Me and my feelings - 150 in Hindi Poems by Dr Darshita Babubhai Shah books and stories PDF | में और मेरे अहसास - 150

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में और मेरे अहसास - 150

इंतजार 

नाजुक सा दिल तोड़कर पूछ रहे हो कैसे हो l

बीच रास्ते में छोड़कर पूछ रहे हो कैसे हो ll

 

ना जाने कब तक इंतजार करते करते बैठे रहे l

खुद ही रास्ता मोड़कर पूछ रहे हो कैसे हो ll

 

रोज मुखौटे पहने हुए लोगों को देखते ही l

औरो के पीछे दौड़कर पूछ रहे हो कैसे हो ll

 

मोहब्बत के प्यारे लम्हों को भूलकर आज l

हुस्न से नाता जोड़कर पूछ रहे हो कैसे हो ll

 

इंतजार के मारे दम टूट रहा ओ वो बेदिल l

हस्ते ज़ख्म को खोडकर पूछ रहे हो कैसे हो ll

१६-४-२०२६ 

बेबसी

इंतजार के मारे दम तोड़ने को मजबूर मत कर करना ll

अर्ज़ है कभी भी इतना थक के चूर मत कर करना ll

 

आज माँ की ममता के हाथों मजबूत हो गये 

है तो l

यूँ हमारी बेबसी को देख कर गुरूर मत कर करना ll

 

जानते हैं दुनिया की रस्मो रिवाज रोकती 

है तुम्हें l

चाहे जो भी हो अपने आप से दूर मत कर करना ll

 

कुछ सुनो तो खुद को खुद के आपे में रखना 

क्यूँकी l

लोग कुछ भी कहते रहेगे पर फ़ितूर मत कर करना ll

 

जाना चाहो चुपचाप चल देना बिना शोर किये 

हुए l

जुदा होने के लिए कोई बहाना हुज़ूर मत कर करना ll

१७-४-२०२६ 

जिन्दा

बिन मौसम बरसातें लिखते रहना l

ख़ुद को भीगो कर यूँ खिलते रहना ll

 

दिल की दुनिया को ताज़ा रखने को l

बिन मतलब दोस्तों से मिलते रहना ll

 

बज़्म में रंगीली सी ग़ज़लें गाकर l

अपना टूटा जिगरा सिलते रहना ll

 

दुनिया में जिन्दा है साबित करने को l

मजलिस में तुम आकर दिखते रहना ll

 

जैसे भी रक्खे चाहे ईश्वरः सखी l

यू हीं खामोशी से दिपते रहना ll

१७-४-२०२६ 

कशमकश

ताउम्र बहतरीन जिंदगी की कशमकश में गुज़र गई l

मंज़िल की तलाश को अनजानी राहों में भटक 

गई ll

 

शीतल चाँदनी रात में चमकते सितारों को गिन 

कर l

इन्तजार के मारे आज आँखों से नींद ही झपक 

गई ll

 

बाद मुद्दतों के मुलाकात का वादा किया है हुस्न 

ने तो l

बादलों से जब खिली धूप निकली आँख चमक 

गई ll

 

शेरों शायरी की भरी मजलिस में सखी देखो 

तो l

मँजे शायरों की उपस्थिति में शायरी छलक 

गई ll

 

सब - ए - हिज्रा में काटे नहीं कटते लम्हें ओ 

तो l

फिझाओ की हल्की सी बयार से कली लचक 

गई ll

१८-४-२०२६ 

मुसाफ़िर 

ख़ुदा हाफ़िज़ मत कहना शहर से जाते जाते l

बहुत दर्द होता है तुझे देखते हुए जाते जाते ll

 

खामोशी से चल दिये बिना कुछ कहे सुने l

थोड़ा सही प्यार और दुलार लुटाते जाते ll

 

गर कभी आना जाना तो लम्हा भर के लिए l

मिलने की त्रासदी लेना शहर में आते जाते ll

 

किस तरह काटेंगे ये बाकी बची हुई उम्र को l

दिल बहलाने को कोई गुल हो खिलाते जाते ll

 

जानते हो जान और जिगरा में बस चुके हों तो l

रहम खाके यादों के पटारे ताला लगाते जाते ll

 

आखरी बार जीभर के देखने के वास्ते सखी l

आँखों से शर्म हया के पर्दों को हटाते जाते ll

 

ना जाने वापिस लौटकर कब आना होगा कि l

एक नजर देखने की तलप को बुझाते जाते ll

१९-४-२०२६ 

तन्हाई

पेश जिस को ज़िन्दगी के सब उजाले कर दिए l 

उस ने ख़ामोशी से औरों के हवाले कर दिए ll

 

मुस्कुराते हुए चले देखे बिना पीछे सखी l

खूबसूरत गुल मिला हमको किनारे कर दिए ll

 

कोई शक सूबा न रह जाये तो सब कह डाला है l

बेतुकी छोटी सी बातों के खुलासे कर दिए ll

 

अब किसीसे कोई भी बाता नहीं करनी है की l

अपने आपा को नसीबा के सहारे कर दिए ll

 

ना रखी उम्मीद न शिकवा भी करेंगे आगे से l

भाग्य में जो भी मिला उससे गुजारे कर दिए ll

 

बात दिल की दिल में रखने से तूने पाया क्या? 

