Tere Mere Darmiyaan - 106 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 106

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तेरे मेरे दरमियान - 106

उसकी आँखें नम हो जाती हैं और फिर आदित्य अपने आंखे चुराते हूए कहता है --

आदित्य (धीरे): - बस… एक ही अफसोस रहेगा…

रागिनी उसकी तरफ देखती है।

रागिनी: - क्या?

आदित्य खिड़की के बाहर देखते हुए कहता है —

आदित्य: - वो कभी ये नहीं जान पाई…कि इस दुनिया में अगर कोई उसे सबसे ज्यादा प्यार करता है…तो वो मैं हूँ।

ये सुनकर रागिनी का दिल भी भर आता है। वह धीरे से आदित्य के कंधे पर हाथ रखती है और आदित्य की और दैखकर कहती है --

रागिनी: - कभी-कभी सच सामने आने में देर लगती है आदित्य…पर जब आता है… तो सब बदल देता है।

आदित्य हल्का सा मुस्कुराता है।

आदित्य: - अब कुछ नहीं बदलेगा रागिनी…कल सब खत्म हो जाएगा।

आदित्य को ये नहीं पता था…उसी समय दूसरी तरफ जानवी भी उसे ढूंढ रही थी…और सच धीरे-धीरे उसके सामने आने वाला था।
और शायद…कल का दिन उनके रिश्ते का अंत नहीं…बल्कि एक नई शुरुआत बनने वाला था।

रागिनी आदित्य की और दैखकर मन ही मन सौचती है---

रागिनी ( मन मे ) :- आदित्य ... तुम जैसे लड़के को पाना नसीब की बात है , बचपन से ही मैं तुम्हें जानती हूँ और पंसद भी करती हूँ पर मुझे पता है तुम मुझे कभी एक दोस्त को अलावा और कुछ समझा ही नही । काश तुम मेरे नसीब मे होते आदित्य , तो मैं कभी तुम्हें अपने से दुर नही करता है ।

रागिनी आदित्य की और दैखकर मन ही मन यो सब सौच रही थी तभी आदित्य रागिनी सो पूछता है --

आदित्य :- तुम्हें क्या हो गया रागिनी ..? तुम कहां खो गई ?

रागिनी :- कही नही , बस तुम्हें दैख रही थी ।

आदित्य :- मुझे क्यों ?

रागिनी :- तुम मेरे नसीब मे क्यों नही हो आदित्य ?

आदित्य रागिनी की बात को हल्की मुस्कान के साथ टाल देता है और कहता है --

आदित्य :- तुम भी ना , मजाक करने की आदत गई नही तुम्हारी । तुम तो मुधसो भी अच्छा लड़का डिजर्व करती हो रागिनी , मैं तो तुम्हारे लायक हूँ ही नही ।

तभी वहां पर प्रताप सिंह रागिनी के पापा आ जाता है और कहता है --

प्रताप :- अरे भाई कौन किसके लायक नही है ?

आदित्य :- मैं .. अंकल , रागिनी बोल रही है के मैं उसको नसीब क्यों नही हुँ । पर वो ये नही जानती के , मैं उसके लायक नही हूँ , ये तो परी है हमारी ।

आदित्य के इतना बोलने पर रागिनी की आंखे नम हो जाती है , प्रताप भी आदित्य की बात पर चुप हो जाता है क्योंकी प्रताप जानता है के रागिनी आदित्य को पंसद करती है । प्रताप अपनी बेटी को दुखी नही दैख सकता था इसिलिए वो आदित्य सो कहने जा रहा था पर तभी रागिनी उसे इशारे मे ही मना कर देती है ।

और प्रताप चुप होकर वहां से चला जाता है । 

आज कोर्ट में उनके डिवोर्स का फैसला होने वाला था। जानवी का घर...

