Roohani Ishq ek Khouffnak Mohabbat - 3 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | रूहानी इश्क एक खौफनाक मोहब्बत - एपिसोड 3

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रूहानी इश्क एक खौफनाक मोहब्बत - एपिसोड 3

एपिसोड 3: हवेली का भूला हुआ राज

आर्या जब अधूरी किताब के सामने खड़ी थी, तभी पहली बार उसे महसूस हुआ कि यह हवेली सिर्फ डरावनी नहीं है… बल्कि जानबूझकर छिपाई गई है।

कमरे की हवा अब भारी हो चुकी थी, और दीवारों पर टंगी पुरानी तस्वीरें धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही थीं। जैसे कोई उन्हें मिटा रहा हो, या वे खुद अपनी कहानी छुपा रही हों।

किताब अपने आप खुली हुई थी। और उसी में एक नया पन्ना उभर आया।

“नीलगिरी हवेली सिर्फ एक घर नहीं थी… यह एक बंद किया गया सच था।”

आर्या ने धीरे-धीरे उस पन्ने को पढ़ा। जैसे-जैसे शब्द सामने आते गए, उसके दिमाग में अजीब-सी तस्वीरें बनने लगीं।

उसे दिखा—एक समय था जब यह हवेली रोशनी से भरी रहती थी। लोग हँसते थे, बच्चे खेलते थे, और मायरा भी वहीं थी… खुश, जीवित, और सामान्य।

लेकिन फिर कुछ बदल गया था।

एक रात… सब कुछ खत्म हो गया था।

आर्या ने किताब से नज़रें उठाईं।

“क्या हुआ था उस रात?” उसने खुद से पूछा।

तभी हवा में एक हल्की सी फुसफुसाहट आई—

“उसे बंद कर दिया गया था…”

आर्या ने झटके से चारों ओर देखा। कोई नहीं था।

लेकिन किताब के पन्ने अपने आप पलटने लगे।

अब उसमें एक नया दृश्य था—हवेली के अंदर एक कमरा, और उसके बाहर खड़ा एक आदमी। उसके चेहरे पर डर और अपराध दोनों थे।

दरवाज़े के अंदर से मायरा की आवाज़ आ रही थी—रोती हुई, मदद मांगती हुई।

आर्या का दिल बैठ गया।

“नहीं… उसे अंदर बंद किया गया था?” उसने कांपते हुए कहा।

किताब में लिखा था—

“सच को छुपाने के लिए एक मासूम को कहानी बना दिया गया।”

आर्या की आँखों में पानी आ गया। उसे पहली बार लगा कि यह सिर्फ भूत-प्रेत की कहानी नहीं है… यह एक इंसान का दर्द है।

तभी कमरा हल्का सा हिला।

दीवार पर एक नया निशान उभर आया—एक दरवाज़े का, जो पहले वहाँ था ही नहीं।

मायरा की आवाज़ फिर गूँजी—

“तुमने अब सच देख लिया है…”

आर्या ने धीमे से पूछा, “तो अब मैं क्या करूँ?”

एक लंबा सन्नाटा।

फिर आवाज़ आई—

“अब तुम्हें वही करना होगा जो किसी ने नहीं किया था…”

किताब अचानक बंद हो गई।

और कमरे में सिर्फ एक चीज़ बची—

वो नया दरवाज़ा, जो धीरे-धीरे खुल रहा था।

अंदर से सिर्फ अंधे

रा था…

: परछाई का सच

आर्या को समझ ही नहीं आया कि समय कब बदल गया। अभी कुछ पल पहले वह गलियारे में खड़ी थी, और अब वह हवेली के एक ऐसे कमरे में थी जहाँ दीवारें नम थीं और हवा में पुरानी लकड़ी की सड़न घुली हुई थी।

उसके हाथ में वही “अधूरी किताब” थी, लेकिन अब वह भारी हो चुकी थी—जैसे उसमें सिर्फ कागज़ नहीं, बल्कि किसी की पूरी कहानी बंद हो।

कमरे के कोने में एक पुराना झूला धीरे-धीरे अपने आप हिल रहा था। चर्र… चर्र… उसकी आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी। आर्या ने टॉर्च उठाई, लेकिन उसकी रोशनी भी अब कमजोर पड़ चुकी थी।

“यह सब असली नहीं हो सकता…” उसने कांपती आवाज़ में कहा।

लेकिन तभी किताब अपने आप खुल गई।

इस बार पन्नों पर शब्द नहीं थे… सिर्फ एक नाम उभर रहा था—

“मायरा”

नाम देखते ही कमरे का तापमान अचानक गिर गया। आर्या को अपने पीछे किसी की सांस महसूस हुई।

धीरे-धीरे उसने पीछे मुड़कर देखा।

कोई नहीं था।

फिर भी… किसी की मौजूदगी हर तरफ थी।

अचानक झूला रुक गया। पूरी हवेली में एक गहरी खामोशी फैल गई। और उसी खामोशी के बीच एक बच्ची की हल्की हँसी सुनाई दी—

“ह…ह…ह…”

आर्या ने झटके से किताब को बंद करने की कोशिश की, लेकिन किताब अब उसके हाथ से चिपक चुकी थी। जैसे वह उसे छोड़ना ही नहीं चाहती थी।

और तभी…

कमरे की दीवार पर एक परछाई उभरी।

पहले वह सिर्फ धुंधली थी, फिर धीरे-धीरे साफ होने लगी। एक छोटी लड़की की परछाई… जो दीवार पर चलते-चलते आर्या की ओर बढ़ रही थी।

आर्या पीछे हटने लगी।

“तुम… तुम कौन हो?” उसने डरते हुए पूछा।

परछाई रुकी नहीं।

उसने बस जवाब दिया—

“मैं वही हूँ… जो अधूरी रह गई थी।”

अचानक कमरे की सारी खिड़कियाँ जोर से बंद हो गईं। धड़ाम-धड़ाम की आवाज़ से आर्या के कान सुन्न हो गए। हवा अब किसी तूफान जैसी हो चुकी थी, जबकि बाहर कोई हवा नहीं थी।

किताब के पन्ने तेजी से पलटने लगे।

और फिर एक आखिरी लाइन उभरी—

“मायरा की कहानी तभी पूरी होगी जब कोई उसकी जगह लेगा।”

आर्या की आँखें फैल गईं।

“नहीं… इसका मतलब…” वह बोल ही रही थी कि परछाई अचानक उसके बिल्कुल सामने आ गई।

अब वह सिर्फ दीवार पर नहीं थी।

वह कमरे में खड़ी थी।

एक छोटी लड़की, सफेद कपड़ों में, जिन पर धूल और खून के हल्के निशान थे। उसकी आँखें खाली थीं, लेकिन उनमें एक दर्द था—बहुत पुराना, बहुत गहरा।

“तुम आ गई हो…” उसने धीमे से कहा।

आर्या का शरीर जम गया।

“मैं… मैं यहाँ क्यों हूँ?” उसने मुश्किल से पूछा।

लड़की ने धीरे से किताब की ओर इशारा किया।

“क्योंकि अब कहानी आगे बढ़ेगी… और किसी एक को खत्म होना होगा।”

कमरे की लाइट अचानक बुझ गई।

और अंधेरे में सिर्फ एक चीज़ रह गई—

किताब का खुला हुआ पन्ना… जिस पर अब

आर्या का नाम भी धीरे-धीरे उभरने लगा था।

और अधूरी कहानी की शुरुआत।