कब सुनाएँगे?
कार्तिक हल्का सा मुस्कुराया। उसने प्यार से संस्कृति के बालों में उंगलियाँ फेरनी शुरू कर दीं।
कार्तिक बोला -
जब तुम पूरी तरह से ready हो जाओगी।
संस्कृति ने थोड़ा सिर उठाकर उसकी तरफ देखा।
संस्कृति बोली -
मतलब?
कार्तिक ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा —
मतलब… जब तुम्हारे दिल में कोई डर ना बचे।
जब तुम्हें ये महसूस हो कि अब तुम्हें कोई दर्द याद नहीं आता।
जब तुम्हें लगे कि अब तुम्हारी जिंदगी सिर्फ खुशी से भरी है…।
उसने धीरे से संस्कृति का हाथ पकड़ा।
कार्तिक बोला -
तब हम अपने बच्चे को इस दुनिया में लाएँगे।
क्योंकि मैं चाहता हूँ कि वो ऐसे घर में आए…जहाँ उसकी माँ पूरी तरह खुश हो।
संस्कृति की आँखें हल्की नम हो गईं।
संस्कृति बोली -
आप हमेशा इतना सोचते कैसे हैं मेरे बारे में?
कार्तिक हँसा।
कार्तिक बोला -
क्योंकि तुम सिर्फ मेरी पत्नी नहीं…मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी जीत हो।
संस्कृति फिर से उसके सीने पर सिर रखकर लेट गई। कमरे में हल्की शांति थी…लेकिन उस शांति के अंदर एक गहरा प्यार था।
संस्कृति ने धीरे से कहा —
तो फिर… शायद वो दिन बहुत दूर नहीं है।
कार्तिक मुस्कुराया। उसने धीरे से उसकी पेशानी चूम ली। बाहर चाँद चमक रहा था…और अंदर दो दिलों के बीच एक नया सपना जन्म ले रहा था।
संस्कृति कुछ ही देर में सो गई। उसकी साँसें धीरे-धीरे चल रही थीं। चेहरा बिल्कुल शांत… जैसे कोई बच्ची गहरी नींद में हो।
इतने सालों का संघर्ष…दर्द… लड़ाइयाँ…शायद उन सबने उसे भीतर तक थका दिया था। कार्तिक अभी भी जाग रहा था।
वो चुपचाप बिस्तर पर लेटा था और संस्कृति को अपनी बाँहों में लिए उसके चेहरे को देख रहा था। आज उसके चेहरे पर एक अलग ही सुकून था। वो सुकून… जो कार्तिक ने पहले कभी नहीं देखा था। कार्तिक ने धीरे से उसके माथे से बाल हटाए।
उसके मन में कई यादें एक साथ घूमने लगीं —
वो दिन जब संस्कृति पहली बार इस घर में आई थी…
उसकी आँखों का डर…
काकी की क्रूरता…
काली कोठरी…
और वो हर पल जब संस्कृति ने आँसू छुपाकर मुस्कुराने की
कोशिश की थी।
कार्तिक की आँखें हल्की नम हो गईं।
उसने बहुत धीरे से फुसफुसाकर कहा —
अब तुम्हें कभी रोना नहीं पड़ेगा… संस्कृति।
संस्कृति नींद में ही हल्का सा हिली…और और भी करीब आकर उसके सीने से लग गई। जैसे उसे पता हो कि अब वो सुरक्षित है।
कार्तिक हल्का सा मुस्कुराया।
कार्तिक (धीरे से) बोला -
तुम सच में बहुत बहादुर हो…शायद तुम्हें खुद भी नहीं पता।
कुछ देर बाद उसने धीरे से कमरे की लाइट बंद कर दी। बस खिड़की से आती चाँदनी कमरे में फैल रही थी। कार्तिक अभी भी सोया नहीं था। वो बस संस्कृति को देख रहा था। शायद उसे डर था कि कहीं ये सुकून भरा पल भी कोई सपना न हो। लेकिन ये सपना नहीं था। ये उनकी नई ज़िंदगी की शुरुआत थी। और इस बार…
इस कहानी में दर्द नहीं…सिर्फ प्यार लिखा जाने वाला था।
Aapko kya lagta hai -
Kya sanskriti good news degi ?