हवेली का मुर्दा दूल्हा:जिन्न की दुल्हन - भाग 1 in Hindi Horror Stories by chanchal books and stories PDF | हवेली का मुर्दा दूल्हा:जिन्न की दुल्हन - भाग 1

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हवेली का मुर्दा दूल्हा:जिन्न की दुल्हन - भाग 1

सयानी की शादी जिस दिन तय हुई, उस दिन से ही हवाओं में एक अजीब सी खामोशी थी। जब उसे उस पुरानी हवेली में दुल्हन बनाकर लाया गया, तो उसे लगा था कि यह सिर्फ एक बड़े परिवार का हिस्सा बनने की शुरुआत है। लेकिन उस हवेली की देहरी पार करते ही, सयानी को एक सिहरन महसूस हुई। वह हवेली नहीं, बल्कि जैसे कोई सोती हुई बला थी, जो आधी रात के बाद अंगड़ाई लेती थी।

यहाँ सयानी का पति, एक ऐसा इंसान था जिसे सयानी ने शादी के बाद से शायद ही कभी दिन के उजाले में देखा हो। जब भी सूरज ढलता, वो हवेली के बंद कमरों में गायब हो जाता। गांव वाले उस हवेली की तरफ देखते तक नहीं थे। उनकी नजरों में डर था—एक ऐसा डर जो सदियों से चला आ रहा था। बुजुर्गों का कहना था कि उस हवेली में रहने वाला दूल्हा इंसान नहीं, बल्कि कोई साया है।

पहली रात ही सयानी को अहसास हुआ कि उसने एक बड़ी भूल की है। रात के बारह बजते ही हवेली के भारी-भरकम दरवाजे अपने आप चरमराने लगते। बंद कमरों से किसी बेबस औरत के रोने की दबी हुई आवाजें आतीं, जो सयानी के रोंगटे खड़े कर देतीं। जब वह आईने में अपना चेहरा देखती, तो उसे अपनी जगह किसी और का धुंधला सा साया दिखाई देता—एक ऐसी औरत का चेहरा, जिसकी आँखें फटी हुई थीं और चेहरे पर बेपनाह दर्द।

असली खौफ तब शुरू हुआ, जब सयानी को अलमारी के अंदर एक पुरानी डायरी मिली। उसमें साफ-साफ लिखा था कि उसका पति पिछले बीस सालों से मर चुका है। उसकी आँखों में इंसानों जैसी कोई चमक नहीं थी, बस एक गहरी, अंधेरी भूख थी—एक ऐसी भूख जो शायद ज़िंदगियों को निगलकर ही शांत होती थी।

हर सुबह सयानी की नींद हवेली की दीवारों पर लिखे उस खूनी संदेश से खुलती—"भाग जाओ, वरना अगली लाश तुम्हारी होगी!"

सयानी समझ गई कि वह इस घर में किसी इंसान की पत्नी नहीं, बल्कि किसी भयानक श्राप की बलि चढ़ाने के लिए लाई गई है। खिड़की पर होती दस्तक, अदृश्य आवाज़ें और कमरे के अंदर मौजूद वह भारीपन उसे अंदर से तोड़ने लगा था। अब उसके सामने दो ही रास्ते थे—या तो वह डरकर घुट-घुट कर मरे, या फिर इस मुर्दा दूल्हे के रहस्य को उजागर करके अपनी जान बचाए। हवेली से बाहर निकलने का रास्ता सिर्फ कब्रिस्तान से होकर गुजरता था, और उस रास्ते पर अब साये उसका इंतजार कर रहे थे।

"सयानी अभी यह सोच ही रही थी कि वो यहाँ से कैसे भागेगी, तभी उसे एहसास हुआ कि जिस दरवाज़े को उसने रात भर बंद रखा था, वो अब बाहर से नहीं, बल्कि अंदर से बंद हो चुका था। उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसके पति की खाली आँखों में मौत साफ नज़र आ रही थी।"
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