प्यार के इजहार करने क्यूँ ज़माने कर दिए?

 

आज तन्हाई ने घेरा डाला की तन मन विरा l 

दिल को खुश करने को आँखों से इशारे कर दिए ll

२०-४-२०२६ 

साथी 

ताउम्र साथ देनेवाला साथी पल भर भी नहीं मिलता l

शायद किसीसे भी मेरा तो मुकद्दर भी नहीं 

मिलता 

 

तमन्ना थी जिन्दगी के सफर में कोई तो मिल 

जाए l

दिलवाला तो क्या कोई दिल पत्थर भी नहीं 

मिलता ll

 

हमरंगी-ए-मौसम की विचित्रता को देखो की 

अब l

दोपहार धूप में खुद का साया बराबर भी नहीं 

मिलता ll

 

राह चलते हुए बातचीत को कई लोग मिलते है 

पर l

दोस्त कह सके एसा एक इन्सां बेहतर भी नहीं 

मिलता ll

 

कुछ रोज हसी खुशी से सखी जीने की आश 

है अब l

वो बचपन वो दुलार देनेवाला अब घर भी नहीं 

मिलता ll

२१-४-२०२६ 

सुख के चार दिन 

सुख के चार दिन क्या जी लिए दुनिया वाले जल गये l

एसी नजर लग गई है कि सुख के चार दिन

ढल गये ll

 

दुनिया किसीकी खुशी में खुश नहीं होती है 

तो l

अपनी खुशी को जाहिर मत कर कानों में 

कह गये ll

 

जी लेना चाहते थे मुस्कुराते हुए अपनों के 

साथ l

दिल के अरमान दिल में दफन होकर ही 

रह गये ll

 

बड़े ज़ालिम दिलवाले बस्ते है आजू बाजू 

में कि l

रह रह के तिरछी नजरों से खुशियो को 

गह गये ll

 

तूफान, उफान ओ बवंडर आते जिन्दगी 

में कि l

सुख के चार दिन बिना जिये हुए ऐसे ही 

बह गये ll

२२-४-२०२६ 

मतलबी संसार

चाहत का इज़हार करते करते रात हो गई है l

ख्यालों में बात करते नींद से मात हो गई है ll

 

जहां में हर कोई अपनी खिचड़ी पका रहा है l

अब तो मतलबी संसार से ना'त हो गई है ll

 

चार लोंगों की निगाहों से बचकर आज तो l

आँखों ही आँखों मे चुपके से बात हो गई है ll

 

हमेशा से ही दिल की दुश्मन दुनिया रही है l

मुलाकात हमारी वज्ह-ए-नशात हो गई है ll

 

आज भी वादा करके मुकर गये है सखी l

इन्तजार में रात भी मेरे साथ हो गई है ll

२३-४-२०२६

गरीबी के दिन

मुझे अब ना रोकना की भटकने की ख़ातिर सफ़र कर रहा हूँ l

मन से गरीबी के दिन से छटकने की ख़ातिर 

सफ़र कर रहा हूँ ll

 

अपनों ने या गैरों ने किसीने भी समझकर 

साथ ना दिया तो l

दुःख को बहुत पिया है छलकने की ख़ातिर 

सफ़र कर रहा हूँ ll

 

कंधो की तमन्ना और तलाश को छोड़कर 

बसति से दूर ही l

खुद की अन्दर खुद ही पनपने की ख़ातिर 

सफ़र कर रहा हूँ ll

 

कोई किसीको सुख नहीं देता खुद ही खुश 

अपनेआप होकर l

खुशी का जाम पी कर बहकने की ख़ातिर 

सफ़र कर रहा हूँ ll

   

जीवन है अमीरी गरीबी का चक्र चालू रहेगा 

बस यही सोच l

जिन्दा हू वो महसूस कर धडकने की ख़ातिर 

सफ़र कर रहा हूँ ll

२४-४-२०२६ 

कर्म ही पूजा है 

कर्म ही पूजा है तो कर्म सँभल के करना चाहिए l

जिंदगी में अच्छे कर्मों का भाठा भरना चाहिए 

ll

 

कर्मों को निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण से करो l

महेनत से कार्यकर जीवन में आगे सरना चाहिए ll  

 

आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें और अपने l

कर्म योग से निरोग बनकर ऊपर चढ़ना चाहिए 

ll

 

याद रखो की कर्म पूजा तभी ही बनता जब के l

अपना काम में निःस्वार्थ भाव से बढ़ना चाहिए 

ll

 

कर्म के साथ धर्म और नैतिकता को साथ लेकर l

काम के वक्त सुख,चैन और सुकून हरना चाहिए 

ll

२५-४-२०२६ 

 

तन्हाई

तन्हाई की ये दास्ताँ क्या हैं?

