Ayan: A fire of hatred or a search for existence - 23 in Hindi Thriller by Irfan ayan Khan books and stories PDF | अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 23

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अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 23

आर्यन ने इशारा किया, और वे सातों गुंडे एक साथ अयान पर टूट पड़े। गोदाम की घुटन भरी हवा में जूतों की रगड़, और दरिंदगी भरी चीखें गूँजने लगीं। चारों तरफ उड़ती धूल और पसीने की गंध के बीच, मौत का खेल शुरू हो चुका था।

एक गुंडे ने पीछे से अयान की गर्दन पर सरिया तान दिया, पर अयान ने फुर्ती से अपनी गर्दन झटक दी। सरिया हवा को चीरता हुआ निकल गया। अयान ने अपनी कोहनी पीछे की तरफ जोर से मारी, जो सीधा गुंडे के पेट में धंसी। 

पलक झपकते ही अयान पीछे घूमा, और उसकी कलाई ऐसी मरोड़ी...'कड़क'... हड्डी टूटने की आवाज़ आई, और गुंडे की चीख पूरे गोदाम में फैल गई। 

अयान ने वही सरिया उसके हाथ से छीना, और घूमकर दूसरे गुंडे के सीने पर दे मारा। वह हवा में उछला, और सीधा लोहे के कबाड़ पर जा गिरा।

अयान की आँखों में आज कोई रहम-वहम नहीं था, आज तो बस 'विराज' के खून का हिसाब होना था।

बाकी बचे 5 गुंडों ने अयान को घेरने की कोशिश की, पर अयान ने उन्हें संभलने का एक मौका तक नहीं दिया। पास में एक भारी, लोहे का ड्रम पड़ा था। अयान ने अपनी पूरी जान झोंक दी, और उसे उन गुंडों की तरफ फेंक मारा। तीन गुंडे तो उसी के नीचे दब के रह गए, और वहीं जमीन पर पड़े-पड़े कराहने लगे।

करीम चाचा दूर खड़े ये सब देख रहे थे। उनकी आँखें खुली की खुली रह गईं। उन्होंने अपने अयान का ये अवतार, कभी सपने में भी नहीं सोचा था। देखते ही देखते अयान ने 8 गुंडों को धूल चटा दी। 

बाकी बचे 2 गुंडे, जो खुद को बहुत बड़ा शूरवीर समझ रहे थे, अयान का ये रूप देख के थर-थराने लगे। उन्होंने सोचा जान बची तो लाखों पाए। हथियार वहीं फेंके, और पिछले दरवाज़े से नौ दो ग्यारह हो गए।

आर्यन, जो अब तक बड़े मजे से कुर्सी पर बैठा था, उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसने देखा कि उसके 10 सबसे खूंखार पाले हुए कुत्ते, मिट्टी में मिल चुके हैं। अयान, हाथ में खून से लथपथ सरिया लिए, धीरे-धीरे उसी की तरफ बढ़ रहा है।

अयान जैसे ही आर्यन की तरफ बढ़ा, आर्यन ने एक खौफनाक मुस्कान के साथ ऊपर इशारा किया। अयान की नजर ऊपर गई और उसका कलेजा मुँह को आ गया। ऊपर बीम की जंजीर से बंधी दिया  और माहिरा, दोनों लटकी हुई थीं। 

उनके हाथ-पैर रस्सियों से जकड़े हुए थे, और मुँह पर टेप चिपका हुआ था। उनकी आँखों में मौत का जो खौफ था, वो अयान को अंदर तक चीरने के लिए काफी था। अयान का खून खौल उठा, पर अब उसके हाथ बंध चुके थे।

आर्यन ने देखा कि अयान का ध्यान पूरी तरह भटक चुका है। अपनी मौत को इतने करीब देख आर्यन की रूह कांप गई थी। उसने बिना कोई आवाज़ किए, दबे पाँव अपनी कुर्सी छोड़ी। और साये की तरह गोदाम के पिछले दरवाज़े की तरफ भागने लगा। 

