रॉनी, राजस के बार काउंटर के पास गया और बोला, "बॉस, उनका इलाज हो गया है। उन्हें बहुत कमजोरी है, इसलिए डॉक्टर ने ड्रिप लगाने की सलाह दी है। डॉ. राठी ने एक नर्स का इंतजाम कर दिया है, जो आज रात उनके साथ वहीं रुकेंगी।"
राजस अपने हाथ में व्हिस्की की बोतल लिए रॉनी की बातें सुन रहा था। उसने आज तक कभी किसी महिला पर हाथ नहीं उठाया था, लेकिन आज उसका गुस्सा अपनी सीमा पार कर गया था। माता-पिता के कातिल का चेहरा सामने देखते ही वह अपना आपा खो बैठा था।
रॉनी कुछ देर वहीं रुका रहा। उसके चेहरे के भाव देखकर राजस समझ गया कि वह कुछ और भी कहना चाहता है।
राजस: "क्या तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो?"
रॉनी: "बॉस, दरअसल मुझे लगता है कि हम जिस लड़की की तलाश कर रहे थे, यह वह लड़की नहीं है।
मुझे लगता है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ हुई है।"
राजस: "क्या बकवास है? तुम्हारा मतलब क्या है?"
रॉनी: "हम जिस लड़की को ढूंढ रहे थे, उसका और इसका चेहरा तो एक जैसा है, लेकिन व्यवहार बिल्कुल अलग है। मुझे गहरा शक है कि कहीं हमने उस लड़की की जुड़वां बहन को तो नहीं पकड़ लिया?"
रॉनी ने आगे कहा, "हमने जिस अनाया के बारे में सुना था, वह बदतमीज, झगड़ालू और ड्रग्स की आदी थी। उसने उस प्रोफेसर का जीना हराम कर रखा था। उसे तो कॉलेज जाने में भी शर्म आती थी। लेकिन पता नहीं क्या हुआ, यह लड़की इतनी कैसे बदल गई?
इसके स्वभाव और रहन-सहन में इतना फर्क कैसे आया? क्या वह नाटक कर रही है? पर उसकी बातों से ऐसा बिल्कुल नहीं लगता।
वह तो किसी परी जैसी मासूम लगती है और उसकी आवाज... कोयल से भी ज्यादा सुरीली है।"
रॉनी की बातों में राजस भी कहीं खो गया। 'क्या वाकई ऐसा हो सकता है? क्या प्रोफेसर ने अपनी बेटी को छिपाकर उसका हमशक्ल (Double role) साथ रखा होगा?' वह अपने ही विचारों पर चौंक गया।
'धिक्कार है! मैं ऐसा कब से सोचने लगा?' पर उस लड़की का चेहरा उसकी नजरों से ओझल नहीं हो रहा था।
ऊपर से व्हिस्की का हल्का नशा उस पर हावी था।
राजस ने रॉनी को वहीं रोककर उसे अनाया की फिर से पूरी जानकारी निकालने का आदेश दिया। "जी बॉस," कहकर रॉनी वहां से चला गया।
राजस के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। वह अपने कमरे से अनाया के कमरे की ओर बढ़ा (दोनों कमरों के बीच एक जुड़वा दरवाजा था)।
अनाया बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी और उसके हाथ में ड्रिप लगी थी।
जैसे ही दरवाजा खुलने की आवाज हुई, कमरे में मौजूद नर्स की नजर राजस पर पड़ी।
वह दिनभर की अस्पताल की ड्यूटी से थक गई थी और कुर्सी पर बैठते ही उसकी आंख लग गई थी।
दरवाजे की आवाज से वह हड़बड़ाकर उठी। अपनी नींद में खलल पड़ने के कारण वह चिड़चिड़ी नजरों से देखने ही वाली थी कि सामने 'राक्षस' (राजस) को खड़ा पाया।
उसे देखते ही वह डर के मारे कांपने लगी।
उसने डरते हुए ग्रीट किया, "हल्लो सर, मैं शीला हूं, डॉ. राठी की हेड नर्स।" इतना कहते हुए उसने अपनी नजरें नीची कर लीं।
राजस की अनुमति के बिना किसी को उसका चेहरा देखने तक की इजाजत नहीं थी।
वह सोच में पड़ गई कि वह खुद को खुशनसीब समझे या बदनसीब, क्योंकि अगर वह किसी को बताती कि उसने 'RS' को करीब से देखा है, तो कोई यकीन नहीं करता।
उसकी तरफ ध्यान दिए बिना राजस लगातार बिस्तर पर पड़ी अनाया को देख रहा था।
वह धीरे-धीरे उसके बिस्तर की ओर बढ़ने लगा।
नर्स कुछ कहना चाहती थी, पर हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। राजस ने उसे बिना कोई तवज्जो दिए बस एक शब्द कहा— "Out!"
