Aghori's Curse True Horror Story 1996 - 2 in Hindi Horror Stories by HDR Creations books and stories PDF | अघोरी का श्राप सच्ची डरावनी कहानी 1996 - 2

Featured Books
Categories
Share

अघोरी का श्राप सच्ची डरावनी कहानी 1996 - 2

माँ मुझे वो कहानी सुनाने लगी 
मेरी माँ कहती है उस समय हमारे गाँव का अधिकतर इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था पर खतरा नहीं था क्यूंकि हम जंगल अक्सर आया जाया करते थे लकड़ी वगैरह लाने के लिए 
जंगल घना था पर हम लोग कभी भी जादा अंदर तक नहीं गए थे 
हमनें कोई जंगली जानवर नहीं देखे थे शेर भालू 
हाँ छोटे मोटे जानवर थे जंगल में और हाथी भी कभी कभी गाँव में घुस जाते थे 

कहानी सुनते टाइम मेरी आंखों में नींद अपने चरम पर थी मुझे बहुत गहरी नींद आ रही थी पर मैं सुनने के चक्कर मे चाहकर भी नहीं सो रहा था 

तभी मेरी माँ ने अचानक कहा तुम्हारे पिताजी की मौत साधारण नहीं थी 

इस बात को सुनते ही मेरी वो गहरी नींद मानो अचानक से गायब हो गई हो मैं उठकर बैठ गया 

तभी अचानक से लाइट चला गया हर तरफ अंधेरा हो गया 
मेरी माँ उठी और लालटेन जलाने के लिए माचिस खोजने लगी 
थोड़ी देर बाद ही माँ ने लालटेन जला कर दीवार के साइड बांस के पिलर पर लालटेन को टाँग दी 

और फिर हम लोग घर से बाहर आ गए आँगन में 
हमारे आँगन में हमेशा एक खाट बिछा हुआ रहता था 
जहाँ हम इन्हीं Situations में अक्सर उस खाट में अपना टाइम किया पार करते थे 

तो मैं खटिया में लेट गया और मेरी माँ मेरे सिरहाने पर बैठ गई 

और मेरा सिर सहलाने लगी मुझे नींद बहुत गहरी आने लगी थी क्यूंकि हर तरफ अंधेरा था और मुझे अँधेरे से Allergy है और मुझे अँधेरे मे तुरंत नींद आने लगती है 

तुम्हारे पिताजी मछुआरा थे और पनडुब्बा भी वो नदी में बहुत देर तक गोता लगाकर डूबे रहते थे 
माँ ने कहना शुरू किया 
उन्होंने बहुत लोगों की जानें भी बचाई थी एक बार तो वो एक बकरी को बचाने के लिए कुए में भी उतर गए थे 
गाँव में लोग उन्हें फूल बाबु कहते थे और गाँव के लोग उनकी इज्जत भी किया करते थे 


सब ठीक चल रहा था उस वक़्त तुम पैदा भी नहीं हुए थे मेरी बड़ी दीदी थी वो अक्सर बिमार रहती थी मेरी माँ भी बुढ़ी लाचार थी तो मुझे उन दोनों का खयाल भी रखना होता था दोनों घर का काम भी करना पड़ता था 
और इन्ही उलझनों मे मेरी जिंदगी चल रही थी पर उस दिन जो हुआ उसकी कल्पना मैंने अपनी जिंदगी में भी नहीं की थी शाम को तुम्हारी मौसी का तबीयत बहुत ही जादा खराब हो गया वो उल्टी किए पे किए जा रही थी और आंख पूरा पलटी करी हुई थी और अजीब अजीब आवाज़ें निकाले जा री थी 


हम लोग उन्हें लेकर डॉक्टर के पास जाने लगे पर गली तक आते ही मेरी बहन ने दम तोड़ दिया 

वहाँ तुम्हारे पिताजी जो घर से उस वक़्त भागे हुए थे लड़ाई की वजह से 
और वो कई हफ्तों से घर नहीं आए थे 