उसे पता था कि अगर एक छोटी सी आहट भी हुई, तो अयान उसे ज़िंदा नहीं छोड़ेगा। आर्यन का हाथ दरवाजे की कुंडी तक पहुँच ही पाया था।

तभी उसका पैर अंधेरे में पड़े लोहे के ढेर से टकरा गया।
पूरे गोदाम में 'झंन्न' से ऐसी आवाज़ हुई जैसे किसी ने सन्नाटे के गाल पर तमाचा मार दिया हो। पुराने पीपे और लोहे के पाइप एक-दूसरे पर ऐसे गिरे कि उनकी गूँज अयान के कानों में जा घुसी।

आर्यन वहीं जम गया, जैसे उसके पैरों में किसी ने कील ठोक दी हो। उसकी सांसे अटक गईं और माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं।

अयान की गर्दन बिजली की रफ़्तार से नीचे की तरफ घूमी। उसकी आँखों में वो ख़ून उतर आया था जिसे देख कर अच्छे-अच्छों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाए।

"कहाँ जा रहा है चूहे? बिल अभी दूर है!" अयान की वो दहाड़ गोदाम की जर्जर छत फाड़ देने के लिए काफी थी। अयान के हाथ में वो सरिया था, जिससे अभी-अभी उसने 8 गुंडों का कीमा बनाया था। 

वो जैसे ही आर्यन की गर्दन दबोचने के लिए आगे बढ़ा, पीछे से करीम चाचा की दहाड़ गूँजी— "अयान! रुक जा... पहले ऊपर देख! उनकी जान जा रही है! इसे छोड़ दे अयान, पहले उन्हें बचा!"

अयान के कदम एक पल के लिए जम गए। उसने गर्दन उठाकर ऊपर देखा—बीम से बंधी जंजीर अब जवाब दे रही थी। माहिरा और दीया की आँखों में मौत का साफ़ मंज़र था। 

करीम चाचा की आवाज़ अयान के कानों से टकराई तो सही, पर उसके दिमाग तक नहीं पहुँची। उसके  रगों में इस वक्त सिर्फ विराज का खून दौड़ रहा था।

उसने करीम चाचा की बात अनसुनी कर दी और हाथ में पकड़ा हुआ वो भारी, जंग लगा हुआ सरिया पूरी ताकत से भागते हुए आर्यन की तरफ दे मारा। 'सटाक'... सरिया हवा को चीरता हुआ सीधा आर्यन के सीने के पार निकल गया। 

आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं, उसके मुँह से चीख तक नहीं निकली। वो वहीं ढेर हो गया। विराज की मौत का हिसाब, चंद सेकंडों में बराबर हो गया।

आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं, उसके मुँह से चीख तक नहीं निकली। वो वहीं ढेर हो गया। विराज की मौत का हिसाब, चंद सेकंडों में बराबर हो गया।

अयान हाँफते हुए आर्यन की गिरती हुई लाश के करीब पहुँचा। उसकी आँखों में अब भी वही दहकती आग थी।

उसने आर्यन के कान के पास झुककर बहुत धीमी और ठंडी आवाज़ में कहा—ये विराज की तरफ से आखिरी सलाम था... अब नरक में उसे अपना चेहरा मत दिखाना। 



(लेखक के कलम से...)
दोस्तो आपको क्या लगता है,अयान ने करीम चाचा की बात अनसुनी करके और आर्यन को खत्म करके सही किया, या उसे पहले लड़कियों को बचाना चाहिए था?

आर्यन तो मारा गया, लेकिन क्या आपको लगता है कि इस गोदाम के बाहर अयान की मुश्किलें खत्म हो गई हैं या ये किसी बड़े तूफान की शुरुआत है?

इस खौफनाक मंजर के बाद, क्या माहिरा कभी अयान को उसी नजर से देख पाएगी जैसी वो पहले देखती थी, या वो अयान के इस 'कातिल' रूप से डर जाएगी? 
अपनी राय comment में जरूर दे और बने रहिए हमारे साथ नफरत की आग पार्ट  24में।