जानवी रात भर सो नहीं पाई थी। उसकी आँखें लाल थीं। वह आईने के सामने खड़ी थी… पर खुद की आँखों में देखने की हिम्मत नहीं हो रही थी। उसे बार-बार वही बातें याद आ रही थीं के कसे आदित्य का उसका ख्याल रखना , हर मुसीबत में उसे बचाना और बिना कुछ कहे उसकी हर गलतफहमी सह लेना ।

ये सब सौचकर जानवी की आँखों से आँसू निकल आते हैं।

जानवी (धीरे): - अगर आज सब खत्म हो गया… तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊँगी… बस ओक बार तुम मेरी बात सुन लेना, मैं तुमसे कोर्ट के बाहर ही सब कुछ बता दुगीं ।

उधर – रागिनी का घर जहीं पर आदित्य चुपचाप तैयार हो रहा था।
उसके हाथ में वही डिवोर्स के पेपर थे। रागिनी उसे देख रही थी।

रागिनी: - अभी भी वक्त है आदित्य…अगर तुम चाहो तो सब बदल सकता है। हम ओक बार जानवी से बात कर सकते है ।

आदित्य हल्की सी मुस्कान देता है।

आदित्य: - कुछ चीजें हमारी चाहत से नहीं…किस्मत से तय होती हैं और मैं जानता हूँ , के मैं चाहे कितना भी कोशिश कर लू पर जानवी कभी मेरी नही हो सकती ।

रागिनी आदित्य से कहती है --

रागिनी :- ठिक है , मैं भी तुम्हारे साथ चलूगीं ।

आदित्य मान जाता है और वहां से रागिनी के साथ चला जाता है ।

कोर्ट के बाहर थोड़ी देर बाद कोर्ट के बाहर सब लोग जमा थे —

विकी (जिसके चेहरे पर घबराहट थी) कुछ वकील और लोग विकी बार-बार इधर-उधर देख रहा था।

उसके मन में सिर्फ एक डर था —

"अगर मोनिका आ गई… तो सब खत्म हो जाएगा।"

तभी अचानक कोर्ट के बाहर एक कार आकर रुकती है। सबकी नजर उसी तरफ चली जाती है। कार का दरवाज़ा खुलता है…
और जानवी बाहर निकलता है और उसके साथ शमिका थी । जिसे दैखकर विकी का चेहरा एकदम पीला पड़ जाता है।

विकी (घबराकर धीरे): - ये… ये यहाँ कैसे आ गई…?

जानवी भी कोर्ट पहुँच चुकी थी और वह आदित्य कोइधर उधर देखती है… और उसकी आँखें भर आती हैं। आदित्य एभी भी वहां पर नही पहूँचा था ।

इधर विकी बहुत परेशान था क्योंकी उसे मोनिका का चिंता था । विकी मन ही मन सौचता है --

." मैने उन लोगो से कहा तो था के मोनिका कोर्ट नही पहूँचना चाहिए पर पत नही अब क्या हूआ होगा । एगर मोनिका कोर्ट आ गई तो सब कुछ खत्म हो जाएगा ।" 

इधर मोनिका घर से कोर्ट जाने के लिए निकल रही थी। उसके मन में डर भी था और पछतावा भी।

वह सोच रही थी —

"आज सब सच बोल दूँगी… चाहे जो भी हो।"

तभी अचानक एक काली गाड़ी उसके सामने आकर रुकती है। दो आदमी बाहर निकलते हैं और मोनिका को जबरदस्ती गाड़ी में बैठाने की कोशिश करते हैं , मोनिका अपने आपको उनसे छुड़ाने की कोशिश करती है --

मोनिका (घबराकर): - छोड़ो मुझे! क्या कर रहे हो तुम लोग? छोड़ो मुझे , कौन हो तुम लोग ।

मोनिका के इतना कहने पर भी वो लोग कुछ जवाब नही देते और वे उसे खींचने लगते हैं। तभी अचानक एक कार तेज़ी से वहाँ आकर रुकती है।

कार का दरवाज़ा खुलता है और आदित्य बाहर निकलता है , उसकी आँखों में गुस्सा था।

आदित्य (कड़क आवाज़ में): - उसे छोड़ दो!

आदित्य। को अकेले दैख कर वो गुंडे पहले हँसते हैं।

गुंडा: - तुम्हें क्या लगता है… तुम हमें रोकोगे?