वो भी करीब 1 घंटे बाद घर आ गए किसी ने उनको खबर दे दी थी मौसी के बारे में 
तुम्हारी मौसी के death के बाद तुम्हारे पिताजी अक्सर परेशान रहा करते थे 
एक शाम वो एक अघोरी बाबा को घर लेकर आए और अघोरी बाबा से मिन्नतें करने लगे कि हमारे घर में भूतों का साया है 

बाबा जी मुझे रात में नींद नहीं आती घुटन महसूस होता है 
और घर के आसपास से अजीब सी आवाज़ें आती है 
कभी मैं सो भी जाऊँ तो डरावने सपने आते हैं 

उस दिन के बाद से वो अक्सर उस अघोरी से मिलने लगे और खुस रहने लगे उनकी समस्याओं का समाधान शायद अघोरी ने कर दिया था 


मेरी आंखें बंद होने लगी और दूसरे ही पल जब मैंने आंखें खोली तो देखा माँ गहरी नींद में है मैंने Time देखा तो रात के तीन बजे का करीब Time हो रहा था 

उस के बाद मैं सोया उसके बाद मैं एक डरावना सपना देख रहा था 
सपने में मुझे एक शाम के वक़्त जैसा माहौल में एक नदी दिखाई दे रहा था 
जिसमें बांस के तख्ते दिख रहे थे कुछ औरतें नदी के किनारे कपड़े धोती हुई दिखाई पढ़ रही थी 

मैं भी उस वक़्त वहां खुदको देख रहा था बांस के तख्ते पर कुछ लोग चढ़े दिख रहे थे मैंने खुदको अचानक वहां नदी में डूबते हुए देखा वो मंजर मुझे एक दम बेचैन और डरावना और मौत के आखरी वक़्त वाला डरावना पल का एहसास दिला रहा था खुदको डूबता हुआ मुझे ऐसा Feel हुआ के सच मे मैं डूब रहा हू 
एक बहुत ही अजीब आवाज के साथ मैं सपने में चीखें जा रहा था 


अचानक मुझे ऐसा महसूस होने लगा कोई मुझे हवा में घुमा रहा हो 
उस डरावने पल में एकदम से मेरी आँख खुली सामने मेरी माँ मेरा सिर को अपने गोद में समेटे हुई थी 

तब मुझे पता चला कि मैं सपना में चीख़ रहा था 
बहुत देर तक मैं अपनी माँ के साथ जागा रहा 
पर माँ उठ गई थी मेरी वजह से तो मुझे अच्छा नहीं लगा और मैं सोने का बोल कर वापस दूसरी करवट होकर लेट गया करीब कुछ मिनटों बाद मैं वापस पलटा
मेरी माँ सो चुकी थी उस रात मैं सो नहीं पाया उस बेचैनी में मुझे एक अघोरी या साधू बाबा का चेहरा मेरे दिमाग में बार बार आ रहा था 

इस तरह सुबह हो गई 

मैं बाहर आँगन में था एक साधु बाबा आए वो कोई और थे जिनको मैंने पहले कभी नहीं देखा था मैं घर में गया और वही 1 रुपये का सिक्का उन्हें दे दिया और घर के अंदर चला आया नाश्ता करने के बाद मैं आँगन में झुला झूलने लगा 

मुझे जमीन में 1 रुपये का सिक्का दिखा मैंने उसे उठा लिया और इस बार मैंने वो सिक्का सीधे जाकर अपने पलंग के सिरहाने में कंबल के नीचे रख दिया 


शाम को मेरी माँ कोई कहानी नहीं सुनाई बस थोड़ा सा पापा के बारे मे बताई और बोली उनकी मौत एक अघोरी के श्राप के वजह से हुई थी 

उन्होंने मुझे कहा रास्ते मे कुछ भी गिरा हुआ चीज मत उठाना बेटा 

पर पता नहीं क्यों उस दिन के बाद से हर रात मुझे अजीब अजीब डरावने सपने आने शुरू हो गए थे 

मैं अपना वो सपना कभी भी भुला नहीं सका आजतक नहीं 
मैं आगे अपने उन सभी सपनों के बारे मे आप सबको बताऊँगा 

मेरे वो सभी सपने बहुत अजीब है 
दोस्तों बस इतना ही आजके लिए