जीस्त क्या है? जाँ क्या हैं? 

 

क्यूँ जुदा हो गये हो कि l

तेरे मेरे दरमियाँ क्या हैं?

 

सिर्फ़ एक बार फिर से l

मिलन का झरियाँ क्या हैं?

 

ऐसे ना किया करो के l

पता है, बागयाँ क्या हैं?

 

गर हौसला बुलन्द हो तो l

उड़ान को आसमाँ क्या हैं?   

२५-४-२०२६  

नज़ारा

दिल बहला सके एसा कोई नज़ारा नहीं मिला l

दो लम्हें जी सके खुशी का इशारा नहीं मिला ll

 

जिंदगी भर दिल में हमेशा से शिकायत रही l

पूरा समंदर घूम लिया कही किनारा नहीं मिला ll

 

इलाज - ए - दर - ओ - दिल का क्या करे अब l

रातभर ढूँढते रहे आसमाँ में सितारा नहीं मिला ll

 

कहने को तो जाने पहचाने बहुत मिले पर कभी l

किसी दोस्त - ए - दिल में पनाहा नहीं मिला ll

 

खुशियो को जैसे किसीकी नजर ही लग गई कि l

जीवन को जीने का मौका दुबारा नहीं मिला ll

 

जाते वक्त एक बार पलट कर देखा ही नहीं तो l

जब जरूरी था तब भी कोई सहारा नहीं मिला ll

 

जो कुछ चाहा वो दो हाथ दूर ही रह गया सखी l

संसार सागर पार करने को तरापा नहीं मिला ll

२६-४-२०२६ 

पीता नहीं हूँ, पिलाई गई हैं

हुस्न जाम की महफिल में लाई हैं l 

मैं पीता नहीं हूँ, पिलाई गई हैं ll

 

चार घूँट रूप के हाथों से पीए l

स्वर्ग की आह्लादकता पाई हैं ll

 

साथ बैठकर पीने का मज्जा l

अजीब सी सुकूनियत आई हैं ll

 

मुद्दतों के इन्तज़ार के बाद तो l  

दोस्तों के संग रौनक भाई हैं ll

 

रुहनियत का एहसास देने l

इश्क - ए - हकीकी गाई हैं ll

२७-४-२०२६ 

अपना घर देखो 

अपना घर देखो, तरक्की से लोग तो वैसे भी 

जलते हैं l

क्या सुनते है? क्या समझते है? और क्या 

कहते हैं?

 

सुबह से रात तक मटरगश्ती किया करते 

हो तो l

क्या रोजगार करते हो? तो सारी रात को 

जगते हैं ll

 

दुनिया को दिखाने के लिए मुखौटा पहनना 

छोड़ दो l

जैसे हो वैसे ही क्यूँ नहीं अंदर बाहिर से 

दिखते हैं?

 

अपनेआप को जोकर बनाके घूम रहे हो सारे 

शहर में l

लोगों को आकर्षित करने को कैसा पहनावा 

पहते हैं?

 

आलास ने तन और मन में घरौंदा बना दिया 

है कि l

दिन रात और सुबह शाम बिना काम किये 

ढलते हैं ll

२८-४-२०२६ 

जीने के हैं चार दिन 

जीने के हैं चार दिन, हँसकर खुलकर जी लो l

यार दोस्तों के संग खुशी का जाम पी लो ll

 

छोड़ो सब चिंताएं क्या रखा है? आओ नाचे l

नशीली फ़िजाओं में जरा सा झूम भी लो ll

 

कल की किसको ख़बर क्या होने वाला है तो l

आज मस्ती के पल जिगरो जान में सी लो ll

 

वक्त बड़ा ही बेदर्द और बेईमानी करता सखी l

जो भी जिसके पास से चाहिये अभी लो ll

 

जो कल राह देख रहे हों वो कल आज ही है l

जितना जी चाहे उतना आज ही सजी लो ll

२९-४-२०२६ 

मौसम 

मौसम का तकाजा यहीं है घर से बाहर ना निकला करो l

एहसास ए अंदाजा यहीं है घर से बाहर ना निकला करो ll

 

उम्मीद, उमंग और उत्साह से सजाया है 

आँगन को l

फूलों से नवाजा यहीं है घर से बाहर ना निकला करो ll

 

बसंत की बहारों से नवपल्ल्वित हो उठा 

है तन मन l

रूप का खजाना यहीं है घर से बाहर ना निकला करो ll

 

दरख़्तों के यौवन को पूर्णता से महसूस 

करने का उत्सव l

फिझाओ में तमाशा यहीं है घर से बाहर ना निकला करो ll

 

प्रतीक्षारत आँखे इन्तजार कर रही है जल्दी 

आ जाओ l

सखी घरौंदा बनाना यहीं है घर से बाहर ना 

निकला करो ll

३०-४-२०२६