आर्या और टिया मस्ती करते करते बाहर आ गये। तब पता चलता है कि उनकी ही एक क्लासमेट जिसका नाम संजना था वो दिख नहीं रही थी। उसके साथ रूम में जो सोई थी वो डर के मारे बोल रही थी। लड़की जिसका नाम अनु था।
अनु: भूत मैम भूत, संजना संजना को ले गए।
मैम उसे शांत कर रहे थे, वो शांत होने का नाम ही नहीं ले रही थी। वही प्रिंसिपल वह के मैनेजमेंट पे चिल्ला रहे थे। आर्या टिया तो बस तमाशा देखने में बिजी थी। तभी अचानक पूरा हॉल का लाइट चली गई। सब लोगों ने अपने फोन का टॉर्च चालू करने लगे। वही आर्या फोन कमरे में भूल चुकी थी। वो भाग भाग के कमरे में जाके फोन लेती है। उसका कमरा पूरा अंधेरे में डूबा था। वो धीरे जाकर बेड तक जाती है, फटाफट फोन ढूंढ थी है और मिलने के बाद जाने के लिए मुड़ती है। उसे ऐसे लगता है कोई पीछे खड़ा है, वो डर जाती है बिना पीछे मुड़े भाग जाती है।
बाहर का माहौल और खराब था। पांच छे बच्चे ऐसे ही गायब हो चुके थे। टिया आर्या को देख गुस्से में बोलती है
टिया: आर्या कहां गई थी तू? मैं कितना डर गई पता है मुझे लगा तू भी गायब हो गई।
आर्या: मैं बस फोन लाने गई थी।
टिया: इस टाइम पे कोई फोन लाने जाता है क्या?
टिया इतना बोल पाती, वो आर्या के पीछे किसी चीज को देख जोर से चिल्लाती है। जिसे देख आर्या और बहुत बच्चे उधर घूम के देखते हैं तो सब शॉक रह जाते हैं और भागना चालू करते हैं। वही आर्या तो सामने देख जम सी गई थी क्योंकि उसके पीछे एक अजीब सी जानवर और इंसान भी नहीं बोल सकते वैसे एक खड़ी थी। आर्या के हाथ टिया पकड़ के भागी, तब उससे होश आया। वही सभी मैनेजमेंट और बच्चे, टीचर्स सब भागने लगे।
वही कुछ दूर जाने के बाद आर्या का ध्यान गया—एक बच्चा दो कुर्सी के बीच फंस चुका था। आर्या किसी पे ध्यान ना देती उसके पास जाकर उस कुर्सी के बीच से निकाला वहीं कुछ दूर उस बच्चे की मां को वो राक्षसी ने पकड़ लिया था। वो बच्चा अपने मां के नाम से पुकार पुकार के रो रह थे। आर्य ने उस बच्चे को सैफ प्लेस पे रख फिर खुद को। हिम्मत देते हुवे
आर्या : तू कर सकती है आर्या
ऐसे बोल वो एक वास बाजू में पड़ थे उसे उठा के वो राक्षसी पे फेंकती है। वहीं राक्षसी पीछे से हुवे हमले से और भड़क जाती है और आर्य के पीछे पद जाती है। आर्या डर के मारे भागने लगती है भागते भागते जंगल के अंदर घुस जाती है। वहीं कुछ दूर भागने के बाद वो बहुत थक जाती है। तो किसी पेड़ के पीछे छिप जाती है कुछ देर आवाज नहीं आता है तो वो थोड़ झांक के देखती है। उसे कुछ नहीं दिखता। फिर जो जेब से अपना फोन निकल के चेक करती है। फोनए नो सिंगनल दिख रह था ऊपर से वो बहुत अंदर आ चुकी थी । वो।खुद से बोलती है
आर्या: कौनसी मुसीबत में फंस गई तू आर्या। माताश्री ने पहले ही। मना किया था पिकनिक जाने अब अगर ऐसा हुआ है कि अब माताश्री क्या पापा भी नहीं जाने देंगे (फिर आसमान की तरफ देख) है भगवान ये कह फसा दिया मुझे। आप मुझे कुछ दिन बाहर भी नहीं आने देंगे क्या ?
वो इतना भगवान से कंप्लेन ही कर रही थी कि वो राक्षसी अचानक उसके सामने आती है। उस देख आर्य और डर जाती है भागने लगती है पर कुछ दूर जाने के बाद बड़ा पेड़ जो एक दूसरे से चिपके थे और उसके आजू बाजू से रास्ता ही भी जाता था बीच में एक मिरर टाइप थे जो थोड़ा चमक रह था आर्या फिर खुद से बोलती है
आर्या: अब इसकी कमी थी।
फिर पीछे घूमती है तो वो राक्षसी उसके पीछे खड़ी थी जिसे देख वो। पीछे हटने लगती है वो राक्षसी आर्या को देख गंदी सी हसी हस्ती है भी आर्या और डर जाती है वो आखिर कर मिरर से चिपकने वाली होती है तब थोड़ा जोर से आवाज आता है।
आगे क्या हुआ पता करने अगला पार्ट जरूर पढ़ना
थैंक्स इसके पहले पार्ट पड़ने के लिए
अब क्या हुआ होगा आर्या के साथ?
वो राक्षसी से बचेगी या राक्षसी उसे मर देगी ?
ये पता चलने अगला पार्ट जरूर पढ़ना
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