और राजस के 'ट' का उच्चारण खत्म होने से पहले ही नर्स कमरे से बाहर भाग चुकी थी।
वह इतनी तेज भागी कि राजस एक पल के लिए उसे देखता रह गया। शायद वह इसी आदेश का इंतजार कर रही थी।
उसके जाने के बाद राजस ने फिर से अपना ध्यान अनाया पर केंद्रित किया।
नाजुक और सुंदर अनाया के चेहरे का हाल राजस ने बेहाल कर दिया था। उसकी लंबी भौहें और घनी पलकें उसकी बंद आंखों को ढंके हुए थीं। गालों पर चोट के निशान थे और फटे हुए होंठों पर मरहम (Ointment) लगा था।
उसने उसका हुलिया बिगाड़ दिया था, फिर भी उसकी मासूमियत बरकरार थी।
'क्या इसके पास कोई जादुई शक्ति है?' राजस ने सोचा। रॉनी की बातों के बाद उसे देखे बिना राजस को चैन नहीं आने वाला था।
उसे देखते हुए राजस को एहसास हुआ कि वह वाकई कितनी मासूम लग रही है।
उसका एक मन कह रहा था कि यह मासूम है, तो दूसरा मन कह रहा था कि इसका अभी कत्ल कर दूं। लेकिन जब तक वह किसी नतीजे पर नहीं पहुँचता, वह उसके जरिए अपना ईगो (Ego) शांत करने वाला था।
क्योंकि चेहरा तो वही था ना, जिसकी उसे तलाश थी!
देखते ही देखते उसे शायद 0.001% पछतावा होने लगा। उसने आज से पहले किसी लड़की पर हाथ नहीं उठाया था।
डॉ. राठी ने कहा था कि वह तीन-चार घंटे में होश में आ जाएगी, लेकिन राजस जानता था कि वह अगली सुबह ही उठेगी।
उसके प्रहार की तीव्रता इतनी थी कि अच्छे-अच्छे दो दिन तक नहीं उठ पाते, फिर यह तो बहुत नाजुक थी।
वह ख्यालों में कब उसके पास बैठ गया, उसे पता ही नहीं चला। वह उस पर झुका और उसके माथे (Forehead) को चूम लिया।
शायद उसे डॉक्टर की दवा से ज्यादा अपने स्पर्श पर यकीन था। वह मरहम की तरह अपने होंठ उसके जख्मों पर रख रहा था।
जहां-जहां लाल निशान थे, वहां उसने अपने होंठ टिका दिए।
धीरे-धीरे वह उसके होंठों तक पहुंचा। वह अभी पीछे हटने ही वाला था कि खुद को संभाल नहीं पाया।
इतना बड़ा बिजनेसमैन होने के बावजूद वह अब तक 'वर्जिन' था। बड़े-बड़े राजनेताओं और अभिनेत्रियों ने उसे रिझाने की कोशिश की थी, पर उसने कभी दिलचस्पी नहीं ली। उसे अपनी मां जैसी सुंदर और सरल लड़की चाहिए थी।
अनाया में उसे अपनी मां की थोड़ी झलक दिखाई दी। वह फिर से नीचे झुका और उसके होंठों को हल्के से चूमने (Smooch) लगा।
व्हिस्की की महक उसे खुद महसूस हो रही थी और अब वह उस गंध को मिटाना चाहता था।
वह होश खोने लगा था। उसने अनाया के होंठों को गहराई से चूमना शुरू किया।
वह उसके लिए स्ट्रॉबेरी की तरह कोमल और रसीले थे। राजस अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। उसे अब उस स्पर्श के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा था।
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