Childhood Friends - Episode 3 in Hindi Short Stories by unknownauther books and stories PDF | Childhood Friends - Episode 3

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Childhood Friends - Episode 3

सच, झूठ और फैसला
सुबह का समय था।
शिवाय बालकनी में खड़ा था। भोपाल की हल्की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन उसके अंदर सब कुछ उथल-पुथल था। उसके दिमाग में बस एक ही बात बार-बार घूम रही थी —
“अनन्या की सगाई 15 दिन में है।”
उसने फोन को कसकर पकड़ रखा था।
विवान उसके कमरे के दरवाजे पर खड़ा था। वह समझ रहा था — अब सच छिपाना आसान नहीं है।
“भाई…” शिवाय ने बिना उसकी तरफ देखे पूछा, “तुझे पता था?”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
दो सेकंड…
तीन सेकंड…
“हाँ,” विवान ने धीरे से कहा।
शिवाय ने धीरे-धीरे उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में हैरानी नहीं थी… बस दर्द था।
“कितने दिन से?”
“कल रात से।”
“रिया ने बताया?”
विवान ने सिर झुका लिया।
एक पल के लिए दोनों के बीच पंद्रह साल की दोस्ती जैसे हवा में ठहर गई।
“तू मुझे बताता क्यों नहीं?” शिवाय की आवाज भारी हो गई।
“मैं पक्का नहीं था, भाई… मैं बस कन्फर्म कर रहा था। मैं नहीं चाहता था कि तू बिना पुख्ता बात के टूट जाए।”
शिवाय हल्का सा हँसा… लेकिन वह हँसी खाली थी।
“पुख्ता बात? आठ साल का प्यार कम होता है क्या किसी सबूत से?”
अनन्या की सच्चाई
शिवाय ने फैसला कर लिया — वह सीधे अनन्या से बात करेगा।
शाम को वह उससे लेक व्यू कैफे में मिला।
ऊपरी झील का नज़ारा शांत था। लोग अपने-अपने में खोए हुए थे। कपों में कॉफी थी और बातों में हल्की मुस्कानें।
लेकिन उनकी टेबल पर खामोशी थी।
“क्या तुम्हारी सगाई हो गई है?” शिवाय ने सीधे पूछा।
अनन्या ने कप की तरफ देखा… फिर उसकी तरफ।
“हाँ।”
“तुम खुश हो?”
यह सवाल सीधे दिल पर लगा।
अनन्या तुरंत जवाब नहीं दे पाई।
“शिवाय… घर वालों ने फैसला किया है। लड़का सेटल है… दुबई में नौकरी करता है।”
शिवाय ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“मैं ये नहीं पूछ रहा। मैं पूछ रहा हूँ… तुम खुश हो?”
अनन्या की आँखों में हल्की नमी आ गई, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया।
“ज़िंदगी सिर्फ भावनाओं से नहीं चलती।”
शिवाय समझ गया — यह उसका सीधा जवाब नहीं है।
लेकिन वह उसे मजबूर भी नहीं कर सकता था।
उसने धीरे से कहा,
“बस एक बार सच बोल दो… सिर्फ एक बार।”
अनन्या ने धीमे से कहा —
“तुमने कभी कहा ही नहीं।”
यह बात सीधा उसके दिल में उतर गई।
आठ साल की खामोशी उसी पल उस पर भारी पड़ गई।
टकराव
घर लौटकर शिवाय ने विवान से बात नहीं की।
एक दिन…
दो दिन…
बिज़नेस मीटिंग्स रद्द हो गईं। क्लाइंट्स कॉल कर रहे थे, लेकिन शिवाय उपलब्ध नहीं था।
तीसरे दिन विवान से रहा नहीं गया।
“तू ऐसे ही बैठा रहेगा तो बिज़नेस का क्या होगा?” उसने कहा।
शिवाय गुस्से में बोला,
“बिज़नेस? मेरे लिए सब कुछ बिज़नेस नहीं है।”
“लेकिन हमने इसे साथ शुरू किया था!”
“तो क्या तू मेरे साथ था जब मुझे पता चला कि वो सगाई कर रही है?”