लेकिन अगले ही पल आदित्य उन पर टूट पड़ता है। कुछ ही मिनटों में दोनों गुंडे जमीन पर पड़े होते हैं , मोनिका हैरानी से सब देख रही थी। मोनिका को भरोसा नही हो रहा था के आदित्य ने उसे बचाया , जबकी आदित्य को पता था के मोनिका उसे फंसाने की कोशिश कर रही है ।

आदित्य उसके पास आता है।

आदित्य: - तुम ठीक हो?

मोनिका की आँखों में आँसू आ जाते हैं।

मोनिका: - तुम… मुझे बचाने क्यों आए? मैंने तो तुम्हें ही फँसाया है…ये जानते हूए भी के अगर मैं बच गई तो मैं कोर्ट मे फिर से तुम्हारे खिलाफ जवाब दूगीं ।

आदित्य शांत स्वर में कहता है —

आदित्य: - गलती करना इंसान की फितरत है…पर सच बोलने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती।

मोनिका उसकी तरफ देखती रह जाती है।

मोनिका: - मैंने तुम्हारे साथ इतना गलत किया…फिर भी तुम मेरी मदद कर रहे हो? अगर ये लोग मुझे मार देते तो तुम बच जाते , पर सब जानते हूए भी तुमने मुझे बचाया ।

आदित्य हल्की मुस्कान के साथ कहता है —

आदित्य: - क्योंकि अगर मैं तुम्हें नहीं बचाता…तो शायद एक और सच दब जाता।

मोनिका की आँखों से आँसू बहने लगते हैं। उसके मन में पहली बार आदित्य के लिए गहरी इज्जत पैदा होती है।

मोनिका (भावुक होकर): - मैं वादा करती हूँ…आज कोर्ट में सब सच बोलूँगी। तुम्हें इंसाफ जरूर मिलेगा। 

आदित्य :- पर ये सब ..?

मोनिका :- ये सब विकी का किया है , वो इतना गिरा हूआ है मुझे पता नही था , उसने मुझे मारने के लिए गुडें भेजे ? मैं उसे छोड़ूगीं नही ।

आदित्य सिर हिलाता है।

आदित्य: - चलो… देर हो रही है सच को अब और इंतजार नहीं करवाना चाहिए।

इतना बोलकर सभी वहां से चला जाता है और कुछ देर बाद…
कोर्ट के बाहर गाड़ी रुकती है।

अंदर जानवी, शमिका और अशोक पहले से मौजूद थे। सबकी नजर अचानक दरवाजे की तरफ जाती है।

दरवाजा खुलता है…और आदित्य अंदर आता है… उसके साथ मोनिका थी । यह देखकर सब हैरान रह जाते हैं आज फैसला होने वाला था —
आदित्य को दैखकर जानवी उसकी और जाना चाहती थी पर तभी रागिनी आदित्य को बाजु मे अपना हाथ डालकर आ रही थी , ये दैखर जानवी अपने कदम रोक लेती है , जानवी को लगता है के आदित्य ने मुव ऑन कर लिया है और रागिनी को अपना लिया है , यही सौच कर जानवी रुक जाती है ।

जानवी के आंखो मे आंशु निकलने लगते है आदित्य को खोने की और उसके दुर जाने की ... जानवी के सारे सपने एक पल मे टुट जाते है और जो आज जानवी आदित्य को सच बताने वाली थी के वो आदित्य से प्यार करने लगी है वो बात जानवी के दिल के अंदर ही रह जाता है । जानवी धीरे से अपने कदम पीछे खींच लेती है।

जानवी (मन ही मन): - मैंने बहुत देर कर दी आदित्य…अब तुम्हारी जिंदगी में मेरी जगह नहीं रही…

उसकी आँखों से आँसू लगातार बहने लगते हैं। उधर आदित्य भी जानवी को देखकर कुछ पल के लिए खो जाता है। उसके मन में भी हजारों बातें चल रही थीं , पर वह कुछ कह नहीं पाता। दोनों बस दूर खड़े एक-दूसरे को देखते रहते हैं। आज भी उनके दिल एक-दूसरे के लिए धड़क रहे थे…पर उनके बीच गलतफहमियों की दीवार खड़ी थी।

To be continue....1006