सन्नाटा।
विवान भी आहत था।
“मैं तेरे खिलाफ नहीं हूँ, भाई… मैं बस हालात के खिलाफ हूँ।”
शिवाय ने दीवार पर हाथ मारा।
“हालात नहीं… मैं खुद के खिलाफ हूँ। आठ साल तक चुप रहा।”
कमरे में भारी खामोशी फैल गई।
फिर शिवाय ने एक फैसला लिया —
“सगाई से पहले मैं उसे सब बता दूँगा।”
बढ़ता हुआ तनाव
उसी रात रिया का मैसेज आया —
“तुम लोग क्या प्लान कर रहे हो?”
विवान ने जवाब दिया, “कुछ नहीं।”
“अगर शिवाय ने सगाई में कोई ड्रामा किया तो अच्छा नहीं होगा।”
विवान ने फोन एक तरफ रख दिया।
लेकिन अगला मैसेज पढ़कर उसका खून जैसे जम गया —
“तुम्हें पता भी है सगाई किससे हो रही है?”
विवान ने तुरंत कॉल किया।
“मतलब?”
रिया ने धीरे से कहा —
“लड़का राजत अंकल के बिज़नेस पार्टनर का बेटा है। अगर ये रिश्ता टूटा, तो तुम्हारी डील भी टूट जाएगी।”
विवान स्तब्ध रह गया।
मतलब अगर शिवाय ने अपने दिल की बात कह दी…
तो सिर्फ रिश्ता नहीं, उनका पूरा बिज़नेस भी खतरे में पड़ जाएगा।
अंदर की लड़ाई
अगले दिन शिवाय जिम में था।
आईने के सामने खड़ा।
उसका शरीर बदल चुका था। आत्मविश्वास दिख रहा था। लेकिन अंदर से वह अभी भी वही छठी क्लास वाला शर्मीला लड़का था।
विवान उसके पास आया।
“भाई, एक बात कहूँ?”
“कह।”
“तू जो करने जा रहा है… उसका असर सिर्फ तुझ पर नहीं पड़ेगा।”
शिवाय ने उसकी तरफ देखा।
“मतलब?”
विवान ने सब बता दिया — डील, राजत, जोखिम।
शिवाय कुछ देर चुप रहा।
फिर उसने एक ऐसी बात कही, जिसने विवान को अंदर तक हिला दिया —
“तो तू कह रहा है कि मैं पैसों के लिए चुप रहूँ?”
“मैं कह रहा हूँ सोच-समझकर फैसला कर।”
“मैं आठ साल सोचता रहा… अब नहीं।”
असली मोड़
सगाई से पाँच दिन पहले शिवाय ने अनन्या को मैसेज किया —
“कल मिलना है। जरूरी है।”
कोई जवाब नहीं आया।
दो घंटे बाद भी नहीं।
रात तक भी नहीं।
अगली सुबह शिवाय के फोन पर कॉल आया।
इस बार नंबर अनजान नहीं था।
राजत खन्ना।
“शिवाय, मुझे तुमसे मिलना है।”
ऑफिस में मुलाकात हुई।
राजत का चेहरा गंभीर था।
“तुम समझदार हो। मेहनती हो। मुझे तुम पसंद हो।”
शिवाय उलझ गया। “सर?”
“लेकिन मेरी भांजी की जिंदगी में कोई अनावश्यक परेशानी नहीं चाहिए।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
“सर, मैंने कुछ किया भी नहीं है।”
राजत ने टेबल पर एक फोटो रखी।
उस फोटो में शिवाय और अनन्या कैफे में बैठे थे… बहुत करीब से ली गई तस्वीर।
“कुछ लोग भावनाओं में फैसले लेते हैं,” राजत ने कहा,
“लेकिन मैं बिज़नेस में भावनाओं को जगह नहीं देता।”
यह सीधी चेतावनी थी।
अंत — अब तक का सबसे बड़ा झटका
घर लौटते समय शिवाय का फोन बजा।
अनन्या का मैसेज था —
“कल शाम 6 बजे, अपर लेक। आखिरी बार मिलते हैं।”
आखिरी बार?
उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
लेकिन उसे यह नहीं पता था…
उस मुलाकात में सिर्फ इज़हार नहीं होगा।
वहाँ कोई और भी होगा।
और जो सच सामने आएगा…
वह सिर्फ एक सगाई नहीं, बल्कि पंद्रह साल की दोस्ती को भी परखने वाला था।
To be continued